प्राची अप्रैल 2016 : समीक्षा / अनुत्तरित सवालों के गीत / अरविंद अवस्थी

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समीक्षा अनुत्तरित सवालों के गीत अरविंद अवस्थी सा हित्य की विधाओं में ‘गीत’ चिरंत्तन विद्या के रूप में मान्य है. गीत-मनीषियों का कहना है ...

समीक्षा

अनुत्तरित सवालों के गीत

अरविंद अवस्थी

साहित्य की विधाओं में ‘गीत’ चिरंत्तन विद्या के रूप में मान्य है. गीत-मनीषियों का कहना है कि मनुष्य के पास जब भाषा नहीं थी तब भी वह पक्षियों के कलख, निर्झर के कलकल और हवा की सरसराहट के साथ गुनगुनाता जरूर रहा होगा. गीत उसके हृदय का स्पंदन है, उसकी स्वतः स्फूर्त चेतना है. गीत का महत्त्व कल भी था, आज भी है और कल भी रहेगा. कालखंड के अवरोधों, आलोचनाओं के बावजूद गीत की आभा बंद नहीं हुई है. अब कोई गमले में प्लास्टिक के फूल सजाकर अपने ड्राइंग रूम की शोभा बढ़ाना चाहता है तो उसे मुबारक हो, किंतु इसका अर्थ यह कदापि नहीं है कि उपवन से गुलाब, गेंदा, जूही, चमेली के हंसते-खिलते-बतियाते, सुगंध उड़ाते फूलों की क्यारियां गायब हो गई हैं. होना भी नहीं चाहिए. काव्य जगत में गीत को सबसे

अधिक अनुशासनबद्ध रचना कहा जाता है. आज जगत में यदि सबसे अधिक उपेक्षित कुछ है तो वह अनुशासन ही है. मुनष्य ने अनुशासन को केवल किताबों या भाषणों में सीमित कर दिया है. जीवन और व्यवहार में अनुशासन को फटकने भी नहीं दिया जा रहा है. क्या घर, क्या स्कूल, क्या दफ्तर कहीं भी अनुशासन का अब वैसा सम्मान नहीं रह गया है. मनुष्य स्वच्छंदता पर उतर आया है. कुछ ऐसा ही ‘गीत’ के साथ भी हो रहा है.

गीतकार जयप्रकाश श्रीवास्तव का गीत संग्रह ‘परिंदे संवेदना के’ मनुष्य और मनुष्यता की पक्षधरता करता है. इस संग्रह के गीत अपने शीर्षक के अनुगामी हैं. गीतकार ने अपने गीतों के माध्यम से संवेदना के पंखों को उड़ान भरने का हौसला दिया है. ये गीत ध्वनि और अर्थ के सौंदर्य से ओतप्रोत हैं. गेयता और संप्रेषणीयता के धनी इन गीतों की पहुंच पाठकों तक आसानी से हो सकेगी ऐसा मेरा विश्वास है. प्रतीक और बिंब, रूपक और उपमा, भाव और शिल्प के ढांचे मजबूती से गढ़े गए हैं जो सुष्ठ़ु, प्रवाहमय और सौंदर्य से भरपूर हैं. उनके गीत सामाजिक सरोकारों और प्राकृतिक उपादानों के साथ समान रूप से तादात्म्य स्थापित करने में समर्थ हैं. बद से बदतर होते जाते हालातों के प्रति गीतकार की चिंता स्पष्ट झलकती है. वह इसके पीछे संवेदनहीन होते मनुष्य को ही जिम्मेदार ठहराता है. ऐसा माहौल रचता-बसता जा रहा है जिसमें अपराध प्रतिष्ठा का मानक बन बैठा है. अब कानून को अपने हाथ की कठपुतली बनाने वालों की तादाद बढ़ रही है. मंदिरों और पवित्र स्थानों पर शर्मनाक घटनाएं घटित हो रही हैं. कॉलोनियों से खतरे बढ़ते जा रहे हैं. बाबा लोग भगवान से ज्यादा ऐश्वर्य और भोगलिप्सा की ओर खींचे चले जा रहे हैं-‘‘प्रतिष्ठत अपराध/बिक चुकी है शर्म/हाथ में कानून/हो रहे दुष्कर्म/

मठाधीशों से सुरक्षित अब नहीं मूर्तियां/संवेदनाएं हुईं खारिज, पड़ी हैं अर्जियां..’’ (पृष्ठ 13)

ऐसा प्रतीत होता है कि गीतकार जयप्रकाश श्रीवास्तव का मन मध्यप्रदेश की वनस्थली और नर्मदा के तटों पर अनवरत चलता रहता है या यों कहें कि वहीं बसता है तो अधिक समीचीन होगा. बड़ी सफाई और नेकनीयती से प्रकृति का सहारा लेकर अपनी बात कह जाते हैं. सामाजिक संबंधों और रिश्तों में दिन-प्रतिदिन बढ़ती टूटन को वे यों दर्शाते हैं-‘‘संबंधों की सूखी नदियां/तट टूटे रिश्तों के/अपनेपन से ऊब गया मन/जमाखर्च बातों के/खालीपन डसता है उजले आदर्शों में.’’ (पृष्ठ 14)

सामयिक घटनाएं, मुद्दे या बदलते विचार जब भी किसी को चोटिल करते हैं तो गीतकार का हृदय कचोट उठता है. उसका संवेदनशील हृदय आंदोलित हो उठता है. चाहे वनों से निरंतर वृक्षों का कटते जाना हो या नदियों में बढ़ते प्रदूषण का खतरा हो, काले-गोरे का या धनी-निर्धन का भेदभाव हो, दफ्तरों में बढ़ते भ्रष्टाचार की घटनाएं हों या आत्महत्या करते किसानों की लाचारी. गीतकार इन सभी दुर्घटनाओं से आहत होता है और इसके

विरोध में मुखर गीतों का जन्म होता है.

आज की सबसे बड़ी विडंबना यही है कि मनुष्य का आपस में विश्वास समाप्त होता जा रहा है. नजदीकी रिश्तों में भी दरारें साफ दिखने लगी हैं. बाप-बेटे, भाई-भाई, पति-पत्नी जैसे पाक रिश्तों में दाग लगने लगे हैं. आदमी इतना कामी हो गया है कि मासूमों के साथ बलात्कार की घटनाएं सुनने में आती हैं. इतना लोभी और स्वार्थी हो गया है कि बाप को पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दे रहा है. पूरी दुनिया कुरुक्षेत्र बनी हुई है-

हर जगह कुरुक्षेत्र है/महाभारत का

बर्फ-सी ठंडी है करुणा/आतंक आफत का

अब नहीं आकाश में हैं/मेघ छाते

फूटता संवेदना का कोई भी झरना

किसको कह दें/कौन है अपना (पृष्ठ 21)

कवि व नवगीतकार जय प्रकाश श्रीवास्तव अध्यापक भी हैं. अतः उनकी चिंता की परिधि में बच्चों का आना अत्यंत स्वाभाविक है. कोई भी कवि या लेखक अपने जीवनानुभवों को जितना ही समृद्ध बनाता है, उसकी अभिव्यक्ति में उतनी ही परिपक्वता, दक्षता, यथार्थता और रचनाशीलता के दिग्दर्शन होते हैं.

झूठे वादे करने वाली सरकारें, नारों से पटी दीवारें, लंगोटी में तन ढांके लोग, नमक और प्याज भी मुंह की पहुंच से दूर, गगन-चुंबी मंहगाई, उन्माद से भरे सत्ताधारी सफेदपोश, शोषण से मजबूर लाचार मजदूर-किसान, बेरोजगारों की लंबी कतारें आज देश की नियति बन चुके हैं. गीतकार की सूक्ष्मदृष्टि से कोई कोना छूटा नहीं है. उन्होंने सभी के दर्द को निकट से महसूस किया है फिर उसे वाणी दी है. वर्तमान परिवेश में ‘प्रेम’ शब्द अपनी. व्यापकता खो चुका है. यह उत्कृष्ट भाव आज मलिन हो चुका है-

हर सबक झूठा लगा/अधूरी प्रविष्टियां

बांच पाये नहीं अब तक/जिंदगी की चिट्ठियां

प्रेम के व्यवहार घृणा से चुके हैं

उजालों के गीत रातों में लिखे हैं (पृष्ठ 32)

गीत की भाषा सरल, सहज और संप्रेषणीय है. भावों के पुष्प कल्पना के धागों में इस तरह पिरोए गए हैं कि एक सुंदर गीत-माला तैयार हुई है. गीतकार ने शब्दों के प्रयोग में बड़ी सहज और सतर्क दृष्टि रखी है.

ऐसा नहीं है कि गीतकार ने दुःख-दर्द ही देखे हैं या उनकी मानसिकता ऐसी है कि उन्हें सब बुरा ही दीखता है. वे फूलों की सुंगध भी महसूस करते हैं, फसलों के खिले चेहरे देखकर मुस्काते हैं. सरसों, चना, अरहर की अच्छी फसल पर खुशियां मनाते हैं. शहर को परिभाषित करते हुए वे कहते हैं-

‘‘आंगन को तरस गए/शहर के मकान.’’ फिर लिपे-पुते और फुदकती गौरैयों वाले आंगन जहां हैं, उस गांव में आने का आमंत्रण देते हैं-

आना उस गांव/जहां लिपे-पुते आंगन में फुदकती है गौरैया...(पृष्ठ 41)

अपने अट्ठावन गीतों के माध्यम से गीतकार ने सामाजिक सरोकारों से जुड़े कई अहम सवाल उठाए हैं. प्रकृति की खूबसूरती को भी उकेरा है. जड़ों की ओर लौटने का आमंत्रण दिया है. यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि ये गीत हमारी संवेदनशीलता को बचाने की मुहिम में सशक्त आवाज हैं.

सम्पर्कः श्रीधर पाण्डेय सदन,

बेलखरिया का पुरा, मीरजापुर (उ.प्र.)-231001

मो. 08858515445

समीक्ष्य कृतिः ‘परिंदे संवेदना के’ (गीतसंग्रह)

गीतकारः जयप्रकाश श्रीवास्तव

प्रकाशकः पहले पहल प्रकाश, भोपाल (म.प्र.)

मूल्यः 150

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
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रचनाकार: प्राची अप्रैल 2016 : समीक्षा / अनुत्तरित सवालों के गीत / अरविंद अवस्थी
प्राची अप्रैल 2016 : समीक्षा / अनुत्तरित सवालों के गीत / अरविंद अवस्थी
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रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2016/04/2016_46.html
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