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रमेशराज के शिक्षाप्रद बालगीत

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---------------------------------------------- || हमको कहते तितली रानी || -------------------------------------- नाजुक-नाजुक पंख हमारे रं...

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|| हमको कहते तितली रानी ||
--------------------------------------
नाजुक-नाजुक पंख हमारे
रंग-विरंगे प्यारे-प्यारे।
इन्द्रधनु ष-सी छटा निराली
हम डोलें फूलों की डाली।

फूलों-सी मुस्कान हमारी
हम से ऋतुएँ शोख- सुहानी
हमको कहते तितली रानी।

आओ बच्चो हम सँग खेलो
छुपा-छुपी की रीति निराली।
तुम आ जाना पीछे-पीछे
हम घूमेंगे डाली-डाली।

किन्तु पकड़ना हमको छोड़ो
सिर्फ दूर से नाता जोड़ो।
हम हैं केवल प्रेम-दिवानी
हमको कहते तितली रानी।
+रमेशराज

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|| अब मम्मी सौगन्ध तुम्हारी ||
-----------------------------------
हम हाथों में पत्थर लेकर
और न बन्दर के मारेंगे,
समझ गये हम तभी जीत है
लूले-लँगड़ों से हारेंगे।
चाहे कुत्ता भैंस गाय हो
सब हैं जीने के अधिकारी,
दया-भाव ही अपनायेंगे
अब मम्मी सौंगंध तुम्हारी।

छोड़ दिया मीनों के काँटा
डाल-डाल कर उन्हें पकड़ना,
और बड़े-बूढ़ों के सम्मुख
त्याग दिया उपहास-अकड़ना,
जान गये तितली होती है
रंग-विरंगी प्यारी-प्यारी
इसे पकड़ना महापाप है
अब मम्मी सौंगध तुम्हारी।

खेलेंगे-कूदेंगे लेकिन
करें साथ में खूब पढ़ायी,
सोनू मोनू राधा से हम
नहीं करेंगे और लड़ाई
हम बच्चे हैं मन से सच्चे
भोलापन पहचान हमारी
अब मम्मी सौगंध तुम्हारी।
+रमेशराज


|| अब का काम न कल पै छोड़ो ||
-------------------------------------------
मीठा होता मेहनत का फल
भाग खुलेगा मेहनत के बल।

छोड़ो निंदिया, आलस त्यागो
करो पढ़ायी मोहन जागो।

आलस है ऐसी बीमारी
जिसके कारण दुनिया हारी।

मेहनत से ही सफल बनोगे
जग में ऊँचा नाम करोगे।

मेहनत भागीरथ ने की थी
पर्वत से गंगाजी दी थी।

मेहनत से तुम नाता जोड़ो
अब का काम न कल पै छोड़ो।
+रमेशराज

|| कहें आपसे हम बच्चे ||
-----------------------------------
भेदभाव की बात न हो
घायल कोई गात न हो।
पड़े न नफरत दिखलायी
रहें प्यार से सब भाई।
करें न आँखें नम बच्चे
कहें आपसे हम बच्चे।

हम छोटे हैं- आप बड़े
यदि यूँ ही अलगाव गढ़े
नहीं बचेगी मानवता
मुरझायेगी प्रेम-लता
झेलेंगे हम ग़म बच्चे
कहें आपसे हम बच्चे।
+रमेशराज

|| हम बच्चों की बात सुनो ||
--------------------------------------
करे न कोई घात सुनो
हम बच्चों की बात सुनो।

बन जायेंगे हम दीपक
जब आयेगी रात सुनो।

हम हिन्दू ना मुस्लिम हैं
हम हैं मानवजात सुनो।

नफरत या दुर्भावों की
हमें न दो सौगात सुनो।

सचहित विष को पी लेंगे
हम बच्चे सुकरात सुनो।
+रमेशराज

|| हम बच्चे ||
---------------------------------
हम बच्चे हर दम मुस्काते
नफरत के हम गीत न गाते।

मक्कारी से बहुत दूर हैं
हम बच्चों के रिश्ते-नाते।

दिन-भर सिर्फ प्यार की नावें
मन की सरिता में तैराते।

दिखता जहाँ कहीं अँधियारा
दीप सरीखे हम जल जाते।

बड़े प्रदूषण लाते होंगे
हम बच्चे वादी महँकाते।
+रमेशराज

|| अब कर तू विज्ञान की बातें ||
------------------------------------------
परी लोक की कथा सुना मत
ओरी प्यारी-प्यारी  नानी,
झूठे सभी भूत के किस्से
झूठी है हर प्रेत-कहानी।|

इस धरती की चर्चा कर तू
बतला नये ज्ञान की बातें
कैसे ये दिन निकला करता
कैसे फिर आ जातीं रातें?
क्यों होता यह वर्षा-ऋतु में
सूखा कहीं-कही पै पानी।|
कैसे काम करे कम्प्यूटर
कैसे चित्र दिखे टीवी पर
कैसे रीडिंग देता मीटर
अब कर तू विज्ञान की बातें
छोड़ पुराने राजा-रानी
ओरी प्यारी-प्यारी  नानी,
+रमेशराज

|| हम बच्चे हममें पावनता ||
----------------------------------------
मुस्काते रहते हम हरदम
कुछ गाते रहते हम हरदम
भावों में अपने कोमलता
खिले कमल-सा मन अपना है ।

मीठी-मीठी बातें प्यारी
मन मोहें मुस्कानें प्यारी
हम बच्चे हममें पावनता
गंगाजल-सा मन अपना है ।

जो फुर-फुर उड़ता रहता है
बल खाता, मुड़ता रहता है’
जिसमें है खग-सी चंचलता
उस बादल-सा मन अपना है ।

सब का चित्त मोह लेते हैं
स्पर्शों का सुख देते हैं 
भरी हुई हम में उज्जवलता
मखमल जैसा मन अपना है ।
+रमेशराज

।। सही धर्म का मतलब जानो ।।
-----------------------------------
धर्म एक कविता होता है
फूलों-भरी कथा होता है

बच्चो तुमको इसे बचाना
केवल सच्चा धर्म निभाना।

यदि कविता की हत्या होगी
किसी ऋचा की हत्या होगी

बच्चो ऐसा काम न करना
कविता में मधु जीवन भरना।

सही धर्म का मतलब जानो
जनसेवा को सबकुछ मानो

यदि मानव-उपकार करोगे
जग में नूतन रंग भरोगे।

यदि तुमने यह मर्म न जाना
गीता के उपदेश जलेंगे

कुरआनों की हर आयत में
ढेरों आँसू मित्र मिलेंगे

इसीलिए बच्चो तुम जागो
घृणा-भरे चिन्तन से भागो

नफरत में मानव रोता है
धर्म एक कविता होता है।
-रमेशराज

।। अब पढ़ना है ।।
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सैर-सपाटे करते-करते
जी अब ऊब  चला
अब पढ़ना है आओ
पापा लौट चलें बंगला।

पिकनिक खूब मनायी हमने
जी अपना हर्षाया
देखे चीते भालू घोड़े
चिड़ियाघर मन भाया
तोते का मीठा स्वर लगता कितना भला-भला।
अब पढ़ना है आओ पापा लौट चलें बँगला ।|

पूड़ी और पराठे घी के
बड़े चाव से खाये
यहाँ झील, झरने पोखर
अति अपने मन को भाये
खूब बजाया चिड़ियाघर में बन्दर ने तसला।
अब पढ़ना है आओ पापा लौट चलें बँगला।|
-रमेशराज

।। हम सावन के रिमझिम बादल ।।
------------------------------------------
बहुत दिनों तक सूरज दादा
की तुमने मनमानी
गर्म-गर्म अंगारे फैंके
और सुखाया पानी।

प्यासे-प्यासे जीवजन्तु सब
नदिया नाले सूखे
लेकिन तुम ऐसा करने में
कभी न बिल्कुल चूके।

किन्तु समझ लो और इसतरह
कुछ भी नहीं चलेगा
हरा-भरा खेत बिन पानी
कोई नहीं जलेगा।

हम सावन के रिमझिम बादल
अब बरसायें पानी
हम धरती पर फूल खिलायें
खुश हो कोयल रानी।
-रमेशराज


।। माफ करो समधीजी ।।
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दूल्हा बनकर, थोड़ा तनकर,
खुश थे बंदर भाई
नाचें संगी-साथी उनके,
बजे मधुर  शहनाई।

लिए हाथ में वरमाला इक,
बंदरिया फिर  आई
दरवाजे पर दूल्हे राजा-
बंदर को पहनाई।

बदंर का बापू बोला फिर ,
‘‘बेटीवाले आओ।
क्या दोगे तुम अब दहेज में
उसकी लिस्ट बनाओ।’’

गुस्से में आकर ऐसे तब,
बोला बेटीवाला-
‘‘अब दहेज का नहीं जमाना,
क्या कहते हो लाला।

यदि की अक्कड़-बक्कड़ तुमने
फौरन पुलिस बुलाऊँ ।
पांच लाख की फौरन तुमको,
अब तो जेल दिखाऊँ ।’’

बंदर का बापू यह सुनकर,
थोड़ा-सा चकराया।
औ’ अपनी गलती पर बेहद,
शरमाया, पछताया।

बोला वह बेटीवाले से,
‘माप करो समधीजी।
माँग दहेज मैंने कर डाली
बहुत बड़ी गलती जी।’’
-रमेशराज


।। भालू की शादी ।।
------------------------------
भालू दादा की शादी में,
केवल पांच बराती।
घोड़ा, बंदर, हिरन, शेरनी,
उसके मामा हाथी।

बिन सजधज के, बिना नगाड़े,
पहुंचे दुल्हन के घर,
बेटी वाले ने खातिर की
सबकी हाथ जोड़कर।

भालू जी ने फिर दुल्हन को,
वरमाला पहनायी।
और सभी बारातीजन ने
ताली खूब बजायी।

हुयी इस तरह बहुत खुशी से
भालूजी की शादी।
दोनों तरफ बहुत ही कम थी,
पैसे की बरबादी।।
-रमेशराज

।। विकलांगों पर दया करो ।।
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अंधों  की लाठी बन जायें,
मंजिल तक इनको पहुंचायें,
इनका दुःख हो अपना ही दुःख
इनका सुख हो अपना सुख।
काम आयें कुछ तो दीनों के,
पग बन करके पग-हीनों के।

दुखियारों को मित्र बनाकर,
चलें कदम से कदम मिलाकर।
लिये बनें उच्च आदर्श
विकलांगों के मित्र सहर्ष।
-रमेशराज


।। बच्चे केवल दो ही अच्छे।।
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बन्दर मामा धूमधाम  से
शादी कर घर आये
चार साल में सोलह बच्चे
उनके घर मुस्काये |

भालू दादा बोले उनसे
सुनिए मामा बन्दर
बच्चे केवल दो ही अच्छे
होते घर के अन्दर।
-रमेशराज

।। स्वागत ऐसे नये साल का ।।
-----------------------------------
दूर करे आकर अंधियारा
जिसमें तूफां बने किनारा
मिल जाता हो जिसमें उत्तर
हर टेड़े-मेड़े सवाल का
स्वागत ऐसे नये साल का।

जो आकर छल को दुत्कारे
सत्य देख उसको पुचकारे
जिसमें फूल-फूल खिलता हो
टहनी-टहनी, डाल-डाल का
स्वागत ऐसा नये साल का।

घृणा द्वेश से दूर रहे जो
मीठी-मीठी बात कहे जो
जिसमें प्यार पनप जाता हो
लोगों में बेहद कमाल का,
स्वागत ऐसे नये साल का।

जिसमें श्रम पूजा जाता हो
मेहनतकश झट मुस्काता हो
जहाँ पसीना बन जाता हो
सोना तपते हुए भाल का,
स्वागत ऐसे नये साल का।
-रमेशराज


।। दो दहेज में एक लाख।।
----------------------------------
बंदरिया से ब्याह रचाने
पहुँचे बदर मामा
मखमल के कुर्तें संग पहना
चूड़ीदार पजामा |

बड़ी अकड़ से बोले मामा
शादी के मंडप में
दो दहेज में एक लाख यदि
ब्याह रचाऊँ तब मैं |

हाथ जोड़कर तब ये बोला
बापू बन्दरिया का
जो गरीब है एक लाख वो
क्या दे पाये बेटा।

सबने ही तब बन्दर मामा
बार-बार समझाए
बात किसी की बन्दर मामा
लेकिन समझ न पाये।

यह सुन बंदरिया तब बोली
सुनिए बात पिताजी
इस दहेज के लोभी से मैं
करूँ न बिल्कुल शादी।

देख बिगड़ती  बात तुरत ही
भागे मामा बन्दर
रस्ते में बत्तीसी टूटी
ऐसी खायी ठोकर।
-रमेशराज
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+रमेशराज, 15/109, ईसानगर , अलीगढ़-202001
मोबा.-9634551630     

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नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3841,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,336,ईबुक,192,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,257,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,105,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2786,कहानी,2116,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,486,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,30,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,90,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,22,पाठकीय,61,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,329,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,327,बाल कलम,23,बाल दिवस,3,बालकथा,50,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,9,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू 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रचनाकार: रमेशराज के शिक्षाप्रद बालगीत
रमेशराज के शिक्षाप्रद बालगीत
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