---प्रायोजक---

---***---

नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका संपर्क : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी यहाँ [लिंक] देखें.

पद्मा शर्मा का आलेख - हिन्‍दी बाल कहानियों में जीवन-मूल्‍य ः एक विश्‍लेषण

साझा करें:

शोध-आलेख डॉ पद्‌मा शर्मा शा. स्‍नात. महाविद्यालय,शिवपुरी हिन्‍दी बाल कहानियों में जीवन-मूल्‍य ः एक विश्‍लेषण बच्‍चे राष्‍ट्र का भविष्‍य ह...

शोध-आलेख डॉ पद्‌मा शर्मा

शा. स्‍नात. महाविद्यालय,शिवपुरी

हिन्‍दी बाल कहानियों में जीवन-मूल्‍य ः एक विश्‍लेषण

बच्‍चे राष्‍ट्र का भविष्‍य होते हैं । इस भविष्‍य की आधारशिला वर्तमान में ही रखी जाती है। यही कारण है कि सरकार और समाज बच्‍चों के भविष्‍य के प्रति उदासीनता नहीं बरतते । भारत के संविधान में भी इस बात का विशेष ध्‍यान रखा गया है कि बच्‍चों के व्‍यक्‍तित्‍व विकास में किसी भी स्‍तर पर उपेक्षा न बरती जाए । अभिभावकों की देखभाल , पारिवारिक वातावरण द्वारा उनमें निहित क्षमताओं का विकास ,प्रतिभा को निखरने के अवसर, प्रोत्‍साहन , वर्जित व्‍यवहारों पर अंकुश, मनोवैज्ञानिक व्‍यवहार, संवेगों का शमन आदि ऐसे कार्य-व्‍यवहार हैं , जिनके द्वारा बच्‍चों के व्‍यक्‍तित्‍व को नई दिशा दी जा सकती है। 1 अभिभावकों तथा शिक्षकों की भूमिका कुम्‍हार के समान होती है । जिस प्रकार से कुम्‍हार कच्‍चे घड़े को ठोक-ठाक कर उसके दोष निकालता है, ऐसी ही सोच पालकों, शिक्षकों, समाज-सुधारकों और लेखकों की होना चाहिए। अनुशासित, शिष्‍ट और सदाचारी बच्‍चे आज की सबसे बड़ी आवश्‍यकता हैं ।

फ्रांस के सुप्रसिद्ध विद्वान रूसो का कहना है कि बालक का मन शिक्षक की पाठ्‌य पुस्‍तक है जिसे उसको पहले पृष्‍ठ से लेकर अंत तक भली-भांति अध्‍यापन करना चाहिए । दूसरी ओर आयु वर्ग एवं शिक्षा मनोविज्ञान पर विचार करते हुए मनोवैज्ञानिकों ने इस बात पर बल दिया है कि अवस्‍था के अनुसार बच्‍चों का अपना पृथक्‌ अस्‍तित्‍व होता है । वे स्‍वतंत्र होते हैं, उनके मनोविज्ञान को समझना इतना आसान नहीं है। तभी तो खलील जिब्रान ने कहा है कि ‘‘तुम उन्‍हें अपना प्‍यार दे सकते हो लेकिन विचार नहीं क्‍योंकि उनके पास अपने विचार होते हैं। तुम उनका शरीर बन्‍द कर सकते हो लेकिन आत्‍मा नहीं क्‍योंकि उनकी आत्‍मा आने बाले कल में निवास करती है । उसे तुम नहीं देख सकते हो । सपनों में भी नहीं देख सकते । उन्‍हें अपनी तरह बनाने की इच्‍छा मत रखना क्‍योंकि जीवन पीछे की ओर नहीं जाता और न बीते हुए कल के साथ रुकता ही है । '' बच्‍चों के लिए लेखन आसान नहीं है । उनके मनोविज्ञान को समझे बिना बाल साहित्‍य लिखा ही नहीं जा सकता । तथ्‍य तो यह है कि बाल साहित्‍य का लक्ष्‍य बच्‍चों के मानसिक स्‍तर पर उतरकर उन्‍हें रोचक ढंग से नई जानकारियाँ देना है । यदि बच्‍चों में कल्‍याण भावना और सौन्‍दर्यपरक दृष्‍टि जाग्रत करनी हो तो उनकी समस्‍त आकांक्षाओं और जिज्ञासाओं का स्‍कूली शिक्षा के साथ ही विकास आवश्‍यक है।2 बच्‍चों के चंचल मन और जिज्ञासाओं को प्रेरित करने का मुख्‍य साधन बाल साहित्‍य ही है ।

पहले भी दादा-दादी, नाना-नानी और घर के अन्‍य बुजुर्ग बच्‍चों को कहानी सुनाते थे तो उसमें कोई सीख समाहित होती थी । पंचतंत्र और हितोपदेश की कहानियाँ भी कोई न कोई उपदेश लिए होती थीं । बाद में जब प्रेमचन्‍द की कहानियाँ भी आयीं जिनमें आदर्श निहित था । 3 आज जबकि बच्‍चा अपना अधिक समय टी व्‍ही और कमप्‍यूटर में व्‍यतीत करता हैे तब तो लेखक की जिम्‍मेदारी और भी अधिक बढ़ जाती है कि उसका ध्‍यान साहित्‍य की ओर कैसे आकर्षित किया जा सकता है ।

नई पीढ़ी के बच्‍चों का मानसिक स्‍तर गुजरे जमाने से कहीं अधिक बढ़ चुका है , उसकी बौद्धिक भूख को शान्‍त करने के लिए ऐसे साहित्‍य की जरूरत है जो उसे मनोरंजन के साथ-साथ सही दिशा भी दे सके । जॉन होल्‍ट मानते हैं कि ‘‘ जिस व्‍यक्‍ति के पास असली स्‍वतंत्रता नहीं होती या उसे लगता है कि उसके पास वह नहीं है, वह उसे लेने के बारे में नहीं सोचता वह केवल इस बारे में सोचता है कि उसे दूसरों से छीना कैसे जाए ? मनुष्‍यता को बचाए रखने के लिए हमें बच्‍चों को इस रूप में ढालना होगा जो अपने जीवन को सम्‍पूर्ण रूप से जीना चाहते हों उसे सार्थकता और खुशहाली से भरना चाहते हों ।''

आज भी कई कहानीकार बाल कहानी लिखकर साहित्‍य में योगदान दे रहे हैं । संभाग स्‍तर पर ही लें तो परशुराम शुक्‍ल, महेश कटारे, राजनारायण बोहरे, डॉ कामिनी, रामगोपाल भावुक, ए असफल, प्रमोद भार्गव , पद्‌मा ढेंगुला, आदि कहानीकारों की लेखनी बाल सरोकारों से सम्‍पृक्‍त है ।

आसपास के परिवेश का बच्‍चों पर बहुत असर पड़ता है । गलत आदतो का पहला प्रभाव उन पर ही पड़ता है । ठाकुर साहब शराब पीते थे और वेश्‍या के घर भी जाते थे उस पर तुर्रा यह कि वे मास्‍टर जी पर ही तोहमत लगा रहे थे कि वे अच्‍छी तरह नहीं पढ़ाते। मास्‍टर जी बोले कि मुझे इन बाल-गोपालों से डर लगता है क्‍योंकि-

‘‘अरे इनसे इसलिए डरता हूँ कहीं हमारे आचरण का इनके बाल -मन पर कोई गलत असर न पड़ जाए।'' 4

ए असफल के ‘‘ नन्‍हा फरियादी, नकली सौ का नोट, नाई की घोड़ी तथा ‘मिसिंग पर्सन' जैसे कहानी संग्रहों में भी मूल्‍य बोध, संस्‍कार, प्रेरक तत्‍व निहित हैं । डा कामिनी की ‘‘ लाडिली के भुवन कहाँ ,इतना जीवट तथा भोली सी आशा'' आदि कहानियों में बाल संस्‍कार तथा बाल मनोविज्ञान की छवि दिखाई देती है । ‘‘भोली सी आशा'' भोली के कथन का एक दृश्‍य वर्णित है-

‘‘ मैं चाहती हूँ कि मैं सभी प्रोग्रामों में भाग लूँ, पर सर कहते हैं कि मैं छोटी हूँ । ''

‘‘ क्‍या तुम चाहती हो कि तुम्‍हारे अलावा दूसरे को काम न मिले''

‘‘ हाँ मम्‍मी मैं चाहती हूँ हमेशा मैं ही फर्स्‍ट आऊँ''

‘‘ स्‍कूल में सभी लड़कियाँ बराबर होती हैं । '' 5

प्रमोद भार्गव की कहानी ‘‘विकास का भूत'' में ऋषि कहते हैं -‘‘राजन गौर से सुनो ,तुम जिस विकास और उन्‍नति के भ्रम में लगे हो वह कुछ ऐसा ही है। जो न ऊपर की ओर बढ़ रही है औेर न नीचे की ओर। बल्‍कि जल,जंगल और जमीन से उसके वास्‍तविक हकदारों से हक छीनकर तुम सामाजिक न्‍याय के बहाने उनके साथ अन्‍याय कर रहे हो।''6

बालमन स्‍वाभिमानी, मेहनती और ईमानदार होता है । कभी-कभी परिस्‍थिति वश उन्‍हें गलत काम करने पड़ते हैं, इसका मतलब यह नहीं कि वे आचरण से खराब हैं। समाज का काम है उन्‍हें सुधारना। पद्‌मा ढेंगुला की कहानी ‘‘ जीवन की नई सुबह '' में अक्षत नामक पात्र मजबूरी में चोरी करता है। इन्‍सपेक्‍टर साहब उसे घर ले जाते हैं और कहते है-

‘‘नहीं अक्षत मुझे पता है, तुम स्‍वाभिमानी हो और ईमानदार भी। तुम तो परिस्‍थितियों से चोर थेे दिल से नहीं। मुझे ईमानदार लड़के की आवश्‍यकता थीं । तुम यहीं काम कर लिया करो। यह सुनकर अक्षत की आंखों से खुशी के आंसू बहने लगे ।'' 7

कुछ अन्‍य कहानीकार भी हैं जो जीवन मूल्‍य के पक्षधर हैं । ऐसे लेखक अपनी कहानियों के घात-प्रतिघातों का निर्माण इस प्रकार करते हैं जिनसे मूल्‍यों की रक्षा हो सके। ‘‘जादुई ठूंठा'' कहानी में दीनू को जब चमत्‍कारी ठूंठा मिलता है तो वह अपनी गरीबी दूर न करके गाँव के हित में उसका इस्‍तेमाल करता है । यह परोपकार वह एक बार नहीं दो-दो बार करता है।

‘‘ठूंठ ने सोचा कि दीनू धन-दौलत मांगेगा । मैं उसको मालदार बना दूंगा। पर दीनू किसी और ही मिट्‌टी का बना था उसने कहा - ‘तुमने नदी का सारा पानी पी लिया हैं वह खाली हो गई है। इससे कितने लोग प्‍यासे रह जायेंगे। तुम उसमें इतना पानी भर दो कि कोई गाँव न डूबे और नदी भी लबालब रहे ।'' 8

आदमी का बड़ा बन जाना उतना लाजमी नहीं है जितना उसमें इन्‍सानियत का होना है । बुराइयों का भण्‍डार होने पर भी जब कभी इन्‍सानियत जाग जाती है, यह इन्‍सान होने की सबसे बड़ी सफलता है । चंपक में प्रकाशित कहानी ‘छोटू की कार '' में यही बताया गया है कि -

‘‘ वह एक बड़ी आतंकी साजिश थी। मैंने देखा है आदमी में वैसे लाख बुराइयाँ हों

पर ऐसे समय पर उसकी इन्‍सानियत जाग जाती है। छोटू अपनी बात जैसे पूरी तरह भूल गया था। पर उसी कार ने हम सबको हादसे से बचाकर लोगों की मदद कदने का अवसर दिया था ।'' 9

यह तो सभी जानते हैं कि मेहनत का फल मीठा होता है । मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती ।कई कहानियाँ इसी कथ्‍य पर आधारित होकर लिखी गई हैं । ‘‘ गर्मागर्म जलेबियाँ '' कहानी में लिखा है -‘‘किसी ने सच ही कहा है कि मेहनत का फल मीठा होता है।'' 10

अतिथि देवो भव का संस्‍कार भारतीय परम्‍परा का अंग है। मेजबान मेहमान के लिये समस्‍त सुविधाएँ जुटाता हैं । जिसके घर अतिथि आते थे वह घर सौभाग्‍य-सम्‍पन्‍न माना जाता था।‘फिर बस गया ताल' कहानी में मृणालिनी श्रीवास्‍तव ने लिखा है -

‘‘दोनों बहुत वर्षों तक वहाँ आने वाले अतिथियों का प्‍यार से स्‍वागत करते रहे। हर यात्री को उस जग से निकालकर एक गिलास दूध अवश्‍य दिया जाता क्‍योंकि उसमें दूध हमेशा ही भरा रहता था।'' 11

हमेशा सच बोलना चाहिए, झूठ बोलना पाप है। यह प्रायः सभी धर्मों का मुख्‍य सार है। बच्‍चों को भी यही सिखाया जाता है। ‘‘सच्‍चाई का फल'' कहानी में भी बाल पात्र रवि अपनी की गयी गलती को स्‍वीकार कर लेता है-

‘‘सर कल मुझसे स्‍कूल की एक खिड़की का कांच टूट गया था। यह सब अचानक हो गया था। मैंने जानबूझकर नहीं तोड़ा । मैं इसका हर्जाना चुकाने को तैयार हूँ। 12

इज्‍जत सबको प्‍यारी होती है, चाहे वह मानव हो या पशु-पक्षी। इधर कई कहानियाँ बाल - साहित्‍य में पशु-पक्षियों को आधार बनाकर लिखी जा रही है। ‘‘ नाक कटने का डर'' 13 कहानी में धीमू कछुआ और तेजू खरगोश की दौड़ प्रतियोगिता का वर्णन है जिसमें तेजू के हार जाने पर सभी उसको धिक्‍कारते थे । पर दूसरी प्रतियोगिता में धीमू कछुआ ने जीत हासिल करके खरगोश के घमण्‍ड को समाप्‍त कर दिया ।

चिल्‍ड्रन बुक ट्रस्‍ट दिल्‍ली द्वारा भी बच्‍चों के विभिन्‍न वर्गों के लिये कहानी , उपन्‍यास और अन्‍य विधा की प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाती हैं । इसके अन्‍तर्गत ‘‘ सच्‍चा लकड़हारा, एक भला कि सौ, खिलाड़ी भावना तथा रिश्‍ता आदि कहानियाँ पुरुस्‍कृत हो चुकी हैं । ‘‘ एक बड़ा कि सौ '' कहानी में सज्‍जन एक चौकीदार हैं उसके पिता की मृत्‍यु हो जाती है और रात्रि में उसे चौकीदारी करने जाना होता है तब वह रात में पिता के मृत शरीर को घर में ही छोड़कर रात्रि पहरेदारी पर निकल पड़ता हैं - ‘‘ चौकीदार सज्‍जन ने जो किया वह पूरी तरह उचित था । उसकी जिम्‍मेदारी थी कि वह एक आदमी के बजाय सैकड़ों के हित की बात करे , जिसके लिये उसने अपने पिता की लाश को दूसरों के लिए छोड़ दिया । यही कर्तव्‍य उसके लिये जरूरी था । 14

हमारे बच्‍चों ने प्रगति की है तो उनके सामने आज नई - नई समस्‍याएँ भी हैं । विकास की साढ़ी यदि शिखर पर ले जाती है तो वह उसमें फिसलन भी पैदा करती है जो बच्‍चों के भविष्‍य के लिए घातक भी बन सकती है । यह सही है कि हमने बच्‍चों को भविष्‍य की चुनौतियों के लिए तैयार तो किया है लेकिन हमें उतना ही सावधान भी रहना है कि वे उपलब्‍ध सुविधाओं का दुरूपयोग न करने पाएँ। भविष्‍य की चुनौतियाँ गंभीर हैं। समाज, संस्‍कृति, जीवन-मूल्‍य सभी की दृष्‍टि से बच्‍चों के सामने अनेक प्रश्‍न हैं और हमें बच्‍चों को उनसे जूझने के लिए सशक्‍त बनाना है। हमें अपने दृष्‍टिकोण में परिवर्तन लाना चाहिए । हमें हिन्‍दी भाषा और उसके साहित्‍य के विकास के लिए प्रयासरत होना होगा इसके लिए बाल -साहित्‍य से ही प्रारम्‍भ करना होगा। हिन्‍दी का बाल -साहित्‍य सौ वर्ष से भी अधिक पुराना हो गया है । इसके सन्‍दर्भ में हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि आज का बच्‍चा इक्‍कीसवीं सदी में प्रवेश कर चुका हैं ,उसकी इच्‍छाएँ पसंद-नापसंद और सरोकार भी बदल गये हैं। उसकी मानसिकता को समझते हुए हमें वह बाल-साहित्‍य रचना होगा, जो उसे संस्‍कार देते हुए नई चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार कर सके । सभ्‍य और सुसंस्‍कृत समाज के निर्माण के लिए बाल-साहित्‍य को उचित महत्‍व देकर उसमें साहित्‍य लेखन करना होगा। नहीं तो हम यही कहते रह जायेंगे-

‘‘ इस पीढ़ी ने पीड़ा दी हमको , बेदर्द जमाना क्‍या जाने

जन्‍म लिया है बेरुखी में फिर प्‍यार की भाषा क्‍या जाने

घुटने भी पुजने लगे जहाँ चरण चूमे जाते थे

हाय हलो से निकले काम फिर अभिवादन को क्‍या जाने '' 15

 

डॉ पद्‌मा शर्मा

सहायक प्राध्‍यापक, हिन्‍दी

शा श्रीमंत माधवराव सिंधिया स्‍नातकोत्तर

महाविद्यालय शिवपुरी , म प्र

 

संलग्‍न ः संदर्भ सूची

संदर्भ-सूची

1. बच्‍चों की प्रतिभा कैसे उभारें - चुन्‍नी लाल सलूजा, अपनी बात

2 कृतिका- वीरेन्‍द्र यादव - पृ 151

3 मानसरोवर -ईदगाह , प्रेमचन्‍द

4 दुलदुल घोड़ी- रामगोपाल भावुक पृ 68-69

5 बिखरे हुए मोर पंख- डॉ कामिनी, पृ 72

6 विकास का भूत - प्रमोद भार्गव पृ 2

7 जीवन की नई सुबह - पद्‌मा ढेंगुला पृ 22

8 जादुई ठूंठा - बाल भास्‍कर -जनवरी 1 . 2010 पृ 24

9 चंपक - जुलाई अंक 2010 पृ 40

10 लोटपोट - सित 2010 पृ 13

11 नंदन - सित 2010 पृ 25

12 बालहंस- सित द्वितीय पृ 18

13 जनसत्ता - रविवारीय, नन्‍ही दुनिया पृ 4

14 एक बड़ा कि सौ - राजनारायण बोहरे पृ 4

15 खून बहुत सस्‍ता है- पद्‌मा शर्मा पृ 40

 

डॉ पद्‌मा शर्मा

सहायक प्राध्‍यापक, हिन्‍दी

शा श्रीमंत माधवराव सिंधिया स्‍नातकोत्तर

महाविद्यालय शिवपुरी , म प्र

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर

---प्रायोजक---

---***---

---प्रायोजक---

---***---

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1$h=100

प्रायोजक

--***--

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधा/विषय पर क्लिक/टच कर पढ़ें : ~

|* कहानी * |

| * उपन्यास *|

| * हास्य-व्यंग्य * |

| * कविता  *|

| * आलेख * |

| * लोककथा * |

| * लघुकथा * |

| * ग़ज़ल  *|

| * संस्मरण * |

| * साहित्य समाचार * |

| * कला जगत  *|

| * पाक कला * |

| * हास-परिहास * |

| * नाटक * |

| * बाल कथा * |

| * विज्ञान कथा * |

* समीक्षा * |

---***---



---प्रायोजक---

---***---

|आपको ये रचनाएँ भी पसंद आएंगी-_$type=three$count=6$src=random$page=1$va=0$au=0$h=110$d=0

प्रायोजक

----****----

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4039,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,338,ईबुक,193,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,262,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,112,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2999,कहानी,2253,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,540,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,31,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,96,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,345,बाल कलम,25,बाल दिवस,4,बालकथा,67,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,16,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,28,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,242,लघुकथा,1248,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,326,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,68,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2005,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,707,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,793,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,17,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,83,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,204,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,77,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: पद्मा शर्मा का आलेख - हिन्‍दी बाल कहानियों में जीवन-मूल्‍य ः एक विश्‍लेषण
पद्मा शर्मा का आलेख - हिन्‍दी बाल कहानियों में जीवन-मूल्‍य ः एक विश्‍लेषण
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2014/10/blog-post_35.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2014/10/blog-post_35.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय SEARCH सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ