प्रमोद यादव की कहानी : इन-आउट

SHARE:

इन-आउट/ प्रमोद यादव ए..एन..यू...अनु....जे...एच...ए...झा...अनु झा ...जितना छोटा नाम, उतनी ही छोटी और सिमटी उसकी जिंदगी. बस...आफिस से घर और घ...

इन-आउट/ प्रमोद यादव

ए..एन..यू...अनु....जे...एच...ए...झा...अनु झा ...जितना छोटा नाम, उतनी ही छोटी और सिमटी उसकी जिंदगी. बस...आफिस से घर और घर से आफिस. इस बीच वही रोज का बोझिल सिलसिला..एक सोच का सिलसिला. कुछ लोगों की जिंदगी में बरसात,ठण्ड, पतझर-बहार के मौसम होते ही नहीं...उन्हीं लोगों में से एक थी...अनु. घर पहुँचते ही दरवाजे पर लगे नेम-प्लेट को वह आदतन पढ़ती और बुदबुदाती...फिर अपनी कमजोर और लंबी उँगलियों के स्पर्श से ‘अनु झा’ के नीचे लिखे ‘आउट’ को ‘इन’ करती. कई-कई बार वह सोचती कि क्या केवल ‘इन’ कर देने से ही कोई सचमुच ‘इन’ हो जाता है या ‘आउट’ कर देने ‘आउट’?

पिछले कई दिनों से वह निरंतर महसूस कर रही है कि घर में नाममात्र को ही ‘इन’ रहती है जबकि दिलोदिमाग पूरी तरह ‘आउट’ रहता है और जब आफिस में रहती है, घर के दरवाजे पर ‘आउट’ लिखा होता है...वह पूरी तरह घर के चारदीवारी में रहती है...किसी अनजान भय..किसी आशंका से सहमी-सहमी.. डरी-डरी.. .कई-कई बार वह इस ‘इन-आउट’ के विचारों को अपने मस्तिष्क से झटक देना चाहा . सोचती की इस विषय में कुछ न सोचूं पर मन तब और अधिक उड़ानें भरता.. हमेशा ही ‘इन’ के वक्त वह ‘आउट’ रही और ‘आउट’ के वक्त ‘इन’. चाहकर भी कभी वह इस रोज के सिलसिलों को बदल न सकी.

दरवाजा ठेलते ही नजर सामने टंगी तस्वीर पर जाकर टिकती है. चौड़े और सुनहरे फ्रेम में जड़े बाबूजी और वीनू भैया की तस्वीर. दोनों की तस्वीरें इतनी जीवंत कि लगता है बाबूजी अब-तब ही पूछेंगे...’ अनु बेटे..लंच-बाक्स तैयार कर दी न..’ भैया की खिलखिलाती तस्वीर से लगता है जैसे भैया हमेशा की तरह किसी बात पर चिढ़ाकर हँस रहे हों. बाबूजी और वीनू भैया के साथ अनायास ही बबली दीदी की याद रोज रुला देती है. दोनों तस्वीरों के बीच वह बबली दीदी को स्पष्ट देखती है..और सुनती है उसकी सहमी-सहमी प्रार्थना भरी आवाज...’ अनु...तुझे मेरी सौगंध..जो यह बात और किसी को बताई तो...सच कहती हूँ...फाँसी लगा लूंगी...’ फिर सिसकियाँ और सिसकियाँ..

दो-ढाई साल पहले यही घर पूरा एक स्वर्ग हुआ करता. बाबूजी,परितोष भैया, बबली दीदी, वीनू भैया और अनु...बस पांच ही तो प्राणी थे. बाबूजी और वीनू भैया एक ही फैक्टरी में सर्विस करते ..बाकी सभी मजे से पढाई करते. वह मनहूस दिन आज भी उसे याद है जब स्वर्ग जैसे घर में पहली बार एक नारकीय स्थिति निर्मित हुई. अनु पहले ही जानती थी कि ऐसी खराब स्थिति कभी भी आ सकती है.इसलिए बार-बार बबली को सलाह देती रही कि अभी मामला बिगड़ा नहीं है..बाबूजी और भैया को साफ-साफ बता दे..वे माफ कर देंगे..लेकिन दीदी ने उसे कसम डाल दी थी ..और चेतावनी भी दी कि अगर किसी को बताया तो मर जायेगी.

फिर एक दिन उसे उलटी हुई और चक्कर पे चक्कर आने लगे. बड़े भैया परितोष भी उन दिनों छुट्टियों में जबलपुर से आये थे. बबली दीदी को सबसे ज्यादा वही चाहते थे. अनु डाक्टर के लिए मना करती रही पर भाई समझ न सका..बहन के प्रेम से वशीभूत वह डाक्टर ले आया. जब मालुम हुआ कि बबली माँ बनने वाली है तो परितोष भैया आपे से बाहर हो गए...अनु रो-रोकर भैया को खींचती रही .समझाने की कोशिश करती रही...और भैया बबली को पीटते रहे.. पीटते रहे..फिर खुद दहाड़ मार रोने बैठ गए. बाबूजी सुने तो सन्न रह गए..सारा गुस्सा पी अपने कमरे में बंद हो गए. उस दिन अनु को भी खूब फटकार मिली....नसीहतें मिली .. बबली दीदी ने रात भर दरवाजा नहीं खोला. दूसरे दिन भी देर तक दरवाजा नहीं खुला तो सभी किसी अनहोनी की आशंका से डर गए..किसी तरह जब दरवाजा खुला तो दीदी सीलिंग फैन में लटकती मृत मिली.. इस घटना के बाद घर का वातावरण अजीब सा हो गया. अनु पर कड़ी पाबंदी लगा दी गई और हर छोटी-बड़ी गलती पर उसे चेतावनी मिलने लगी. घर में सभी अलग-अलग ‘टापू’ से हो गए.. अजनबी से हो गए. बबली दीदी के बारे में बातचीत तक की मनाही थी. उसकी तस्वीर मेज से हटा दी गई तब से वह तस्वीर अनु के ट्रंक में है. ढाई साल बीत गए..वह कभी उसे दीवाल पर जड़ न सकी. कुछ करीबी लोग जिनका अनु के घर अक्सर आना-जाना होता था, उनसे भी बातचीत बंद करा दी गई. धीरे-धीरे उन लोगों ने खुद ही अनु के घर जाना बंद कर दिया.

इस हादसे के ठीक एक महीने बाद ही एक और भयानक जलजला आया... बचा-खुचा घर, इस जलजले की भेंट चढ गया. फैक्टरी में एक दिन अचानक एक भारी विस्फोट हुआ और तीस कर्मचारी मारे गए..बाबूजी और वीनू भैया भी मृतकों में शामिल थे...फैक्टरी की तरह घर भी ख़ाक हो गया..और अवशेष की तरह बच गए ..केवल परितोष और अनु परितोष भैया को जैसे काठ मार गया..अनु केवल रोती रही..बिलखती रही..बाबूजी और वीनू भैया के मृत्योपरांत जो राशि फैक्टरी से मिलनी थी,वह प्रबंधन और यूनियन की लड़ाई के चलते कोर्ट पहुँच गया..तात्कालिक जो राशि मिली वह क्रिया-करम में ही खर्च हो गए..अब अजीब स्थिति थी.

अनु बार-बार बड़े भैया परितोष को समझाती रही कि वे जबलपुर जाकर अपनी बी.ई. की पढ़ाई पूरी कर ले..वह कहीं भी, कोई भी नौकरी करके उसके लिए रुपये भेजती रहेगी..लेकिन बड़े भाई को, जो अब बाप की जगह था, यह कैसे गवारा होता ? उसने पढ़ाई छोड़ दी. नौकरी की तलाश में दर-दर भटके पर नहीं मिली.अलबत्ता उन्ही दिनों अनु को प्रतीक के प्रयास से ‘साहनी एंड साहनी’ में नौकरी मिल गयी. प्रतीक दो साल पहले कालेज के दिनों अनु के साथ पढ़ा था.

अनु उन्ही दिनों ही प्रतीक से प्रभावित थी.पर बबली दीदी वाली घटना से वह इतनी आतंकित थी कि चाहकर भी उन दिनों प्रतीक के प्यार का जवाब न दे सकी थी प्रतीक भी दिल की गहराईयों से उसे प्यार करता..उसने कई बार अनु से सुनना चाहा कि वह भी उसे चाहती है पर अनु कभी भी उसे साफतौर पर जवाब न दे सकी.. प्रतीक ने तब एक बार कहा भी था-‘ सोचने के लिए तुम्हें पूरी उम्र दे रहा हूँ..पर जवाब जरुर देना अनु..’

आफिस में अनु के टेबल के बगल ही प्रतीक का टेबल था. अनु उसके एहसानों को कभी भुला नहीं पाती..क्योंकि बुरे दिनों में उसने ही यह नौकरी दिलाई थी इसलिए उसकी सभी बातों का वह सकारात्मक जवाब ही देती..एक दिन जब प्रतीक ने लंबे अरसे बाद फिर पुरानी यादों का वास्ता दिया..दोहराया..तो वह ‘ना’ न कह सकी..और भला कब तक खुद को सम्हालती ?..वह भी तो उसे चाहती ही थी..अंततः दोनों फिर मिलने लगे..और करीब से करीबतर होते गए..पर जब कभी प्रतीक ‘घर-परिवार’ की बातें करता ..वह भय से काँप जाती.. और एकाएक उससे छिटक जाती..कहती- ‘ मुझे भूल जाओ प्रतीक..भूल जाओ.. मैं चाहकर भी तुम्हारी नहीं हो सकती..मुझे भूल जाओ..’

घर में घटी दुर्घटनाओं का जिक्र कर कई बार बताया कि परितोष भैया को अगर हमारे संबंधों की जानकारी हुई तो वे काटकर फेंक देंगे..पर बार-बार प्रतीक हौसला देता कि ऐसा कुछ नहीं होगा..अक्सर वह कहता- ‘ अनु.. तुम अगर थोडा साहस दिखाओ तो तुम्हारे भैया को मैं समझा लूँगा..लेकिन तुम ही डर गयी तो..’ तब अनु कुछ न कहती...चुपचाप ख़ामोशी की चादर तान लेती.

आज परितोष भैया सुबह से किसी सर्विस के सिलसिले में दो-तीन दिनों के लिए बाहर गए हैं.यह बात उसने जब प्रतीक को बताई तो वह तपाक से बोल पड़ा था- ‘ गुड न्यूज..तब तो आज शाम की चाय तुम्हारे यहाँ पियेंगे..’तब अनु ने उसे विनम्रतापूर्वक मना कर दिया था.

अभी आरामी- कुर्सी पर पसरे प्रतीक को याद कर ही रही थी कि बेल बजी..दरवाजा खोला तो प्रतीक ही था..इसके पहले कि अनु कुछ बोलती,प्रतीक हाथ जोड़ बोल उठा- ‘सारी..अनु ..गुस्सा मत करना..मना करने के बाद भी आ गया..जानता हूँ..तुम निहायत ही डरपोक लड़की हो..अपने भैया से काफी डरती हो..वो बाहर हैं,फिर भी तुम्हे लगता है जैसे आ जायेंगे..अब माथे से पसीना पोंछ लो..और अपने नाजुक हाथों से एक कप चाय पिला दो..मैं तुरंत चला जाऊँगा....प्रामिस..’

अनु ‘ कहाँ डरती हूँ ’ वाले अंदाज से सीना फुलाई और उसे सोफे पर बैठाया. बैठते ही उसने अनु को अपनी गोदी में खींच लिया. वह हडबडा गयी..दरवाजा बंद करने के बहाने खुद को छुड़ाई और दरवाजा बंद की. चाय के लिए किचन की ओर मुड़ ही रही थी कि फिर बेल बजी. अनु और प्रतीक चुप एक-दूसरे को ताकने लगे.अनु का चेहरा अकस्मात सफ़ेद सा पड़ गया. पसीने से तरबतर हो गई वह. प्रतीक ने इशारा किया तब दरवाजे की और बढ़ी. दरवाजा खोला तो अवाक रह गई.

‘भैया...आप...आप तो..बाहर गए थे न...? ‘ अनु हकला-हकला कर मुश्किल से इतना ही बोल पाई.

परितोष ने एक नजर अनु को ..उसके अस्त-व्यस्त साडी को ..बिखरे केश को घूरा ..फिर प्रतीक को विचित्र नज़रों से देखा. उसने नमस्ते की मुद्रा में अभिवादन किया जिसका कोई जवाब नहीं मिला. परितोष सीधे किचन में चला गया. पीछे-पीछे अनु भी चली गयी. प्रतीक चुपचाप किचन की ओर निहारता खामोश खड़ा रहा. किचन के अन्दर से दोनों की आवाज साफ़-साफ़ प्रतीक के कानों से टकरा रही थी.....

‘ कौन है यह ? ‘

‘ जी..प्रतीक..’

‘ कौन प्रतीक ? ‘

‘ प्रतीक भैया... जिन्होनें मुझे नौकरी दिलाई थी.. मुझे..अपनी ..सगी..सगी बहन की तरह ...’

प्रतीक आगे और कुछ न सुन सका. उसे लगा जैसे किसी ने उसके कानों में गरम तेल उंडेल दिया हो.. तेजी से वह दरवाजे की ओर लपका. हड़बड़ी में उसके बुशशर्ट का पिछला हिस्सा दरवाजे के किसी कील में फँस गया. उसे छुडाने पीछे घुमा तो नेमप्लेट पर नजर पड़ी. धीर से बुदबुदाया- ‘ अनु झा...इन...’

उसने ‘इन’ के ऊपर उंगली फिराई.. फिर पढ़ा- ‘ अनु झा...आउट..’और तेजी से बाहर चला गया.

xxxxxxxxxxxxxx

 

 

प्रमोद यादव

दुर्ग,छत्तीसगढ़

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: प्रमोद यादव की कहानी : इन-आउट
प्रमोद यादव की कहानी : इन-आउट
http://lh3.ggpht.com/-it07IN4Vxig/UfoOz3NhHzI/AAAAAAAAVYo/wa0o9XIc6cw/clip_image002%25255B3%25255D.jpg?imgmax=200
http://lh3.ggpht.com/-it07IN4Vxig/UfoOz3NhHzI/AAAAAAAAVYo/wa0o9XIc6cw/s72-c/clip_image002%25255B3%25255D.jpg?imgmax=200
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2014/06/blog-post_3.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2014/06/blog-post_3.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content