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पूनम शुक्ला का संस्मरण - अनोखी राखी

 

अनोखी राखी

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तीन दिनों बाद ही रक्षाबंधन का त्योहार था।मेरे मन में हर्षोल्लास भरा हुआ था।आखिर रक्षाबंधन है ही बहनों के लिए एक खास पर्व जिस दिन वे अपने भाइयों पर अपना स्नेह न्योछावर कर देती हैं।और फिर मेरे तो तीन अपने भाई और छ: चचेरे यानी की कुल मिला कर नौ। पर साथ में दो ही रहते थे,बाकी सब दूर- दूर। सबके पास राखी डाक द्वारा भेज दी गई थी।तब मैं कक्षा सातवीं में पढ़ती थी। जब भी कक्षा में खाली पीरियड मिलता ,हम सभी सहपाठिनें अपनी-अपनी राखी की तैयारियों की बातें एक दूसरे से बताने लगतीं। किसी का भाई दूसरे शहर से उस दिन आने वाला होता तो कोई बहन अपने भाई के पास जाने वाली होती। किसी ने चटकीली रंगबिरंगी बड़ी राखी अपने भाई के लिए पसंद की होती तो किसी ने छोटी मोरपंख वाली।किसी को रेशम का धागा पसंद होता तो किसी को गोटे सितारे। किसी नें रक्षाबंधन के लिए नई फ्राक बनवा रखी थी तो किसी ने लहँगा। हम सभी अपनी-अपनी बातें एक दूसरे से शेयर करते और फिर कुछ नया आइडिया भी पनप आता। आइडिया मिलते ही हम अपने कार्यक्रम में थोड़ी तबदीली भी कर लेते।

आज की शुरूआत भी रोज की तरह ही हुई,एटेन्डेन्स,प्रार्थना और फिर पहले पीरियड की घन्टी। गणित के मास्टर जी का पहला पीरियड था क्योंकि वही हमारे क्लास टीचर थे।पर आज उनकी बातों में कुछ नयापन था।पुराने फार्मूले और जोड़ घटान से बिल्कुल अलग। आज उनपर भी रक्षाबंधन का ही असर था। उन्होंने कुछ देर तक रक्षाबंधन पर अपने विचार रखे जो हम सभी तल्लीनता से सुनते रहे और फिर उन्होंने हम सभी के सामने लड़कियों द्वारा लड़कों को राखी बाँधने का प्रस्ताव रखा जो हम सभी को बहुत पसंद आया। सर ने हमलोगों को एक लिस्ट बनाने के लिए भी कहा जिसमें ये स्पष्ट रूप से लिखा हो कि राखी किस लड़के को किस लड़की द्वारा बाँधी जाएगी।अब तो पूरी कक्षा का माहौल ही बदल गया। बहनें अपने भाईयों का और भाई अपने बहनों का चुनाव करने लगे। विद्यालय के बाहर ही एक राखी की दुकान भी थी।इंटरवल में हम अपना टिफिन जल्दी खाकर ,झुंड बनाकर राखियाँ खरीदने पहुँच जातीं। लड़के भी आपस में बातें करते कि राखी बँधने पर वो क्या उपहार देंगे।

सभी ने अपने-अपने अनुसार चुनाव किया और लिस्ट बननी शुरू हो गई।किसी ने अपना भाई पारिवारिक संबंधों के कारण चुना तो किसी ने रोज़ाना साथ आने-जाने के कारण।किसी ने प्रग़ाढ़ मित्रता के कारण तो किसी ने आकर्षक व्यक्तित्व के कारण।कक्षा में दो-चार ऐसे भी थे जिन्होंने राखी बाँधने और बँधवाने से ही मना कर दिया।जिसकी जैसी सोच रही वैसा ही चुनाव रहा पर मैं आज ये सोचकर हैरान हूँ कि मेरा चुनाव कितना अलग था। हाँ मैंने अपनी कक्षा में चार लड़कों को अपना भाई चुना जिसमें एक मुसलमान,एक ईसाई,एक हिन्दू और एक सिख था। मेरी लिस्ट बिल्कुल अलग थी।मेरे भाई निराले थे। मैंने भी उनके लिए चार नई राखियाँ खरीदीं ,अपनी सहेलियों को अपने चुनाव के बारे में बताया,शायद किसी ने टोका भी कि मुसलमान और ईसाई को क्या राखी बाँधनी है लेकिन मेरा चुनाव अडिग था। रक्षाबंधन का दिन भी आ गया। संयोग की बात ये थी कि उस दिन १५ अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस भी था। मैदान में प्राचार्य महोदय ने भारत का तिरंगा फहराया। हम सभी ने मार्चपास्ट किया। एकता के गीत गाए गए ,लड्डू बँटे और फिर मैंने अपने चारों भाइयों को राखी बाँधी। मेरे भीतर जो प्रसन्नता की लहरें थीं उसे मैं बयान नहीं कर सकती। असली एकता व सौहार्द् का दिवस तो मैंने मनाया था

 

पूनम शुक्ला


परिचय

नाम - पूनम शुक्ला

जन्म - ज्येष्ठ पूर्णिमा ,२०२९ विक्रमी।

26 जून 1972

जन्म स्थान - बलिया , उत्तर प्रदेश

शिक्षा - बी ० एस ० सी० आनर्स ( जीव विज्ञान ), एम ० एस ० सी ० - कम्प्यूटर साइन्स ,एम० सी ० ए ०। चार वर्षों तक विभिन्न विद्यालयों में कम्प्यूटर शिक्षा प्रदान की। अब कविता,ग़ज़ल,कहानी लेखन मे संलग्न।

कविता संग्रह " सूरज के बीज " अनुभव प्रकाशन , गाजियाबाद द्वारा प्रकाशित।

"सुनो समय जो कहता है" ३४ कवियों का संकलन में रचनाएँ - आरोही प्रकाशन

दैनिक जागरण,दैनिक ट्रिब्यून,परिकथा,जनपथ,हरिगंधा,स्त्री काल,संचेतना,शोध दिशा,गुफ्तगू,जनसत्ता दिल्ली, आदाबी किरन,चौथी दुनिया,परिंदे,सनद,सिताब दियरा,पुरवाई,अनुभूति,पहली बार,फर्गुदिया,बीईंग पोएट ईपत्रिका ,साहित्य रागिनी,विश्व गाथा,आधुनिक साहित्य,,जन-जन जागरण भोपाल,शब्द प्रवाह,जनसंदेश टाइम्स,नेशनल दुनिया,आज समाज,पीपल्स समाचार,जनज्वार,सारा सच,लोकसत्य,सर्वप्रथम ,पूर्वकथन,गुड़गाँव मेल,गुड़गाँव टुडे,बिंदिया,दिन प्रतिदिन में रचनाएँ प्रकाशित।

 

गुड़गाँव , हरियाणा - 122001

 

ई मेल आइडी poonamashukla60@gmail.com

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