वीरेन्‍द्र‘सरल‘ का हास्य-व्यंग्य - एक महा आधुनिक मेम

SHARE:

बचपन से मुझे दृष्‍टिदोष है या कोई मनारोग, यह मैं नहीं जानता। मगर जब से होश सम्‍हाला है तब से एक अजीब घटना से परेशान हूँ। वह घटना यह है कि म...

बचपन से मुझे दृष्‍टिदोष है या कोई मनारोग, यह मैं नहीं जानता। मगर जब से होश सम्‍हाला है तब से एक अजीब घटना से परेशान हूँ। वह घटना यह है कि मैं जब भी किसी दुकान पर कोई सामान खरीदने के लिये जाता हूँ। दुकानदार से उस सामान का मूल्‍य पूछता हूँ। दुकानदार उसका मूल्‍य बताता है तो उस सामान से एक खूबसूरत युवती प्रकट हो जाती है। वह मुझे देखकर ऐसे मोहक अंदाज में मुस्‍कुराती है, जैसे कह रही हो, दम है तो ले जा मुझे अपने साथ। फिर वह धीमी आवाज में फिल्‍मी गीत गुनगुनाती है। ‘‘आओ देखें जरा किसमें कितना है दम।‘‘ यदि उस सामान का मूल्‍य मेरे बजट में नहीं समाता और मैं उसे खरीदे बिना ही वापस आने लगता हूँ तो वह युवती मुँह बिचकाकर अंगूठा दिखाकर ऐसे घूरती है जैसे कह रही हो, ‘‘दम नहीं है तो दाम क्‍यों पूछते हो भिखमंगे कहीं के?‘‘ यदि मैं अपनी बजट की चिन्‍ता किये बिना उस सामान को खरीद लेता हूँ तो वह युवती हँसती-मुस्‍कुराती, इठलाती हुई मेरे पीछे-पीछे चलती है और मेरे घर के द्वार तक आकर अंतर्धान हो जाती हैं।

मैंने डाक्‍टर-वैद्य यहाँ तक की ओझा-गुनिया, नीम-हकीम के पास जाकर भी अपनी इस समस्‍या को बताया है। पर उनका कहना है कि इस समस्‍या से केवल तुम ही नहीं बल्‍कि देश के सारे लोग परेशान हैं। घबराने की बात नहीं है, धीरे-धीरे अभ्‍यस्‍त हो जाओगे। पर मैं संतुष्‍ट नहीं हूँ, सोचता हूँ कि ये मुझे बच्‍चा समझकर कहीं झूठी तसल्‍ली तो नहीं देते। जी चाहता है, सीधे उस युवती से ही बात करूँ। आखिर वह मुझे इस तरह परेशान क्‍यों करती है?

एक दिन जब मैं दुकान से कुछ खरीददारी करके निकला तो वह फिर इठलाती हुई मेरे पीछे चलने लगी। आज मैं उससे बात करने का मन बना चुका था, मगर बीच बाजार में उससे बातचीत करना मुझे उचित नहीं लगा। मैं चुपचाप आगे बढ़ते हुये भीड़ कम होने का इंतजार करने लगा। भीड़ कम होने पर मैंने उसे समझाने की कोशिश की। मैंने पूछा-‘‘आप इस तरह मेरा पीछा करके मुझे परेशान क्‍यों करती हैं? लोग देखेंगे तो क्‍या कहेंगे? लोग तो यही समझते हैं कि अकसर लड़के ही लड़कियों का पीछा करते हैं। प्रेम नामक रोग केवल लड़कों का अधिकृत रोग है। लड़कियों में इसका संक्रमण नहीं होता। ऑपरेशन मजनूं का नाम बार-बार सुनाई देता है, कहीं आपने ऑपरेशन लैला का नाम सुना है, नहीं ना? फिर आप क्‍यों हाथ धोकर मेरे पीछे पड़ी हैं ? लोग समझेंगे, मैं ही आपको बहला-फुसला कर ले जा रहा हूँ। आप पिछले कई वर्षों से मेरा पीछा कर रही हैं। पहले आप कुंवारियों के आधुनिक परिधान में दिखाई देती थी और अब आप साड़ी पहननें लगी हैं। गले में मंगल-सूत्र भी आपने पहना है। मतलब अब आपकी शादी भी हो गई है। अब तो मेरा पीछा करना छोड़िये देवी जी।‘‘

मेरी समझाइश का उस पर कुछ भी असर नहीं हुआ। वह मंद-मंद मुस्‍कुराती रही। फिर जोर-जोर से ‘‘मुन्‍नी बदनाम हुई डार्लिंग तेरे लिये गाती हुई नाचने लगी।‘‘ मैं हैरान रह गया। हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाते हुये मैंने कहा-‘‘आप बदनाम हों य न हो, पर मैं जरूर बदनाम हो जाऊँगा माता जी। मुझ पर दया कीजिये, कृपा करके मेरा पीछा करना छोड़ दीजिये।‘‘ वह मुझे लाल-लाल आँखों से घूर-घूर कर देखने लगी। शायद मेरा माता जी कहना उसे नागवार गुजरा था। वह चीखी-‘‘बदतमीज, माताजी होगी तुम्‍हारी माँ। माता जी कह कर मुझे गाली देते हो नालायक।‘‘ मैं सकपका गया, मैंने डरते हुये कहा-‘‘हमारी संस्‍कृति तो परायी स्‍त्रियों को माता जी कहने का संदेश देती है और आप आग-बबूला हो रही हैं बहन जी।‘‘ मेरा वाक्‍य अभी पूरा भी नहीं हुआ था और वह शेरनी की तरह आक्रामक मुद्रा मे आकर गुर्रायी-‘‘लगता है तेरी खोपड़ी पर दो-चार सैडिंल पड़ने पर ही तेरा दिमाग ठिकाने आयेगा। क्‍या तुम्‍हें खूबसूरत लड़कियों से बात करने का तरीका नहीं मालूम है? गंवार कहीं के।‘‘ मेरी सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई। समझ में ही नहीं आ रहा था कि आखिर मुझसे ऐसी क्‍या गलती हो गई है। मैंने मेमने की तरह मिमयाते हुये कहा-‘‘मुझे माफ कर दो बेटी।‘‘ अब तो वह लाल आँखों से घूरती हुई चिल्‍लाई-‘‘शायद तुम तमाचा खाकर ही सुधरोगे?‘‘ मैं उसकी लाल-लाल आँखों को देख यह सोचकर डर गया कि कहीं अँखियों से गोली न मार दे। फिर वह आगे बोली-‘‘तुम्‍हें जरा भी शर्म नहीं आती? किस मुँह से अपने आप को युवा कहते हो? मैं रोज ब्‍यूटी पार्लर जाती हूँ, गोरेपन का क्रीम लगाती हूँ। आधुनिक परिधान पहनती हूँ फिर भी तुम्‍हें बच्‍ची नजर आ रही हूँ मूर्ख। आजकल के होनहार युवा तो लड़कियों को फिल्‍मी अंदाज मे छेड़ते हैं। सीटी बजाते हैं। चलती है क्‍या नौ-से-बारह और आती क्‍या ख्‍ंाडाला गाते हैं और एक तुम हो जो मुझे माँ, बहन, बेटी कहकर अपमानित कर रहे हो। धिक्‍कार है तुम्‍हारी जवानी पर। ठहर मैं अभी चिल्‍ला-चिल्‍लाकर भीड़ इकट्ठी करती हूँ कि तुम मुझे छेड़ रहे थे।‘‘ उसकी बातें सुनकर मेरे हाथ-पाँव फूल गये। पसीना आ गया, मेरा सिर चकराने लगा। बड़ी मुश्‍किल से मैंने अपने आप को गिरने से बचाया। मैं सोचने लगा, तो क्‍या गंगा सचमुच उल्‍टी बहने लगी है? पश्‍चिमी हवा के दुष्‍प्रभाव से माँ, बहन, बेटी जैसे पवित्र संबोधन गाली लगने लगी है इन आधुनिकाओं को? अब किसी भी प्रकार के रिस्‍क लेने के बजाय मैंने उन्‍हीं से पूछा-‘‘पहले तो आप ये बताइये कि मैं आपको किस संबोधन से संबोधित करूँ ?‘‘ वह सगर्व मुस्‍कुराते हुये बोली-‘‘हाँ अब आये न लाइन पर। तुम्‍हें इतना भी पता नहीं है, आधुनिक युवतियों को माय डियर, मुन्‍नी डार्लिंग, चिकनी चमेली, जलेबी बाई, छम्‍मक छल्‍लो , स्‍वीटहार्ट जैसे सम्‍मानित संबोधन से संबोधित किया जाना चाहिये। यही सब तो फिल्‍मी संबोधन हैं इनके लिये। लगता है कि तुम फिल्‍म या टी वी वगैरह नहीं देखते। जब मुन्‍नी स्‍वयं तुम्‍हारे लिये बदनाम होना चाहती है तो तुम क्‍यों उसके इस पवित्र कार्य में बाधा बनना चाहते हो ?‘‘ उसकी बातें सुनकर मैं अवाक रह गया।

वह मुझे अपने-आप को स्‍वीटहार्ट कहने की अनुमति दे रही थी पर मैं अपने हार्ट के फेल हो जाने के डर से हिम्‍मत नहीं जुटा रहा था। मध्‍यम मार्ग अपना कर मैंने उसे केवल मेम कहने में ही अपनी भलाई समझी। मैंने कहा-‘‘मैम! तो क्‍या आप आधुनिक है?‘‘ उसने मुँह बिचकाते हुये कहा-‘‘हूहं, आधुनिक? मै तो महाआधुनिक हूँ।‘‘ मैंने पूछा-‘‘मैंने तो केवल अत्‍याधुनिक तक का ही नाम सुना है। ये महा आधुनिक क्‍या होता है? वैसे, मुझे तो आपके आधुनिक होने पर ही शक है क्‍योंकि आप स्‍कार्फ बाँधकर नहीं चल रही हैं। आजकल तो ओल्‍ड और एक्‍सपायरी डेट की युवतियां भी स्‍कार्फ बाँधकर चलती हैं। आप महाआधुनिक होकर भी स्‍कार्फ नहीं बाँधती। क्‍या आपको शर्म नहीं आती ?‘‘

वह विस्‍फोटक अंदाज में ठहाका लगाकर बोली-‘‘बच्‍चू! दुनिया गोल है। पहले चेहरा छिपाना पर्दा प्रथा कहा जाता था, अब वही आधुनिकता हो गई है। अब तो स्‍थिति यह हो गई है कि गृहणियां तक स्‍कार्फ बाँधकर गृहकार्य करती हैं। पता ही नहीं चलता कौन युवती है और कौन बूढ़ी अम्‍मा। शायद स्‍कार्फ आजकल अपनी पहचान छिपाने का सबसे सुंदर और सस्‍ता माध्‍यम बन गया है, समझे?‘‘

उसकी बातों से अब मैं एकदम बोर होने लगा था। मैंने हाथ जोड़कर कहा-‘‘मेरी माँ, ज्‍यादा तंग मत करो मेरा पीछा छोड़ो और अपनी राह चलो।‘‘ वह नैन मटकाते हुये खिलखिलाई और मेरी बातों का उपहास करते हुये बोली-‘‘मैं तो जनम-जनम तक तुम्‍हारा साथ छोड़ने वाली नहीं हूँ बच्‍चू।‘‘ मैं ऐसी-वैसी कोई साधारण युवती नहीं हूँ। महंगाई हूँ महंगाई, समझे?‘‘

महंगाई का नाम सुनकर मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई। ब्‍लडप्रेशर बढ़ गया और मुँह से अनायास निकल पड़ा-‘‘बाप-रे-बाप! जिसके कारण देश में लोगों की नींद हराम हो गई है, सारा देश परेशान है वह इतनी सुंदर है।‘‘ मैं अपलक उसके सौंदर्य को निहारने लगा ।

उसने मेरी आँखों के सामने अपना हाथ लहराते हुये कहा-‘‘कहाँ खो गये?‘‘ मैं तुरन्‍त त्राहि माम्‌ की मुद्रा में आ गया। अब उससे बातचीत करने में मुझे सामान्‍य युवती से कम खतरा लग रहा था। मैंने कहा-‘‘देवी आप क्‍यों आम लोगों को इस तरह परेशान कर रही हैं?लोग आपके कारण आत्‍महत्‍या करने को मजबूर हो रहे हैं। आपका मुँह तो सुरसा के समान बढ़ा जा रहा है। अब हमारी आवश्‍यकतायें हनुमान जी तो नहीं, जो आपके पेट में घुस जाये और कुछ पल ठहर कर सुरक्षित बाहर निकल आये, हम पर रहम करो मैया, दया करो। त्राहिमाम्‌ देवी त्राहिमाम्‌।‘‘

मेरी डबडबाई आँखें, उदास चेहरा और आर्त विनती सुनकर उसकी आँखें भी नम हो गई। उसने रूँधे गले से कहा-‘‘मैं विवश हूँ, नहीं चाहते हुये भी मुझे ये सब अपने पतियों के इशारे पर करना पड़ रहा है। मैं क्‍या करूँ? उनके इशारे पर नाचना मेरी मजबूरी है। मगर मेरी पीड़ा समझने वाले लोग कहाँ है?‘‘ इतना कह कर वह सुबक-सुबक कर रोने लगी ।

अब चौंकने की बारी मेरी थी। मैंने साश्‍चर्य पूछा-‘‘पति! कौन हैं आपके पति?‘‘ वह नजरें झुकाकर बोली-‘‘कालाधन, भ्रष्‍टाचार, जमाखोरी, रिश्‍वतखोरी, मिलावटखोरी, काला बाजारी, बेईमानी यही सब तो मेरे पति हैं। मैंने मासूमियत से पूछा-‘‘इतने सारे पति! मेम आपने शादी की है य देह व्‍यापार पर उतर आई हैं।‘‘ आगे मैं कुछ और पूछता, उससे पहले ही उसका झन्‍नाटेदार थप्‍पड़ मेरे गाल पर पड़ा। मैं तिलमिला गया, मुझे दिन में भी तारे दिखलाई पड़े। जब कुछ समय बाद मेरी आँखें कुछ देखने लायक हुई तो वहाँ दूर-दूर तक कोई भी नहीं था। वह अदृश्‍य हो चुकी थी ।

मैं अपने गाल को सहलाते हुये सोचने लगा, सारा देश बिल्‍कुल मेरी तरह मंहगाई की थप्‍पड़ से यूं ही तिलमिला रहा है।

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: वीरेन्‍द्र‘सरल‘ का हास्य-व्यंग्य - एक महा आधुनिक मेम
वीरेन्‍द्र‘सरल‘ का हास्य-व्यंग्य - एक महा आधुनिक मेम
http://lh4.ggpht.com/-YKzcZ0lUqDM/Uw2xMAqmFsI/AAAAAAAAXhk/1_G55Y3vEBA/image%25255B3%25255D.png?imgmax=200
http://lh4.ggpht.com/-YKzcZ0lUqDM/Uw2xMAqmFsI/AAAAAAAAXhk/1_G55Y3vEBA/s72-c/image%25255B3%25255D.png?imgmax=200
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2014/07/blog-post_1817.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2014/07/blog-post_1817.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content