रचनाकार में खोजें -
 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें.

हिंदी कहानी ओर पेशेवर मर्सियाबाज - डॉ. माहेश्वर

SHARE:

(प्रस्तुत टिप्पणी सारिका, फरवरी, 1986 से साभार ली गई है. तीन दशक बीत जाने के बाद क्या हिंदी कहानी का परिदृश्य कुछ बदला है? पढ़ें और अपने व...

image

(प्रस्तुत टिप्पणी सारिका, फरवरी, 1986 से साभार ली गई है. तीन दशक बीत जाने के बाद क्या हिंदी कहानी का परिदृश्य कुछ बदला है? पढ़ें और अपने विचार दें.)

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से ही कहानी हिंदी साहित्य की केंद्रीय विधा रही है, पर इधर कुछ समय से कहानी पर हूँ प्रश्नचिह्न भी लगते रहे हैं..

'सारिका' ने पांच कथा-पीढी विशेषांकों और दो संयुक्त पीढी विशेषांकों में आज की हिंदी कहानी के स्वरूप तथा उसकी संवेदना को तलाश करने की कोशिश की है. यह कोशिश कितनी कारगर साबित हुई है, इस संदर्भ को लेकर चल रही बहस में अब तक आप -योगेश गुप्त, पुष्पपाल सिंह और बटरोही के आलेख पढ ही चुके हैं. इस अंक में प्रस्तुत हैं कथाकार, आलोचक डॉ. माहेश्वर के विचार

हिंदी कहानी फिर केंद्र में आ रही है, पाठक से जुड रही है, अपनी मध्यवित्तीय खुजली का इलाज कर रही है, और भारतीय जीवन की गलाजत और सौंदर्य से आंखें चार कर रही है. तो उसकी मौत के पैगंबरों और उसका कफन खसोटने वाले मर्सियाबाजों के दिल में फिर हूक उठी है, फिर वे श्मशान के सियारों की तरह एक स्वर में रोने लगे हैं.

इन्हें तकलीफ यह है कि उनके पूर्वजों ने कहानी का मांस नोच कर उसकी ठठरी को _ - ग्लास -टैंकों में और 'मरने की जगहों’ पर ला पटका था, तो कुछ लोग फिर से उसे जीवित करने की कोशिश क्यों कर रहे हैं? जन सामान्य के पास उसकी जो भी सांस्कृतिक धरोहर बची है; - उसे लूट कर तह-खानों में बंद करने की जो - इयूटी इन्हें सौंपी गयी है उसे अंजाम देने के लिए ये फिर कमर कस कर खड़े हो गये हैं. ये चाहते हैं कहानी ,फिर 'अमूर्त अवधारणाओं के लिए रहस्यवाद में सिमट जाय, ये कहानी को उस धारा "के साथ जोडना चाहते हैं जो इतिहास से कट कर _ कविता की तरह 'अमूर्त-बिंबों द्वारा मानव नियति और काल के रहस्यमय भीतरी संबंधों को जांचती रहे और एक आडी तिरछी गति में लगभग एक ही बिंदु के चारों और घूमती दिखाई पडे' (मृणाल पांडे-सारिका 16-31 अक्तूबर, 1985). जिन कहानियों में 'कथानक के घटनाक्रम पर उसके कथानक के विकास का क्रम सहज, रेखिक और आदि मध्य अंत से युक्त रहता है' और जो _ प्रेमचंद की परंपरा को आगे बढाती है उसे ये लोग घटिया कहानी मानते हैं-कम से कम अमूर्त अवधारणाओं वाली, अमूर्त बिंबों वाली, तथाकथित काव्यमय अंतर्दृष्टि वाली कहानी की तुलना में तो निश्चय ही घटिया मानते हैं.

_ हिंदी कहानी के 'एक निराशाजनक पीढ़ी बोघ' _ वाले कथाकार समीक्षक को लगता है कि हम सब . जितने संपन्न दिखायी देते थे अब उतने ही दरिद्र _ दिखायी देते हैं और 'आजादी के बाद की हिंदी _ कहानी को रेखांकित करने के लिए हमारे पास नई _ कहानी दौर के बाद की एक भी कहानी नहीं है.' . (बटरोही, सारिका। -15 फरवरी 1986). आज जबकि पिछले पंद्रह वर्षों में कहानी 'अकहानी की नपुंसक अराजकतावाद, नई कहानी की परवर्ती व्यक्तिवादी रूझान और कीमियागिरी, संचेतन कहानी की गुटबाजी और धूर्त फतवेबोजी सक्रिय कहानी जैसे भोंथरे और लुंपेनशैली के अवसरवाद से अपना पीछा छुडाकर फिर से प्रेमचंद की सामाजिक और ऐतिहासिक वाली सहज, सरल और जनप्रिय भावधारा के नजदीक आ रही है, जब व्यक्तिवादी रचना दृष्टि वाले कथाकार सामाजिक चेतना के स्वरूप को पकड़ने की कोशिश कर रहे हैं और कठमुल्ला समाजद्ष्टि के रचनाकार फार्मूलेबाजी और सपाट कथन की अवधारणात्मक कहानियां लिखना छोडकर जीवन की संश्लिष्टता और गहराई को अपनी रचनाओं का मूल :स्वर बना रहे हैं, जब कहानी आम पाठक को नये सिरे से आकर्षित-करने लगी है और उसकी चेतना में कहानी के माध्यम से सामाजिक सच्चाइयों का सजीव खाका बनना शुरू हुआ, तब फिर एक बारी सातवें दशक उत्तरार्द्ध के वर्षों की तरह लंबी तान कर सोये हुए मर्सियाबाज अपनी छातियां कूटने निकल पडे हैं.

हिंदी कहानी को 'हाशिए पर' डाल आने वाले एक नामवर कहानी आलोचक अब फिर सक्रिय हुए हैं और उन्हें फिर से सिर्फ निर्मल वर्मा, 'नई कहानी' आंदोलन की उपलब्धि लगने लगे हैं.

(हाय श्रीकांत जी, हाय राजेंद्र जी, हाय कमलेश्वर जी.) और परवर्ती कहानीकारों में सिर्फ चार, ज्ञानरंजन, काशीनाथ, स्वयंप्रकाश और असगर वजाहत. निर्मल वर्मा, जो प्राय: बीस वर्ष पहले गिनती की कहानियां (जिनमें 'लंदन की एक रात' जैसी बेहतर कहानियां भी थीं) लिखकर चुक गये और ज्ञानरंजन' (जिन्होंने 'घंटा'' और 'बहिर्गमन' के बाद शायद एक भी कहानी अच्छी या बुरी) नहीं लिखी, फिर भी 'पहल' जैसी बेहतर पत्रिका निकाल रहे हैं, काशीनाथ जो 'कालकथा', 'लोग बिस्तरों पर', और दूसरी एक दर्जन अच्छी कहानियां लिखने के बाद आज कहानी में फैंटे की. गुहार लगा रहे हैं. (सदी का सबसे बडा - आदमी-रविवार दीपावली विशेषांक), स्वयंप्रकाश और असगर वजाहत, जो लगात्तार अपना एक ' मध्यम स्तर बनाये हुए ही अगर हिंदी कहानी के नामलेवा हैं तो सारिका के सात विशेषांकों में प्रकाशित किये गये प्राय: एक सौ कथाकारों को किस खाते में डाला जाये?

कहानी की विकास यात्रा की समझ पर धूल डालने की ये कोशिशें कारगर नहीं होंगी, क्योंकि आज का कथाकार जीवन और उसके भोक्ता तथा स्रष्टा आदमी की नियति से जुडे रहने की अनिवार्यता अच्छी तरह समझ गया है. इस मर्सियाबाजी को एक तरफ रख कर अगर हम पिछले दिनों प्रकाशित कहानियों पर एक 'नजर डालें तो पायेंगे कि उस चीखपुकार और आतंकित कर देने वाले गर्वीले---अस्वीकार के पीछे , वस्तुगत या रचनात्मक आधार नहीं है. सारिका द्वारा प्रकाशित सात विशेषांकों में से कुछ चुनी हुई कहानियों का विश्लेषण करके कुछ दिलचस्प नतीजे निकाले जा सकते हें.

'सारिका' के 'कथापीढी विशेषांक: एक' में भैरव प्रसाद गुप्त की 'कंठी' और रामेश्वर शुक्ल 'अंचल' की 'एक्कहवा पांडे' सिद्हस्त कथाकारों की मार्मिक कहानियां हैं. जिन लोगों को 'कम्यूनिष्ट' शब्द से एलर्जी है वे भले ही गत्ती भगत को पुलिस द्वारा कम्युनिष्ट कहे जाने के कारण उस चरित्र की ऊर्जस्विता और विश्वसनीयता पर संदेह करने लग जायें. पर गत्ती भगत जैसा शक्तिशाली और सामाजिक अंतर्विरोधों को सफाई से पेश करने वाला और सामंती मूल्यों को छोडकर सच्चाई .की रक्षा के . लिए जनवादी मूल्यों को स्वीकार करने की कशमकश झेलता और अंत में जनवादी मूल्य को स्वीकारता गतिशील चरित्र पाठक के मन पर गहरी छाप छोड जाने में समर्थ है.

इसी तरह 'एक्कहवा पाडे' - में भी जड सामंती मूल्यों को नकारने वाले एक बेहद तेजस्वी चरित्र का निर्माण किया गया है बीस बिस्वा (सर्वोच्च) ब्राह्मण कुल में उत्पन्न सीताराम ने इक्का चलाने से लेकर खेतीकिसानी, लगान-वसूली के कितने-कितने पापड बेले अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए. मगर इस चरित्र की शक्ति इसकी सच्चाई मानवीयता, उदारता और कर्मठता में है. *

शुरू से आखिर तक अपनी तमाम कमियों और मूर्खताओं के बावजूद सीताराम एकदम मानवीय और सच्चा बना रहता है. पोष्य पुत्र रामकिशोर की स्वार्थपरता और मध्यवर्गीय' अमानवीयता की तुलना में सीताराम का चरित्र और' भी निस्नर उठता है.

पूरी तौर से टूटकर भी सीताराम जपने स्वाभिमान सच्चाई और त्याग को बनाये रहता है. रामकिशोर 'की मां की एकमात्र गहना एक सोने की मुहरी. वह इतने घोर दारिद्र्य के बीच भी रामकिशोर को लौटा आता है,

'कंठी' के गत्ती भगत और 'एक्कहवा पांडे' के 'सीताराम में एक गहरा अंतर है. दोनों आदर्शवादी पात्र हैँ, पर गत्ती भगत का आदर्शवाद एक सचेत सैद्धांतिक चेष्टा है, जबकि सीताराम का आदर्शवाद उसकी पूरी चेतना और जीवानुभावों का अंग बन कर आता है. गत्ती भगत एक आदर्श को विपरीत परिस्थिति में नये कोण से देखने की दृष्टि पाता है, जबकि सीताराम का आदर्श उसके व्यक्तित्व का और चेतना का एक अभिन्न अंग बन कर आता है, इसीलिए 'एक्कहवा पांडे', एक कलात्मक प्रभाष के रूप में कहीं व्यापक फलक को घेरता है. दोनों ही कहानियों में ब्यौरों के प्रति एक सजग और तीखी दृष्टि संपन्नता दिखायी देती है.

प्रेमचंद की परंपरा को प्रमचंदीय शैली में ही निभाने वाली 'कंठी' और 'एक्कहवा पांडे' के बाद एक और कहानी न केवल प्रेमचंद की परंपरा को ही आगे बढाती है, बल्कि यथार्थ को फेंटेसी में बदलकर यथार्थ को कहीं ज्यादा सांकेतिक तथा मार्मिक ढंग से पेश करती है. मुद्राराक्षस की कहानी 'कुश्ती'. यह सरल, सहज इतिवृतात्मक तथा गझिन बुनावट की जगह पारदर्शी, कई स्तरों पर. सक्रिय, यथार्थ को आधी फैंटेसी और आधे विद्रूप के धरातल पर उकेरती बहुत जरूरी ब्यौरों पर अपेक्षाकृत ज्यादा बल देती, ढेर सारे ब्यौरों को छोडकर गुजरती हुई, संजीदगी के लहजे के पीछे एक उपहास और उपहास के पीछे गहरी संजीदगी को सजाकर रखती और अपने मसखरेपन के पीछे चार्ली चैप्लिन ट्रैंप की तरह बहुत तीखी संवेदना और हंसी में लिपटी रूलाई की तरह पेश की गयी है. ऊपर से यह कहानी एक निदेशक द्वारा अपने कार्यालय के दो बाबुओं आफिस इंचार्ज दयाल और अस्थायी {प्रोबेशन पर) क्लर्क सतीश बहादुर के बीच कुश्ती करवाना बडी अटपटी-सी लगती है, प्राय: असंभव और संभव के बीच लटकी हुई-सी. पर सतीश' बहादुर का आखिर में जानबूझकर, हार जाना कि उनकी सालाना रिपोर्ट खराब कर दयाल उन्हें नौकरी से निकलवा न दे--इसको चेखवीय प्रभाव की रचना बना देती है.

कथा पीढी : तीन में नीलकांत की 'अनसुनी चीख' और रमेश उपाध्याय की "सफाइयां', काफी देर तक जेहन के भीतर तहों पर अपनीं अनुगूंज _ बनाये रखने में समर्थ हैं. 'अनसुनी चीख' की . सोनबरसा जमीन के लिए तहसीलदार, प्रधान और नायब के सामने अपना शरीर परोस देती 'है और जमीन भी कितनी – पच्चीस डिसमिल. दस-बीस बीघे नहीं. प्रश्न यह नहीं है कि सोनबरसा 'पहले इसे खुद स्वीकारती है तो फिर छटपटाती क्यों है (किसी पाठन ने शायद ऐसा कहा था) देखना यह है कि एक गरीब छोटी जात की औरत कैसे गांव के सामंती और नौकरशाही शक्तियों के गठजोड़ द्वारा नोची और खायी जा रही है और उनके नखों-दांतों के बीच फंसी सोनबरसा की चीख जितनी दहशतनाक है उतनी ही गिरिराज किशोर की 'चीख' कहानी में मंत्री के दूरदर्शन कार्यक्रम में दूर से आतीं राष्ट्र आत्मा की चीख यांत्रिक और चमत्कार जैसी, कथाकार की अवधारणात्मक सोच से जुटायी हुई, जमीन के लिए अपने शरीर को उन कसाईयों को परोसने को मजबूर सोनबरसा से जन् प्रधान कहता है कि 'जमीन तुझे दे दी गई, इतने पर भी तू छटपटाती है, सोनबरसा, अब खुश हो जा, तू हम सबकी जमीन है.' तो कथाकार एक निष्ठुर और धृणित यथार्थ को हमारे सामने अपनी पूरी भयानकता में खोल देता है सामंती नौकरशाही गठजोड द्वारा जमीन और औरत की यह निर्मम लूट यह भी प्रमाणित करती है कि सामंती मूल्यविधान में औरत जमीन की तरह ही एक मित्कियत है, जिसका हर तरह दोहन करना उच्च वर्ग के .पुरुषों का अधिकार है. कहानी पूर्णतया यथार्थवादी शैली में कही गयी है, और इसमें हर विवरण को बहुत कलात्मकता और चुस्ती के साथ रखा गया है जो एक विशेष प्रभाव को गहराता हुआ पेड्र के नीचे पडी एक मैली कथरी के बिंब तक तो जाकर सोनबरसा की जिंदगी की वीभत्सता और व्यर्थता की 'और संकेत करता है! काश: उसके बाद, का वाक्य कहानीकार न लिखता.

'सफाइयां' एक दूसरे तरह के रचनाकौशल का प्रमाण देती है. नगरों में नवधनाद्य वर्ग की कुत्सित दलाल मनोवृत्ति और चरम ' मूल्यहीनता के साथ शासक वर्गों के राजनीतिक दबदबे 'का फायदा उठाकर धन कमाने और हर स्थिति को अपने पक्ष में इस्तेमाल कर ले जाने के काइयेपन को बेहद प्रभावशाली ढंग से यह कहानी पेश करती है. पत्नी को जल कर मर जाने को मजबूर करने वाला, अपनी युवा साली को रखैल बना लेने वाला सुरिंदर कुमार खुद अपनी पत्नी को न केवल उसकी मौत का बल्कि अपने नैतिक पतन का भी जिम्मेदार बना देता है. शहर का यह पढा-लिखा मध्य-वर्ग कितने शातिरपने से नैतिकता और' कानून का दांव देकर अपनी- स्वार्थसिद्धि करता है, यह इस कहानी की विषयवस्तु है.

इस कहानी में अदभुत शिल्प का सहारा लिया गया है. मुख्य पात्र सुरिंदर कुमार अपने व्यवहार की सफाई खुद प्रस्तुत करता है और पूरी मुस्तैदी से अपना पक्ष प्रस्तुत करता है, पर जैसे-जैसे वह अपनी सफाई देता है वैसे-वैसे ही वह बेनकाब होता जाता है. वह न केवल खुद को बल्कि अपने जैसे एक पूरे समुदाय के जीवन के खोखलेपन, अनैतिकता ओर पाखंड को उजागर करता है.

श्लेषपरक एकालाप शैली में लिखी यह लंबी कहानी आरंभ से अंत तक पाठक को बांधे रहने में समर्थ है. एक खास तरह की दिल्ली की बहुप्रचलित वार्तालाप शैली का इसमें रोचक तथा सार्थक प्रयोग किया गया है. यह. भाषा कथ्य को बेहद धारदार बनाने में सहायक हुई है. _

_ 'कथा-पीद्री विशेषांक ¦ चार' में गोविंद मिश्र की 'मायकल लोबो' और राजी सेठ की ' 'यात्रामुक्त' कहानी-कला के बेहतर उदाहरण हैं;

घटनाविहीन कथ्य की ब्रजेश्वर मदान की अपनी वशिष्ट शैली में लिखी पिल्ला भी उल्लेखनीय है. मायकल लोबो बेहद सघे हुए शिल्प की गहन मानवीय संवेदना की कहानी है, एकदम सांचे ढली हुई तो राजी सेठ की 'यात्रामुक्त' वर्गीय प्रनीवृति के अवर्विरोधों में फंसे नौकर और मालिक के बीच के अतर्विरोधों के मध्य दो पीढियों के आपसी अंतर्संबंधों की काफी गहराई में जाकर पड़ताल करती है, ये दोनों ही कहानियां भाषिक संयोजन और तीव्रता की अदभुत मिसालें हैं.

'कथा पीढी विशेषांक ¦ पांच' इस श्रृंखला की सबसे मजबूत कड़ी है. इस अंक में बेहतर कलासृष्टि और रचनात्मक संयम के साथ साथ अपेक्षाकृत युवा कथाकारों के तीखे तेवर देखने को मिलते हैं, संजीव की "पिशाच", अब्दुल बिस्मिल्लाह की 'अतिथि देवो भव', सुरेंद्र सुकुमार की 'चल खूसरो घर आपने, नासिरा शर्मा की 'सिक्का', पुन्नी सिंह की 'शोक' और प्रियंवद की 'बूढ़ा फिर उदास है" बेहतरीन कथालेखन के उदाहरण हैँ, इन तमाम कहानियों की विशेषता है गहरा कलात्मक संयम और व्यंजना और जीवन के रंगों की विविधता तथा व्यापकता'

संजीव की कहानी का मानवीय त्रासदी और क्लासिकी रचना वैभव, अब्दुल बिस्मिल्लाह की कहानी का तनी हुई रस्सी जैसा माहौल और एक हल्की छुअन से जीवन स्थितियों को उजागर करती कलम, सुरेंद्र सुकुमार की थोडी 'लाउड" पर गहरी मानवीय यातना में से रचनात्मकता, नासिरा की अत्यंत गहरी आत्मा के सौरभ और वेदना से सिक्त औरत की दुनिया की कहानी, पुन्नी सिंह की व्यापक व्यंग्य और तीखी समाज-दष्टि नयी पीढी के रचनाकार की ताजगी और संभावनाओं को पूरी तरह प्रमाणित करती हैँ.

संयुक्त पीढ़ी विशेषांक : एक इन विशेषांक की कडी का सबसे कमजोर अंक है. इसमें अपेक्षाकृत नये लोगों की कहानियां ही आश्वस्त करती हैँ. जैसे अभय की 'कतार', स्नेह मोहनीज् की 'एक लडकी अकेली' और उदयन वाजपेयी की "चेहरे.

संयुक्त पीढी विशेषांक : दो, में नयी और पुरानी दोनों पीढियों की कुछ अच्छी कहानियां आती हैं. इस अंक की सबसे बेहतर कहानियां कुंदन सिंह परिहार की बिरादरी और शशिप्रभा शास्त्री की 'ये छोटे महायुद्ध. आशीष सिन्हा की ‘अपने लोगों के बीच’. बदिउज्जमा की ‘हसब-नसब’, वीरेंद्र मेंहदीरत्ता की ‘उमंग’ और चित्रा मुद्गल की ‘ब्लेड’ भी नए भावबोध की गहराई और मानवीय रिश्तों की क्रूरता और ममत्व को जितनी गहराई और सूक्ष्मता के साथ ‘बिरादरी’ और ‘ये छोटे महायुद्ध’ में चित्रित किया गया है वह उन कहानियों को विशिष्टता प्रदान करती है.

COMMENTS

BLOGGER
---*---

-----****-----

|नई रचनाएँ_$type=complex$tbg=rainbow$count=6$page=1$va=0$au=0

विज्ञापन --**--

|कथा-कहानी_$type=complex$tbg=rainbow$au=0$count=6$page=1$src=random-posts$s=200

|हास्य-व्यंग्य_$type=blogging$au=0$count=6$page=1$src=random-posts

-- विज्ञापन --

---

|लोककथाएँ_$type=complex$tbg=rainbow$au=0$count=6$page=1$src=random-posts

|लघुकथाएँ_$type=list$au=0$count=5$com=0$page=1$src=random-posts

|काव्य जगत_$type=complex$tbg=rainbow$au=0$count=6$page=1$src=random-posts

-- विज्ञापन --

---

|बच्चों के लिए रचनाएँ_$type=complex$tbg=rainbow$au=0$count=6$page=1$src=random-posts

|विविधा_$type=complex$tbg=rainbow$au=0$va=0$count=6$page=1$src=random-posts

 आलेख कविता कहानी व्यंग्य 14 सितम्बर 14 september 15 अगस्त 2 अक्टूबर अक्तूबर अंजनी श्रीवास्तव अंजली काजल अंजली देशपांडे अंबिकादत्त व्यास अखिलेश कुमार भारती अखिलेश सोनी अग्रसेन अजय अरूण अजय वर्मा अजित वडनेरकर अजीत प्रियदर्शी अजीत भारती अनंत वडघणे अनन्त आलोक अनमोल विचार अनामिका अनामी शरण बबल अनिमेष कुमार गुप्ता अनिल कुमार पारा अनिल जनविजय अनुज कुमार आचार्य अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ अनुज खरे अनुपम मिश्र अनूप शुक्ल अपर्णा शर्मा अभिमन्यु अभिषेक ओझा अभिषेक कुमार अम्बर अभिषेक मिश्र अमरपाल सिंह आयुष्कर अमरलाल हिंगोराणी अमित शर्मा अमित शुक्ल अमिय बिन्दु अमृता प्रीतम अरविन्द कुमार खेड़े अरूण देव अरूण माहेश्वरी अर्चना चतुर्वेदी अर्चना वर्मा अर्जुन सिंह नेगी अविनाश त्रिपाठी अशोक गौतम अशोक जैन पोरवाल अशोक शुक्ल अश्विनी कुमार आलोक आई बी अरोड़ा आकांक्षा यादव आचार्य बलवन्त आचार्य शिवपूजन सहाय आजादी आदित्य प्रचंडिया आनंद टहलरामाणी आनन्द किरण आर. के. नारायण आरकॉम आरती आरिफा एविस आलेख आलोक कुमार आलोक कुमार सातपुते आशीष कुमार त्रिवेदी आशीष श्रीवास्तव आशुतोष आशुतोष शुक्ल इंदु संचेतना इन्दिरा वासवाणी इन्द्रमणि उपाध्याय इन्द्रेश कुमार इलाहाबाद ई-बुक ईबुक ईश्वरचन्द्र उपन्यास उपासना उपासना बेहार उमाशंकर सिंह परमार उमेश चन्द्र सिरसवारी उमेशचन्द्र सिरसवारी उषा छाबड़ा उषा रानी ऋतुराज सिंह कौल ऋषभचरण जैन एम. एम. चन्द्रा एस. एम. चन्द्रा कथासरित्सागर कर्ण कला जगत कलावंती सिंह कल्पना कुलश्रेष्ठ कवि कविता कहानी कहानी संग्रह काजल कुमार कान्हा कामिनी कामायनी कार्टून काशीनाथ सिंह किताबी कोना किरन सिंह किशोरी लाल गोस्वामी कुंवर प्रेमिल कुबेर कुमार करन मस्ताना कुसुमलता सिंह कृश्न चन्दर कृष्ण कृष्ण कुमार यादव कृष्ण खटवाणी कृष्ण जन्माष्टमी के. पी. सक्सेना केदारनाथ सिंह कैलाश मंडलोई कैलाश वानखेड़े कैशलेस कैस जौनपुरी क़ैस जौनपुरी कौशल किशोर श्रीवास्तव खिमन मूलाणी गंगा प्रसाद श्रीवास्तव गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर ग़ज़लें गजानंद प्रसाद देवांगन गजेन्द्र नामदेव गणि राजेन्द्र विजय गणेश चतुर्थी गणेश सिंह गांधी जयंती गिरधारी राम गीत गीता दुबे गीता सिंह गुंजन शर्मा गुडविन मसीह गुनो सामताणी गुरदयाल सिंह गोरख प्रभाकर काकडे गोवर्धन यादव गोविन्द वल्लभ पंत गोविन्द सेन चंद्रकला त्रिपाठी चंद्रलेखा चतुष्पदी चन्द्रकिशोर जायसवाल चन्द्रकुमार जैन चाँद पत्रिका चिकित्सा शिविर चुटकुला ज़कीया ज़ुबैरी जगदीप सिंह दाँगी जयचन्द प्रजापति कक्कूजी जयश्री जाजू जयश्री राय जया जादवानी जवाहरलाल कौल जसबीर चावला जावेद अनीस जीवंत प्रसारण जीवनी जीशान हैदर जैदी जुगलबंदी जुनैद अंसारी जैक लंडन ज्ञान चतुर्वेदी ज्योति अग्रवाल टेकचंद ठाकुर प्रसाद सिंह तकनीक तक्षक तनूजा चौधरी तरुण भटनागर तरूण कु सोनी तन्वीर ताराशंकर बंद्योपाध्याय तीर्थ चांदवाणी तुलसीराम तेजेन्द्र शर्मा तेवर तेवरी त्रिलोचन दामोदर दत्त दीक्षित दिनेश बैस दिलबाग सिंह विर्क दिलीप भाटिया दिविक रमेश दीपक आचार्य दुर्गाष्टमी देवी नागरानी देवेन्द्र कुमार मिश्रा देवेन्द्र पाठक महरूम दोहे धर्मेन्द्र निर्मल धर्मेन्द्र राजमंगल नइमत गुलची नजीर नज़ीर अकबराबादी नन्दलाल भारती नरेंद्र शुक्ल नरेन्द्र कुमार आर्य नरेन्द्र कोहली नरेन्‍द्रकुमार मेहता नलिनी मिश्र नवदुर्गा नवरात्रि नागार्जुन नाटक नामवर सिंह निबंध नियम निर्मल गुप्ता नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’ नीरज खरे नीलम महेंद्र नीला प्रसाद पंकज प्रखर पंकज मित्र पंकज शुक्ला पंकज सुबीर परसाई परसाईं परिहास पल्लव पल्लवी त्रिवेदी पवन तिवारी पाक कला पाठकीय पालगुम्मि पद्मराजू पुनर्वसु जोशी पूजा उपाध्याय पोपटी हीरानंदाणी पौराणिक प्रज्ञा प्रताप सहगल प्रतिभा प्रतिभा सक्सेना प्रदीप कुमार प्रदीप कुमार दाश दीपक प्रदीप कुमार साह प्रदोष मिश्र प्रभात दुबे प्रभु चौधरी प्रमिला भारती प्रमोद कुमार तिवारी प्रमोद भार्गव प्रमोद यादव प्रवीण कुमार झा प्रांजल धर प्राची प्रियंवद प्रियदर्शन प्रेम कहानी प्रेम दिवस प्रेम मंगल फिक्र तौंसवी फ्लेनरी ऑक्नर बंग महिला बंसी खूबचंदाणी बकर पुराण बजरंग बिहारी तिवारी बरसाने लाल चतुर्वेदी बलबीर दत्त बलराज सिंह सिद्धू बलूची बसंत त्रिपाठी बातचीत बाल कथा बाल कलम बाल दिवस बालकथा बालकृष्ण भट्ट बालगीत बृज मोहन बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष बेढब बनारसी बैचलर्स किचन बॉब डिलेन भरत त्रिवेदी भागवत रावत भारत कालरा भारत भूषण अग्रवाल भारत यायावर भावना राय भावना शुक्ल भीष्म साहनी भूतनाथ भूपेन्द्र कुमार दवे मंजरी शुक्ला मंजीत ठाकुर मंजूर एहतेशाम मंतव्य मथुरा प्रसाद नवीन मदन सोनी मधु त्रिवेदी मधु संधु मधुर नज्मी मधुरा प्रसाद नवीन मधुरिमा प्रसाद मधुरेश मनीष कुमार सिंह मनोज कुमार मनोज कुमार झा मनोज कुमार पांडेय मनोज कुमार श्रीवास्तव मनोज दास ममता सिंह मयंक चतुर्वेदी महापर्व छठ महाभारत महावीर प्रसाद द्विवेदी महाशिवरात्रि महेंद्र भटनागर महेन्द्र देवांगन माटी महेश कटारे महेश कुमार गोंड हीवेट महेश सिंह महेश हीवेट मानसून मार्कण्डेय मिलन चौरसिया मिलन मिलान कुन्देरा मिशेल फूको मिश्रीमल जैन तरंगित मीनू पामर मुकेश वर्मा मुक्तिबोध मुर्दहिया मृदुला गर्ग मेराज फैज़ाबादी मैक्सिम गोर्की मैथिली शरण गुप्त मोतीलाल जोतवाणी मोहन कल्पना मोहन वर्मा यशवंत कोठारी यशोधरा विरोदय यात्रा संस्मरण योग योग दिवस योगासन योगेन्द्र प्रताप मौर्य योगेश अग्रवाल रक्षा बंधन रच रचना समय रजनीश कांत रत्ना राय रमेश उपाध्याय रमेश राज रमेशराज रवि रतलामी रवींद्र नाथ ठाकुर रवीन्द्र अग्निहोत्री रवीन्द्र नाथ त्यागी रवीन्द्र संगीत रवीन्द्र सहाय वर्मा रसोई रांगेय राघव राकेश अचल राकेश दुबे राकेश बिहारी राकेश भ्रमर राकेश मिश्र राजकुमार कुम्भज राजन कुमार राजशेखर चौबे राजीव रंजन उपाध्याय राजेन्द्र कुमार राजेन्द्र विजय राजेश कुमार राजेश गोसाईं राजेश जोशी राधा कृष्ण राधाकृष्ण राधेश्याम द्विवेदी राम कृष्ण खुराना राम शिव मूर्ति यादव रामचंद्र शुक्ल रामचन्द्र शुक्ल रामचरन गुप्त रामवृक्ष सिंह रावण राहुल कुमार राहुल सिंह रिंकी मिश्रा रिचर्ड फाइनमेन रिलायंस इन्फोकाम रीटा शहाणी रेंसमवेयर रेणु कुमारी रेवती रमण शर्मा रोहित रुसिया लक्ष्मी यादव लक्ष्मीकांत मुकुल लक्ष्मीकांत वैष्णव लखमी खिलाणी लघु कथा लघुकथा लतीफ घोंघी ललित ग ललित गर्ग ललित निबंध ललित साहू जख्मी ललिता भाटिया लाल पुष्प लावण्या दीपक शाह लीलाधर मंडलोई लू सुन लूट लोक लोककथा लोकतंत्र का दर्द लोकमित्र लोकेन्द्र सिंह विकास कुमार विजय केसरी विजय शिंदे विज्ञान कथा विद्यानंद कुमार विनय भारत विनीत कुमार विनीता शुक्ला विनोद कुमार दवे विनोद तिवारी विनोद मल्ल विभा खरे विमल चन्द्राकर विमल सिंह विरल पटेल विविध विविधा विवेक प्रियदर्शी विवेक रंजन श्रीवास्तव विवेक सक्सेना विवेकानंद विवेकानन्द विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक विश्वनाथ प्रसाद तिवारी विष्णु नागर विष्णु प्रभाकर वीणा भाटिया वीरेन्द्र सरल वेणीशंकर पटेल ब्रज वेलेंटाइन वेलेंटाइन डे वैभव सिंह व्यंग्य व्यंग्य के बहाने व्यंग्य जुगलबंदी व्यथित हृदय शंकर पाटील शगुन अग्रवाल शबनम शर्मा शब्द संधान शम्भूनाथ शरद कोकास शशांक मिश्र भारती शशिकांत सिंह शहीद भगतसिंह शामिख़ फ़राज़ शारदा नरेन्द्र मेहता शालिनी तिवारी शालिनी मुखरैया शिक्षक दिवस शिवकुमार कश्यप शिवप्रसाद कमल शिवरात्रि शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी शीला नरेन्द्र त्रिवेदी शुभम श्री शुभ्रता मिश्रा शेखर मलिक शेषनाथ प्रसाद शैलेन्द्र सरस्वती शैलेश त्रिपाठी शौचालय श्याम गुप्त श्याम सखा श्याम श्याम सुशील श्रीनाथ सिंह श्रीमती तारा सिंह श्रीमद्भगवद्गीता श्रृंगी श्वेता अरोड़ा संजय दुबे संजय सक्सेना संजीव संजीव ठाकुर संद मदर टेरेसा संदीप तोमर संपादकीय संस्मरण संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018 सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन सतीश कुमार त्रिपाठी सपना महेश सपना मांगलिक समीक्षा सरिता पन्थी सविता मिश्रा साइबर अपराध साइबर क्राइम साक्षात्कार सागर यादव जख्मी सार्थक देवांगन सालिम मियाँ साहित्य समाचार साहित्यिक गतिविधियाँ साहित्यिक बगिया सिंहासन बत्तीसी सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध सीताराम गुप्ता सीताराम साहू सीमा असीम सक्सेना सीमा शाहजी सुगन आहूजा सुचिंता कुमारी सुधा गुप्ता अमृता सुधा गोयल नवीन सुधेंदु पटेल सुनीता काम्बोज सुनील जाधव सुभाष चंदर सुभाष चन्द्र कुशवाहा सुभाष नीरव सुभाष लखोटिया सुमन सुमन गौड़ सुरभि बेहेरा सुरेन्द्र चौधरी सुरेन्द्र वर्मा सुरेश चन्द्र सुरेश चन्द्र दास सुविचार सुशांत सुप्रिय सुशील कुमार शर्मा सुशील यादव सुशील शर्मा सुषमा गुप्ता सुषमा श्रीवास्तव सूरज प्रकाश सूर्य बाला सूर्यकांत मिश्रा सूर्यकुमार पांडेय सेल्फी सौमित्र सौरभ मालवीय स्नेहमयी चौधरी स्वच्छ भारत स्वतंत्रता दिवस स्वराज सेनानी हबीब तनवीर हरि भटनागर हरि हिमथाणी हरिकांत जेठवाणी हरिवंश राय बच्चन हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन हरिशंकर परसाई हरीश कुमार हरीश गोयल हरीश नवल हरीश भादानी हरीश सम्यक हरे प्रकाश उपाध्याय हाइकु हाइगा हास-परिहास हास्य हास्य-व्यंग्य हिंदी दिवस विशेष हुस्न तबस्सुम 'निहाँ' biography dohe hindi divas hindi sahitya indian art kavita review satire shatak tevari undefined
नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3793,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,326,ईबुक,182,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,257,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,105,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2744,कहानी,2069,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,484,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,129,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,30,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,87,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,22,पाठकीय,61,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,309,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,326,बाल कलम,23,बाल दिवस,3,बालकथा,48,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,8,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,16,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,224,लघुकथा,806,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,306,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,57,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1882,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,637,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,676,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,14,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,52,साहित्यिक गतिविधियाँ,181,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,51,हास्य-व्यंग्य,52,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: हिंदी कहानी ओर पेशेवर मर्सियाबाज - डॉ. माहेश्वर
हिंदी कहानी ओर पेशेवर मर्सियाबाज - डॉ. माहेश्वर
https://lh3.googleusercontent.com/-WTV6Nvv9PzI/WHDPTdxgttI/AAAAAAAAyEw/PGr-K9dmRwg/image_thumb.png?imgmax=800
https://lh3.googleusercontent.com/-WTV6Nvv9PzI/WHDPTdxgttI/AAAAAAAAyEw/PGr-K9dmRwg/s72-c/image_thumb.png?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2017/01/blog-post_16.html
https://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/2017/01/blog-post_16.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय खोजें सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है चरण 1: साझा करें. चरण 2: ताला खोलने के लिए साझा किए लिंक पर क्लिक करें सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ