रु. 25,000+ के  नाका लघुकथा पुरस्कार हेतु रचनाएँ आमंत्रित.

अधिक जानकारी के लिए यहाँ http://www.rachanakar.org/2018/10/2019.html देखें.

नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें.

व्यंग्य की जुगलबंदी-26 : चुनाव के बाद / अनूप शुक्ल

साझा करें:

अनूप शुक्ल व्यंग्य की जुगलबंदी-26 चुनाव के बाद ----------------------------------------- इस बार की व्यंग्य की जुगलबंदी का विषय़ था -चुन...

clip_image001

अनूप शुक्ल

व्यंग्य की जुगलबंदी-26 चुनाव के बाद

-----------------------------------------

इस बार की व्यंग्य की जुगलबंदी का विषय़ था -चुनाव के बाद ! Ranjana Rawat और Rishbh Saxena पहली बार शामिल हुये। रंजना जी के वन लाइनर ’हासिल-ए-जुगलबंदी’ टाइप रहे।

Alok Puranik के बारे में लिखते हुये हमने लिखा (http://fursatiya.blogspot.in/2014/09/blog-post_30.html) था - “आलोक पुराणिक की खूबी यह यह है कि जिस घटना पर बाकी लेखक एकाध लेख ही निकाल पाते हैं उसी घटना से वे अलग-अलग कोण से तीन-चार लेख बड़े आराम से निकाल लेते हैं।“ उन्होंने हमारे विश्वास की फ़िर रक्षा की। तीन लेख सटाय़े।

विषय तय करने और बताने इसके बाद सब लेखों को समेटकर पेश कराना बवाल-ए-जान काम है। टैग करने में कोई न कोई छूट जाता है, किसी को अनावश्यक टैग हो जाता है। दोनों बवाल हैं। लोगों के लेख पढते हुये अच्छा लगता है। लेकिन जब उनको समेटने का समय आता है तो मरी हुई नानी एक बार फ़िर मर जाती हैं। नानी भी झल्लाती होंगी कहीं -कित्ती बार मारेगा बच्चा हमको।

जुगलबंदी में तीन टाइप के लेख छपते हैं। पहले वे जुगलबंदी में आने के बाद सज-संवरकर , कट-छंटकर अखबारों में शामिल होते हैं। Nirmal Gupta, DrAtul Chaturvedi, समीरलाल Udan Tashtari आदि साथियों के लेख इस घराने के होते हैं। दूसरे आलोक पुराणिक घराने के लेख जो सजे-संवरे और अखबार में छपे होते हैं। तीसरे वे साथी जो अपने मजे के लिये लिखते हैं। ये साथी थोड़ा समय निकालकर अपने लेख को थोड़ा प्यार से संवारकर लिखें तो और बेहतर बनेगें लेख। इसकेलिये सोचते हैं कि जुगलबंदी का विषय और पहले बताया जाये तो शायद अच्छा रहे। अपनी राय बतायें।

Arvind Tiwari जी जो लिखते हैं यथार्थ और अनुभव की शानदर रेसिपी होती है। उनके लिये यही उपमा याद आती है कि वे ऐसे लेखक बल्लेबाज हैं जो विकेट के चारो तरफ़ शॉट लगाते हैं। हर गेंद पर रन बनाते हैं। थोड़ा हाथ कम्प्यूटर पर और मांज लें तो नियमित अखबारी लेखन फ़िर से शुरु कर सकते हैं। अभी केवल बजरंगबली की कृपा वाले दिन मंगलवार को डीएलए आगरा में छपते हैं।

Sanjay Jha Mastan के लिखने की अलग ही शैली है। सिनेमा से जुड़े होने के कारण लेखों को प्रस्तुत करने का उनका अंदाज अनूठा और बेहतरीन होता है। वे अपने लिखने का श्रेय जुगलबंदी को देते हैं। संजय झा का जुगलबंदी की उपलब्धि है। यह अलग बात है कि संजय झा अक्सर हमारी हड़बड़ी के कारण टैग होने से रह जाते हैं। संवेदनशील मन के होने के कारण संजय इसे हमारे ’प्यार’ से वंचित होना मानकर दुखी होते हैं। फ़िर अनुरोध करने पर लिखते हैं , शानदार लिखते हैं।

बाकी सबके बारे में फ़िर कभी। फ़िलहाल आइये आपको झलक दिखलाते हैं इस बार की जुगलबंदी के लेखों की।

पहला लेख आया Alok Puranik का। आलोक बाबू ने लेख का विषय रखा’ आमिर खान के बाद अभिषेक बच्चन’। आलोक, आमिर और अभिषेक में ’अ’ वर्ण की आवृत्ति देखिये। अनुप्रास की छटा दर्शनीय है न !
लेख का लिंक यह रहा-

https://www.facebook.com/puranika/posts/10154547930963667
इस लेख के कुछ अंश देखिये:

1. बंदे को शाणा होना चाहिए, पर बहुत ज्यादा शाणा नहीं होना चाहिए, हाल प्रशांत किशोर जैसा हो जाता है।

2. चिरकुट से चिरकुट एजेंट एजेंसी लेने से पहले सोचता है कि वह आइटम बेच पायेगा या नहीं।

3. एक जमाने में हारनेवाले नेता ऐसी स्याही पर आरोप लगाते थे, जो वोट देनेवाले की उंगली पर लगाते ही गायब हो जाती थी और वो दोबारा वोट डालकर अपने मनपसंद कैंडीडेट को जिता देते थे। स्याही से आरोप उठकर ईवीएम पर आ गये हैं, यानी देश डिजिटल इंडिया की तरफ बढ़ रहा है।

एक और लेख जिसका शीर्षक रखा ’हारे को ईवीएम’ में आलोक बाबू फ़िर ईवीएम महिमा बताते हैं। पूरा लेख इधर बांचिये https://www.facebook.com/puranika/posts/10154545943108667

आपके लिये मुख्य अंश हम पेश करते हैं:

1. यह ईवीएम घोटाला नहीं, बैंकिंग घोटाला है। हर नेता मस्त बैठा था यह सोचकर कि मैं बैंक खाते में इतने वोट हैं। बाद में जाकर पता लगा कि जिन वोटों को वह अपना समझ रहा था या अपना समझ रही थी वह किसी और के खाते में बरामद हुए।

2. सदमा तब सौ गुना हो जाता है, जब अपने खाते से गायब रकम विरोधी के पास बरामद हो और उसे दिखाकर वह चुनाव-डांस कर रहा हो।

Anshu Mali Rastogi का इस बार मन लफ़ंगई पर लिखने का था। उन्होंने चुनाव के बाद अपने मन की मुराद पूरी की। लफ़ंगई पर गर्व करते हुये उन्होंने जो लिखा वह यहां देख सकते हैं

https://www.facebook.com/anshurstg/posts/213644762449219
लेख के कुछ अंश हम आपको पढवाते हैं:

1. लफंगा हूं तो हूं। कम से उन कथित चरित्रवानों से तो अच्छा ही हूं जो मुंह में राम आंखों में अश्लीलता रखते हैं।

2. यह दुनिया लफंगों की ‘सद-चरित्र लफंगई’ पर ही टिकी है। दुनिया-समाज में अगर लफंगे न हों तो अजीब-सी विरानी और उदासी छा जाए। खास बात, लफंगे बढ़-बोले नहीं होते। न किसी से हिलगते हैं, न ज्यादा किसी को भाव देते। बस अपने काम से मतलब रखते हैं।

3. हर व्यक्ति अपनी लफंगई को राजनीति, चुनाव, नौकरी, साहित्य, लेखन, घर-परिवार, नाते-रिश्तेदारी, लड़ाई-झगड़े में एप्लाई करने पर तुला है। इसमें कुछ लोग कामयाब हो जाते हैं, जो नहीं हो पाते वे इस-उस को ‘कोसने’ में ही अपनी सारी ‘एनर्जी’ गवां डालते हैं।

समीरलाल उर्फ़ Udan Tashtari जुगलबंदी के ’राजा बाबू’ टाइप लेखक हैं। नियमित शिरकत करते हैं। ब्लॉगिंग की फ़ैन फ़ालोविंग फ़ेसबुक पर मिली हुई है। उनको अखबारों में और लेख भेजने चाहिये। अखबारों की शब्दसीमा के हिसाब से। खूब छपना चाहिये। इस बार जो लिखा समीरलाल ने उसका लिंक यह रहा https://www.facebook.com/udantashtari/posts/10154852969371928

लेख के कुछ अंश:

1. चुनाव के बाद बस दो तरह के नेता बचते हैं. एक जीते हुए और दूसरे हारे हुए.

2. यहाँ (राजनीति में) न तो कोई सिरा होता है न ही कोई छोर, जो कोई किसी को सिरे से खत्म करे और न ही चुनाव के बाद क्या होगा जैसी कोई सोच....जो भी ऐसी सोच रखता है वो नेता हो ही नहीं सकता.

3. हमारी या आपकी पार्टी जैसी अवधारणा भी मूर्ख ही पालते हैं. नेता अजर अमर है. नेता मूल रुप से राजनिती की आत्मा है और पार्टी शरीर. पार्टियाँ बदलती रहती हैं.

Arvind Tiwari जी ने इस मसले को लिखते हुये शीर्षक रखा ’चुनाव के बाद 'मैं'और 'वह’। चुनाव में लेखकों को भी उतार दिये। मजे लिये। देखिये। लेख का लिंक यह रहा https://www.facebook.com/permalink.php… लेख के कुछ अंश यहां पेश हैं:

1. उनके हारने और मेरे हारने में फ़र्क है फिर भी मेरा हारना उनके हारने से उसी तरह जुड़ा है जैसे नया वेतनमान मंहगाई भत्ते से जुड़ा होता है।

2. चुनाव परिणाम आये तो हमारी हालत उस प्रेमी जैसी हो गयी जिसकी प्रेमिका ने साथ भागने का वादा तो कर दिया लेकिन गाड़ी छूटने तक प्लेटफार्म पर नहीं पहुंची! प्रेमी बेचारा दूसरी गाड़ी और प्रेमिका के संयुक्त इंतज़ार में हाफ़ शर्ट पहने गर्म पानीनुमा चाय पीते हुए रात को सुबह में बदलकर घर लौट आता है!

3. कुत्तों की घ्राण शक्ति बहुत पावरफुल मानी जाती है।जबकि उनके चमचेनुमा कुत्ते आज भी हर किसी पर भोंक पड़ते हैं।सियासत में चमचों का भौंकना सतत चलने वाली प्रक्रिया है भले ही उनका नेता हार क्यों न जाये।

Nirmal Gupta जी ने चुनाव के बाद लड्डुओं का राजनय पर नजर दौड़ाई और खूब दौड़ाई। लेख बाद में हरिभूमि अखबार में छपा। पूरा लेख बांचने के लिये इधर आइये- https://www.facebook.com/gupt.nirmal/posts/10211599001306254

लेख के कुछ अंश:

1. चुनाव के दौरान जो लड्डू होते हैं,वे नेताओं के वादों और उनकी बातों की तरह गोलमटोल होते हैं। वे लगभग डिजिटल होते हैं। वे लड्डू होकर भी दरअसल नहीं होते। वे आभासी मित्रता की तरह मित्र और अमित्र के बीच झूले की तरह झूलते रहते हैं। इनमें स्वाद का सिर्फ तिलिस्म होता है।

2. चुनाव के बाद जीतने वाले जीत की ख़ुशी में लम्बी सांस लेता है। चूँकि वह भरपूर हवा भीतर लेता है तो अनिवार्यत: उसे छोड़ता भी है। वह जीत के एक एक पल का मजा लेता है। वह सबको मुफ्त में खुलेहाथ शर्तिया विजय के सूत्र बांटता है।

3. चुनाव के नाम पर जो होना था ,हो लिया। खेल खत्म हुआ। खेल के भीतर का असल खेल शुरू हुआ। पाले खिंच गये हैं। पाले बदलने वाले अपने काम पर लग गये है। जो किसी वजह से ‘कर्तव्यविमूढ’ खड़े के खड़े रह गये,वे अपनी मूढ़ता में सरोकार ढूंढ रहे हैं।

Ranjana Rawat जी ने हमारे अनुरोध पर जुगलबंदी में शिरकत की। ग्यारह पंच पेश किये। सब एक से बढकर एक टाइप। सभी पंच यहां बांचिये https://www.facebook.com/ranjana.rawat2/posts/1260639690723220

हम आपको झलक दिखलाते हैं:

1. गोवा में काँग्रेस के हाथ से सत्ता फिसल गई है, दिग्विजय सिंह को ये बात एक विदेशी सैलानी द्वारा उस वक़्त पता चली जब वे गोवा में समुद्र के तट पर लेटे, भाजपा की जीत के पीछे RSS का हाथ होने पर मंथन कर रहे थे ।

2. 2014 में पर्रिकर गोवा से दिल्ली लाए गए अब 2017 में फिर से वापिस गोवा भेज दिए गए हैं । ये बात ठीक है गोवा में समुद्र है पर उस में भी मोदी लहर चल रही है, इस बात की जाँच होनी चाहिए--विपक्ष

3. चुनाव हो जाने के बाद माहौल बिलकुल उस बेडरूम के सीन सा हो जाता है जिसमें पति-पत्नी अब करवट लेकर सोने की तैयारी में हैं ।

Sanjay Jha Mastan ने चुनाव के बाद में ’काला हास्य’ कैटेगरी के पंच लिखे। शानदार पंच। सभी पंच यहां बांचिये

https://www.facebook.com/permalink.php?story_fbid=10155157301822658&id=640082657

हम कुछ झलक दिखाते हैं:

1. चुनाव के बाद खिचड़ी पकती है ! चुनाव के बाद सबकी दाल गलती है ! सुबह का भूला चुनाव के बाद घर लौट आता है ! चुनाव के बाद अनुलोम, विलोम हो जाता है ! चुनाव के बाद सब पात ढाक के हो जाते हैं ! चुनाव के बाद कुछ अंगूर खट्टे हो जाते हैं ! चुनाव ख़त्म होते ही राजनीती शुरू हो जाती है !

2. चुनाव के बाद फिर से शपथ ग्रहण होता है ! चुनाव के बाद कुर्सी बंटती है ! चुनाव के बाद कुर्सी का तौलिया बदल जाता है ! चुनाव के बाद बेरोज़गार के पाँव भारी हो जाते हैं !

3. चुनाव के बाद चुनाव में हारा प्रत्याशी फिर से कुँवारा हो जाता है ! चुनाव के बाद साहित्य का चीरहरण हो जाता है ! चुनाव के बाद व्यंग्य की लाज रख ली जाती है ! चुनाव के बाद अगली चुनाव की तैयारी शुरू हो जाती है !

विनय कुमार तिवारी जी ने चुनाव के बाद पर जो लिखा उसको आप यहां पहुंचकर पूरा बांचिये

https://www.facebook.com/vinaykumartiwari31/posts/1229542713830352
हम आपको इसके कुछ अंश पेश करते हैं

1. नेता हो या वोटर, क्या चुनाव के पहले और क्या चुनाव के बाद, जिसकी जो आदत होती है वह नहीं छूटती है।

2. चुनाव बाद तो सरकार बदल गई है, अब फिर से ठेका होगा और ठेकेदार भी बदल जाएंगे..अब उनके वाले लोग ठेका उठाएँगे´।

3. चुनाव बाद भी चुनाव पूर्व वाला गोरखधंधा चलता रहता है, ठेकेदार नेता की मजबूरी होते हैं। यह गोरखधंधा ही चरम-सत्य है, चुनाव तो आते-जाते रहते हैं।

Ravishankar Shrivastava उर्फ़ रविरतलामी जी चुनाव के बाद के लिये सौ साल आगे ले गये हमको। सन 3025 के चुनाव दिखा दिये। आप भी देखिये यहां पहुंचकर

http://raviratlami.blogspot.in/2017/03/26-3050.html
लेख के कुछ अंश:

1. बायोमैट्रिक तरीके से, 1048 बिट एनक्रिप्टेड सेक्योर्ड साइट के जरिए जो मतदान करवाए गए उसमें हैकिंग की गई, और तमाम वोट परसेंटेज जीतने वाली पार्टी को चले गए. (इसीलिए, वापस, पुराने, ईवीएम तरीके से, बूथ आधारित मतदान कराने की पुरजोर मांग हारने वाली पार्टी की ओर से की गई)

2. चुनाव के दौरान वोटरों को जमकर लुभाया गया. चुनावी घोषणा-पत्र में पर्सनल ड्रोन से लेकर पर्सनल रोबॉटिक असिस्टेंट तक देने के वायदे किए गए और बांटे गए, जिससे लालच में अंधी होकर जनता ने वोट दिए.

3. चुनावी विश्लेषकों के मुताबिक दरअसल, अधिकांशतः जीते वही हैं जो टिकट नहीं मिलने या अन्य वजहों से ऐन चुनाव से ठीक पहले पाला बदल लिए थे. इस लिहाज से, जिस पार्टी की जीत है, सत्यता में वह जीत नहीं है, और जिस पार्टी की हार है, वस्तुतः वह हार नहीं है. ठीक ठीक कहें, तो यह तो यथा-स्थिति-वाद है!

लखनऊ में Alankar Rastogi के जानपहचान के लोग उपमुख्यमंत्री बन गये हैं। फ़िर भी वे परदुखकातरता के भाव से हारे हुये लोगों के लिये हार के जिम्मेदार खोज रहे हैं। *हार का जिम्मेदार कहाँ से लाऊं यार* लेख बांचने के लिये उनकी पोस्ट पर पहुंचिये-

https://www.facebook.com/rastogi.ala…/posts/1292059700882713

इसके कुछ अंश आपको पढवाते हैं:

1. हार के जिम्मेदार को ढूंढना और उस कवच विहीन सिर की तलाश करना जिस पर हार का ठीकरा फोड़ा जा सके. तथाकथित रूप से आगे –आगे चलने वाले को करारी हार मिलने पर पीछे के रास्ते से बेदाग़ निकाल देना भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा होता है .विशेषकर वहां जहाँ राजनितिक पार्टी उनकी पर्सनल प्रॉपर्टी समझी जाती हो .

2. हार का पोस्ट मार्टम शुरू किया जाता है . जिसने अपनी पार्टी का मर्डर किया होता है वही उस पोस्ट मार्टम के पैनल का हेड होता है . आसानी से समझा जा सकता है कि उस पोस्ट मार्टम में कारण नहीं बल्कि कातिल को बचाने का निवारण किया जाता है .पोस्ट मार्टम रिपोर्ट आती है

3. जब हर बंदा पार्टी हित के बजाये चंदाहित में लगा रहेगा . जब हर कार्यकर्त्ता के भांजे –भतीजों का ठौर पार्टी के सिरमौर बनने में रहेगा . जब सभी को टिकट देने की विकट समस्या आ जाएगी तब भीतराघात तो होना ही है .

Rishbh Saxena इस जुगलबंदी में पहली बार शामिल हुये। उनका स्वागत है। उन्होंने हर पार्टी के हिसाब से चुनाव के बाद के सीन बयान किये हैं। बयान क्या पूरी चकल्लस है भाई। उनके लेख को पढने के लिये इधर आइये .

https://www.facebook.com/rishbh.saxena/posts/1508685029175990 कुछ अंश यहां पेश हैं:

1. चुनावी जीत की खबरों के बीच सबसे बड़ा झटका पीएम मोदी को लगा है। उत्तर प्रदेश में बीजेपी की भारी जीत को देखकर पड़ोसी देशों श्रीलंका, बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान विचार कर रहे हैं कि पीएम मोदी के उनके देश की यात्रा करने पर प्रतिबंध लगा दिया जाए।

2. नेताओं को डर था कि मोदी लहर जिस तरह से सुनामी में तब्दील होती जा रही है उसके बाद कहीं मोदी इन देशों में भी चुनाव जीतकर प्रधानमंत्री न बन जाए। इन सभी देशों ने इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में भी उठाने की बात कही है।

3. यूपी इलेक्शन का रिजल्ट देखकर फूली नहीं समा रही बीजेपी पर दिग्विजय सिंह ने ट्वीट से वार किया। पीएम मोदी को निशाना बनाते हुये दिग्विजय ने कहा कि यूपी जीतना कोई बड़ी बात नहीं है, अगर सच में मोदी लहर है तो पाकिस्तान में जीत कर दिखाएं मोदी।

अभी हम समेट ही रहे थे जुगलबंदी कि देखा कि आलोक पुराणिक ने फ़िर एक लेख ठेल दिया- “कांग्रेस-मुक्त में अमर रहे कांग्रेस” लेख का लिंक यह रहा https://www.facebook.com/puranika/posts/10154556189663667

लेख के कुछ अंश देखिये:

1. कांग्रेस दरअसल आत्मा है, जिसके बारे में गीता में बताया गया है कि वह मरती नहीं है, एक शरीर से दूसरे शरीर में प्रवेश कर लेती है। हालांकि कांग्रेस कुछ के लिए अब प्रेतात्मा हो गयी है-डराती है, सबसे ज्यादा कांग्रेस के उन नेताओं को जो अभी भाजपा ज्वाइन करने का जुगाड़ नहीं तलाश पाये हैं।

2. कांग्रेस आम भारतीय जैसी है, चौबीस घंटे चूंचूं, मैंमैं राजस्थान में कांग्रेसी नेता सीपी जोशी दूसरे कांग्रेसी नेता नेता गहलौत से झगड़ते हैं, गहलौत तीसरे कांग्रेसी नेता सचिन पायलट से झगड़ते हैं, आपस में इतना झगड़ते हैं कि भाजपा से लड़ने का वक्त ही नहीं बचता।

3. कांग्रेस दरअसल वह बड़ा भूतपूर्व शो रुम है, जिसके भूतपूर्व कर्मचारियों ने शो-रुम वीरान करके अपनी दुकानें जमा ली हैं-बंगाल की ममता बनर्जी की पार्टी, महाराष्ट्र की शरद पवार की पार्टी, आंध्र की वाईएसआर कांग्रेस-ये सब कांग्रेस के काऊंटर होते, तो अगर कांग्रेस शो-रुम ठीक चल रहा होता तो। अब ये दुकानें जम गयी हैं, तो शो-रुम को कुछ ना समझतीं।

और अब अंत में अनूप शुक्ल का भी लेख तो है

https://www.facebook.com/anup.shukla.14/posts/10210882645235623

कुछ अंश भी देख लीजिये

1. चुनाव के बाद होने वाली हरकतों के बारे में गदर मतभेद हैं। कुछ लोग कहते हैं चुनाव के बाद सरकार बनती है। दीगर लोग मानते हैं कि चुनाव के बाद फ़िर चुनाव होते हैं। ज्यादा अनुभवी लोग बताते हैं कि चुनाव के बाद जो होता है उसको नौटंकी के अलावा कुछ कहना ठीक नहीं।

2. ईवीएम और वैलटपेपर के लफ़ड़े से लफ़ड़े से बचने का सस्ता और टिकाऊ उपाय यह भी हो सकता है कि चुनाव में जिसको सबसे ज्यादा गरियाया जाये उसको इज्जत के साथ बुलाकर शपथ ग्रहण करा दी जाये-’ आइये भाई देश/प्रदेश को हिल्ले लगाना शुरु करिये एक तरफ़ से। अभी बरबादी की तमाम संभावनायें बची हैं।’

3. हम यह तक नहीं तय कर पाते कि आजकल दिन अच्छे चल रहे हैं कि खराब। हम अभी खुश हैं कि दुखी। हम पूरी तरह लुट चुके हैं या अभी और लुटने की गुंजाइश है। बस यही सोचकर संतोष कर लेते हैं - ’सब कुछ लुट जाने के बाद भी भविष्य बचा रहता है।’

यह रहा इस बार की जुगलबंदी का लेखा-जोखा। कैसा लगा बताइये। इसके बाद अगली जुगलबंदी पर लिखने के लिए जुट जाइये। अब आप कहेंगे -विषय तो बताइये। तो अगली बार की जुगलबंदी का विषय है -गर्मी।

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर

-----****-----

-----****-----

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1

.... प्रायोजक ....

-----****-----

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधाएँ ~

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---


|आपके लिए कुछ चुनिंदा रचनाएँ_$type=complex$count=8$src=random$page=1$va=0$au=0

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3845,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,336,ईबुक,192,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,257,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,105,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2789,कहानी,2119,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,486,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,30,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,90,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,22,पाठकीय,61,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,329,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,327,बाल कलम,23,बाल दिवस,3,बालकथा,50,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,9,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,17,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,238,लघुकथा,839,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,8,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,315,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,62,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1924,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,650,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,689,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,14,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,56,साहित्यिक गतिविधियाँ,184,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,58,हास्य-व्यंग्य,68,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: व्यंग्य की जुगलबंदी-26 : चुनाव के बाद / अनूप शुक्ल
व्यंग्य की जुगलबंदी-26 : चुनाव के बाद / अनूप शुक्ल
https://lh3.googleusercontent.com/-xrd-rKAvkn8/WNYkeqrfaSI/AAAAAAAA3mU/ANkrXsLFbzs/clip_image001%25255B3%25255D.jpg?imgmax=800
https://lh3.googleusercontent.com/-xrd-rKAvkn8/WNYkeqrfaSI/AAAAAAAA3mU/ANkrXsLFbzs/s72-c/clip_image001%25255B3%25255D.jpg?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2017/03/26.html
https://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/2017/03/26.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय SEARCH सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है चरण 1: साझा करें. चरण 2: ताला खोलने के लिए साझा किए लिंक पर क्लिक करें सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ