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महावीर उत्तरांचली के 3 गीत

(1.) मैंने इस संसार में, झूठी देखी प्रीत

मैंने इस संसार में, झूठी देखी प्रीत
मेरी व्यथा-कथा कहे, मेरा दोहा गीत
मैंने इस संसार में ....

मुझको कभी मिला नहीं, जो थी मेरी चाह
सहज न थी मेरे लिए, कभी प्रेम की राह
उर की उर में ही रही, अपना यही गुनाह
कैसे होगा रात-दिन, अब जीवन निर्वाह
जब भी आये याद तुम, उभरे कष्ट अथाह
अब तो जीवन बन गया, दर्द भरा संगीत
मेरी व्यथा-कथा कहे, मेरा दोहा गीत //१. //
 
आये फिर तुम स्वप्न में, उपजा सनेह विशेष
निंद्रा से जग प्रिये, छाया रहा कलेश
मिला निमंत्रण पत्र जो, लगी हिय को ठेस
डोली में तुम बैठकर, चले गए परदेस
उस किन से पाया नहीं, चिट्ठी का सन्देश
हाय! पराये हो गए, मेरे मन के मीत
मेरी व्यथा-कथा कहे, मेरा दोहा गीत //२ . //

छोड़ गए हो नैन में, अश्कों की बौछार
तिल-तिलकर मरता रहा, जन्म-जन्म का प्यार
विष भी दे जाते मुझे, हो जाता उपकार
विरह अग्नि में उर जले, पाए दर्द अपार
छोड़ गए क्यों कर प्रिये, मुझे बीच मझधार
अधरों पर मेरे धरा, विरहा का यह गीत
मेरी व्यथा-कथा कहे, मेरा दोहा गीत //३. //

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(2.) अपने भीतर, तू निरंतर, लौ जला ईमान की

अपने भीतर, तू निरंतर, लौ जला ईमान की
तम के बदल भी छंटेंगे, यादकर भगवान की
अपने भीतर तू निरंतर .......................

है खुदा के नूर से ही, रौशनी संसार में
वो तेरी कश्ती संभाले, जब घिरे मंझधार में
हुक्म उसका ही चले, औकात क्या तूफ़ान की
अपने भीतर तू निरंतर .......................

माटी के हम सब खिलोने, खाक जग की छानते
टूटना है कब, कहाँ, क्यों, ये भी हम ना जानते
सब जगह है खेल उसका, शान क्या भगवान् की
अपने भीतर तू निरंतर ......................

दींन-दुखियों की सदा तुम, झोलियाँ भरते रहो
जिंदगानी चार दिन की, नेकियाँ करते रहो
नेकियाँ रह जाएँगी, निर्धन की और धनवान की
अपने भीतर तू निरंतर .....................

(3.) फूल खिले हैं प्यार के

फूल खिले हैं प्यार के
गले मिलो गुलनार के
साये में दीवार के
फूल खिले हैं ...................

जीतो अपने प्यार को
लक्ष्य करो संसार को
अपना सब कुछ हार के
फूल खिले हैं ...................

ऐसे डूबो प्यार में
ज्यों डूबे मझधार में
नैया बिन पतवार के
फूल खिले हैं ...................

ख़ुशी मनाओ झूमकर
धरती-अम्बर चूमकर
सपने देखो यार के
फूल खिले हैं ...................

दिल से दिल को जोड़िये
प्रेम डोर मत तोड़िये
बोल बड़े हैं प्यार के
फूल खिले हैं ...................

*गुलनार -- अनार की एक किस्म की प्रजाति जिसमें फल नहीं लगते।

—गीतकार : महावीर उत्तरांचली
B-4/79, Parytan Vihar, Vasundhra Enclave, New Delhi -110096
Mobile : 9818150516

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