---प्रायोजक---

---***---

नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका संपर्क : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी यहाँ [लिंक] देखें.

रामनिवास डांगोरिया की कविताएँ

साझा करें:

  (कविता) मां कितना कष्ट उठाती होगी जब गर्भ से रहती होगी मां करती होगी परहेज कितना जब गर्भ में पलता है लल्ला। क्या है उसे खाना क्या नहीं ख...

 image

(कविता)
मां
कितना कष्ट उठाती होगी
जब गर्भ से रहती होगी मां
करती होगी परहेज कितना
जब गर्भ में पलता है लल्ला।

क्या है उसे खाना
क्या नहीं खाना
रखती है हरदम
ख्याल अपना।

असहनीय दर्द भी
कभी कमर कभी घुटने
कभी उदर पीड़ा को भी
सहती है मां।

जब होता है प्रसव तो
पीड़ा कितनी उठाती होगी मां
ये तो वही जाने
जिसने झेली होगी प्रसव पीड़ा।

बाद प्रसव के तो
मल-मूत्र में ही
लिपटी सी रहती है मां
आती है गंध कुछ
अजीब सी वहां
जहां प्रसव के बाद
होती है संग लल्ला के मां।

सोती है खुद
बिस्तर गीले में
सुलाती है सूखे में
लल्ला को मां।

तड़प उठती है
मां की ममता
जब जी तोड़ के
रोता है लल्ला।

उठाती है दौड़ के
लगाती है सीने से
काम सारे छोडकर
पिलाती है दूध
आंचल अपने में
छिपाकर मां।

हाथों को अपने बनाती है
झूला मां
हिलारती-दुलारती
गाती है लोरिया
दिल के टुकड़े को
सुलाने को मां।

ताकि निपटाले काम सारे
घर के तसल्ली से मां।

पकड़कर हाथ अपने से
सिखाती है चलना मां
सपने सैकड़ों दिल में
संजोंये रहती है मां।

 

 

 


(कविता)
(कर्मवीर)

कर्मवीर बन बढ़ता चल तू
लक्ष्य अपना चुन लेना तू
कठिन विपदाएं भी है आगें
पीछे कभी न हटना तू।।

जग जीवन की पीड़ा गहरी
करले दिल से सच्ची करनी
ईश्वर को सब याद है तेरी
पंहुचे इक दिन मंजिल अपनी।।
कर्मवीर बन बढ़ता चल तू
लक्ष्य अपना चुन लेना तू
कठिन विपदाएं भी है आगें
पीछे कभी न हटना तू।।

राह में तेरे विकट है मंजर
कंकड़ पत्थर झाड़-झंड़कर
हृदय हो तेरा पाक समन्दर
दूर न कोई तुझसे मंजिल।।

कर्मवीर बन बढ़ता चल तू
लक्ष्य अपना चुन लेना तू
कठिन विपदाएं भी है आगें
पीछे कभी न हटना तू।।

 

        )

 

 

 



(एकता का मंत्र)

हिन्दू मुस्लिम सिक्ख ईसाई
हम सब एक दूजे के भाई
मजहब चाहे अलग-अलग
खून तो एक है सबकाई।।

जात-पात भेदभाव का
नहीं किसी के रोग हो
सबका मालिक एक है
ऐसा सबका सोच हो।।

अनेकता में एकता का
सबमें बड़ा जोश हो
रीति-रिवाज़ वेशभूषा
चाहें सबकी अनेक हो।।

आजादी की वर्षगांठ पर
मंच हमारा एक हो
डांगोरिया एक है हम
गुलशन हमारा एक हो।।

 

 

 



सज्जनता
जो तुम सज्जन बनना चाहो
सबसे प्रीत करो भाई
जाति सम्प्रदाय का भेद मिटादो
घट-घट बिराजे हैं सांई।।

सद् कर्मों से ही मानव तो
बन पाता है सदाचारी
छल-कपट को मन से त्यागो
ये तो बड़े ही दुराचारी।।

जो तुम सज्जन बनना चाहो
सबसे प्रीत करो भाई
जाति सम्प्रदाय का भेद मिटादो
घट-घट बिराजे हैं सांई।।

धन यौवन के लालच में तुम
मत बनना अत्याचारी
दुर्गुण दिल से बाहर करदो
कितने ही मर गये बलकारी।।

जो तुम सज्जन बनना चाहो
सबसे प्रीत करो भाई
जाति सम्प्रदाय का भेद मिटादो
घट-घट बिराजे हैं सांई।।

अविद्या विकारो में डांगोरिया
कितने ही चले गये अभिमानी
अपना आचरण नहीं सुधारा
अन्त हो गये नरक गामी।।

जो तुम सज्जन बनना चाहो
सबसे प्रीत करो भाई
जाति सम्प्रदाय का भेद मिटादों
घट-घट बिराजे हैं सांई।।

                        ----



जीवन का आधार

जीवन का है यही आधार
सादा जीवन उच्च विचार।।

काम, क्रोध और लोभ तो दुश्मन
इनसे मिले नरक का द्वार।।

जीवन का है यही आधार
सादा जीवन उच्च विचार।।

काम तो वासनाओं का भंडार
जिसमें मोहित सब संसार।।

जीवन का है यही आधार
सादा जीवन उच्च विचार।।

क्रोध है बुद्धि का सरताज
करता हानि बिना विचार।।

जीवन का है यही आधार
सादा जीवन उच्च विचार।।

लोभ न करता किसी से प्यार
अपना पराया सब बेकार।।

जीवन का है यही आधार
सादा जीवन उच्च विचार।।

डांगोरिया मत उलझो यार
यह तो सारे मन के विकार।।

जीवन का है यही आधार
सादा जीवन उच्च विचार।।


--

है नाथ अब अवतार धरो

है नाथ अब अवतार धरो
पीड़ित प्रजा विषम स्थिति
सज्जन जन कल्याण करों
है नाथ अब अवतार धरो।।

तेरा जग ये तेरी प्रजा
तेरा ही गुणगान यहां
सज्जन मानव तड़प रहा है
बढ़ रही हिंसा घोर यहां।।

है नाथ अब अवतार धरो
पीड़ित प्रजा विषम स्थिति
सज्जन जन कल्याण करो
है नाथ अब अवतार धरो।।

युग-युग तुमने अवतरित होकर
हिंसा का सर्वनाश किया
अब क्यों विलम्ब करो तुम प्रभु
पाप का भार हटाओ धरा।।

है नाथ अब अवतार धरो
पीड़ित प्रजा विषम स्थिति
सज्जन जन कल्याण करो
है नाथ अब अवतार धरो।।

डांगोरिया कर जोड़ पुकारे
भक्त जनों की हरलो पीड़ा
भक्त सज्जन आस करें तेरी
धर्म स्थापित करों यहां।।

है नाथ अब अवतार धरो
पीड़ित प्रजा विषम स्थिति
सज्जन जन कल्याण करो
है नाथ अब अवतार धरो।।

                   

----
ये इतिहास भी याद करो

ये इतिहास भी याद करों
घृणा का परित्याग करों
घट-घट एक सांई बिराजे
सबका ही सम्मान करों।।

गुरू द्रोण तो घृणा कर गये
धनुष विद्या सिखाने में
एकलव्य का अंगूठा लीना
छल किया था वन में
दलित वर्ग में आज भी उनको
नही कोई सम्मान मिला।
कौरव दल में शामिल हुये तो
आखिर उनका अन्त हुआ।।

ये इतिहास भी याद करों
घृणा का परित्याग करों
घट-घट एक सांई बिराजे
सबका ही सम्मान करों।।

शुद्र वर्ण में जन्मी भीलनी
सत्य भक्ति मन में
झूठे बैर राम ने खाऐं
नहीं घृणा थी मन में।।

ये इतिहास भी याद करों
घृणा का परित्याग करों
घट-घट एक सांई बिराजे
सबका ही सम्मान करों।।

दासी पुत्र विदुर जी हो गये
हो गये द्वापर युग में
दुर्योधन के मेवा त्याग हरि
साग विदुर घर खावें जी।।

ये इतिहास भी याद करों
घृणा का परित्याग करों
घट-घट एक सांई बिराजे
सबका ही सम्मान करों।।

काशी नगर में राजा हरिश्चन्द्र
बढ़े हुए थे सत्यवादी
कलुआं मेहतर के रहे चाकर
मरघट की थी रखवाली।।
ये इतिहास भी याद करों
घृणा का परित्याग करों
घट-घट एक सांई बिराजे
सबका ही सम्मान करों।।

शुद्र वर्ण है केवट जाति
महाभारत में सत्यवती
जिसके पुत्र रिषि वेदव्यास
कौरव पांडव वंशधनी।।

ये इतिहास भी याद करों
घृणा का परित्याग करों
घट-घट एक सांई बिराजे
सबका ही सम्मान करों।।

शूद्र वर्ण में हुए रविदास
भक्त हुये थे शिरोमणी
रतनसिंह राजा की बेटी
मीरा हो गई थी चेली।।

ये इतिहास भी याद करों
घृणा का परित्याग करों
घट-घट एक सांई बिराजे
सबका ही सम्मान करों।।

नारद रिषि थे चतुर सुज्ञानी
सर्व विद्या परवीना
शूद्र धींवर से दीक्षा लेकर
तीन लोक यश कीना।।

ये इतिहास भी याद करों
घृणा का परित्याग करों
घट-घट एक सांई बिराजे
सबका ही सम्मान करों।।

युग-युग महिमा कहां तक वर्णु
जिसका कोई पार नही
डांगोरिया हरि अनन्त है लीला
मेरी कोई औकात नही।।

ये इतिहास भी याद करों
घृणा का परित्याग करों
घट-घट एक सांई बिराजे
सबका ही सम्मान करों।

---


जागो अब देश की नारी

जागो अब देश की नारी
यह अभियान चलाना है।
भ्रष्टाचार मिटाकर अब तो
स्वच्छ राज अब लाना है।।

सरकारी सेवा में पति तो
उनको यह समझाना है।
वेतन के अलावा पैसा लायें
उसको तुम्हें ठुकराना है।।

अगर है व्यापारी पति तो
सच्चा व्यापार चलाना है।
मिलावट खोरी नहीं करोगे
यह जनहित में फरमाना है।।

हर नारी यदि ठान ले मन में
यह संदेश हमारा है।
शोषण मुक्त होवेगा भारत
निश्चित सफलता पाना है।।

समस्त संस्थाओं की नारियों से
यह आह्वान हमारा है।
संघठित हो प्रचार करों तुम
जड़ से इसे मिटाना है।।

 


---


जागो-जागो देश के युवा

जागो-जागो देश के युवा यह आह्वान हमारा है
मतदान अवश्य करना यह अधिकार तुम्हारा है।।

लोकतन्त्र के महायज्ञ में अपना कर्तव्य निभाना है
तब ही तन्त्र मजबूत बनेगा यह अनुरोध हमारा है।।

जागो-जागो देश के युवा यह आह्वान हमारा है
मतदान अवश्य करना यह अधिकार तुम्हारा है।।

जैसे पक्षी उड़े गगन में पंख दो ही से वह उड़ता है
वैसे ही अधिकार-कर्तव्य लोकतन्त्र का गहना है।।

जागो-जागो देश के युवा यह आह्वान हमारा है
मतदान अवश्य करना यह अधिकार तुम्हारा है।।

डांगोरिया जन सोच समझकर मत प्रयोग तो करना है
लोकतन्त्र के महायज्ञ में सबको आहुति देना है।।

जागो-जागो देश के युवा यह आह्वान हमारा है
मतदान अवश्य करना यह अधिकार तुम्हारा है।।

--


यातायात

अब तो सड़क पर बेधड़क चलते हैं कई लोग
वाहनों को तेज गति से दौड़ाते हैं लोग।।

करते नहीं है परवाह खुद अपनी कुछ लोग
औरों की क्या करेंगे यह तेज चलने वाले लोग।।

बाजारों में अब तो गिनती के चलते हैं पैदल लोग
बेवजह यह पैदल ही कुचले जाते हैं लोग।।

सफर मोटर साईकिलों से करते हैं बहुत लोग
दौ से चार बैठाकर सफर करते हैं लोग।।

नियमों कायदों का ध्यान क्यों रखते नहीं लोग
बिना हेलमेट के ही वाहन चलाते हैं लोग।।

कार चालक भी अब तो हो गये हैं बेखोफ
कार भरने के बाद भी लटकते हुये जाते हैं लोग।।

डांगोरिया आगे निकलने की जिद करते हैं चालक लोग
रस्ते में बेहूदा बात पर ही झगड़ते हैं लोग।।

यातायात नियमों का पालन क्यों करते नहीं लोग
अपनी लापरवाही से चालान अदा करते हैं लोग।।

 

   
---


यह अभियान चलाना है

यह अभियान चलाना है
सबको जाग्रत करना है
खंडित होती धरा सम्पदा
इसकी रक्षा करना है।। यह अभियान .......................
पत्थर बजरी अवैध खनन का
माफियों के गैर नियम का
उजड़ते जंगल पहाड़ वनों का
सबको बीड़ा उठाना है।।         (1)
यह अभियान .......................
मानव वृक्षों को काट रहा है
घने जंगलों को उजाड़ रहा है
पर्वतों को भी तोड़ रहा है
पठारी भूमि खोद रहा है
अब पाबन्द इसपे लगाना है।।    (2)
यह अभियान .......................
प्राकृतिक सौन्दर्य नर बिगाड़ रहा है
श्रृंगारित आभा उजाड़ रहा है
अपने स्वार्थ के वश क्यों मूर्ख
भविष्य का सिर फोड़ रहा है
अब सौगन्ध सभी को खाना है।।        (3)
यह अभियान .......................
डांगोरिया यह गजब हो रहा है
खनिज सम्पदाओं का हनन हो रहा है
मानव संसाधनों का विदोहन हो रहा है
प्रशासन क्यों अनजान हो रहा है
अब जन चेतना जगाना है।।    (4)
यह अभियान चलाना है
सबको जाग्रत करना है
खंडित होती धरा सम्पदा
इसकी रक्षा करना है।।
यह अभियान ......................


--


वृक्ष जहान

जाग-जाग अरे ओ इन्सान।
मत काटे रे वृक्ष जहान।।
क्यों करता रे इनपे वार।
ये तो औषधियों का है भंडार।।
जाग-जाग अरे ओ इन्सान।
मत काटे रे वृक्ष जहान।।
वृक्षों से जंगल और बरसे सावन।
जीव जगत लगे अति मन भावन।।
जाग-जाग अरे ओ इन्सान।
मत काटे रे वृक्ष जहान।।
पशु पक्षी और मानव जनका।
करते हित ये हर जीवन का।।
जाग-जाग अरे ओ इन्सान।
मत काटे रे वृक्ष जहान।।
वृक्ष काटे क्यों बने नादान।
इनसे वसुन्धरा शोभायमान।।
जाग-जाग अरे ओ इन्सान।
मत काटे रे वृक्ष जहान।।
आबाद है इनसे भारत महान।
अर्थ व्यवस्था बढ़े चौगान।।
जाग-जाग अरे ओ इन्सान।
मत काटे रे वृक्ष जहान।।
करले प्रतिज्ञा अब अरे इन्सान।
करेगा रक्षा वृक्ष तमाम।।
जाग-जाग अरे ओ इन्सान।
मत काटे रे वृक्ष जहान।।


--


मालिक व मजदूर

मालिक कैसे बना है मालिक
यह मजदूर की ही तो बदौलत है
अगर ना होता मजदूर तो
मालिक कहा से बनता
यह उसी की अभिव्यक्ति है।

बदौलत है मजदूर की जिसने
अपना पसीना बहाया है
और बहाता आ रहा है
सर्दी में गर्मी में
बरसात में भी वह
पसीने में नहाया है।

डांट को फटकार को भी वह
सहता हुआ आया है
धंधा बिजनेस वालों का
बिजनेस चलाया है
धनवान बनाया है।

आलीशान इमारतों में
मालिक को सुलाया है
महंगी-महंगी गाड़ियों में
मालिक को घुमाया है
खान-पान रहन-सहन के
स्तर को बढ़ाया है।

जय हो उस मजदूर की जो
झोंपड़ी में रहता आया है
जिसने कमाई सिर्फ
दो वक्त की रोटी
वह भी उसको समय पर
नसीब नहीं होती।
निपटा न दे जब तक काम
मालिक का तब तक वह
भूख को भी दबा लेता है।

चाय पानी से कचोरी एक खाकर
और पी लेता है बीड़ी
ऐसे दे लेता है अपने
मन को तसल्ली।

क्योंकि वह जानता है कि
मेरे अभाव में काम ठप्प है
मीलों-कारखानों में उसने ही
उत्पादन को बढ़ाया है
खेतों में भी उसने ही
हल को चलाया है।

रिक्शे को ठेले को भी
उसने ही दौड़ाया है
रिक्शे में इंसानों को
ठेले में सामानों को
उसने ही गंतव्य तक पहुंचाया है।

रेत ईंट पत्थरों को भी
वही ढोता आया है
सड़को व पुलो को भी
ऊंची-नीची इमारतो को भी
उसने ही बनाया है।

बहुत किये निर्माण उसने
फिर भी वह हमेशा
मजदूर ही कहलाया है।
मजदूर ही कहलाया है।
मजदूर ही कहलाया है।


      --


मैं हूं एक पुष्प

मैं हूं एक पुष्प
सुनो मेरी दांस्ता
खिला था मैं एकचमन में
पाला था एक बागवान ने मुझे
अपने श्रम से बड़े ही परिश्रम से
किया था मेरी पौध को बड़ा उसने।
फिर मेरे-
योवनावस्था मे आने के बाद
खिलता हुआ मेरे हो जाने के बाद
सबकी तारीफ़ों के बाद
कर दिया मुझे उसने
दूसरों के हाथ।
मैं मन्दिरों-मस्जिदों
गुरूद्वारों-चर्चों में चढ़ा
नवयोवना का गजरा बना
लोगो के गले का हार बना
दुल्हा-दुल्हन का श्रृंगार बना
मुहब्बत करने वालो का पैगाम बना
इतना काम आने के बाद
फिर मेरे-
कुम्हलाऐं जाने के बाद
बदसूरत मेरे हो जाने के बाद
खुशबु मेरी उड़ जाने के बाद
मुझे नकारा समझा गया
सड़कों पर फेंका गया
पैरों तले कुचला गया
कचरे में डाला गया
इतनी दुर्दशा के बाद तो
मैं खाद्य में तब्दील हो गया
फिर भी मैं-
खेतों में डलकर भूमि को उपजाऊं
बनाता रहा- बनाता रहा- बनाता रहा।



विरह वेदना श्रृंगार रस

उमड़-घुमड़कर बदरा छावें।
सावन घटा घनघोर गरजावे।।
चम-चम चम-चम बिजली चमके।
झरमर-झरमर मेघा बरसे।।
नाचे मोर पपीहा बोले।
नव-यौवना का मनवा डोले।।
मन्द पवन शीतल पुरवाई।
फड़के यौवन ले अंगडाई।।
कोयल ज्यों मल्हार सुणावें।
पिया-मिलन की याद सतावें।।
पिया गये परदेश हमारे।
मेवा मिष्ठान मोहे ना भावे।।
सगरो सणगार यो फीको लागे।
पिया घर होवें तो नीको लागे।।
माथे की चुन्दड़ी उड़-उड़ जावे।
हार नौलखो रोल मचावें।।
भाल की बिन्दिया हो गई मैली।
पायल छत्तीसो राग सुणावें।।
ज्यों-ज्यों मेघा झरमर बरसें।
नेणा नीर म्हारें सागर झलके।।
द्वार खड़ी मैं पंथ निहारूं।
राह थक-थक नेणा हारें।
डांगोरिया यह विरह की आंधी
बिना नीर ज्यों मछली तड़पे।।

------------------------

 

परिचय:

नाम                :        रामनिवास डांगोरिया(वाल्मीकि)
पिता का नाम        :        स्व. श्री दरियावराम (वाल्मीकि)
जाति                :        मेहतर (वाल्मीकि)
जन्मतिथि            :        30.06.1971
जन्म स्थान            :        बारां जिला बारां
वैवाहिक स्थिति        :        विवाहित
लिंग                :        पुरूष
भाषा                :        हिन्दी, हाड़ौती
राष्ट्रीयता            :        भारतीय
वर्ग                :        एस.सी.
धर्म                :        हिन्दू
स्थाई पता            :        शिवाजी नगर, मारवाड़ा बस्ती, बारां
                        तहसील बारां, जिला बारां (राज.)
                        पिन - 325205

शैक्षणिक योग्यता        :        मैट्रिक पास
सदस्य                :        अखिल भारतीय साहित्य परिषद,
                        राजस्थान (इकाई) बारां
लेखन                :        कविता, गजल एवं लेख
सम्प्रति            :        जिला स्तरीय समाचार पत्रों में कविताएं प्रकाशित

                           
                        रामनिवास डांगोरिया (साहित्यकार)
                        साहित्य परिषद बारां (राजस्थान)

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर: 2
रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

---प्रायोजक---

---***---

---प्रायोजक---

---***---

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1$h=100

प्रायोजक

--***--

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधा/विषय पर क्लिक/टच कर पढ़ें : ~

|* कहानी * |

| * उपन्यास *|

| * हास्य-व्यंग्य * |

| * कविता  *|

| * आलेख * |

| * लोककथा * |

| * लघुकथा * |

| * ग़ज़ल  *|

| * संस्मरण * |

| * साहित्य समाचार * |

| * कला जगत  *|

| * पाक कला * |

| * हास-परिहास * |

| * नाटक * |

| * बाल कथा * |

| * विज्ञान कथा * |

* समीक्षा * |

---***---



---प्रायोजक---

---***---

|आपको ये रचनाएँ भी पसंद आएंगी-_$type=three$count=6$src=random$page=1$va=0$au=0$h=110$d=0

प्रायोजक

----****----

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4024,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,338,ईबुक,193,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,262,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,111,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2987,कहानी,2242,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,535,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,31,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,94,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,344,बाल कलम,25,बाल दिवस,4,बालकथा,66,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,14,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,28,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,242,लघुकथा,1245,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,326,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,68,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2002,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,706,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,790,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,17,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,80,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,201,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,75,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: रामनिवास डांगोरिया की कविताएँ
रामनिवास डांगोरिया की कविताएँ
http://lh5.ggpht.com/-bomi2XTuOM4/VMtER63i7qI/AAAAAAAAdWU/OHw2ty6UZIM/image_thumb.png?imgmax=800
http://lh5.ggpht.com/-bomi2XTuOM4/VMtER63i7qI/AAAAAAAAdWU/OHw2ty6UZIM/s72-c/image_thumb.png?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2015/01/blog-post_986.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2015/01/blog-post_986.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय SEARCH सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ