---प्रायोजक---

---***---

नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका संपर्क : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी यहाँ [लिंक] देखें.

सपना मांगलिक की कहानी - इजहार

साझा करें:

निक्की एक १२ साल कि ख्वाबों ख्यालों में रहने वाली एक साधारण लड़की थी उसके कम बोलने कि आदत के कारण उसके बहुत कम दोस्त थे । जिसकी वजह से निक्...

निक्की एक १२ साल कि ख्वाबों ख्यालों में रहने वाली एक साधारण लड़की थी उसके कम बोलने कि आदत के कारण उसके बहुत कम दोस्त थे । जिसकी वजह से निक्की अपने आपको बहुत अकेला और कमतर आंकती थी । एक दिन उसने देखा कि उसके घर से थोड़ी दूर वाले फ्लैट में दो गाड़ियों में से कुछ लोग सामान उतार रहे हैं पूछने पे पता चला कि वो लोग किसी दूसरे शहर से आये हैं और अब यहीं रहेंगे ये घर भी उन्होंने ही खरीद लिया है उस परिवार में माता पिता के अलावा एक उसकी ही उम्र का लड़का भी था दिखने में गोरा चिट्टा पर शर्मीला सा नाम था उसका राजू । राजू कि माताजी ने निक्की से उसका नाम और कक्षा के बारे में पूछा फिर मुस्कुराते हुए बताया कि उनका बेटा राजू भी उसकी ही उम्र का है और उसके ही स्कूल में एडमिशन लेने वाला है । राजू कि माताजी ने निक्की से कहा –“बेटा हमारा राजू बहुत शर्मीला है जल्द ही किसी से घुलता-मिलता नहीं है । वैसे भी ये शहर उसके लिए नया है और वो यहाँ किसी को नहीं जनता तो तुम्हें जब भी वक्त मिले इसके साथ खेलने के लिए यहाँ आ जाया करो राजू का भी मन लग जाएगा “

निक्की राजू की माताजी को मना नहीं कर पायी और उसके मुंह से निकल ही गया –“जी आंटी जरूर”इतना कह निक्की वाहन से अपने घर चली गयी।

दूसरे दिन निक्की जब स्कूल में गयी तो हैरान रह गयी कल बाला लड़का राजू उसका एडमिशन भी निक्की कि ही क्लास में और निक्की के ही बी सेक्शन में हुआ । दोनों ने एक दूसरे को देख मुस्कराहट का आदान-प्रदान किया । और जब लंच का समय हुआ तो निक्की राजू के पास जाकर बोली –राजू कैसा लगा तुम्हें हमारा स्कूल ?”राजू ने कहा –“अच्छा तो है लेकिन यहाँ मेरा कोई दोस्त नहीं जिससे मैं बातें कर सकूं जयपुर में तो अमित और विशाल थे उनसे मेरा मन लग जाता था पर यहाँ में एकदम अकेला हूँ “

निक्की –“बस इतनी सी बात ,फिर अपना हाथ आगे बढाते हुए बोली राजू मुझसे दोस्ती करोगे ?”

राजू ने भी उसका हाथ पकड़ अपनी मौन स्वीकृति दे दी । अब तो दोनों घर से साथ ही स्कूल से घर लौट के आते और इतवार के दिन भी साथ साथ शतरंज और कैरम खेलते या फिर बहार पार्क में बतियाते । दोनों ही अपने दिल कि हर बात एक दूसरे से शेयर करने लगे थे और राजू भी स्कूल में या पढाई में निक्की को कोई भी समस्या होने पर उसकी मदद बड़ी तत्परता से करता । समय ने पंख लिए और दो साल बीत गए राजू और निक्की कि मित्रता और भी गहरी होती चली जा रही थी ।

एक दिन निक्की बोली –“राजू क्या तुम किसी लड़की के प्रति आकर्षित हुए हो ?राजू शरमाते हुए –“ये कैसा सवाल कर रही हो “निक्की –बताओ ना राजू हमने प्रोमिस किया था ना एक दूसरे के साथ सारी बातें शेयर करेंगे “राजू-नहीं अबतक तो नहीं ,तुमने कभी किसी को पसंद किया ?”

निक्की –(नजरें झुकाते) हुए-मेरी जैसी साधारण सी दिखने वाली लड़की को कौन पसंद करेगा ।

राजू-निक्की तुम ऐसा क्यों बोल रही हो तुम बहुत अच्छी हो जितना साथ तुम मेरा देती हो वैसा कोई भी नहीं देता ना स्कूल में ना ही घर में मुझे तो तुम साधारण नहीं असाधारण दिखती हो एकदम परियों कि रानी के जैसी जो छड़ी घुमाकर मेरी हर मुश्किल दूर कर देती है “

निक्की –फिर विवेक ने मेरा मजाक बनाकर अपमानित क्यूँ किया । पता है राजू तुम्हारे आने से पहले में विवेक को पसंद करती थी और जब मैंने उसे कहा कि मैं तुम्हें पसंद करती हूँ तो उसने अपने दोस्तों के सामने मेरा मजाक बनाया कहा –“पहले घर जा कर आइना देखो एकदम बंदरिया दिखती हो “

तुम ही बताओ राजू क्या में इतनी बुरी दिखती हूँ ,ऐसा कहकर निक्की राजू के गले से लगकर रोने लगी और राजू भी बड़े प्यार से उसकी पीठ थपथपा कर उसे हौसला दे रहा था । राजू-“अरे नहीं निक्की तुम तो बहुत प्यारी सी गुडिया हो तुम्हारी मुस्कान बहुत प्यारी है एकदम शालीन और सच्ची और रही बात विवेक कि तो वह खुद एक बन्दर है और बन्दर क्या जाने अदरक का स्वाद “

राजू कि बात सुन निक्की रोते-रोते हंस पड़ी । उसे हस्त देख राजू भी हंसने लगा और दोनों हाथ में हाथ डाल वापस घर कि तरफ चल पड़े ।

राजू और निक्की समय के साथ बहुत ही पक्के दोस्त बन गए उनके परिवार वाले दोनों को दो हँसों का जोड़ा कहकर बुलाते थे । दोनों एक दुसरे के साथ अपने मन कि सुख ,दुःख कि हर बात बांटा करते थे लेकिन निक्की ने उससे हमेशा अपने मन कि एक बात छुपाई और वो ये कि वह राजू से बहुत प्यार करने लगी थी ,राजू भी विवेक कि तरह उसका प्यार ना ठुकरा दे इस डर से उसने राजू को अभी तक कुछ नहीं बताया । इसी दिन पर दिन गहरी होती दोस्ती के साथ दोनों ने स्नातक भी पास कर लिया । अब निक्की ने सोचा कि ये सही बक्त है राजू से अपने प्यार का इज़हार करने का यही सोच उसने राजू का मोबाइल नंबर मिलाया । दूसरी तरफ से राजू कि बेसब्री भरी आवाज सुनाई दी -

हेलो निक्की आज में तुम्हें एक जरूरी बात बताने वाला हूँ तुम जल्दी से पार्क आ जाओ वही बात करेंगे बाय “

निक्की कि खुशी का ठिकाना ना रहा वो समझी कि राजू भी उसकी ही तरह उससे अपने प्यार का इजहार करना चाहता है ,निक्की उस दिन बहुत देर लगाकर तैयार हुई घर से दो कदम कि दूरी वाले पार्क के लिए वो इतना सज संवर रही थी । अंत में अपने को एक बार और शीशे में निहार कर वो पार्क कि तरफ चल दी । वहाँ राजू पहले से ही बैठा हुआ था । निक्की को देख बोला –“अरे निक्की बहुत देर लगा दी तुमने क्या कर रही थी “निक्की कुछ नहीं राजू बस देर हो गयी कह इंतज़ार करने लगी कि राजू उसे कहे कि वह आज बहुत सुन्दर लग रही है या जो बात यानि प्यार का इज़हार करे जिसके लिए उसने उसे यहाँ बुलाया है । लेकिन राजू ने जो कहा उसे सुनकर निक्की के परों तले जमीन खिसक गयी ।

राजू-(उत्साहित हो )निक्की तुम्हें पता है मुझे बेंगलौर iim में प्रवेश मिल गया है और कल ही में बेंगलौर के लिए निकल रहा हूँ मैंने सबसे पहले ये बात तुम्हें बताई क्यूंकि मुझे पता है कि इस खबर से मुझसे भी ज्यादा तुम खुश होंगी “

निक्की अपने आपको संयत करते हुए “वाह राजू ये तो बहुत अच्छी खबर है मुझे तुम पर गर्व है जिंदगी में तुम कामयाबी की मिसाल बनो “

राजू-“तो कल तुम मुझे एअरपोर्ट तक आ रही हो ना विदा करने ,निक्की ने सहमति में सर हिलाया और निक्की राजू से घर पे जरूरी काम का बहाना बना वाहन से वापस आने लगी जैसे ही वो मुडी राजू-निक्की आज तुम बहुत सुन्दर लग रही हो “लेकिन अब निक्की को इस तारीफ से कोई खुशी नहीं हुई क्यूंकि उसका प्यार उससे दूर जो जा रहा था ।

दूसरे दिन निक्की राजू को उसकी परिवार के साथ विदा करने गयी दोनों ने एक दूसरे को पत्र लिखते रहने का वादा किया । निक्की ने भी अपनी आगे कि पढ़ाई जारी कि उसने फैशन डिजायनिंग का कोर्स शुरू किया । राजू के शुरू में तो हर सप्ताह पत्र आते थे लेकिन छः माह के बाद वो महीने और साल के अंत तक कभी कभी आने लगे । दो साल बाद राजू का पत्र मिला कि उसकी एम बी ए पूरी हो गयी है और वहीँ बेंगलौर में उसकी नौकरी भी लग गयी है । इस बार भी निक्की ने चाहकर भी अपने दिल कि बात राजू से नहीं कि । ऐसे ही दो और साल गुजर गए निक्की ने अपना एक बुटीक खोल लिया जो खूब अच्छे से चल रहा था निक्की और राजू का इस बीच कोई संपर्क नहीं रहा । निक्की ने भी अपने आपको बुटीक में मशगूल कर लिया और मम्मी –पापा के शादी के आग्रह को भी निक्की बार-बार इस आशा से ठुकराए जा रही थी कि शायद राजू उससे प्यार का इज़हार करे ।

एक दिन अचानक ही राजू कि मम्मी का फोन निक्की कि मम्मी के पास आया कि राजू कि शादी अगले सप्ताह तय हुई है निक्की को कुछ दिन के लिए बेंगलौर भेज दीजिए वो राजू कि बचपन कि दोस्त है अगर शादी में वही हंगामा नहीं करेगी तो और कौन करेगा । फिर राजू का भी फोन निक्की के पास आया की उसकी हवाई जहाज़ कि टिकिट कुरियर कर दी है । निक्की ने राजू को आश्वासन दिया कि वो उसकी शादी में जरूर आएगी और खूब नाचेगी भी । फोन रखने के बाद निक्की खूब जोर जोर से रोने लगी रोये भी क्यों ना उसकी आखिरी आस ने भी अब दम तोड़ दिया था ।

खैर निक्की दिल पे पत्थर रख बेंगलौर गयी वाहन राजू से ऐसे मिली जैसे बचपन में मिला करती थी राजू और निक्की खूब बातें बनाते शादी वाले घर कि कई जिम्मेदारियों को निक्की ने एक परिवार के सदस्य कि तरह संभाला । राजू कि शादी वाले दिन बारात में जम के नाची भी लेकिन इस मुस्कराहट और नाच के पीछे छिपा गम राजू एक बार भी नहीं पहचान पाया जब निक्की ने राजू और उसकी पत्नी श्वेता को एक दूसरे के वरमाला डालते देखा तो उसका अंतर्मन तड़प उठा । शादी के दूसरे दिन राजू और उसके परिवार से विदा लेते वक्त निक्की से राजू बोला-“निक्की थोड़े दिन और रुक जाओ ना “निक्की –राजू अभी तो में जा रही हूँ लेकिन दोबारा जब आउंगी तब तुम एक प्यारे से बेबी के पापा बन जाओगे “राजू उसकी बात सुन शर्मा गया ,और घर के सभी लोग खिलखिला पड़े ।

बेंगलौर से आने के बाद कुछ दिन तक निककी का मन बुटीक के किसी भी काम में नहीं लगा ममी पापा ने घुमाफिरा के उससे फिर से शादी कि बात करनी चाही तो उसने झुंझला के उन्हें कभी शादी ना करने की अपनी भीष्म प्रतिज्ञा सुना दी ,मम्मी पूछ –पूछ कर हार गयी उसके फैसले कि वजह लेकिन निक्की ने उन्हें कुछ ना बताया। इसके बाद आठ साल और बीत गए ना राजू का कोई फोन उसके पास आया ना ही उसने किया लेकिन एक दिन जब वह अपने बुटीक में टेलर को कुछ समझा रही थी तभी उसके पास राजू का फोन आया ,निक्की के हेल्लो कहते ही राजू बच्चों कि तरह फूट-फूटकर रो पड़ा ,निक्की-क्या हुआ राजू सब ठीक तो है ?राजू- “निक्की मेरा तलाक हो गया में बिलकुल अकेला हो चुका हूँ जीने कि कोई वजह नजर नहीं आ रही “कहते हुए राजू फिर रोने लगा

निक्की-राजू ऐसे हिम्मत मत हारो मुझे पूरी बात बताओ कैसे हुआ ये सब वो भी इतने साल बाद ?

राजू –मैं कल तुम्हारे पास आ रहा हूँ मिलकर बताऊंगा ,दूसरे दिन कि फ्लाईट से राजू वाहन आ गया निक्की के गले लग फिर रोया शादी टूटने कि वजह उसने सामंजस्य का ना होना बताया

राजू बहुत ज्यादा अवसाद ग्रस्त नजर आ रहा था निक्की ने उसे कुछ दिन वही रुकने का आग्रह किया । राजू ने उसका आग्रह मान लिया अब रोज निक्की और राजू घूमने जाते निक्की उसे अवसाद से निकलने कि पूरी-पूरी कोशिश में लगी थी और २-३ दिन में ही उसकी मेहनत रंग लाने लगी राजू का मुरझाया चेहरा दोबारा खिल उठा वो भी हंसने चहकने लगा ,राजू के सामीप्य में निक्की को महसूस होता कि भगवां ने राजू को शायद उसी के लिए दोबारा भेजा है ,लेकिन इस बार भी मौके कि नजाकत देख निक्की अपने दिल का हाल राजू को ना बता सकी । १५ दिन वाहन रुकने के बाद जब राजू नोर्मल हो चुका था तो उसने निक्की से वापस जाने कि बात कही क्यूंकि उसकी छुट्टियाँ खत्म हो चुकी थी अगर ज्यादा अवकाश लिया तो उसकी नौकरी चली जायेगी ,निक्की ने भरी मन से राजू को विदा किया राजू के जाने के बाद निक्की फिर से अकेली हो गयी ।

राजू के जाने के लगभग सात दिन बाद बेंगलौर से फोन आया कि राजू ने आत्महत्या कर ली है । और वह एक वसीयत भी बनाकर गया है जो तभी पढ़ी जायेगी जब निक्की वहां आ जायेगी

राजू के घरवालों ने निक्की से राजू की अंतिम इच्छा पूरी करने का आग्रह किया । निक्की राजू की इस अंतिम इच्छा के लिए और आत्महत्या का असली कारण जानने के लिए वहां के लिए रवाना हुई । वहां जाके देखा एक हौल में राजू के परिवार वाले और उसकी पत्नी श्वेता वहां बैठे हैं निक्की के पहुँचने पर वकील साहब को भी बुलवा लिया गया । थोड़ी देर शांत रहने के बाद निक्की ने श्वेता

से उसके तलाक की वजह पूछी और उसने जो वजह बताई उसे सुन निक्की सन्न रह गयी श्वेता के अनुसार राजू और उसके बीच कभी पति-पत्नी वाले रिश्ते नहीं रहे क्यूंकि राजू शादी से पहले

किसी और से प्रेम करता था उसने श्वेता को उस लड़की का नाम तो नहीं बताया लेकिन ये जरूर कहा कि अब वह किसी और से प्यार नहीं कर पायेगा । श्वेता आठ साल तक जोगन कि तरह राजू के प्यार को पाने का जतन और उम्मीद करती रही इन आठ सालों में राजू उसका दोस्त तो बना लेकिन पति नहीं बन पाया हारकर उसने ये अनचाही शादी तोड़ने का निर्णय ले लिया आज यहाँ वह भी राजू के वसीयत के आग्रह पर ही आई है । श्वेता कि बात निक्की को अंदर तक हिला गयी लेकिन इससे पहले वो कुछ सोचे वकील साहब वसीयत पढ़ने के लिए आ चुके थे ।

वकील साहब ने वसीयत के अनुसार राजू कि संपत्ति का हकदार उसके माता पिता और पूर्व पत्नी श्वेता को आधा –आधा बताया और निक्की के नाम एक लाल डायरी और एक पत्र था ,निक्की ने कांपते हाथों से पत्र खोला और पढ़ने लगी उसमें राजू ने लिखा –“प्रिय निक्की जो बात में तुमसे कई बार कहना चाह रहा था और अपने जीते जी ना कह पाया आज वो तुम्हें लिखकर बता रहा हूं

शायद जब यह पत्र मिलेगा तो मैं इस दुनिया में नहीं होऊंगा निक्की बचपन से मैं एक प्यारी सी लड़की को प्रेम करता था और जब भी अपनी प्रेमिका और पत्नी के बारे में सोचता मुझे उसी लड़की का चेहरा दिखाई देता और वो लड़की तुम हो निक्की । मैंने कई बार तुमसे अपने प्यार का इज़हार करना चाहा लेकिन तुम मुझे मना ना कर दो और हमारी दोस्ती ना टूट जाए इस डर से मैं तुम्हें नहीं कह पाया ,आज मैं ये बात कह रहा हूँ लेकिन तुम्हारा नाराज होना मैं नहीं सह पाउँगा इसलिए ये दुनिया छोड़कर जा रहा हूँ मुझसे कोई गलती हुई हो तो माफ करना ये लाल डायरी में तब तब लिखता था जब मैं तुमसे प्रेम का इज़हार करना चाहता था और बिना कहे रह जाता तुम इसे पढ़ लेना और श्वेता से कहना मुझे माफ कर दे मेरी वजह से उसकी जिंदगी के आठ साल बर्बाद हो गए ,अलविदा ।

 

 

साहित्यकार /कवि/स्वतंत्र पत्रकार

सपना मांगलिक (आगरा)up 282005

Sapna8manglik@gmail.com

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर: 1
रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

---प्रायोजक---

---***---

---प्रायोजक---

---***---

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1$h=100

प्रायोजक

--***--

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधा/विषय पर क्लिक/टच कर पढ़ें : ~

|* कहानी * |

| * उपन्यास *|

| * हास्य-व्यंग्य * |

| * कविता  *|

| * आलेख * |

| * लोककथा * |

| * लघुकथा * |

| * ग़ज़ल  *|

| * संस्मरण * |

| * साहित्य समाचार * |

| * कला जगत  *|

| * पाक कला * |

| * हास-परिहास * |

| * नाटक * |

| * बाल कथा * |

| * विज्ञान कथा * |

* समीक्षा * |

---***---



---प्रायोजक---

---***---

|आपको ये रचनाएँ भी पसंद आएंगी-_$type=three$count=6$src=random$page=1$va=0$au=0$h=110$d=0

प्रायोजक

----****----

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4040,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,338,ईबुक,193,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,262,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,112,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3002,कहानी,2255,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,541,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,31,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,96,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,345,बाल कलम,25,बाल दिवस,4,बालकथा,67,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,16,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,28,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,242,लघुकथा,1248,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,326,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,68,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2005,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,709,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,794,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,17,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,84,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,205,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,77,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: सपना मांगलिक की कहानी - इजहार
सपना मांगलिक की कहानी - इजहार
http://lh3.ggpht.com/-wY2PSbVyamk/VFyTgZGNhUI/AAAAAAAAbN0/VgalHpn-ErE/image_thumb.png?imgmax=200
http://lh3.ggpht.com/-wY2PSbVyamk/VFyTgZGNhUI/AAAAAAAAbN0/VgalHpn-ErE/s72-c/image_thumb.png?imgmax=200
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2014/11/blog-post_86.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2014/11/blog-post_86.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय SEARCH सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ