अजय गोयल की कहानी - सोनचैरिया का पहला गीत

SHARE:

माँ! तुम्हारी यह सोनचैरिया जन्मना चाहती है। ओस में भीगकर सूरज से बतियाना चाहती है। परिन्दों की तरह आकाश चूमना चाहती है। परसों कुदरत ने अपनी ...

माँ! तुम्हारी यह सोनचैरिया जन्मना चाहती है।

ओस में भीगकर

सूरज से बतियाना चाहती है।

परिन्दों की तरह

आकाश चूमना चाहती है।

परसों कुदरत ने अपनी गुल्लक से निकाल एक मोती-सा दिन खर्च ने दिया तब मुझे लगा, पूरब में सुबह मुस्कराते बुद्ध के साथ हुई थी। तुमने दीदी को सोते समय बुद्ध कथा सुनाई थी ना। मैं सारी रात करूणा निथारती रही। जबकि तुम्हारे लिए पूरब में गुलाब खिला था। इस गर्भावस्था में तुम्हारी दुनिया गुलाब की गंध में रची बसी है। जिसका एक हिस्सा आप डिबिया में बंद कर लेना चाहती है।

आज घर में न गोविन्द माधव हरे मुरारी की धुन बजी। न सीताराम सीताराम गाकर दादी ने सुबह का अभिनंदन किया। उन्होंने उगते सूरज के दर्शन तक न किये थे। जबकि सुबह-सुबह उन्हें लगता कि क्षितिज पर कोई नन्हा मुन्ना खेलता चला आया है। वे अकसर अपना आंचल फैलाकर उगते सूरज से कहती, 'भेस सूरज भी तू। मेरा चन्दा भी तू। मेरी आंखों का तारा भी तू। आ मेरी गोद में आजा।''

मुझ से पहले दो-दो सोनचैरियाओं को वापस भेज चुकी दादी ने सुबह का नौका विहार जैसा उल्लास भंवर में फंसा दिया। मेरे लिए बोली, ''अब इसे भी निबटाने का इंतजाम करना होगा।'' उन्होंने माघ की नरम मुलायम धूप अचानक जेठ की बरछी-भालों सी चुभती विकराल दुपहरी में बदल दी थी।

माँ! दादी के लिए जमीन तभी फट गयी थी जब तुम्हारा अल्ट्रासाउंड करते हुए डॉक्टर ने कहा - ''सोनचैरिया।''

अपने घुटनों की पीर भूल कर दादी डॉक्टर की तरफ लपकी। रूँधे गले से एक बार फिर अल्ट्रासाउन्ड करने का आग्रह करने लगी।

स्थिति समझ कर आप तुरन्त अल्ट्रासाउन्ड रूम से बाहर आ गयी। तमतमा गयी थी आप क्योंकि अल्ट्रासाउन्ड पिछले सप्ताह से रह-रह कर आपके पेट में होने वाले दर्द के लिए किया जाने वाला था। ना कि लिंग परीक्षण के लिए।

घर लौटते समय सारे रास्ते दादी बड़बड़ाती रही। ''एक सोनचैरिया घर में है तो। फिर क्यों यह हाहाकार। दूसरी लाकर कीकर का बाग लगाना है क्या? कीकर और आमों का क्या मेल? दुनिया कहती है, लड़की मरे भाग्यवानों की। पहले जन्म में कौन से पाप किए हैं मेरे बेटे प्रदीप ने जो उसके नसीब में कीकर लिखें हैं ?''

माँ! किसी सपने का टूटना डूबने जैसा होता है। मन में अंधड़ हो तो बाहर भी अंधेरा लगता है। घर आकर आपने अपने आपको कमरे में बंद कर लिया। पिछले दो दिनों से मुझे बचा लेने के लिए लड़ रही हो। न कुछ खाया है। ना पिया है। जूझ रही हो अपनों से। इसलिए घाव तुम्हारे मन पर ज्यादा है।

बाहर पिताजी महाभारत किए हुए हैं। उन्हें समझ नहीं आ रही तुम्हारी जिद है। उनकी समझ से तुम दुनिया नहीं समझती। नासमझ हो।

माँ! मैं उन अदृश्य अल्ट्रासाउंड किरणों से कैसे बचती? कोना-कोना छान लेती हैं यह किरणें।

माँ! उड़ने के लिए पुष्पक विमान की कल्पना है। पाताल लोक हममें बसता है। दिव्य दृष्टि से महाभारत देखा गया। गर्भ में अभिमन्यु द्वारा चक्रव्यूह सीख लेने की कथा है। अंग प्रत्यारोपण के लिए गणेश है। यह अल्ट्रासाउंड अछूता है। इसके द्वारा गर्भ मन्यन में कालकूट विष एक सोनचैरिया होती है।

माँ! विकास की यह कौन-सी सीढ़ी हैं जहाँ बेटी का चीरहरण गर्भ में किया जाने लगे। दुर्भाग्य से दुःशासन की भूमिका दादी निभा रही है। कहीं शरण लूँ मैं? मुझे कोई लक्ष्मणरेखा नहीं दिखती सिवाय तुम्हारे। जब द्वार पर मुझे निबटा देने के लिए मेरी दादी व पिता खड़े हुए हैं।

पिछले दो साल से दादी एक पोते के लिए जतन कर रही थी। पिताजी ने अपनी कुंडली में बृहस्पति की दशा आने की प्रतीक्षा की। आप भी गऊ सेवा के लिये प्रतिदिन गऊ-ग्रास लेकर जाती।

इस नव-रात में इस असाध्य की प्राप्ति के लिए दादी ने नौ वर्षीया नौ कन्याओं को पूजने का व्रत लिया था। दुर्गा पुकारे जाने वाली नौ वर्षीया नौ कन्यायें एक भरी-पूरी कालोनी में नहीं मिली। सारे जतन अधूरे रह गये। दादी का माथा ठनका। एक दुर्गा कम रह गयी थी। पंडित जी ने राह दिखायी, कहा ''प्रसाद को चीटियों के लिए छत पर सिला दो।' '

अपने घुटनों की पीड़ा के कारण बहुत समय बाद छत पर गयी थी दादी। देर तक बैठी रही। चीं-चीं करती फुदकती-चहकती एक चिड़िया नहीं आयी थी। कौओं की काँव-काँव होती रही। शायद पहली बार उन्हें अहसास हुआ कि जीवन में बस काँव-काँव रह गयी थी।

उस समय दादी पर नवरात्र का प्रभाव था और सिर पर उजाला उँडेलता सूरज था।

दादी ने देखा छत साफ सुथरी सिकरी थी। पक्षियों के लिए जलकुंड के साथ बाजरा भी था। तुम्हारी भरपूर उपस्थिति का दादी को भान हुआ। उनकी आँखें तरल हो गयी। उस नमी में तुम्हारे लिए बहुत कुछ था माँ। दादी सोचने लगी,-

''कैसी सुघड़ गृहस्थन बहू है। राम जी मैं तो तर गयी। बस एक पोते का मुँह दिखा दो। चाहे मेरी जान ले लो। मैं अब खुद लकड़ियों में जाना चाहती हूँ। जानती हूँ समुद्र तक आचमन में गटकने वाले अगस्त ऋषि कह गये हैं, स्त्री हन्ता कोई और नहीं रावण का रूप है। मैं पूरी लंका में रह रही हूँ; कदम-कदम पर सारा इंतजाम। मुलायम आवाज के साथ चमचम दीवारों के बीच सब इंतजार में रहते हैं। पैसा देख कर कोई मना नहीं करता। इस बार बहू को अपनी डॉक्टर सावित्री के पास ले जाऊँगी। प्रदीप की भी डिलीवरी वहाँ हुई थी। प्रदीप के साथ पैदा हुई जोडिया लड़की का न जाने क्या हुआ होगा, मेरे मन ने उस समय कहा था कि पहली लड़की लक्ष्मी होती है तो दूसरी लड़की दरिद्री कही जाती है। इसको साथ ले जाना दिलद्दर साथ ले जाना होगा। मैं भी कैसी पत्थर दिल हो गयी थी उस समय। पहली लड़की उमा के साथ वह पल ही जाती। लेकिन उस समय अकेली थी मैं। ना सास का साथ था। ना ससुर का साया। छोटा सा काम। हाथ छोटा हो तो ...। आदमी वैसे ही आधा पागल हो जाता है।''

-''कहाँ खो गयी हो। पंडित जी इंतजार में हैं।'' दादाजी उन्हें ढूँढते हुए छत पर आ गये थे।

माँ! छत पर दादी का जैसे कायांतरण हो गया था।

क्योंकि छत पर बैठी वे दादी नहीं थीं जिन्होंने गर्भ के दूसरे महीने में एक अन्जान सी जड़ खाने के लिए आपको विवश कर दिया। जिसके लिए उन्हें बताया गया था कि इस जड़ से गर्भ में पल रही लड़की भी लडके में परिवर्तित हो जाती है।

वे दादी भी नहीं थी जो अल्ट्रासाउंड होने से पहले तक आपके सामने बादाम का दूध प्रतिदिन रख देती। जिससे आने वाला पोता महान बुद्धिमान हो।

वे दादी भी नहीं थी जो आपको केवल आराम करने के लिए कहती। क्योंकि वे एक स्वस्थ पोता चाहती थी। इस बार दादी ने शुरु से कमान सम्भाल ली थी। तुम्हारे 'चेकअप' के दिन डा० सावित्री के पास साथ में जाती। उस दिन दादी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा जब तुमने उन्हें बताया कि इस गर्भावस्था में अपने चारों ओर गुलाबों की सुगन्ध बिखरी महसूस होती है।

उस समय दादी को लगा जैसे सिंड्रेला का रथ, उसके घोड़े और उसकी राजसी वेषभूषा रात के बारह का घंटा बजने के बाद भी कद्दू चूहे और छड़ों में नहीं बदले।

मैं चाहती हूँ ''दादी मुझे सिंड्रेला की कहानी सुनाएं। वे अपने कन्धों पर मेरा स्पर्श महसूस करें। जन्म से पहले मेरा भी नाम रखें। जैसे उन्होंने अपने सम्भावित पोते का नाम गुलाब रख लिया था।''

माँ! आपके कमरे के बाहर नानी आ बैठी है। पिताजी ने उन्हें बुलाया है। आपसे कमरा खोलने के लिए वे कह चुकी हैं। मत खोलना माँ। वे पिताजी का विरोध करने की स्थिति में नहीं है। मैं डा० सावित्री की मुरीद हूँ। उन्होँने शुरूआत से आपको न झुकने के लिए कहा। इसके लिए ताकत दी। और चौथे माह के बाद बिना सलाह अल्ट्रासाउंड न कराने के लिए कहा। लेकिन दादी ने आपको भरमा लिया। दो चार दिन आपने पेट में दर्द क्या महसूस किया। बस। अल्ट्रासाउंड करा डॉ. साहब के पास चेकअप कराने के लिए उन्होंने आपको मना लिया। जबकि इस बार दादी ने लिंग परीक्षण न कराने का शुरूआत में आपको वचन दिया था। लेकिन दादी योजनाबद्ध तरीके से काम कर रही थी। माँ! दादी को सारी चालाकी डॉ. सावित्री के सामने पस्त हो जाती है। वे चाहकर भी नहीं पूछ सकी अपनी उस नवजात बेटी का हाल जिसे वे तीस बरस पहले अस्पताल में छोड़ आयी थी।

माँ! सकल ब्रह्माण्ड में जीवन का कैनवास है हमारी पृथ्वी। जहाँ जीवन के रंग सजते हैं। जीवन हिलोर लेता है। सूरज और चाँद देख जीवन अंगड़ाई लेता है। आपके गर्भ में इसका इतिहास दोहरा रही हूँ। करोड़ों वर्षों का। सांस लेने से पहले इस महायात्रा मेँ यदि अग्नि-परीक्षा देनी पड़े? तब जीवन का क्या अर्थ रह जाता है? वह भी स्त्री होने पर .....?

उस दिन चेम्बर में डॉ. सावित्री का कोई कर्मचारी नहीं था। दादी के मन की बात आपने पूछी।

डॉ. सावित्री ने तुरन्त सन्दर्भ बदल दिया। उन्होंने दादी से पूछा, -''घुटने में दर्द क्या काफी रहता है?'' -''डॉक्टर साहब घुटना बदलने के लिए कहते हैं। लाखों रूपये का इंतजाम बेटा कैसे करे? उसको अपना काम भी जमाना है। मुझे क्या करना है अब।'' हमदर्दी के दो शब्दों के आगे दादी अपनी गठरी खोल कर बैठ गयी। आपने एक बार फिर पूछा?

डॉ. सावित्री मुस्करा पड़ी। उनकी मुस्कराहट में मुझे मेरी जीवन रेखा दीखती है। मुझे वे ताला-हार लगती हैं। माँ! मुझे सांसे मिली तब दादी से अवश्य पूछूंगी, क्या राम को रावण गढ़ सकते हैं? या रावणों के कारण राम जन्म लेते हैं। आप राम को तारण-हार मानती हैं। माँ के लिए अनेक कथा-वाचकों की राम कथा सी० डी० लेकर आयीं। चाहती हैं, आप सुने और गुने, जिससे राम-सा पोता पैदा हो। क्या मैं राम का चरित्र लेकर पैदा नहीं हो सकती? आप अपने दिन का पहला घटा सीताराम-सीताराम जपती हुई गुजारती हो। सीता के राम को भजती हो या राजा राम को?''

मुझे लगता है, सब केवल राजा पैदा करना चाहते हैं। जबकि राजा अपने आप में सबसे बड़ा संकट है। राजा अपने लिए जीता है। समय, समाज और सभ्यता सब खा जाता है। हमारे महान मुगलों की शहजादियों में बताओ किसका विवाह हुआ है? अकबर की छ: बेटियाँ थीं। तब अल्ट्रासाउंड पैदा नहीं हुआ था। छ: की छ: जीवन भर अपने पैदा होने के मकसद पर बिसूरती रही। दीवारों से सर मारती रही।

बस, राजा बना रहे।

राजा का इस्तकबाल बुलंद रहे।

राजा रथी रहे।

कुर्बानियाँ सुविधानुसार भुला दी जाती हैं।

माँ! देखो ना। उमा बुआ पढ़ने में होशियार थी। एक डॉक्टर बनना चाहती थी। जबकि पिताजी का दिल नहीं लगता था पढ़ाई में। उन्हें दादी एक डॉक्टर बनाना चाहती थी। किसी कम्पीटिशन में उनका चयन नहीं हो रहा था। उनकी कुंठा ने बुआ की भाग्य रेखा काट दी। एक दिन उन्होंने बुआ से कहा, -''तुम्हारा चयन हुआ और मेरा नहीं हुआ तो मैं आत्महत्या कर लूँगा।''

बुआ ने पढ़ना-लिखना छोड़ दिया। ड्सके बाद उनकी जिन्दगी में विवाह शेष रह गया था।

दो साल पहले पल में अटारी चढ़ने के फेर में कच्चे तेल के सौदों से गड्डे में जा गिरे थे पिता जी। उस घाटे को दादा जी ने अपनी जिन्दगी की कमाई स्वाहा कर भरा। और अब .... अपनी सोनचिरैया को निबटा कर अपने लिए हवा पानी का बीमा करा लेना चाहते हैं पिताजी।

माँ! क्या तुम्हें ध्यान है? बुद्ध कथा सुनते वक्त पास बैठे पिताजी अचानक चिढ़ गये थे। उन्हें समझ नहीं आ रहा था, आखिर शहर के धनवानों द्वारा दिये गये सोना-चाँदी को पिघलाकर करूणामयी मुस्कराहट लिये बुद्ध की मूर्ति क्यों नहीं बनेगी? वह एक गरीब लड़की के एक छोटे पैसे का पिघल कर मिलने का इंतजार आखिर क्यों करेगी? माँ! माँ! उठो! डॉ. सावित्री का दादी के पास अभी-अभी फोन आया है। भागीरथी बुआ के आने का। नहीं समझी। वे वही बुआ है। जिनका जन्म पिताजी के साथ हुआ था। जिन्हें दादी .अस्पताल में छोड़ आयी थी। दादी के छोड़ कर चले आने के बाद डा० साहब के चाचाजी अस्पताल पहुँचे थे। वे सुनकर हैरान रह गये कि कोई माँ इस तरह अपनी बच्ची को अस्पताल में छोड़ कर कैसे जा सकती है। बुआ उस क्षण चुपचाप पालने में थी। डा० साहब परेशान थे। जब चाचा जी ने बुआ को स्पर्श किया तो उनकी नन्हीं अंगुलियों ने उनके हाथों को पकड़ लिया। जिन्हें छुड़ाकर वे पलटे तो उन्होंने रोना शुरू कर दिया। उस समय उनके पैर आगे नहीं बढ़ सके। चाचा जी के पास कोई बेटी नहीं थी। एक बार फिर चाचा जी पालने के पास पहुँचे। सती बुआ को चूमना चाहा तब अपना नन्हा हाथ बीच में ले आयी। उन्हें लगा जैसे कह रही हो, स्नेह बाद में। हिम्मत है तो पहले जिम्मेदारी लो। बेटी को स्वीकार करो। दिखावा मत करो। बस, चाचाजी ने अपना लिया बुआ को। भागीरथी नाम दिया। आज बुआ एक डॉक्टर है। स्टेमसेल थरेपी की विशेषज्ञ।

उन्होंने घुटनों की क्षतिग्रस्त कार्टिलेज को इस थरेपी द्वारा रिजेनरेट कई बार कर दिखाया है। वे दादी से मिलना चाहती हैं। उनका इलाज करना चाहती हैं।

माँ! देखो! खिड़की से बाहर देखो। दादी द्वार पर हैं। भागीरथी बुआ आ चुकी हैं। दादी कह रही है,-''मेरी तारण-हार है भागीरथी। मुझे पापों से मुक्त करने आयी है। अब मेरी पोती भी आखें खोलेगी।''

माँ! तुम्हारे समुद्र-मंथन से धनवन्तरी के रूप में आयी हैं भागीरथी। जीवन कलश लेकर। तुम्हारे आयतन में मेरा अस्तित्व है। तुममें छुपी हुई हूँ मैं।

माँ! तुम गंगा हो

संस्कृति जीती हो।

धर्म साधती तुम

सातत्य को

उत्कर्ष तक वहन करती हो।

क्योंकि अमृत कलश हो।

इतिहास रचती तुम

वर्तमान साधकर

भविष्य की भूमिका बनती हो।

संजीवनी हो।

--

 

- अजय गोयल

निदान नर्सिंग होम

फ्रीगंज रोड, हापुड़

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: अजय गोयल की कहानी - सोनचैरिया का पहला गीत
अजय गोयल की कहानी - सोनचैरिया का पहला गीत
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2014/07/blog-post_200.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2014/07/blog-post_200.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content