रचनाकार में खोजें -
 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें.

भारत में नव-सामंतवाद और काला धन - श्रीमती विमल सिंह

SHARE:

भारत कहने को तो प्रजातांत्रिक देश है, किन्तु यहाँ के लोगों की पसंद है सामंतवाद। यही कारण है कि जो नेता प्रजातांत्रिक पद्धति से चुनकर विभिन्...

image

भारत कहने को तो प्रजातांत्रिक देश है, किन्तु यहाँ के लोगों की पसंद है सामंतवाद। यही कारण है कि जो नेता प्रजातांत्रिक पद्धति से चुनकर विभिन्न सदनों में पहुँचते हैं, उनका रहन-सहन और सोच बहुत जल्द ही सामंती ढर्रे पर चल निकलता है। चुनावों के पहले वे मतदाताओं के पाँव छूने में भी गुरेज नहीं करते, किन्तु सत्ता में आते ही उनकी आँखों का पानी मर जाता है और धीरे-धीरे आम आदमी से दूरी बनाने लगते हैं। यही हाल हमारे आला अफ़सरों का है। सुना है कि उन्हें शुरुआती प्रशिक्षण में ही सिखा दिया जाता है कि आपका काम शासन करने का है। इसलिए शासक और शासित के बीच की दूरी बनी रहे- तभी आप सफलतापूर्वक शासन कर सकते हैं। यह आभिजात्यवादी सोच ही आम आदमी को नेताओं और शासकों से दूर करता है। इसलिए प्रजातांत्रिक व्यवस्था के बावजूद शासन का अपने यहाँ एक ही अर्थ है- राजशाही, सामंतशाही। नेता और नौकरशाह, व्यवसाइयों, उद्योगपतियों आदि के साथ मिलकर सामंतशाही का एक ऐसा ताना-बाना बुनते हैं, जहाँ आम गरीब-गुरबा केवल शासित बनकर रह जाता है। इस सामंतशाही प्रवृत्ति को हम नव-सामंतवाद कहकर अभिहित करना चाहेंगे।

सामंतशाही की मूल विषयवस्तु है सत्ता यानी पावर। कुछ भी यानी मनमानी करने, किसी को भी धर दबोचने, और दूसरों को कुचलते हुए शान से जीने की पावर। बड़े पदों से जुड़ी रहती है पावर। लेकिन पावर अपने-आप में कोई एकांगी और निरपेक्ष अवधारणा नहीं है। पावर का रूपान्तरण पैसे में न हो तो वह किस काम की? पावर से आप अपने अधीनस्थों को डरा सकते हैं, किसी को भी अपराधी सिद्ध करके जेल भिजवा सकते हैं, थोड़ी देर के लिए किसी को भी अपने रुआब में ले सकते हैं। किन्तु पावर से आप बाज़ार में कुछ खरीद नहीं सकते। ऐसे विक्रेता से तो कतई नहीं खरीद सकते, जिसे आपकी पावर के होने या न होने से कोई फर्क न पड़ता हो। इसलिए जो लोग पावर में होते हैं वे जहाँ-जहाँ उनका वश चलता है, वहाँ से पैसा खींचते हैं। अपने अधिकार क्षेत्र का काम तो वे बिना पैसा दिए, केवल पावर के दम पर करा लेते हैं, किन्तु जहाँ उनके अधिकार की आभा नहीं पहुँच पाती, वहाँ वे पैसा फेंकते हैं। और ज़रूरत पड़े तो अनाप-शनाप पैसा, क्योंकि अपनी पावर के दम पर उनके पास अनाप-शनाप पैसा आया भी होता है। इसके समानांतर है पैसा और पैसे की पावर। जो धनी लोग पावर में नहीं हैं, उन्हें पता है कि पावरफुल लोगों को पैसे से खरीदा जा सकता है। वे पैसे की पावर को जानते हैं और ज़रूरत पड़ने पर उसका बखूबी इस्तेमाल करते हैं।

धीरे-धीरे कुछ थोड़े-से पावरफुल लोग देश का ज्यादातर पैसा अपने पास दबा लेते हैं या केवल वहाँ संचित होने के अवसर उपलब्ध कराते हैं, जहाँ से जब चाहें तब निकलवा सकें, वसूल सकें। ऐसे पैसे को बाहर निकालने के लिए या उसे कूड़ा बनाने के लिए अच्छी सरकारें कुछ वैसे उपाय कर डालती हैं, जैसे वर्तमान केन्द्र सरकार ने किए। एक दिन अचानक घोषणा होती है कि हजार और पाँच सौ रुपये के जो नोट बाज़ार में हैं, या सामंती सोच वाले पावरफुल लोगों के पास दबे हुए हैं, वे अब कागज के टुकड़े मात्र रह गए हैं। यदि कोई उन नोटों को बदलना चाहे तो बदल ले, जमा करना चाहे तो बैंक में जमा कर दे। लेकिन उसके लिए अमुक-अमुक शर्तें हैं। ये शर्तें कहीं न कहीं ईमानदारी की ओर ले जानेवाली हैं।

विभिन्न दलों के ऐसे राजनेता और धन के लिए ही बड़ी नौकरी में आनेवाले भ्रष्ट अभियंता, अधिकारी, व्यापारी, व्यवसायी बौखला गए हैं, जिनके पास बेहिसाब करेंसी है। वे सोच में है कि अब क्या करें? जो नहीं बोल सकते, वे चुपचाप खून का घूँट पी रहे हैं, किन्तु नेताओं की ज़बान पर कोई लगाम नहीं। वे अपनी बौखलाहट शब्दों में बयान कर रहे हैं। हवाला जनता की तकलीफों का दे रहे हैं, किन्तु तकलीफ दरअसल खुद उन्हीं की है। उनके पास अरबों रुपये की बेहिसाब करेंसी है। ऐसी करेंसी जो कभी वैध मुद्रा होती थी, किन्तु अब नहीं रहेगी। जैसे किसी विषधर नाग से उसकी मणि छीन ली जाए तो वह बौखला जाता है, वैसे ही इन धनपशुओं से उनके धन की गरमी निकाल ली गई है और वे धनहीन होकर बौरा गए हैं। हालांकि इनके पास अनाप-शनाप भू-संपत्ति है, बंगले हैं, कोठियाँ हैं, गाड़ियाँ हैं, सोना और हीरे-जवाहरात हैं, किन्तु वहाँ तक सरकार के हाथ नहीं पहुँच पाए। सरकार मुद्रा जारी करती है, उसे वापस ले सकती है, बदल सकती है। यह सरकार के लिए सहज ही शक्य है। और सरकार ने यह कर दिखाया। इससे सरकार की नेकनीयती का पता चलता है।

जो नेता अपने-आप को आम जनता का खैरख्वाह बतलाते हैं, चुनाव के दिनों में कोई भी विचार किए बिना, निस्संकोच भाव से गरीब-गुरबा के पाँव छूते हैं, उनकी टूटी तसली में साग रोटी खा आते हैं, उनकी टूटी मचिया पर बैठकर उनके दिल में सेंध लगा आते हैं और चुनाव जीतते ही सामंती तेवर दिखाने लगते हैं; उनकी असलियत 1000-500 के नोट वापस लेने पर उत्पन्न हुई उनकी बौखलाहट से उजागर हो रही है। आम आदमी की चिन्ता दर्शाना इनका स्वांग है। ये आँसू घड़ियाली हैं।

देश की कई पार्टियों के झंडे पर हँसिया-हथौड़ा छपता है, कहीं साइकिल है, तो कहीं और ऐसे प्रतीक जिनका संबंध आम निम्न-मध्यवर्गीय समाज से नहीं, बल्कि बिलकुल गरीब-गुरबा, मज़दूर और किसान से है। जो नेता इन प्रतीकों पर चुनाव जीतते हैं, सत्ता पर काबिज होते हैं, उनमें से बहुतों को शायद यह भी मालूम नहीं होगा कि हँसिया का हमारे लोक-जीवन में, हमारी कृषि-व्यवस्था में क्या उपयोग है, कि उसकी धार भीतरी हिस्से में होती है या बाहरी, कि हँसिया और खुरपे में क्या अन्तर है और हँसिया या खुरपे को इस्तेमाल में कैसे लाया जाता है? हथौड़े और घन में क्या अन्तर है? कुदाल और फावड़े में क्या अन्तर है? गैंती और फावड़े में क्या अन्तर है? बेलचे और सब्बल में क्या अन्तर है? और इन सब उपकरणों का इस्तेमाल किन-किन कार्यों के लिए होता है? अपना चुनावी उल्लू सीधा करने के लिए किसान और मज़दूर को उल्लू बनाना इन चतुर नेताओं को खूब आता है। बस, लोमड़ी जैसी चतुराई ही उनका परम पुरुषार्थ है। और परम प्राप्य है- पैसा। उक्त निर्णय के बाद इनका अरबों रुपया अब रद्दी में तबदील हो गया। इनकी सामंतशाही का सारा असबाब कचरा हो गया। इसलिए ये बौखला गए हैं।

नेता तो आते-जाते रहते हैं। आज ये आए हैं, तो कल दूसरे आएंगे। लेकिन अधिकारी और अभियंता, बाबू-वर्ग लम्बी पारी खेलता है। वह नेताओं की छोटी-छोटी पारियों के लिए मैदान बनाता है। ज़ाहिर है कि काले पैसे के गोरख-धंधे में इस वर्ग की भूमिका बहुत बड़ी होती है। देश में जगह-जगह से खबरें आ रही हैं कि अमुक-अमुक शहर में एक इंजीनियर करोड़ों रुपये लेकर स्वर्णकार के यहाँ गया, और जो सोना बत्तीस लाख का एक किलो आता है, उसके लिए पैंसठ लाख रुपये की दर से भुगतान कर आया। ऐसे तमाम अधिकारी और अभियंता हैं, जिनके घरों में करोड़ों रुपये की करेंसी भरी हुई है। ये लोग बीस-बीस लाख रुपये नकद देकर लग्ज़री गाड़ियाँ खरीदते हैं, इनकी बीवियाँ लाखों रुपये की नकद शॉपिंग एक बार में कर लाती हैं। इतनी नगदी इनके पास कहाँ से आती है?

इसी प्रकार हजारों व्यापारी एक पैसा भी कर नहीं चुकाते या अपने टर्नओवर के अनुपात में बहुत ही कम कर भरते हैं, जबकि महँगी गाड़ियाँ खरीदते हैं, विशाल कोठियों में रहते हैं, शादियों-समारोहों पर करोड़ों फूँक डालते हैं। उनके सी.ए. काली कमाई को छिपाने के गुर बताने में माहिर होते हैं। ऐसे धन-पशुओं के बर-अक्स वे नौकरी-पेशा लोग हैं, जिनके वेतन से पाँच-छह लाख रुपये सालाना टैक्स कट जाना आम बात है। पाँच-छह लाख रुपये टैक्स भरनेवाले नौकर मामूली कार रख ले तो भी गनीमत है। इन दोनों की आर्थिक स्थिति तो ठीक है, किन्तु देश में बहुत बड़ी संख्या (मैजॉरिटी) उन लोगों की है जो महीने में पाँच से दस हजार रुपये तक ही कमा पाते हैं। यह वर्ग किसी तरह पाँव घसीटते हुए पूरी ज़िन्दगी गुजार देता है। उसे न टैक्स भरना है, न काला धन जमा करना है। अलबत्ता उसके पास जो दो-चार नोट हजार और पाँच सौ रुपये की शक्ल में हैं, उन्हें बदलने की आफ़त ज़रूर उनके गले पड़ गई है। गेहूँ के साथ पिस जाने इन लाचार घुनों की नियति बन गई है।

देश के तंत्र का बहुत बड़ा हिस्सा घूसखोरी, कमीशनखोरी और बेईमानी के मकड़जाल में उलझा हुआ है। वर्तमान केन्द्र सरकार ने इस मकड़जाल को काटने की जो दिलेरी दिखाई है, वह काबिले-तारीफ है। काले धन के दम पर कुछ लोग समाज में अपने-आप को राजा समझ रहे थे, और आम नागरिकों को कीड़ा-मकौड़ा। काले धन के महज कागज का टुकड़ा बनकर रह जाने पर इन धन-पशुओं की औकात आम आदमी जैसी हो गई है। सामाजिक समरसता के लिए यह बेहद ज़रूरी है। सड़कों पर जबरदस्ती की धींगामुश्ती करती बड़ी-बड़ी एसयूवी अब कम नज़र आ रही हैं। आम आदमी, जो आदतन या विवशतावश ईमानदार है, शान से चल रहा है। उसकी आवश्यकताएं सीमित हैं, उसके खर्चे कम हैं, उसे शाहखर्ची की आदत नहीं रही। वह मज़े में है। कुढ़ रहे हैं वे जिनके पास अनाप-शनाप बेहिसाब पैसा था और जो अनाप-शनाप खर्च करने के अभ्यस्त हो चले थे, किन्तु उनके पैसे के कूड़ा बनते ही वह पहलेवाली शाहखर्ची सपना होकर रह गई।

अनाप-शनाप पैसा बनानेवालों का दिमाग खराब करने में विज्ञापनों और कार-निर्माताओं, फैशन-गुरुओं, कपड़े व प्रसाधन सामग्री बेचनेवालों का भी कम योगदान नहीं रहा है। मसलन मारुति की सियाज कार के एक विज्ञापन में एक मुम्बइया अभिनेता कहता है- सेलिब्रिटीज डोन्ट केयर। इसी तरह एक एसयूवी को चीते की तरह पेश किया जाता रहा, जिसके आने पर बाकी सभी गाड़ियाँ सहमकर एक तरफ हो जाती हैं और टैग लाइन सुनाई पड़ती है- द बीस्ट इज ऑन द रोड। सवाल यह है कि सेलिब्रिटी को यह अख्तियार किसने दिया कि वह दूसरों की परवाह न करे। आप अपने घर में जो मन आए, वह कीजिए। किन्तु सड़क पर निकले हैं तो समाज के कायदे-कानून को मानना पड़ेगा। आप होंगे सेलिब्रिटी अपने घर में, उससे हमें क्या? आप केयर नहीं करेंगे जो जेल जाएँगे। और बनैले जानवरों के लिए हमारी सड़कें नहीं हैं। आप चीते हैं तो जंगल में जाइए। शहर में चलना है तो सभ्यता से चलिए। सभ्य समाज की सड़कें खूंख्वार जानवरों की सैरगाह नहीं होतीं। ऐसे विज्ञापन या तो अमीरों को खूंख्वार और बेपरवाह बनने के लिए प्रेरित करते हैं, या उनकी इन बुराइयों को उजागर करते हैं। लेकिन इनके केन्द्र में हैं बिगड़ैल अमीर, पैसे की गरमी सिर में चढ़ जाने के कारण अपना आपा खो चुके अमीर।

प्रजातंत्र तभी सफल हो सकता है, जब उसमें हर व्यक्ति को बराबर के अवसर उपलब्ध हों। पाशविक प्रवृत्तियों अथवा आपराधिक गतिविधियों के कारण लूटने-खसूटने में अधिक सक्षम कुछ लोग जब समाज का सारा धन अपने कब्जे में कर लें तो न्याय-प्रिय और प्रजापालक सरकारें वही करेंगी, जो हमारी वर्तमान केन्द्र सरकार ने किया है। देश में बढ़ रही सामंतशाही और उसके फलस्वरूप उत्पन्न हो रहे काले धन को जड़ से दूर करके, नेस्तनाबूद करके प्रजातंत्र की पुनः प्रतिष्ठा के लिए किए गए ऐसे स्तुत्य प्रयास की जितनी भी प्रशंसा की जाए वह कम है।

---0---

COMMENTS

BLOGGER
---*---

-----****-----

|नई रचनाएँ_$type=complex$tbg=rainbow$count=6$page=1$va=0$au=0

विज्ञापन --**--

|कथा-कहानी_$type=complex$tbg=rainbow$au=0$count=6$page=1$src=random-posts$s=200

|हास्य-व्यंग्य_$type=blogging$au=0$count=6$page=1$src=random-posts

-- विज्ञापन --

---

|लोककथाएँ_$type=complex$tbg=rainbow$au=0$count=6$page=1$src=random-posts

|लघुकथाएँ_$type=list$au=0$count=5$com=0$page=1$src=random-posts

|काव्य जगत_$type=complex$tbg=rainbow$au=0$count=6$page=1$src=random-posts

-- विज्ञापन --

---

|बच्चों के लिए रचनाएँ_$type=complex$tbg=rainbow$au=0$count=6$page=1$src=random-posts

|विविधा_$type=complex$tbg=rainbow$au=0$va=0$count=6$page=1$src=random-posts

 आलेख कविता कहानी व्यंग्य 14 सितम्बर 14 september 15 अगस्त 2 अक्टूबर अक्तूबर अंजनी श्रीवास्तव अंजली काजल अंजली देशपांडे अंबिकादत्त व्यास अखिलेश कुमार भारती अखिलेश सोनी अग्रसेन अजय अरूण अजय वर्मा अजित वडनेरकर अजीत प्रियदर्शी अजीत भारती अनंत वडघणे अनन्त आलोक अनमोल विचार अनामिका अनामी शरण बबल अनिमेष कुमार गुप्ता अनिल कुमार पारा अनिल जनविजय अनुज कुमार आचार्य अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ अनुज खरे अनुपम मिश्र अनूप शुक्ल अपर्णा शर्मा अभिमन्यु अभिषेक ओझा अभिषेक कुमार अम्बर अभिषेक मिश्र अमरपाल सिंह आयुष्कर अमरलाल हिंगोराणी अमित शर्मा अमित शुक्ल अमिय बिन्दु अमृता प्रीतम अरविन्द कुमार खेड़े अरूण देव अरूण माहेश्वरी अर्चना चतुर्वेदी अर्चना वर्मा अर्जुन सिंह नेगी अविनाश त्रिपाठी अशोक गौतम अशोक जैन पोरवाल अशोक शुक्ल अश्विनी कुमार आलोक आई बी अरोड़ा आकांक्षा यादव आचार्य बलवन्त आचार्य शिवपूजन सहाय आजादी आदित्य प्रचंडिया आनंद टहलरामाणी आनन्द किरण आर. के. नारायण आरकॉम आरती आरिफा एविस आलेख आलोक कुमार आलोक कुमार सातपुते आशीष कुमार त्रिवेदी आशीष श्रीवास्तव आशुतोष आशुतोष शुक्ल इंदु संचेतना इन्दिरा वासवाणी इन्द्रमणि उपाध्याय इन्द्रेश कुमार इलाहाबाद ई-बुक ईबुक ईश्वरचन्द्र उपन्यास उपासना उपासना बेहार उमाशंकर सिंह परमार उमेश चन्द्र सिरसवारी उमेशचन्द्र सिरसवारी उषा छाबड़ा उषा रानी ऋतुराज सिंह कौल ऋषभचरण जैन एम. एम. चन्द्रा एस. एम. चन्द्रा कथासरित्सागर कर्ण कला जगत कलावंती सिंह कल्पना कुलश्रेष्ठ कवि कविता कहानी कहानी संग्रह काजल कुमार कान्हा कामिनी कामायनी कार्टून काशीनाथ सिंह किताबी कोना किरन सिंह किशोरी लाल गोस्वामी कुंवर प्रेमिल कुबेर कुमार करन मस्ताना कुसुमलता सिंह कृश्न चन्दर कृष्ण कृष्ण कुमार यादव कृष्ण खटवाणी कृष्ण जन्माष्टमी के. पी. सक्सेना केदारनाथ सिंह कैलाश मंडलोई कैलाश वानखेड़े कैशलेस कैस जौनपुरी क़ैस जौनपुरी कौशल किशोर श्रीवास्तव खिमन मूलाणी गंगा प्रसाद श्रीवास्तव गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर ग़ज़लें गजानंद प्रसाद देवांगन गजेन्द्र नामदेव गणि राजेन्द्र विजय गणेश चतुर्थी गणेश सिंह गांधी जयंती गिरधारी राम गीत गीता दुबे गीता सिंह गुंजन शर्मा गुडविन मसीह गुनो सामताणी गुरदयाल सिंह गोरख प्रभाकर काकडे गोवर्धन यादव गोविन्द वल्लभ पंत गोविन्द सेन चंद्रकला त्रिपाठी चंद्रलेखा चतुष्पदी चन्द्रकिशोर जायसवाल चन्द्रकुमार जैन चाँद पत्रिका चिकित्सा शिविर चुटकुला ज़कीया ज़ुबैरी जगदीप सिंह दाँगी जयचन्द प्रजापति कक्कूजी जयश्री जाजू जयश्री राय जया जादवानी जवाहरलाल कौल जसबीर चावला जावेद अनीस जीवंत प्रसारण जीवनी जीशान हैदर जैदी जुगलबंदी जुनैद अंसारी जैक लंडन ज्ञान चतुर्वेदी ज्योति अग्रवाल टेकचंद ठाकुर प्रसाद सिंह तकनीक तक्षक तनूजा चौधरी तरुण भटनागर तरूण कु सोनी तन्वीर ताराशंकर बंद्योपाध्याय तीर्थ चांदवाणी तुलसीराम तेजेन्द्र शर्मा तेवर तेवरी त्रिलोचन दामोदर दत्त दीक्षित दिनेश बैस दिलबाग सिंह विर्क दिलीप भाटिया दिविक रमेश दीपक आचार्य दुर्गाष्टमी देवी नागरानी देवेन्द्र कुमार मिश्रा देवेन्द्र पाठक महरूम दोहे धर्मेन्द्र निर्मल धर्मेन्द्र राजमंगल नइमत गुलची नजीर नज़ीर अकबराबादी नन्दलाल भारती नरेंद्र शुक्ल नरेन्द्र कुमार आर्य नरेन्द्र कोहली नरेन्‍द्रकुमार मेहता नलिनी मिश्र नवदुर्गा नवरात्रि नागार्जुन नाटक नामवर सिंह निबंध नियम निर्मल गुप्ता नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’ नीरज खरे नीलम महेंद्र नीला प्रसाद पंकज प्रखर पंकज मित्र पंकज शुक्ला पंकज सुबीर परसाई परसाईं परिहास पल्लव पल्लवी त्रिवेदी पवन तिवारी पाक कला पाठकीय पालगुम्मि पद्मराजू पुनर्वसु जोशी पूजा उपाध्याय पोपटी हीरानंदाणी पौराणिक प्रज्ञा प्रताप सहगल प्रतिभा प्रतिभा सक्सेना प्रदीप कुमार प्रदीप कुमार दाश दीपक प्रदीप कुमार साह प्रदोष मिश्र प्रभात दुबे प्रभु चौधरी प्रमिला भारती प्रमोद कुमार तिवारी प्रमोद भार्गव प्रमोद यादव प्रवीण कुमार झा प्रांजल धर प्राची प्रियंवद प्रियदर्शन प्रेम कहानी प्रेम दिवस प्रेम मंगल फिक्र तौंसवी फ्लेनरी ऑक्नर बंग महिला बंसी खूबचंदाणी बकर पुराण बजरंग बिहारी तिवारी बरसाने लाल चतुर्वेदी बलबीर दत्त बलराज सिंह सिद्धू बलूची बसंत त्रिपाठी बातचीत बाल कथा बाल कलम बाल दिवस बालकथा बालकृष्ण भट्ट बालगीत बृज मोहन बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष बेढब बनारसी बैचलर्स किचन बॉब डिलेन भरत त्रिवेदी भागवत रावत भारत कालरा भारत भूषण अग्रवाल भारत यायावर भावना राय भावना शुक्ल भीष्म साहनी भूतनाथ भूपेन्द्र कुमार दवे मंजरी शुक्ला मंजीत ठाकुर मंजूर एहतेशाम मंतव्य मथुरा प्रसाद नवीन मदन सोनी मधु त्रिवेदी मधु संधु मधुर नज्मी मधुरा प्रसाद नवीन मधुरिमा प्रसाद मधुरेश मनीष कुमार सिंह मनोज कुमार मनोज कुमार झा मनोज कुमार पांडेय मनोज कुमार श्रीवास्तव मनोज दास ममता सिंह मयंक चतुर्वेदी महापर्व छठ महाभारत महावीर प्रसाद द्विवेदी महाशिवरात्रि महेंद्र भटनागर महेन्द्र देवांगन माटी महेश कटारे महेश कुमार गोंड हीवेट महेश सिंह महेश हीवेट मानसून मार्कण्डेय मिलन चौरसिया मिलन मिलान कुन्देरा मिशेल फूको मिश्रीमल जैन तरंगित मीनू पामर मुकेश वर्मा मुक्तिबोध मुर्दहिया मृदुला गर्ग मेराज फैज़ाबादी मैक्सिम गोर्की मैथिली शरण गुप्त मोतीलाल जोतवाणी मोहन कल्पना मोहन वर्मा यशवंत कोठारी यशोधरा विरोदय यात्रा संस्मरण योग योग दिवस योगासन योगेन्द्र प्रताप मौर्य योगेश अग्रवाल रक्षा बंधन रच रचना समय रजनीश कांत रत्ना राय रमेश उपाध्याय रमेश राज रमेशराज रवि रतलामी रवींद्र नाथ ठाकुर रवीन्द्र अग्निहोत्री रवीन्द्र नाथ त्यागी रवीन्द्र संगीत रवीन्द्र सहाय वर्मा रसोई रांगेय राघव राकेश अचल राकेश दुबे राकेश बिहारी राकेश भ्रमर राकेश मिश्र राजकुमार कुम्भज राजन कुमार राजशेखर चौबे राजीव रंजन उपाध्याय राजेन्द्र कुमार राजेन्द्र विजय राजेश कुमार राजेश गोसाईं राजेश जोशी राधा कृष्ण राधाकृष्ण राधेश्याम द्विवेदी राम कृष्ण खुराना राम शिव मूर्ति यादव रामचंद्र शुक्ल रामचन्द्र शुक्ल रामचरन गुप्त रामवृक्ष सिंह रावण राहुल कुमार राहुल सिंह रिंकी मिश्रा रिचर्ड फाइनमेन रिलायंस इन्फोकाम रीटा शहाणी रेंसमवेयर रेणु कुमारी रेवती रमण शर्मा रोहित रुसिया लक्ष्मी यादव लक्ष्मीकांत मुकुल लक्ष्मीकांत वैष्णव लखमी खिलाणी लघु कथा लघुकथा लतीफ घोंघी ललित ग ललित गर्ग ललित निबंध ललित साहू जख्मी ललिता भाटिया लाल पुष्प लावण्या दीपक शाह लीलाधर मंडलोई लू सुन लूट लोक लोककथा लोकतंत्र का दर्द लोकमित्र लोकेन्द्र सिंह विकास कुमार विजय केसरी विजय शिंदे विज्ञान कथा विद्यानंद कुमार विनय भारत विनीत कुमार विनीता शुक्ला विनोद कुमार दवे विनोद तिवारी विनोद मल्ल विभा खरे विमल चन्द्राकर विमल सिंह विरल पटेल विविध विविधा विवेक प्रियदर्शी विवेक रंजन श्रीवास्तव विवेक सक्सेना विवेकानंद विवेकानन्द विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक विश्वनाथ प्रसाद तिवारी विष्णु नागर विष्णु प्रभाकर वीणा भाटिया वीरेन्द्र सरल वेणीशंकर पटेल ब्रज वेलेंटाइन वेलेंटाइन डे वैभव सिंह व्यंग्य व्यंग्य के बहाने व्यंग्य जुगलबंदी व्यथित हृदय शंकर पाटील शगुन अग्रवाल शबनम शर्मा शब्द संधान शम्भूनाथ शरद कोकास शशांक मिश्र भारती शशिकांत सिंह शहीद भगतसिंह शामिख़ फ़राज़ शारदा नरेन्द्र मेहता शालिनी तिवारी शालिनी मुखरैया शिक्षक दिवस शिवकुमार कश्यप शिवप्रसाद कमल शिवरात्रि शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी शीला नरेन्द्र त्रिवेदी शुभम श्री शुभ्रता मिश्रा शेखर मलिक शेषनाथ प्रसाद शैलेन्द्र सरस्वती शैलेश त्रिपाठी शौचालय श्याम गुप्त श्याम सखा श्याम श्याम सुशील श्रीनाथ सिंह श्रीमती तारा सिंह श्रीमद्भगवद्गीता श्रृंगी श्वेता अरोड़ा संजय दुबे संजय सक्सेना संजीव संजीव ठाकुर संद मदर टेरेसा संदीप तोमर संपादकीय संस्मरण संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018 सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन सतीश कुमार त्रिपाठी सपना महेश सपना मांगलिक समीक्षा सरिता पन्थी सविता मिश्रा साइबर अपराध साइबर क्राइम साक्षात्कार सागर यादव जख्मी सार्थक देवांगन सालिम मियाँ साहित्य समाचार साहित्यिक गतिविधियाँ साहित्यिक बगिया सिंहासन बत्तीसी सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध सीताराम गुप्ता सीताराम साहू सीमा असीम सक्सेना सीमा शाहजी सुगन आहूजा सुचिंता कुमारी सुधा गुप्ता अमृता सुधा गोयल नवीन सुधेंदु पटेल सुनीता काम्बोज सुनील जाधव सुभाष चंदर सुभाष चन्द्र कुशवाहा सुभाष नीरव सुभाष लखोटिया सुमन सुमन गौड़ सुरभि बेहेरा सुरेन्द्र चौधरी सुरेन्द्र वर्मा सुरेश चन्द्र सुरेश चन्द्र दास सुविचार सुशांत सुप्रिय सुशील कुमार शर्मा सुशील यादव सुशील शर्मा सुषमा गुप्ता सुषमा श्रीवास्तव सूरज प्रकाश सूर्य बाला सूर्यकांत मिश्रा सूर्यकुमार पांडेय सेल्फी सौमित्र सौरभ मालवीय स्नेहमयी चौधरी स्वच्छ भारत स्वतंत्रता दिवस स्वराज सेनानी हबीब तनवीर हरि भटनागर हरि हिमथाणी हरिकांत जेठवाणी हरिवंश राय बच्चन हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन हरिशंकर परसाई हरीश कुमार हरीश गोयल हरीश नवल हरीश भादानी हरीश सम्यक हरे प्रकाश उपाध्याय हाइकु हाइगा हास-परिहास हास्य हास्य-व्यंग्य हिंदी दिवस विशेष हुस्न तबस्सुम 'निहाँ' biography dohe hindi divas hindi sahitya indian art kavita review satire shatak tevari undefined
नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3793,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,326,ईबुक,182,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,257,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,105,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2744,कहानी,2069,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,484,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,129,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,30,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,87,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,22,पाठकीय,61,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,309,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,326,बाल कलम,23,बाल दिवस,3,बालकथा,48,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,8,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,16,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,224,लघुकथा,806,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,306,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,57,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1882,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,637,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,676,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,14,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,52,साहित्यिक गतिविधियाँ,181,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,51,हास्य-व्यंग्य,52,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: भारत में नव-सामंतवाद और काला धन - श्रीमती विमल सिंह
भारत में नव-सामंतवाद और काला धन - श्रीमती विमल सिंह
https://lh3.googleusercontent.com/-PnU1JDghSEw/WCbOGBtwl4I/AAAAAAAAxCg/6VLgZLRbL-Y/image_thumb%25255B1%25255D.png?imgmax=800
https://lh3.googleusercontent.com/-PnU1JDghSEw/WCbOGBtwl4I/AAAAAAAAxCg/6VLgZLRbL-Y/s72-c/image_thumb%25255B1%25255D.png?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2016/11/blog-post_72.html
https://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/2016/11/blog-post_72.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय खोजें सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है चरण 1: साझा करें. चरण 2: ताला खोलने के लिए साझा किए लिंक पर क्लिक करें सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ