प्राची - जनवरी 2017 : समीक्षा / प्रेम की घनीभूत अनुभूतियाँ हैं नौ मुलाकातें / राजेन्द्र कुमार

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समीक्षा प्रेम की घनीभूत अनुभूतियाँ हैं नौ मुलाकातें राजेन्द्र कुमार क थाकार बृज मोहन यूँ तो कई वर्षों से लिख रहे हैं. उनकी कहानियाँ पत्र...

समीक्षा

प्रेम की घनीभूत अनुभूतियाँ हैं नौ मुलाकातें

राजेन्द्र कुमार

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थाकार बृज मोहन यूँ तो कई वर्षों से लिख रहे हैं. उनकी कहानियाँ पत्र-पत्रिकाओं में यदाकदा दिखाई देती थीं, पर अन्तराल इतना लम्बा कि पाठक और सम्पादक उनका नाम ही भूल जायँ. लेकिन इधर पिछले 2-3 सालों में उनकी कहानियाँ कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में एकाएक दिखाई दीं तो आश्चर्य होता है. हाल ही में उनका पहला उपन्यास ‘नौ मुलाकातें’ आया तो और भी आश्चर्य हुआ, क्योंकि उसका विषय प्रेम है. वह भी 65 वर्ष की उम्र में, जबकि उनकी कहानियों का विषय प्रायः प्रेम नहीं रहा है. उपन्यास में सात्विक प्रेम है. सात्विक इसलिए कि उपन्यास में नायक के मन में दैहिक आकर्षण है, उत्ताल काम भावनाएँ हैं, किन्तु चुम्बन, आलिंगन तो दूर की बात, नायिका को वह अपनी ओर से छू भी नहीं पाता. यही स्थितियाँ, नायक में छटपटाहट भरती हैं, जो उसे प्रगति करने को प्रेरित करती हैं. रचनाकार के भीतर शायद कोई दबी हुई प्रेमानुभूति थी, जो कहानियों में नहीं आ पायी और उपन्यास में उँडेल दी गई है.

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उपन्यास की कथावस्तु नायक-नायिका की अलग-अलग जगहों पर लगभग चालीस वर्षों की अवधि में हुई कुल नौ मुलाकातों के इर्द-गिर्द है, जो उनकी किशोर अवस्था से शुरू होकर उम्र के उत्तरार्द्ध तक अनायास व सायास होती हैं. उनमें नादान प्रेम पनपता है, जो परिस्थितिजन्य सम-विषम घटनाओं, बनते-बिगड़ते समीकरणों के बीच अस्पष्ट और अव्यक्त सा रह जाता है. लेकिन वक्त किसी के लिए रुकता नहीं है. कुछ ऐसा घटता है कि दोनों को मन मारने के लिये बाध्य होना पड़ता है. प्रेम किसी का मरता नहीं है, क्योंकि उनका प्रेम पहला होता है, जो आन्तरिक और निश्छल होता है. अतः इसे एक असफल प्रेमकथा के रूप में देखा जा सकता है.

वरिष्ठ फिल्म आलोचक जय प्रकाष चौकसे लिखते भी हैं- ‘भावना का संसार पृथ्वी से भी बड़ा होता है. प्रेम और भावना से बड़ा दुनिया में कुछ भी नहीं. प्रेम कभी मरता नहीं. हालात चाहे कैसे भी हों, वक्त का कितना भी बड़ा दरिया चाहे बीच से गुजर चुका हो. प्रेम दोनों तरफ रहता है, पर अपने किनारे नहीं तोड़ता.’

ऐसे ही उफनते प्रेम और भावनाओं का लिखित दस्तावेज उपन्यास ‘नौ मुलाकातें’ है. इसके कथानक में भावनाओं का ज्वार ऐसा आता है कि लगता है यही उपन्यास का चर्मोत्कर्ष है, लेकिन ज्वारभाटे की तरह चर्मोत्कर्ष और भी होते हैं, जिसका अनुमान साधारणतः नहीं ही होता और वे आते रहते हैं.

उपन्यास की पृष्ठभूमि में छत्तीसगढ़ व मध्यप्रदेश है. उपन्यास का अधिकांश भाग पूर्वदीप्ति में है, जिसकी शुरुआत का कालखण्ड, पिछली सदी के 80 के दशक का मालूम पड़ता है. जब फोन सबको उपलब्ध नहीं होते थे, मेल-मुलाकातों में दूरियाँ बाधक होती थीं. संवाद के माध्यम पत्र हुआ करते थे, पर उपन्यास के नायक-नायिका के बीच पत्र-संवाद भी मुश्किल. नायक जहाँ कस्बाई कुण्ठा व हीनभावनाओं के द्वन्द्वों से ग्रस्त होता है. वहीं नायिका महानगरीय सभ्यता, संस्कृति में पली सुविधा-सम्पन्न और उन्मुक्त है, किन्तु पारिवारिक बेड़ियों से मुक्त नहीं है. उनके बीच की आर्थिक खाई का सवाल ही मुखर नहीं हो पाता. परिणति में जाति-पाँति भी बाधक नहीं, बल्कि रिश्तेदारी को लेकर ही नायक की माँ ही घोर विरोधी है. रिश्ता भी ऐसा नहीं कि उनकी शादी न हो सके, पर माँ है कि समय की धूल पड़े जर्जर हो चुके उन रिश्तों को जोड़े अडिग होकर खड़ी रहती है, जिनसे कभी माँ का उपकृत थी. बचपन व भावुकतापूर्ण जुड़ाव, जिन्हें वह भूल नहीं सकती और नायिका को बहू बनना कतई स्वीकार्य नहीं. अपने परिवार को इस योग्य ही नहीं समझती. नायक का माँ से टकराव है और उनकी मान्यताओं को खण्डित करना चाहता है, पर ऐसा कुछ अकस्मात् घटता है कि वह शान्त हो जाता है. नायिका को उसकी अरुचि का पता नहीं, वह कठिन उतार-चढ़ाव झेलकर, अदम्य साहस से एक दिन अपने परिवार के सारे दवाब दरकिनार कर अपनी जीवन-मृत्यु का हवाला देकर प्रेम प्रकट करती है और प्रेमपरीक्षा के लिए किसी भी कसौटी पर चढ़ने को तैयार होती है तो नायक के पैरों तले की जमीन खिसकने लगती है. नायक किसी तरह उस विसंगति से उबरता है तो लहुलुहान नायिका फिर अचानक उसे ऐसे मोड़ पर मिलती है, जब वह दूसरी लड़की से उसी के शहर में शादी कर रहा होता है. भयभीत नायक की खुशियों में वह ग्रहण नहीं लगाती, बल्कि खून का घूँट पीकर उसकी खुशियों में खुलकर शामिल होती है. आत्मग्लानि में डूबा नायक जिन्दगी भर उसके करीब जाने से कतराता रहता है और कोशिश करने पर भी उसे भूल नहीं पाता.

सबसे खास बात है, उनकी आठ मुलाकातें एकान्त में नहीं होतीं. नौवीं मुलाकात लम्बे अन्तराल पर हो रही है, जब वे बहुत बदल चुके होते हैं. उनकी सन्तानें जवान हो चुकी होती हैं. नायक केन्द्रीय विद्यालय का प्रधानाचार्य हो चुका होता है और नायिका सम्भ्रान्त परिवार की माननीया होती है. मुलाकात चूँकि नायिका द्वारा प्रायोजित है, इसलिए नायक शंकित है कि अब क्या होगा! सिर्फ इस मुलाकात में ही दोनों को मनचाहा एकान्त मिलता है और उनके मन के अन्धेरे-उजाले पक्ष उजागर होते हैं. अजीब सी कसक दोनों को होती है. करीब होने से नायक उसे छूने का मोह करता है, किन्तु एक अदृश्य, मगर पुख्ता मर्यादित रेखा का आभास बीच में पाकर उसे रुकना पड़ता है. नायिका अपनी कसक व्यक्त करते हुये एक हो जाने का ऐसा प्रतिरूपक प्रस्ताव रखती है, जो कि नायक और उसकी पत्नी को स्वीकार करने में एतराज नहीं हो सकता था. अन्त को लेकर कहा जा सकता है कि उपन्यास को सुखान्त बनाने के लिए चल-प्रचलित फार्मूले का सहारा लिया गया, मगर यह जरूरी नहीं कि हर असफल प्रेमकहानी का अन्त दुखद ही हो.

उपन्यास का नायक स्वयं नैरेटर होने से उसकी उपस्थिति हर जगह अनिवार्य है. नायिका परोक्ष में है, उसकी भाव-भंगिमा व देहभाषा ही सम्प्रेषण का माध्यम होती है. लेकिन फिर भी उसका दिव्य चरित्र खड़ा होता है. उपन्यास को नायिका प्रधान मानने में गुरेज नहीं होना चाहिए. पात्र कम हैं, उनकी भूमिका भी कम है, लेकिन स्पष्ट और महत्वपूर्ण हैं. पात्र ऐसे ट्विस्ट पैदा करते हैं कि कथ्य में हास-परिहास, मिलन, विछोह, आसक्ति-विरक्ति बने रहते हैं और उत्सुकता जगाये रखते हैं. खास याद रह जाने वाले पात्रों में माँगीलाल, जो काया से किसी विदूषक से कम नहीं, लेकिन जबर्दस्त खलल पैदा करता है. वहीं रेवती कान्तिहीन युवती है, जो धाकड़ तो है ही और एक अच्छी सलाहकार भी है. नायक-नायिका की भावनाओं के लिये फूलों से बने एक तैरते हुए पुल का काम करती है.

जिस तरह जिन्दगी सीधी-सपाट नहीं चलती, उसी तरह उपन्यास के घटनाक्रम में भी तमाम उतार-चढ़ाव, घुमाव और पेंच आते हैं, जो कथ्य को रोचक व औत्सुक्य बनाते हैं. गहन संवेदनाओं व भावभीनी अनुभूतियों का घनत्व लिए प्रवाहमयी भाषा में उपन्यास इतना पठनीय है कि अगर बहुत जरूरी काम न हो तो एक बैठक में पढ़ने को बाध्य करता है. उपन्यास के आमुख पर प्रख्यात चित्रकार कुँवर रवीन्द्र का चित्र है, जो उपन्यास के कलेवर को अति आकर्षक बनाता है.

समीक्षक सम्पर्क- 282, राजीवनगर, नगरा, झाँसी- 284003 मोबाइल- 9455420727

समीक्षित कृतिः नौ मुलाकातें (उपन्यास)

प्रकाशकः एपीएन पब्लिकेशन्स,

डब्ल्यू जेड-87 ए, गली नं. 4, हस्तसाल रोड, उत्तम नगर, नई दिल्ली- 110059

मूल्य- रु0 180/- पृष्ठ संख्याः 158

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
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रचनाकार: प्राची - जनवरी 2017 : समीक्षा / प्रेम की घनीभूत अनुभूतियाँ हैं नौ मुलाकातें / राजेन्द्र कुमार
प्राची - जनवरी 2017 : समीक्षा / प्रेम की घनीभूत अनुभूतियाँ हैं नौ मुलाकातें / राजेन्द्र कुमार
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