जंग जिंदगी की / कहानी / राजन कुमार

SHARE:

“पापा-पापा कोई कहानी सुनाओ न प्लीज” राजन अपने पिता से बार-बार कहता, पर पापा यह कहकर टाल देते कि बेटा मुझे कोई कहानी नहीं आती। वह मायूस होकर...

image

“पापा-पापा कोई कहानी सुनाओ न प्लीज” राजन अपने पिता से बार-बार कहता, पर पापा यह कहकर टाल देते कि बेटा मुझे कोई कहानी नहीं आती। वह मायूस होकर इस निश्चय के साथ लौट जाता कि फिर कभी भी पापा को कहानी सुनाने के लिए नहीं कहेगा।

राजन बड़ा हुआ हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी करके वह पापा के पास ही काम करने लगा। काम जमा नहीं तो उसे छोड़कर दूसरी जगह दूसरे काम पर लग गया। उसके पापा को जब भी छुट्टी मिलती तो राजन से मिलने चले आते। पापा जब घर जाते तो रात में राजन के रूम में ही ठहरते। वह खाने-पीने के शौकीन थे। वह कभी-कभार पीते भी थे।

एक दिन राजन के पिताजी ने एक लड़के को पैसे देते हुए कहा कि जाओ दारु की एक बोतल ले आओ। और तुम भी अपने लिए कुछ ले लेना। वह लड़का राजन के साथ रहता था। उसका नाम नागराज था। वह बोला- नहीं आप पैसे रखिए, मैं ला देता हूँ। पापा जबरदस्ती उसे पैसे देने लगे तो वह बोला- “राजन अच्छा लड़का है, मुझे अपना बड़ा भाई मानता है। यदि मैं बिना खाये सो जाता हूँ तो जगाकर खाना खिलाता है। जब आप यहाँ आये हैं तो मेरा भी कुछ फर्ज बनता है।” राजन के पापा अपने बेटे की तारीफ सुनकर खुशी से थोड़ा भावुक हो गए। थोड़ी देर बाद राजन से बोले- “बेटा बचपन में तुम मुझसे कहानी सुनाने के लिए कहा करते थे, पर मैं हमेशा सुनाने से मना कर देता था। आज मैं तुझे एक कहानी सुनाना चाहता हूँ।” राजन भी उत्सुकता से बोला- हाँ-हाँ सुनाइए पापा। फिर वह गंभीर होकर कहानी सुनाना शुरू किए। एक आदमी है जिसका नाम मुनीन्द्र मंडल था। मुनीन्द्र मंडल! बेटे ने अचंभित होकर कहा- यह तो आपका नाम है और कहानी में है नहीं बल्कि था रहता है। बेटे के सवाल पर उसके पापा बोले, बेटा उसका भी नाम मेरे ही नाम पर है और वह अभी जिंदा है। इसलिए ‘मैं’ एक आदमी है। फिर वह आगे सुनाना शुरु किए।

    “मुनीन्द्र बचपन में बहुत शरारतें करता। जितनी ज्यादा वो शरारतें करता, उतना ही अपने पिता काली मंडल से डरता भी। काली मंडल ? राजन ने चौंक कर कहा- काली मंडल तो आपके पिता का यानी मेरे दादा जी का नाम है और सवालिया नजरों से राजन अपने पापा की तरफ देखने लगा। पापा गंभीर होकर बोले- बेटा! जब उस आदमी का नाम मेरा नाम हो सकता है तो उसके पापा का नाम भी मेरे पापा के नाम से मिल सकता है न। अब चुपचापशांत रहकर आगे सुनो। राजन को अब समझ में आ गया कि यह मुनीन्द्र कोई और नहीं बल्कि उसके ही पिता हैं। यह कोई कहानी नहीं बल्कि आत्मकथा सुना रहे हैं। राजन

भी पिता की आत्मकथा सुनने के लिए बेचैन हो उठा। क्योंकि किसी भी बेटे को उसके पिता की आपबीती का एहसास नहीं रहता, बस इतना पता रहता है कि उसके पापा ने बड़े मुश्किल से उसे पाल-पोसकर बड़ा किया। कैसे पाला-पोसा, यह पता नही। फिर भी यह जानने का मौका राजन जाने न दिया। उसने बड़ी उत्सुकता से पूछा कि आगे क्या हुआ?

उसके पापा आगे सुनाने लगे, “मुनीन्द्र मंडल जब स्कूल जाता तो रास्ते में किसी दोस्त के यहाँ झोला और किताबें रख देता और मछली पकड़ने नदी किनारे चला जाता। जब स्कूल के छुटने का समय होता तो जो मछलियाँ हाथ लगतीं, उन्हें लेकर घर चला आता। उसके पापा को ये सब पता चलता तो वह लाठी लेकर बेटे के पीछे दौड़ पढ़ते। अगर वह पकड़ लिया जाता तो ठीक, नहीं तो रात में सोते समय ही लाठियों से उसकी मरम्मत कर देते। फिर भी शैतानी करने से वह बाज नहीं आता था। पर सहन करने की भी एक हद होती है।

उस समय कम उम्र में हीं शादियाँ हो जाती थीं। इसलिए मंडल के पिता ने, दसवीं पास करने के बाद उसकी शादी के लिए लड़की भी ढूँढ ली। रीति-रीवाज के अनुसार दूल्हे को मंडप में कुछ माँगने का अधिकार होता ही है। जब उसकी सासू माँ ने कहा कि दामाद जी, ‘का चाही, बोलीं?’ तो मंडल बेझिझक बोल पड़ा- रेडियो.... उसके पिताजी उसके पीछे ही खड़े थे हाथ में बिहारी लाठी लिए। वह लाठी मंडल की तरफ तानते हुए बोले- रेडियो चाहिए, गाना सुनेगा, फिल्मी हीरो बनेगा? बारात में आये लोगों ने उनको रोकते हुए कहा कि कम से कम आज तो उसे बख्श दो। आज उसकी शादी है, किसी तरह शांत हुए उसके पापा।

राजन ये सब सुनकर हँसने लगा और बोला, “पापा! आपका और आपके पिता का नाम इस आदमी से मिलता है तो उनकी पत्नी का नाम गायत्री देवी ही होगा? पिता बोले, हाँ-हाँ, बेटा गायत्री ही नाम होगा न। सब मेरे ही परिवार के नामों जैसे ही हैं।” फिर आगे क्या हुआ पापा?  “शादी हो जाने के बाद घर का खर्चा बढ़ गया और मंडल पढ़ाई छोड़कर पंजाब चला गया। कुछ ही दिन हुए थे उसे लुधियाना में तभी खबर आई कि उसके पिता काली मंडल नहीं रहे। मंडल फौरन वहाँ से वापस आ गया। घर पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था। मंडल के पाँच भाई थे। पिता की मृत्यु के बाद सब अलग-थलग पड़ गये। अगर घर में कोई मेहमान आता तो सब डर जाते कि कौन खातिरदारी करे उनकी।

कुछ दिन बाद मुनीन्द्र मंडल बेंगलूर आ गया। वहाँ पर चार हजार की तनख्वाह पर काम करने लगा। उसी जगह एक आसाम का आदमी काम करता था। उसने कहा- मंडल भईया! चलो दूसरी जगह जहाँ मेरी जान-पहचान है। वहीं काम करेंगे, वहाँ पैसा भी ज्यादा मिलेगा और काम भी ठीक है। मंडल उसके साथ मैसूर चला गया। कुछ दिन काम करने के बाद वह अपने मालिक से बोला- मुझे यहाँ कुछ ठीक नहीं लग रहा है। मुझे पैसे दे दो मैं बेंगलूर चला जाऊँगा। उसने मात्र सौ रुपये दिए और जाने के लिए बोल दिया। मंडल अपना सामान समेटकर फिर बेंगलूर आ गया। उसके पास एक सूटकेश और लोहे का एक बक्सा था। जिसमें कुछ कपड़े और घर की बनाई कुछ खाने की चीजें थीं। मंडल एक गैलरी में काम करने लगा। रहने का कोई ठिकाना नहीं था। इसलिए सारा सामान गैलरी में ही रखकर वह किसी पार्क में सो जाता था। वहाँ का मैनेजर मंडल से बोला कि यह कोई धरमशाला है क्या कि यहाँ बक्सा और पेटी रखते हो? हटाओ यहाँ से ये सब।

“गैलरी के बगल में एक आसामी काम करता था। मंडल की उससे जान-पहचान हुई, उसने अपना सामान उसके पास रखते हुए बोला कुछ दिन आप इसे अपने पास रखिए, मैं कुछ दिन बाद ले जाऊँगा। उस आदमी ने मंडल का सामान रख लिया और कहा कि आप निश्चिंत रहिए, सामान सही जगह पर है। मंडल भी खुशी से मुस्कुराया और मन ही मन बोला- चलो काम और सामान का टेंशन खत्म। अब खाने का क्या? जेब में सिर्फ सौ रुपये ही बचे थे। शाम को सुपरवाइजर बोला कि सौ रुपये मुझे दो, मैं सुबह लौटा दूँगा और तुम्हारे लिए नाश्ता भी ला दूँगा। मंडल ने सोचा पैसे के साथ नाश्ता मुफ्त मिल जाएगा। ऐसा सोच मंडल ने उसे सौ रुपये दे दिये। अगले दिन वह सुपरवाइजर आया ही नहीं। वह पैसे लेकर अपने गाँव भाग गया। इधर वह आसामी आदमी भी सारा सामान लेकर भाग निकला। मंडल ने जिस पर विश्वास किया, वह भी दगा दे गया। अब विचारा मंडल क्या करता? शरीर पर जो कपड़ा था, वही महीनों तक पहनता फिर किसी पार्क में पानी से धोकर सुखाता और पहन लेता। खाना एक ठेलेवाले से उधार ले लेता । बीस रुपये में थोड़ा चावल मिलता। वही एक बार खाता और रात को सिर्फ पानी पीकर सो जाता।”

“उसने इतनी मुसीबतें झेलकर यहाँ अपने परिवार के लिए मेहनत किया, परिवार के किसी सदस्य से भी अपना दुःख-दर्द नहीं बाँटा। वह यह नहीं चाहता था कि उसकी मुश्किल भरी बातें सुकर उसका परिवार दुःखी हो। कहते हैं डूबते को तिनके का सहारा होता है। मंडल जहाँ काम करता था, वहीं कुछ औरतें भी साफ-सफाई का काम करती थीं। जब उन औरतों ने देखा कि उसे खाने की बड़ी समस्या है, तो वे सब उससे बोलीं कि भइया आज से एक टाइम का खाना हम सब आपको खिलाएंगे। उस दिन से सभी औरतें अपने-अपने

खाने में से थोड़ा-थोड़ा एक प्लेट में भरकर मंडल को खिलाने लगीं। कुछ दिन बाद उसे रात में भी काम मिल गया। वह वहीं काम करके सो जाता। लगभग दो साल तक यही सिलसिला चलता रहा। फिर उसके अच्छे दिन आने शुरु हो गये।”

“मंडल ने अपने बेटे को पढ़ाने के साथ-साथ अपनी तीन बेटियों की शादी भी धूम-धाम से कर दी। आज भी मंडल वहीं पर काम करता है, उन्हीं औरतों के हाथों का बना खाना खाता है। क्योंकि उन लोगों से अब भी उसे उतना ही लगाव है जितना पहले था। वे औरतें भी नियमित रूप से मंडल को खाना खिलाने के बाद ही खाती हैं। मंडल ने तय किया है कि वह उन लोगों को जिंदगी भर याद रखेगा, बड़े एहसान हैं उन लोगों के मुझ पर।”

आखिर राजन के पापा ने जब यह कबूल कर ही लिया कि मुनीन्द्र मंडल और कोई नहीं बल्कि वह खुद हैं। यह जानकर राजन की सिसकने लगा। वह सोचने लगा कि कितना दर्द है पापा के सीने में। अगर ये सब वह पहले ही किसी को बता देते तो दिल थोड़ा हल्का हो जाता। माँ-बाप अपने बच्चों के लिए कितनी तकलीफें उठाते हैं, पर बच्चे, क्या वे अपने माँ-बाप की किसी भी तकलीफ को महसूस करते हैं? नहीं, क्योंकि उनको पता ही नहीं होता कि तकलीफ किसे कहते हैं। उनको तब पता चलता है, जब खुद पर बितती है।

मुझे भी पता नहीं था कि तकलीफ क्या होती है। क्योंकि मम्मी-पापा ने कभी यह एहसास ही नहीं होने दिया। पर आज पापा की बातें सुनकर मैं बहुत उदास हुआ और खुश भी । उदास इसलिए कि बिना उफ किये पापा ने कितनी मुसीबतों का सामना किया। खुश इसलिए कि उन्होंने कभी किसी चीज की मुझे कमी नहीं होने दी। दुःख सहकर भी उन्होंने हमें सारे सुख दिए जो हमें चाहिए थे। आज से मैं यह प्रण लेता हूँ कि पापा को कभी भी तकलीफों का सामना नहीं करने दूँगा। अपने माँ-बाप को हमेशा खुश रखूँगा।

राजन कुमार

पत्र व्यवहार का पता-

राजन कुमार

ग्राम : केवटसा

पोस्ट : केवटसा, गायघाट

जिला : मुजफ्फरपुर- 847107 (बिहार)

मो. 8792759778, 9771382290

ईमेल- : rajankumar.lado143@gmail.com

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: जंग जिंदगी की / कहानी / राजन कुमार
जंग जिंदगी की / कहानी / राजन कुमार
https://lh3.googleusercontent.com/-CahdRTLWcIs/V2Tg5nZfO0I/AAAAAAAAuZ4/ocM1lqdWej4/image_thumb%25255B2%25255D.png?imgmax=800
https://lh3.googleusercontent.com/-CahdRTLWcIs/V2Tg5nZfO0I/AAAAAAAAuZ4/ocM1lqdWej4/s72-c/image_thumb%25255B2%25255D.png?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2016/06/blog-post_52.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2016/06/blog-post_52.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content