साइबर अपराध कथा / क्रिप्टोमिक्स / रवि रतलामी

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“छलिया मेरा नाम...” गुनगुनाते हुए उसने अपने पीसी को स्टार्ट करने के लिए बटन दबाया. सुबह-सुबह रेडियो सिटी पर सुने इस पुराने गाने ने उसके अवच...

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“छलिया मेरा नाम...” गुनगुनाते हुए उसने अपने पीसी को स्टार्ट करने के लिए बटन दबाया. सुबह-सुबह रेडियो सिटी पर सुने इस पुराने गाने ने उसके अवचेतन मन को बंधक बना लिया था और यह गाना एलपी रेकॉर्ड के रिपीट मोड की तरह बार बार उसके मन में बज रहा था. और न केवल बज रहा था, पूरे साज और आवाज़ के साथ बज रहा था.

आज की सुबह बड़ी शानदार गुजरी थी. आज तो मौसम भी खुशगवार था और आफिस के रास्ते के पीक आवर ट्रैफ़िक ने भी उसे कोई खास परेशान नहीं किया था. ऊपर से, आमतौर पर चिरकाल से उसके देर रात काम करने की आदत से खार खाई उसकी बीवी ने ऑफिस से जल्द आने के लिए सदैव की तरह आज आह-उलाहना भी नहीं दिया था और ऑफिस के लिए विदाई का जरा ज्यादा ही मीठा चुंबन दिया था जो इधर उसे लंबे अरसे से हासिल नहीं हुआ था, और जिसका स्वाद वो अब भी महसूस कर सकता था.

पर, एक आईटी प्रोफ़ेशनल के लंबे, थके दिन की तो ये महज शुरूआत भर थी.

उसने सोचा, शायद ये उसकी गलतफ़हमी है, पर उसे लगा कि सिस्टम आज जरा जल्दी ही बूट हो गया. उसने कन्फर्म किया कि ये उसका ही टर्मिनल तो है. वह आश्वस्त हुआ, क्योंकि लॉगिन-पासवर्ड उसका ही था और स्वीकार्य हो गया था.

कंपनी के कामधाम की सुगमता की पड़ताल करने, रोज की तरह रूटीन में उसने सबसे पहले अपना ईमेल क्लाएंट खोला. धड़धड़ाते हुए ईमेल डाउनलोड होने लगे. अधिकांश कचरा फारवर्ड या अनावश्यक सीसी, कुछेक में ही कार्यवाही आवश्यक और इक्का दुक्का अर्जेंट. उसने सरसरी निगाह ईमेल के सब्जैक्ट लाइनों पर डाली. एक ईमेल का विषय देखते ही उसकी दिलचस्पी जाग उठी, उसकी आँखों में चमक कौंधी. ईमेल का सब्जैक्ट लाइन था –

“कर्मचारियों के वेतन और बोनस में बढ़ोत्तरी”

मेल के साथ इसी नाम की एक एक्सेल फ़ाइल अटैच थी. उसने ईमेल भेजने वाले का नाम देखा. वहाँ एचआर डिपार्टमेंट का जेनुइन सा नाम दिखा. हालांकि यह कोई वेतन भत्ते बढ़ने-घटने का समय नहीं था, और न ही कंपनी में इस बाबत कोई हलचल थी, फिर भी उसने बिना कोई अधिक विचार किए उस फ़ाइल को खोलने के लिए उस पर दोहरा क्लिक किया. क्या पता कंपनी अपने बढ़ते व्यापार के चलते हाइक दे रही हो! और यदि यह सच हो तो कितना अच्छा हो!

कहने को तो वह एमएम एक्सपोर्ट्स लिमिटेड के आईटी प्रभाग का प्रमुख था, परंतु उसके विभाग में उसको मिलाकर चार लोग ही काम करते थे. कंपनी नई थी, छोटी थी मगर तेजी से पाँव पसार रही थी. पिछले साल के मुकाबले इस साल इसकी व्यापार वृद्धि में दुगना इजाफ़ा हुआ था.

उसके साथी कर्मचारी अभी ऑफ़िस में आ ही रहे थे और एक दूसरे को हाय-हैलो कर अपने अपने क्यूबिकल में दिन-भर के लिए धंस रहे थे. वेतन बोनस की वह एक्सेल फ़ाइल खुली नहीं तो उसने उस पर दोबारा क्लिक किया. फ़ाइल अब भी नहीं खुली और न ही कोई त्रुटि संदेश मिला. एकबारगी उसे कुछ खटका सा हुआ, मगर इस बीच किसी साथी ने लॉगिन समस्या के बारे में उसे अपने क्यूबिकल से पुकारा तो उसे सुलझाने वह वहाँ चला गया.

वहाँ पर कंप्यूटर टर्मिनल के स्क्रीन पर लॉगिन विंडो के बजाए उसे कुछ और दिखा. उसे पढ़कर उसका दिमाग घूम गया. कंप्यूटर स्क्रीन पर बोल्ड अक्षरों में लिखा था-

आपकी तमाम फ़ाइलें क्रिप्टोमिक्स लॉकर से एनक्रिप्ट कर दी गई हैं.

आपके तमाम दस्तावेज़, फ़ोटो, डेटाबेस तथा अन्य बहुमूल्य फ़ाइलों को मिलिट्री ग्रेड एनक्रिप्शन से एनक्रिप्ट कर दी गई हैं और एक विशिष्ट कुंजी इस कंप्यूटर नेटवर्क सर्वर के लिए बनाया गया है.

इसका प्राइवेट डिक्रिप्शन कुंजी एक सीक्रेट इंटरनेट सर्वर पर भंडारित किया गया है और दुनिया में कोई भी आपकी इन फ़ाइलों को डीक्रिप्ट नहीं कर सकता जब तक कि आप हमें भुगतान कर उस प्राइवेट कुंजी को प्राप्त न कर लें.

भुगतान के लिए आपके पास केवल 96 घंटे हैं. यदि आपने इस नियत समय के भीतर पैसा नहीं दिया तो आपकी सभी फ़ाइलें हमेशा-हमेशा के लिए एनक्रिप्ट हो जाएंगी और फिर उन्हें कोई भी वापस नहीं पा सकेगा.

चेतावनी - इस क्रिप्टोमिक्स प्रोग्राम से छुटकारा पाने का कोई भी प्रयास न करें. ऐसा कोई भी प्रयास डीक्रिप्शन कुंजी को खत्म कर देगा और आपकी फ़ाइलें हमेशा के लिए डीक्रिप्ट हो जाएंगी और इस नुकसान के लिए आप स्वयं जिम्मेदार होंगे. इन फ़ाइलों को वापस पाने का केवल और केवल एक ही तरीका है. बिटक्वाइन से भुगतान करना. बिटक्वाइन से भुगतान कैसे करें इसके लिए "अगला" बटन क्लिक करें.

नीचे एक डिजिटल घड़ी थी जो काउंटडाउन कर रही थी. डेड लाइन में से पंद्रह मिनट पहले ही कब के गुजर गए थे पता ही नहीं चला था. उसने अगला बटन पर क्लिक किया. उसमें विस्तार से टॉर ब्राउज़र और वीपीएन के जरिए केवल और केवल बिटक्वाइन से भुगतान करने और उसकी प्रक्रिया के बारे में लिखा था, और डीक्रिप्शन का प्राइवेट कुंजी दिया गया था जिसके जरिए भुगतान हेतु साइट में एक्सेस करना था. कुल 2 बिटक्वाइन का भुगतान करना था. 2 बिट क्वाइन यानी कोई डेढ़ हजार डॉलर – करीब एक लाख रुपए.

वह दौड़कर अपने कंप्यूटर पर आया. अब यही संदेश वहां पर भी दिखने लगा था. कंपनी के कंप्यूटर नेटवर्क पर क्रिप्टोमिक्स रैंसमवेयर का साइबर हमला हुआ था और अब उनका संपूर्ण कंप्यूटर नेटवर्क बंधक बन गया था, जिसको छुड़ाने के लिए अब उन्हें फिरौती की रकम चुकानी थी.

अचानक उसे सबकुछ समझ में आ गया.

तो, यह था. वेतन बोनस की हक़ीकत. उसके वेतन बोनस में बढ़ोत्तरी के समाचार पाने की खुशी के लालच ने फंसा दिया था. किसी हैकर ने “स्पीयरफ़िशिंग” अटैक कर उसे फ़ांस लिया था. जो वेतन बोनस वाली एक्सेल फ़ाइल ईमेल से अटैच कर भेजी गई थी उसमें रैंसमवेयर वायरस था, और वह वायरस कंपनी के कंप्यूटर नेटवर्क पर कब्जा जमा चुका था और तमाम जरूरी फ़ाइलों को कूटरचना तकनीक से तब तक के लिए अनुपयोगी बना दिया था, जब तक कि फ़ाइलों की कूटरचना हटाने के लिए भुगतान कर जरूरी कुंजी हासिल न किया जाए. इंटरनेटी दुनिया में तेजी से फैल रहे साइबर फिरौती अपराध में आज वह भी जाने अनजाने फंस गया था. वैसे उसने एहतियातन कंपनी के अन्य नेटवर्क कंप्यूटरों पर अटैचमेंट खोलने की सुविधा बंद कर रखी थी और सारा काम क्लाउड कंप्यूटिंग से होता था. परंतु चूंकि वह स्वयं नेटवर्क एडमिन था, अतः यह जरूरी किस्म की सुविधा उसने अपने टर्मिनल पर बरकरार रखी थी, परंतु असावधानी और लालच ने उसे डस लिया था जिसका खामियाजा उसे आज भुगतना पड़ रहा था. जाहिर है, तू-डाल-डाल-मैं-पात-पात की तर्ज पर हैकर का एक कदम आगे का यह हमला नेटवर्क में इंस्टाल लेटेस्ट अपडेटेड एंटीवायरस प्रोग्राम भी नहीं पकड़ पाया था.

उसने तुरंत ही कंपनी के सीईओ को फ़ोन लगाया. संक्षेप में सारी स्थिति बताई और यह भी बताया कि अभी उनका नेटवर्क किसी काम का नहीं रह गया है. सीईओ ने सख्त लहजे में कहा कि कंपनी के लिए एक लाख रुपए की कोई महत्ता नहीं है, जल्द से जल्द भुगतान करो और कुंजी हासिल करो और काम चालू करो.

अब उसे जो भी करना था, तुरंत करना था. कंपनी का कंप्यूटर नेटवर्क जल्द से जल्द वापस पटरी पर लाने के लिए उसने बॉस की आज्ञा मानने का निश्चय किया और फिरौती की रकम भुगतान करने के लिए उसने क्रिप्टोमिक्स सूचना विंडो के पे बटन पर क्लिक किया. नया विंडो खुलने में थोड़ा समय लग रहा था, क्योंकि इंटरनेट धीमा चल रहा था.

कंप्यूटर स्क्रीन पर कर्सर के बिजी एनीमेशन को देखते-देखते अचानक उसके दिमाग में बिजली सी कौंधी और उसके होठों में एक चौड़ी सी मुस्कान आई. उसने वापस सीईओ को फ़ोन लगाया और फिरौती के भुगतान के लिए दो घंटे की मोहलत मांगी.

उसे याद आ गया. अरे! यह जरा सी बात तो उसे पहले ही याद आ जाना चाहिए था. परंतु हड़बड़ी में बड़ी गड़बड़ी हो रही थी, और वो फिरौती की रकम चुका कर और भी बड़ी गड़बड़ी करने वाला था. ऊपर से, इस बात की कोई गारंटी नहीं थी कि फिरौती की रकम देने के बाद डीक्रिप्शन कुंजी काम करे और उनकी फ़ाइलें वापस मिल जाएँ. अब वो कंपनी का एक धेला भी फिरौती के रूप में नहीं जाने देगा. उसे वो चुटकुला भी याद आ गया – व्हाई नौ वन कैन हैक रजनीकांत? बिकाज़ रजनीकांत आलवेज़ बैकअप्स!

उसने कंपनी के कंप्यूटर नेटवर्क सिस्टम में बैकअप का शानदार, डबल, फेल-सेफ प्लान लगाया हुआ था. मासिक, साप्ताहिक, दैनिक के अलावा उसने प्रतिघंटा बैकअप प्लान भी लगाया हुआ था और ऑप्टिकल ड्राइव के साथ साथ नेटवर्क-आइसोलेटेड मैग्नेटिक ड्राइव में भी डेटा बैकअप रहता था. चूंकि वायरस हमला सुबह-सुबह ही हुआ था, अतः उसके पास पिछली रात तक का सारा इंटैक्ट डेटा उपलब्ध था, और वह बैकअप रीस्टोर के जरिए बिना एक धेला दिए, हैकर को धता बता कर कंपनी का नेटवर्क सिस्टम चुटकियों में फिर खड़ा कर सकता था.

पर, इससे पहले उसने एक जरूरी काम और किया. पढ़ाई के दिनों का उसका एक मित्र एथिकल हैकर था, और अब तो साइबर क्राइम हल करने में उस्ताद हो चला था. उसने उस मित्र को फ़ोन लगाया, अपनी समस्या बताई और उसे जरूरी जानकारी, स्क्रीनशॉट आदि देकर अपने नेटवर्क को दुरुस्त करने में जुट गया.

कोई तीन घंटे की अनथक परिश्रम से उसने कंपनी का कंप्यूटर नेटवर्क पहले की तरह दुरुस्त कर लिया और रनिंग मोड में ले आया. सबसे पहले उसने सर्वर से इंटरनेट ऐक्सेस हटाया, फिर सर्वर व नेटवर्क से जुड़े तमाम हार्डड्राइवों को फार्मेट कर उनमें नया सिस्टम इंस्टाल किया और फिर डेटा बैकअप चलाया. सबकुछ आसान और बिना किसी समस्या के हो गया. अभी वह इस मैराथन काम से फारिग होकर, अपने बॉस को आल ओके सिग्नल देकर, थोड़ा सुस्ताने के लिए चाय का कप हाथ में लिया ही था कि उसके हैकर मित्र का फ़ोन आया –

“क्या स्थिति है?”

“थैंक गॉड, आल इज़ वेल. सिस्टम इज़ अप एंड रनिंग नाऊ. एज नथिंग हैज हैपन्ड बिफ़ोर!”

“गुड. तुम्हारे लिए कुछ समाचार है.”

“अच्छा!”

“हां, बल्कि तुम्हारी कंपनी के लिए समाचार है.”

“ओह!”

“आर एम एक्सपोर्ट्स के बारे में जानते हो?”

“हाँ. ये प्रतिद्वंद्वी कंपनी है. दरअसल हमारी कंपनी के सगे छोटे भाई की ही कंपनी है – साल भर पहले हमारी कंपनी से अलग होकर नई कंपनी बनाई थी. वर्क एरिया सेम है. परंतु यह आर एम एक्सपोर्ट्स कुछ ठीक नहीं चल रही जबकि हमारी कंपनी का कारोबार डबल हो गया है”

“गुड. यानी मोटिव स्पष्ट है.”

“मैं समझा नहीं.”

“अच्छा, मैं समझाता हूँ. तुमने जो डिटेल्स दिए थे, उनसे तो जाहिर है कोई क्लू नहीं निकलना था और न ही निकला. परंतु क्रिप्टोमिक्स के चंद ऑपरेटरों पर मेरी रीयलटाइम नजर रहती है. उसके एक ऑपरेटर ने डॉर्कवेब पर एक क्लाएंट से ताज़ा डील की थी स्पीयरफ़िशिंग के लिए. मैंने एक दो सूत्र और जोड़ा तो एक नाम निकला आर एम एक्सपोर्ट्स. बाकी तुमने भाई-भाई राइवलरी वाला मामला स्पष्ट कर ही दिया. और तुमने यह भी अच्छा किया कि कोई फिरौती नहीं दी और बैकअप से सिस्टम रीस्टोर कर लिया. मैं शर्त लगा सकता हूँ कि वे फिरौती लेने के बाद भी कोई आपका डेटा डीक्रिप्ट नहीं करते. उन्हें तो डेटा पूरा डिस्ट्राय करने की ही डील मिली हुई थी. समझ रहे हो ना? प्रतिद्वंद्वी व्यापार को डुबोने की साजिश ताकि उनका व्यापार फल फूल सके.”

“हे! भगवान.”

“नाऊ यू नो! टेक केयर. विल हैव ड्रिंक टुगेदर सम डे. बाय”

वह अपना सिर पकड़ कर बैठ गया. उसे सूझ नहीं पड़ा कि ये बात वो अपनी कंपनी के मालिक को बताए या नहीं. प्रकटतः दोनों भाइयों में गज़ब का अपनापा और भाईचारा दिखता था – व्यापार अलग करने से पहले भी और बाद में भी. परंतु प्रेम में पगे चेहरे के पीछे भी कोई और, क्रूर चेहरा छिपा हो सकता है? या शायद प्रतिद्वंद्वी कंपनी के किसी मैनेजर की ये चाल हो – टार्गेट पूरा करने के दबाव में ये कदम उठाया हो? कोई केवल कयास ही लगा सकता था.

उसने अपने सिर को एक झटका दिया और अपने दिमाग की मेमोरी से आज हुए क्रिप्टोमिक्स हमले से संबंधित सारा डेटा डिलीट कर दिया.

सिस्टम बढ़िया चल रहा है. उसने डिस्प्ले पर एक नजर डाली. सभी लाग एरर फ्री चल रहे थे. बढ़िया. वो मुस्कुराया.

अचानक उसे लगा कि उसे आज जरा जल्दी घर जाना चाहिए.

“छलिया मेरा नाम...” वह गुनगुनाया. यह गाना फिर से उसके दिमाग में बजने लगा. पूरे साज और आवाज़ के साथ.

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नाम

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रचनाकार: साइबर अपराध कथा / क्रिप्टोमिक्स / रवि रतलामी
साइबर अपराध कथा / क्रिप्टोमिक्स / रवि रतलामी
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