समीक्षा / व्यंग्य संग्रह / सागर मंथन चालू है :समय की कसौटी पर / कमलेश ‘कमल’

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हिंदी साहित्य आज विविध विधाओं से समृद्ध है । कहानी, निबंध ,उपन्यास आदि अपने विकास के चरम पर है । साहित्य में व्यंग्य का अपना विशिष्ट स्थान ...

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हिंदी साहित्य आज विविध विधाओं से समृद्ध है । कहानी, निबंध ,उपन्यास आदि अपने विकास के चरम पर है । साहित्य में व्यंग्य का अपना विशिष्ट स्थान है । वक्रता , उग्रता और अभिव्यंजनात्मकता के द्वारा इसने अपनी विशेष पहचान बनाई है । साहित्य, समाज की सत् असत् चितवृत्तियों ,गतिविधियों का संग्रह है । समाज की इन असत् वृत्तियों को कथा ,उपन्यास आदि के माध्यम से आइना दिखाता है : व्यंग्य । अपनी बात रखने का एक सशक्त माध्यम है : व्यंग्य ।

प्राचीन से आधुनिक काल तक चाहे कबीर हो या नागार्जुन या फिर शरद जोशी, हरिशंकर परसाई । इन सभी ने व्यंग्य के माध्यम से समाज की समस्याओं का पोस्टमार्टम किया है । आधुनिक युवा व्यंग्य जगत में श्री शशिकांत सिंह ‘शशि’ का नाम बड़े आदर से लिया जाता है । व्यंग्य जगत् में प्रसिद्धि का पैमाना संख्या या मात्रा पर नहीं लेखनी की मारक क्षमता पर निर्भर है । व्यंग्यकार शशि जी पर यह सिद्धांत अक्षरशः लागू होता है ।

समरथ को नहीं दोष (२००१ ), ऊधो ! दिन चुनाव के आए ( २००५ ) ,बटन दबाओ पार्थ (२०१३ ) सागर मंथन चालू है (२०१६ )एवं नवीनतम उपन्यास ‘प्रजातंत्र के प्रेत’ (२०१७) इनकी उल्लेखनीय रचनाएँ हैं । ‘बटन दबाओ पार्थ ‘व्यंग्य संग्रह काफी चर्चित रहा ।

हाल ही में प्रकाशित व्यंग्य संग्रह ‘सागर मंथन चालू है’ भाषा और भाव की दृष्टि से उत्कृष्ट और श्रेष्ठ रचना है । लेखक का समाज , राजनीति, प्रशासन के प्रति विस्तृत चिंतन का प्रतिफल है ।

इस संग्रह में धरती पर एक दिन, सागर मंथन चालू है, घटोत्कच, गूँगी प्रजा का वकील, एक और ईदगाह, मुर्गाबाडा ,प्लेटफॉर्म न.-४,शेखचिल्ली खड़े बाजार में आदि व्यंग्य रचनाएँ महत्त्वपूर्ण है ।

‘धरती पर एक दिन’ कहानी में सुख सुविधाभोगी देवतुल्य लोगों को आम आदमी की समस्याओं से साक्षात्कार करवाया गया है । चमत्कार रूपी भ्रष्टाचार के बिना कोई विलासितापूर्ण जीवन कैसे जी सकता है ? ईमानदारी से सरल जीवन जीना कितना कठिन और दुष्कर है । यही कहानी का कथ्य है ।

‘सागर मंथन चालू है ’ इनकी प्रतिनिधि रचना है । मिथकीयता को आधार बनाकर आधुनिक संदर्भ में सागर मंथन की कल्पना करना व्यंग्यकार की नवरचनाधर्मिता का प्रयोग नवीन दृष्टि को उजागर करता है । समाज और देश पर जिनका प्रभाव है, वे ही प्रभु है , देवता है । वे ही सारी सुख सुविधाओं के हकदार हैं । गरीब के हिस्से में केवल दुख और दुविधा है । लेखक ने तर्काधारित इस निबंध में इन सभी समस्याओं को अपने निशाने पर रखा है । आम आदमी के लिए साधन संपन्नता मृगमरीचिकावत् है ।

‘घटोत्कच’ कहानी में संवादों का सुंदर प्रयोग हुआ । घटोत्कच के माध्यम से लेखक का आक्रोश व्यक्त हुआ है । घटोत्कच वर्तमान संदर्भ में या लोकतंत्र में केवल वोट बैंक का प्रतीक बनकर उभरा है । जो राजनीति की स्वार्थपरता का मोहरा मात्र है । आज धर्म और राष्ट्रप्रेम के नाम पर न जाने कितने घटोत्कचों का जीवन दाँव पर है । यह एक विचारणीय प्रश्न है । कहानी के अंत में घटोत्कच का युद्ध के लिए तैयार होना आमजन का सत्ताधारियों के समक्ष अपनी विवशता को दर्शाता है । लोकतांत्रिक व्यवस्था की खामियों पर व्यंग्यकार की पैनी नजर अपने कथ्य में सफल होती है ।

फ्लेटफॉर्म न. ४ कहानी में शोषण, भुखमरी ,अशिक्षा ‘एक और ईदगाह’ में आर्थिक विषमता के साथ बालमन की संवेदना ‘मुर्गाबाडा’ में इंसान की स्वार्थपरता और’ शेखचिल्ली खडे बाजार में’ में बाजारवाद की प्रवृत्ति इत्यादि समस्याओं को उकेरा गया है ।

इस प्रकार ‘सागर मंथन चालू है’ व्यंग्य संग्रह में युवा व्यंग्यकार शशिकांत सिंह ‘शशि’ ने पौराणिक संदर्भों , ऐतिहासिक घटनाओं आदि को आधार बनाकर अपने बेबाक अंदाज में समाज ,प्रशासन और राजनीति की विसंगतियों , विद्रुपताओं और समाज में व्याप्त आर्थिक विषमता, असमानता ,राजनैतिक अवसरवादिता का कच्चा चिट्ठा खोला है । गंभीर से गंभीर विषय को सरल और रोचक ढंग से अभिव्यक्त करना इनके लेखन का वैशिष्ट्य है । प्रशासन और राजनीति की जटिलताएँ निरंतर कलम के निशाने पर है ।

संग्रह विषय वस्तु की दृष्टि से जितना समृद्ध है,भाषा की दृष्टि से भी उतना ही प्रौढ । भाषा भावों की अनुगामिनी है । सर्वत्र सरल भाषा का परिमार्जित और प्रांजल रूप द्रष्टव्य है । प्रसंगानुकूल और पात्रानुकूल भाषा का प्रयोग प्रशस्य है । तत्सम , तद्भव और उर्दू शब्दों का आवश्यकतानुसार प्रयोग हुआ है । ‘हातिम की हाय हाय’ में उर्दू शब्दों की रोचकता की एक बानगी-

‘‘ ऐ खुदा के नेक बंदे! यहाँ का बादशाह आवाम की फ्रिक नहीं करता है।’’

‘‘ ऐ रहमत ऐ खुदाई ! मैंने खुदा के फजल से फतह हासिल की ।’’

कहीं कहीं आंग्ल भाषा के शब्दों ने कथ्य को प्रभावी बनाया है

जैसे - यू इडियट ! गेट आउट । ( धरती पर एक दिन से )

भाषा में एक ताजगी है, जीवंतता है, एक प्रवाह है । कथाएँ लंबी है लेकिन बोझिल नहीं । पाठकों को बाँधकर रखने की क्षमता है ।

जैसे - ‘‘फुटपाथिया बच्चे चूँकि संविधान नहीं पढ़ते ,इसलिए जल्दी बालिग हो जाते हैं।’’ (फ्लेटफार्म नं.४ से )

‘‘ ऑफर और ग्राहकों में वहीं संबंध है जो गुड़ और मक्खियों में ।’’(शेखचिल्ली खड़े बाजार में )

संक्षेपतः ‘सागर मंथन चालू है’ एक प्रौढ़ और गंभीर व्यंग्य संग्रह है । भावों की विविधता ,भाषा की सरलता और शैली की रोचकता का त्रिवेणी संगम दृष्टव्य है । स्वस्थ समाज और देश के निर्माण के लिए यह संग्रह रामबाण औषधि के माफिक है जिसका सेवन हर पाठक को करना चाहिए ।

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आलोच्य पुस्तक : सागर मंथन चालू है

लेखक : शशिकांत सिंह ‘शशि’

प्रकाशक : अनंग प्रकाशन नई दिल्ली

मूल्य : २९५

कमलेश ‘कमल’

(हिंदी शिक्षक)

मु.पो. भगवतगढ

जिलाःसवाईमाधोपुर राजस्थान

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक 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मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर 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जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi 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