रचनाकार में खोजें -
 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें.

धरती हमारे लिए स्वर्ग सी सुंदर बन सकती है : स्टीफन हॉकिंग को पत्र / राजकुमार झांझरी

SHARE:

'दी गार्डियन' में “This is the most dangerous time for our planet” शीर्षक से प्रकाशित लेख में आपने मानव जाति के अस्तित्व पर मंडरा र...

image

'दी गार्डियन' में “This is the most dangerous time for our planet” शीर्षक से प्रकाशित लेख में आपने मानव जाति के अस्तित्व पर मंडरा रहे खतरों पर वाजिब चिंता व्यक्त की है। आपके विचारों से यह सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि आपने यह निश्चित रूप से मान लिया है कि अब धरती को विध्वंस से बचाना लगभग असंभव होता जा रहा है तथा मानव को धरती के विकल्प की तलाश शुरू कर देनी चाहिए।

विश्व के महान वैज्ञानिक होने के नाते आपकी यह निराशा समस्त विश्ववासियों के लिए नितांत ही चिंता का विषय है। क्या वाकई दुनिया ध्वंस होने जा रही है? क्या यह दुनिया मनुष्य के निवास योग्य नहीं रहने वाली है? क्या वाकई इस दुनिया में रहने वाले मनुष्यों के भाग्य में सिर्फ अभाव, दुख, दर्द, कष्ट ही बदा है? शायद नहीं।

[ads-post]

आपने पृथ्वी तथा मानव जाति के भविष्य को लेकर जो दर्दनाक व चिंताजनक स्थिति बयां की है, इसके लिए कोई और नहीं, सिर्फ मानव जाति ही पूरी तरह जिम्मेदार है। सृष्टि की रचना करने वाले ने दुनिया के समस्त प्राणियों में मनुष्य को ही सबसे अधिक नियामतें बख्शी हैं। कोई भी मां अपनी औलाद को किसी भी प्रकार का कष्ट देना नहीं चाहती। इस पृथ्वी पर रहने वाले सभी प्राणी धरती माता की संतान है। सृष्टिकर्ता ने इस प्रकार हमारी धरती की रचना की है कि धरती पर रहने वाली उसकी हर संतान सुखी, शांतिपूर्ण तथा निरोगी जीवन यापन कर सके। सृष्टि की रचना इतनी सटीक व सुंदर है कि अगर मनुष्य उसके नियमानुसार चलता तो इस धरती पर उसे न दुख होता, न तकलीफें और कोई आपदा-विपदा ही होतीं। लेकिन लोभी व अहंकारी मनुष्य खुद प्रकृति के नियमानुसार चलने के बजाय प्रकृति को ही अपनी इच्छानुसार चलाने की कोशिशें करता आया है। अपने क्षुद्र स्वार्थों के लिए इस सृष्टि को ही ध्वंस करने की कवायद में जुटा हुआ है। उसकी हालत उस मूर्ख सरीखी है, जो उसी टहनी को काट रहा है, जिस पर वह खुद बैठा हुआ है। हमारी धरती हमें जीने के लिए न सिर्फ अन्न, पानी तथा ऑक्सीजन मुहैय्या करवाती है बल्कि वह मनुष्य जीवन को सुंदरतम बनाने के सारे साधन भी प्रदान करती है, जो उसके मन की प्रबल शक्ति तथा सृष्टि के नियमानुसार गृहनिर्माण में निहित हैं। अहंकारी मनुष्य इस धरती पर रहकर भी धरती के नियमों के अनुसार चलने को राजी नहीं, चाहे इसके लिए उसे कितनी ही तकलीफें क्यों न उठानी पड़ रही हो?

मनुष्य जब तक प्रकृति से सामंजस्य कर चलता था, वह काफी हद तक सुखी व निरोगी जीवन यापन करता था। लेकिन जब से मनुष्य ने जूते-चप्पलें पहनने प्रारंभ किये, तभी से उसका प्रकृति से संबंध क्रमश: कटता चला गया। नंगे पांव जमीन पर चलने से पृथ्वी की चुम्बक शक्ति पांव के तलुओं के जरिये उसके शरीर के हर अंग को मिलती थी, फलस्वरूप उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी लगभग अजेय होती थी। इसका प्रमाण आपको जैन संतों के रूप में आज भी देखने को मिलता है। आपको शायद पता हो कि जैन संत हमेशा नंगे पांव पैदल ही चलते हैं। वे 24 घंटों में सिर्फ एक बार आहार तथा एक बार ही जल ग्रहण करते हैं। इसके अलावा वे अगले 24 घंटों में कुछ भी खाते-पीते नहीं। लेकिन वे चूंकि नंगे पांव जमीन पर चलते हैं, इसलिए उनके तन को पांवों के तलुओं के जरिये पृथ्वी की पर्याप्त चुंबक शक्ति प्राप्त होती है, जिसकी वजह से वे काफी हृष्ट-पुष्ट रहते हैं। मानव जाति की यह कितनी बड़ी विडंबना है कि जो सृष्टि मनुष्य को जीवन प्रदान करती है, स्वस्थ रहने के लिए पर्याप्त ऊर्जा प्रदान करती है, मनुष्य अनवरत उसी का अंधाधुंध दोहन कर तथा उसके नियमों के विपरीत चलकर अपने पांवों पर खुद कुल्हाड़ी मार रहा है, जिसकी वजह से आज समूचा प्राणी जगत अपने अस्तित्व के खतरे से जूझने के लिए अभिशप्त है।

सृष्टि का निर्माण कितना अचूक है, इस बात को हम वृक्ष और मनुष्य के संपर्क से ही समझ सकते हैं। सृष्टि के नियम के अनुसार वृक्ष जहां कार्बन डाई ऑक्साईड ग्रहण कर ऑक्सीजन छोड़ते हैं, वहीं मनुष्य ऑक्सीजन ग्रहण कर कॉर्बन डाई ऑक्साईड छोड़ता है। आप ही सोचिये कि अगर वृक्ष और मनुष्य की सांसों के बीच संपर्क न होता तो क्या लोभी मनुष्य अब तक इस दुनिया में एक भी वृक्ष को जिंदा रहने देता? कतई नहीं।

मनुष्य के अहंकार के सबसे प्रमुख प्रमाण हैं मनुष्य द्वारा सृजित हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध आदि पृथ्वी के हजारों धर्म तथा ज्योतिष शास्त्र। सृष्टि के अवदानों को तुच्छ तथा खुद को सर्वोत्कृष्ट साबित करने के लिए उसने सृष्टि की अवहेलना तक ही खुद को सीमित न रखकर अपने-अपने धर्म और ईश्वर / अल्ला / गॉड आदि रच लिये और उन्हें ही धरती के सृजन तथा अस्तित्व में आने से लेकर अब तक की सारी नियामतों का कर्ता-धर्ता बताने लगा। मनुष्य जिस पृथ्वी पर वास करता है और जिससे अन्न, जल, वायु सरीखे जीवन धारण के सारे साधन प्राप्त करता है, उसकी न सिर्फ अवहेलना करता है बल्कि शनि, मंगल, बुध, वृहस्पति आदि ग्रहों में ही अपना भविष्य व सुख, शांति, समृद्धि खोजता है। मनुष्य यह बात भूल गया कि मानव सृजित धर्मों तथा ज्योतिष शास्त्र ने समूची मानव जाति को पंगु बना रखा है। सृष्टि ने मनुष्य के मन में कितनी असीम शक्ति प्रदान की है, उसे भला आपसे बेहतर कौन समझ सकता है क्योंकि आपने कभी न ठीक होने वाले असाध्य रोग से ग्रस्त होने के बावजूद विज्ञान के क्षेत्र में जो चमत्कारी शोध व आविष्कार किये हैं, वे शारीरिक रूप से सक्षम लोगों के लिए भी संभव नहीं हो पाए। प्रकृति ने आपके मन में जितनी प्रबल शक्ति प्रदान की है, पृथ्वी के हर मनुष्य के मन में भी उतनी ही शक्ति विद्यमान है, लेकिन मनुष्य उस शक्ति को पहचान पाने में असमर्थ है क्योंकि धर्म और ज्योतिष ने उनके मन-मस्तिष्क पर बेडिय़ां डाल रखी हैं।

कार्ल माक्र्स ने कहा था कि धर्म अफीम के नशे की तरह है। अफीम के नशे में धुत्त इंसान को कुछ नहीं दिखता। मनुष्य द्वारा सृजित धर्म कहते हैं कि तुम्हारे हाथ में कुछ भी नहीं है, जो कुछ भी घटित हो चुका है, हो रहा है तथा होने वाला है, वह सब कुछ अल्ला, ईश्वर, गॉड की इच्छा से ही हुआ है, हो रहा है तथा होने वाला है। ज्योतिष शास्त्र भी कहता है कि मनुष्य का जीवन ग्रह-नक्षत्रों की चाल से ही बदलता है। इस प्रकार इन मानव सृजित धर्मों तथा ज्योतिष शास्त्र ने युगों-युगों से समूची मानव जाति को उसकी असीम शक्ति से वंचित कर रखा है। दरअसल मनुष्य के मन पर ही उसका जीवन निर्भर करता है। मनुष्य का मन फोटोस्टेट मशीन की तरह होता है, जिस प्रकार फोटोस्टेट मशीन में जो भी तस्वीर डाली जाती है, वही तस्वीर निकलकर आती है, ठीक उसी तरह मनुष्य मन में जैसे विचार रखता है, उसका जीवन भी वैसा ही हो जाता है। आम तौर पर मनुष्य के मन में अपने भविष्य के प्रति अनिश्चयता से उत्पन्न डर, दूसरों के प्रति हिंसा-ईर्ष्या की भावना, दूसरों का हक मारकर अपना पेट भरने की लालसा आदि नकारात्मक भावनाओं की ही बहुलता रहती है और इसी वजह से मनुष्य का जीवन अशांति, अनिश्चयता, डर, बेचैनी आदि से पीडि़त रहता है।

अगर मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारों में जाकर पूजा-पाठ, प्रार्थना करने, पशु-पक्षियों की बलि-कुर्बानी देने से ही मनुष्य का जीवन संवर जाता तो आज भारत दुनिया के सबसे सबल, उन्नत, समृद्ध व शांतिपूर्ण राष्ट्रों में गिना जाता क्योंकि दुनिया में सबसे ज्यादा मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारे तथा लगभग 98 लाख 80 हजार संत-बाबा इस देश के चप्पे-चप्पे पर मौजूद हैं। लेकिन फिर भी भारतवर्ष दुनिया के सबसे पिछड़े व गरीब देशों में गिना जाता है। आज भी 19.40 करोड़ भारतीय भूखे पेट सोने को अभिशप्त हैं। विश्व के अति गरीब लोगों में से सर्वाधिक 33 प्रतिशत भारत में रहते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारों और शनि, मंगल, बुध सरीखे ग्रह-नक्षत्रों के प्रति अत्यधिक आसक्ति ने भारतीयों के पांवों में बेडिय़ां डाल रखी हैं।

गत 7 दिसंबर को इंडोनेशिया में आये भीषण भूकंप में जान-माल की भारी क्षति के साथ ही 14 मस्जिदें भी ढह गईं। गत 10 दिसंबर को नाईजीरिया में एक चर्च की छत गिर जाने से उसमें प्रार्थना करने के लिए एकत्रित हुए 160 लोगों की अकाल मृत्यु हो गई। भारत का प्रसिद्ध तीर्थस्थान केदारनाथ चार धामों में से एक धाम माना जाता है, जिसकी यात्रा करके हर धर्मपरायण व्यक्ति न सिर्फ खुद को धन्य समझता है, बल्कि उसे ऐसा महसूस होता है मानो उसने ईश्वर का दर्शन पा लिया हो और उसके सारे कष्ट दूर हो गए हों। लेकिन 11 जून 2013 को बादल फटने व ग्लेशियर टूटने के कारण आये जलजले से इस तीर्थस्थान पर प्रकृति का जो कहर बरपा, उसकी कल्पना करने मात्र से ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। चारों ओर लाशें ही लाशें और मकानों, दुकानों, मंदिरों के भग्नावशेष बिखरे पड़े थे। मानो वह कोई तीर्थस्थान नहीं, विशाल कब्रिस्तान हो। 25 अप्रैल 2015 को नेपाल में भी महाविनाश हुआ। पशुपतिनाथ मंदिर से जुड़े 264 हेक्टेयर क्षेत्र में मौजूद छोटे-बड़े 518 मंदिर लगभग पूरी तरह ध्वस्त हो गए। उपरोक्त घटनाएं क्या यह सवाल पूछने के लिए काफी नहीं है कि दुनिया में कहीं कोई ईश्वर, अल्ला या गॉड होता तो प्रकृति की क्या मजाल थी कि वह इन मंदिरों-मस्जिदों, गिर्जाघरों-तीर्थस्थानों को इस तरह नेस्तनाबुत कर पाती? इन घटनाओं से प्रमाणित होता है कि प्रकृति से ऊपर और प्रकृति से ज्यादा ताकतवर और कोई नहीं है। आपको जानकर अचरज होगा कि मैंने प्रकृति के नियमों के विपरीत बने कई मंदिरों के ढांचे में प्रकृति के नियमों के अनुकूल परिवर्तन करवाया है। भारतवर्ष में ऐसे हजारों मंदिर हैं, जिनका निर्माण प्रकृति के नियमों के अनुसार किया गया है। अगर भगवान होता और प्रकृति से ज्यादा बड़ा व ताकतवर होता तो भला इन मंदिरों की प्रकृति के नियमानुसार निर्माण की जरूरत क्यों पड़ती? ऐसे में आप सहज ही अनुमान लगा सकते हैं कि मनुष्य द्वारा सृजित भगवान बड़ा है अथवा हमारी प्रकृति बड़ी है।

आगे आपने लिखा है कि आज हमने ऐसी तकनीक विकसित कर ली है, जिसके सहारे धरती को ही नष्ट कर रहे हैं, लेकिन इस विनाश से बचने के लिए हमने कोई तकनीक विकसित नहीं की है। मनुष्य को यह भ्रम है कि वह इस धरती को नष्ट करने की क्षमता रखता है, जबकि सच्चाई यह है कि धरती खुद समूची मानवता को चंद पलों में धुलिसात करने की क्षमता रखती है। मनुष्य को धरती को बचाने के लिए किसी तकनीक को विकसित करने की चिंता छोड़कर मानव जाति को बचाने के लिए सृष्टि की तकनीक की मदद लेनी चाहिए। सृष्टि की रचना इतनी सुंदर है कि अगर मनुष्य उसके नियमानुसार गृहनिर्माण कर उसमें निवास करे तो फिर उसका जीवन सुंदर से सुंदरतम बन सकता है। हमारी धरती का निर्माण जिन तत्वों से हुआ है, अगर मनुष्य उन तत्वों को यथास्थान पर रखकर गृहनिर्माण करें तो उसे न तो किसी प्रकार का तनाव झेलना पड़ेगा, न बीमारियों से जार-जार होना पड़ेगा, न आर्थिक तंगी का शिकार होना पड़ेगा और न ही किसी अवांछित समस्या से जूझना पड़ेगा।

उदाहरण स्वरूप अगर मनुष्य अपने घर में गलत जगह पर कुंआ, बोरवेल स्थापित करता है तो उसका जीवन अशांति, अभावों, तनावों से ही जर्जर नहीं होता बल्कि दुर्घटना व अकाल मृत्यु का भी शिकार होना पड़ता है। हर वर्ष विश्व में करोड़ों लोग गलत स्थान पर बोरेवेल, कुंए आदि के निर्माण की वजह से दुर्घटना व अकाल मृत्यु के शिकार होते हैं। इसके विपरीत अगर सृष्टि के नियमानुसार ठीक जगह पर कुंआ, बोरवेल स्थापित किया जाता है तो उस घर में वास करने वालों को सुख, शांति, समृद्धि व निरोगी जीवन प्राप्त होता है। सृष्टि के नियमानुसार अगर यथास्थान पर रसोईघर का निर्माण किया जाता है तो जीवन में आर्थिक उन्नति, निरोगी काया व पारिवारिक सुकून प्राप्त होता है। लेकिन अगर गलत स्थान पर किचन का निर्माण किया जाता है तो न सिर्फ परिवार में रोगों की बहुतायत होती है, बल्कि परिवार का दिवाला भी पिट जाता है। इसी प्रकार यथास्थान पर बेडरुम होने से जहां मनुष्य को अच्छी नींद आती है, वहीं गलत स्थान पर बेडरुम होने, बीम के नीचे व गलत दिशा में सिर रखकर सोने से मनुष्य न सिर्फ अनिद्रा, तनाव व रक्तचाप झेलने पर मजबूर होता है, बल्कि अधिक दिनों तक उस स्थान पर सोने पर पागल भी हो जाता है। आज विश्व के करोड़ों लोग गलत दिशा में सिर रखकर सोने, बीम के नीचे अथवा गलत स्थान पर सोने की वजह से न सिर्फ स्थाई रुप से प्रेशर की बीमारी के शिकार हो रहे हैं, बल्कि पागल भी हो रहे हैं। WHO के मुताबिक, दुनियाभर में मानसिक रोग से पीडि़त लोगों की अनुमानित संख्या करीब 45 करोड़ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 2020 तक अवसाद विश्व में दूसरा सबसे बड़ा रोग होगा। आँकड़ों के अनुसार विश्व की 12 प्रतिशत आबादी मानसिक बीमारियों की शिकार है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हर 5 में से 1 महिला और हर 12 में से 1 पुरुष मानसिक व्याधि का शिकार हैं। नेशनल कमीशन ऑन माइक्रोइकॉनामिक्स और हेल्थ के आंकड़े बताते हुए भारत के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने लोकसभा में मई 2016 में जानकारी दी थी कि भारत में करीब 6 करोड़ लोग मानसिक तौर पर बीमार हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में 5 करोड़ लोग मानसिक रूप से बीमार हैं। आपको सूचित करना चाहूंगा कि इनमें से काफी संख्या ऐसे लोगों की है जो या तो घर के दक्षिण-पूर्व के कोने में सोते हैं, या बीम के नीचे सोते या लंबे समय तक बैठते हैं, या फिर उत्तर दिशा की ओर सिर करके सोते हैं। इन सभी कारणों से मनुष्य की दिमागी हालत बिगड़ जाती है और वह मानसिक रुप से सिर्फ बीमार ही नहीं होता, बल्कि काफी लोग पूरी तरह पागल भी हो जाते हैं। काफी संख्या में मुसलमान धर्मावलंबी उत्तर की ओर सिर करके सोते हैं। उत्तर की ओर सिर करके सोने से मनुष्य की नींद पूरी नहीं होती और वह धीरे-धीरे अनिद्रा रोग का शिकार हो जाता है, जो बाद में क्रमश: मानसिक चिड़चिड़ेपन, स्वभाव में उग्रता, अस्थिरता तथा आखिर में मानसिक अस्वस्थता का शिकार हो जाता है। ये चंद उदाहरण हैं जिनसे पता चलता है कि सृष्टि की अवहेलना करने या सृष्टि के नियमों के विपरीत चलने की मानव जाति को कितनी बड़ी सजा भुगतनी पड़ रही है।

मैंने ऊपर जिन बातों का उल्लेख किया है, वे किसी उपन्यास या कहानी का हिस्सा नहीं बल्कि जीवन की सच्चाई है और विगत 20 सालों में मैंने भारत के पूर्वोत्तर के राज्यों के 15,000 परिवारों को सृष्टि के नियमानुसार गृहनिर्माण की नि:शुल्क सलाह देकर पाये अनुभवों के आधार पर लिखी है। भारतवर्ष के पूर्वोत्तर के राज्यों के लोग विगत सैकड़ों सालों से सृष्टि के नियमों के पूरी तरह विपरीत गृह निर्माण करते आये हैं और इसी का परिणाम है कि भारत का समूचा पूर्वोत्तर विगत सैकड़ों सालों से उग्रवाद, अशांति व पिछड़ेपन से जार-जार हो रहा है। विगत 20 सालों में हमने जिन परिवारों को सृष्टि के नियमानुसार गृहनिर्माण की सलाह दी है, उनमें से जिन परिवारों ने उसका अनुसरण कर गृहनिर्माण किया अथवा अपने गृह के ढांचे में फेरबदल किया है, आज उनकी खोई खुशियां पुन: लौट आई हैं तथा आज वे सुख, शांति, समृद्धि का जीवन यापन कर रहे हैं। मैं समझता हूँ कि विश्व के लोग यदि धर्म व ज्योतिष के चंगुल से निकलकर अपने मन की शक्ति का भरपूर उपयोग करे तथा सृष्टि के नियमानुसार गृह निर्माण करें तो मनुष्य को स्वर्गसुख हासिल करने के लिए अगले जन्म का इंतजार नहीं करना पड़ेगा बल्कि इसी जन्म में, इसी दुनिया में उसे स्वर्ग सुख हासिल हो जायेगा। मुझे तो यहां तक विश्वास है कि अगर दुनिया के लोग अपने घरों में सही जगह पर बोरिंग/कुँआ तथा किचन बनाना सीख जाये तो फिर दुनिया में कोई भी गरीब नहीं रहेगा। आपने जिस धरती पर खतरनाक दौर की चेतावनी दी है, वही धरती हमारे लिए स्वर्ग सी सुंदर बन सकती है, बस जरूरत है धरती पर रहने वाले मानव समाज के मानव सृजित धर्मों व ग्रह-नक्षत्रों के बजाय धरती के नियमों पर चलने की।

- राजकुमार झांझरी

वास्तु वैज्ञानिक व अध्यक्ष, रि-बिल्ड नॉर्थ ईस्ट, गुवाहाटी, असम (भारत)

COMMENTS

BLOGGER: 1
Loading...

-----****-----

|13000+ रचनाएँ_$type=complex$count=6$page=1$va=0$au=0

|विविधा_$type=blogging$au=0$va=0$count=6$page=1$src=random-posts

 आलेख कविता कहानी व्यंग्य 14 सितम्बर 14 september 15 अगस्त 2 अक्टूबर अक्तूबर अंजनी श्रीवास्तव अंजली काजल अंजली देशपांडे अंबिकादत्त व्यास अखिलेश कुमार भारती अखिलेश सोनी अग्रसेन अजय अरूण अजय वर्मा अजित वडनेरकर अजीत प्रियदर्शी अजीत भारती अनंत वडघणे अनन्त आलोक अनमोल विचार अनामिका अनामी शरण बबल अनिमेष कुमार गुप्ता अनिल कुमार पारा अनिल जनविजय अनुज कुमार आचार्य अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ अनुज खरे अनुपम मिश्र अनूप शुक्ल अपर्णा शर्मा अभिमन्यु अभिषेक ओझा अभिषेक कुमार अम्बर अभिषेक मिश्र अमरपाल सिंह आयुष्कर अमरलाल हिंगोराणी अमित शर्मा अमित शुक्ल अमिय बिन्दु अमृता प्रीतम अरविन्द कुमार खेड़े अरूण देव अरूण माहेश्वरी अर्चना चतुर्वेदी अर्चना वर्मा अर्जुन सिंह नेगी अविनाश त्रिपाठी अशोक गौतम अशोक जैन पोरवाल अशोक शुक्ल अश्विनी कुमार आलोक आई बी अरोड़ा आकांक्षा यादव आचार्य बलवन्त आचार्य शिवपूजन सहाय आजादी आदित्य प्रचंडिया आनंद टहलरामाणी आनन्द किरण आर. के. नारायण आरकॉम आरती आरिफा एविस आलेख आलोक कुमार आलोक कुमार सातपुते आशीष कुमार त्रिवेदी आशीष श्रीवास्तव आशुतोष आशुतोष शुक्ल इंदु संचेतना इन्दिरा वासवाणी इन्द्रमणि उपाध्याय इन्द्रेश कुमार इलाहाबाद ई-बुक ईबुक ईश्वरचन्द्र उपन्यास उपासना उपासना बेहार उमाशंकर सिंह परमार उमेश चन्द्र सिरसवारी उमेशचन्द्र सिरसवारी उषा छाबड़ा उषा रानी ऋतुराज सिंह कौल ऋषभचरण जैन एम. एम. चन्द्रा एस. एम. चन्द्रा कथासरित्सागर कर्ण कला जगत कलावंती सिंह कल्पना कुलश्रेष्ठ कवि कविता कहानी कहानी संग्रह काजल कुमार कान्हा कामिनी कामायनी कार्टून काशीनाथ सिंह किताबी कोना किरन सिंह किशोरी लाल गोस्वामी कुंवर प्रेमिल कुबेर कुमार करन मस्ताना कुसुमलता सिंह कृश्न चन्दर कृष्ण कृष्ण कुमार यादव कृष्ण खटवाणी कृष्ण जन्माष्टमी के. पी. सक्सेना केदारनाथ सिंह कैलाश मंडलोई कैलाश वानखेड़े कैशलेस कैस जौनपुरी क़ैस जौनपुरी कौशल किशोर श्रीवास्तव खिमन मूलाणी गंगा प्रसाद श्रीवास्तव गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर ग़ज़लें गजानंद प्रसाद देवांगन गजेन्द्र नामदेव गणि राजेन्द्र विजय गणेश चतुर्थी गणेश सिंह गांधी जयंती गिरधारी राम गीत गीता दुबे गीता सिंह गुंजन शर्मा गुडविन मसीह गुनो सामताणी गुरदयाल सिंह गोरख प्रभाकर काकडे गोवर्धन यादव गोविन्द वल्लभ पंत गोविन्द सेन चंद्रकला त्रिपाठी चंद्रलेखा चतुष्पदी चन्द्रकिशोर जायसवाल चन्द्रकुमार जैन चाँद पत्रिका चिकित्सा शिविर चुटकुला ज़कीया ज़ुबैरी जगदीप सिंह दाँगी जयचन्द प्रजापति कक्कूजी जयश्री जाजू जयश्री राय जया जादवानी जवाहरलाल कौल जसबीर चावला जावेद अनीस जीवंत प्रसारण जीवनी जीशान हैदर जैदी जुगलबंदी जुनैद अंसारी जैक लंडन ज्ञान चतुर्वेदी ज्योति अग्रवाल टेकचंद ठाकुर प्रसाद सिंह तकनीक तक्षक तनूजा चौधरी तरुण भटनागर तरूण कु सोनी तन्वीर ताराशंकर बंद्योपाध्याय तीर्थ चांदवाणी तुलसीराम तेजेन्द्र शर्मा तेवर तेवरी त्रिलोचन दामोदर दत्त दीक्षित दिनेश बैस दिलबाग सिंह विर्क दिलीप भाटिया दिविक रमेश दीपक आचार्य दुर्गाष्टमी देवी नागरानी देवेन्द्र कुमार मिश्रा देवेन्द्र पाठक महरूम दोहे धर्मेन्द्र निर्मल धर्मेन्द्र राजमंगल नइमत गुलची नजीर नज़ीर अकबराबादी नन्दलाल भारती नरेंद्र शुक्ल नरेन्द्र कुमार आर्य नरेन्द्र कोहली नरेन्‍द्रकुमार मेहता नलिनी मिश्र नवदुर्गा नवरात्रि नागार्जुन नाटक नामवर सिंह निबंध नियम निर्मल गुप्ता नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’ नीरज खरे नीलम महेंद्र नीला प्रसाद पंकज प्रखर पंकज मित्र पंकज शुक्ला पंकज सुबीर परसाई परसाईं परिहास पल्लव पल्लवी त्रिवेदी पवन तिवारी पाक कला पाठकीय पालगुम्मि पद्मराजू पुनर्वसु जोशी पूजा उपाध्याय पोपटी हीरानंदाणी पौराणिक प्रज्ञा प्रताप सहगल प्रतिभा प्रतिभा सक्सेना प्रदीप कुमार प्रदीप कुमार दाश दीपक प्रदीप कुमार साह प्रदोष मिश्र प्रभात दुबे प्रभु चौधरी प्रमिला भारती प्रमोद कुमार तिवारी प्रमोद भार्गव प्रमोद यादव प्रवीण कुमार झा प्रांजल धर प्राची प्रियंवद प्रियदर्शन प्रेम कहानी प्रेम दिवस प्रेम मंगल फिक्र तौंसवी फ्लेनरी ऑक्नर बंग महिला बंसी खूबचंदाणी बकर पुराण बजरंग बिहारी तिवारी बरसाने लाल चतुर्वेदी बलबीर दत्त बलराज सिंह सिद्धू बलूची बसंत त्रिपाठी बातचीत बाल कथा बाल कलम बाल दिवस बालकथा बालकृष्ण भट्ट बालगीत बृज मोहन बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष बेढब बनारसी बैचलर्स किचन बॉब डिलेन भरत त्रिवेदी भागवत रावत भारत कालरा भारत भूषण अग्रवाल भारत यायावर भावना राय भावना शुक्ल भीष्म साहनी भूतनाथ भूपेन्द्र कुमार दवे मंजरी शुक्ला मंजीत ठाकुर मंजूर एहतेशाम मंतव्य मथुरा प्रसाद नवीन मदन सोनी मधु त्रिवेदी मधु संधु मधुर नज्मी मधुरा प्रसाद नवीन मधुरिमा प्रसाद मधुरेश मनीष कुमार सिंह मनोज कुमार मनोज कुमार झा मनोज कुमार पांडेय मनोज कुमार श्रीवास्तव मनोज दास ममता सिंह मयंक चतुर्वेदी महापर्व छठ महाभारत महावीर प्रसाद द्विवेदी महाशिवरात्रि महेंद्र भटनागर महेन्द्र देवांगन माटी महेश कटारे महेश कुमार गोंड हीवेट महेश सिंह महेश हीवेट मानसून मार्कण्डेय मिलन चौरसिया मिलन मिलान कुन्देरा मिशेल फूको मिश्रीमल जैन तरंगित मीनू पामर मुकेश वर्मा मुक्तिबोध मुर्दहिया मृदुला गर्ग मेराज फैज़ाबादी मैक्सिम गोर्की मैथिली शरण गुप्त मोतीलाल जोतवाणी मोहन कल्पना मोहन वर्मा यशवंत कोठारी यशोधरा विरोदय यात्रा संस्मरण योग योग दिवस योगासन योगेन्द्र प्रताप मौर्य योगेश अग्रवाल रक्षा बंधन रच रचना समय रजनीश कांत रत्ना राय रमेश उपाध्याय रमेश राज रमेशराज रवि रतलामी रवींद्र नाथ ठाकुर रवीन्द्र अग्निहोत्री रवीन्द्र नाथ त्यागी रवीन्द्र संगीत रवीन्द्र सहाय वर्मा रसोई रांगेय राघव राकेश अचल राकेश दुबे राकेश बिहारी राकेश भ्रमर राकेश मिश्र राजकुमार कुम्भज राजन कुमार राजशेखर चौबे राजीव रंजन उपाध्याय राजेन्द्र कुमार राजेन्द्र विजय राजेश कुमार राजेश गोसाईं राजेश जोशी राधा कृष्ण राधाकृष्ण राधेश्याम द्विवेदी राम कृष्ण खुराना राम शिव मूर्ति यादव रामचंद्र शुक्ल रामचन्द्र शुक्ल रामचरन गुप्त रामवृक्ष सिंह रावण राहुल कुमार राहुल सिंह रिंकी मिश्रा रिचर्ड फाइनमेन रिलायंस इन्फोकाम रीटा शहाणी रेंसमवेयर रेणु कुमारी रेवती रमण शर्मा रोहित रुसिया लक्ष्मी यादव लक्ष्मीकांत मुकुल लक्ष्मीकांत वैष्णव लखमी खिलाणी लघु कथा लघुकथा लतीफ घोंघी ललित ग ललित गर्ग ललित निबंध ललित साहू जख्मी ललिता भाटिया लाल पुष्प लावण्या दीपक शाह लीलाधर मंडलोई लू सुन लूट लोक लोककथा लोकतंत्र का दर्द लोकमित्र लोकेन्द्र सिंह विकास कुमार विजय केसरी विजय शिंदे विज्ञान कथा विद्यानंद कुमार विनय भारत विनीत कुमार विनीता शुक्ला विनोद कुमार दवे विनोद तिवारी विनोद मल्ल विभा खरे विमल चन्द्राकर विमल सिंह विरल पटेल विविध विविधा विवेक प्रियदर्शी विवेक रंजन श्रीवास्तव विवेक सक्सेना विवेकानंद विवेकानन्द विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक विश्वनाथ प्रसाद तिवारी विष्णु नागर विष्णु प्रभाकर वीणा भाटिया वीरेन्द्र सरल वेणीशंकर पटेल ब्रज वेलेंटाइन वेलेंटाइन डे वैभव सिंह व्यंग्य व्यंग्य के बहाने व्यंग्य जुगलबंदी व्यथित हृदय शंकर पाटील शगुन अग्रवाल शबनम शर्मा शब्द संधान शम्भूनाथ शरद कोकास शशांक मिश्र भारती शशिकांत सिंह शहीद भगतसिंह शामिख़ फ़राज़ शारदा नरेन्द्र मेहता शालिनी तिवारी शालिनी मुखरैया शिक्षक दिवस शिवकुमार कश्यप शिवप्रसाद कमल शिवरात्रि शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी शीला नरेन्द्र त्रिवेदी शुभम श्री शुभ्रता मिश्रा शेखर मलिक शेषनाथ प्रसाद शैलेन्द्र सरस्वती शैलेश त्रिपाठी शौचालय श्याम गुप्त श्याम सखा श्याम श्याम सुशील श्रीनाथ सिंह श्रीमती तारा सिंह श्रीमद्भगवद्गीता श्रृंगी श्वेता अरोड़ा संजय दुबे संजय सक्सेना संजीव संजीव ठाकुर संद मदर टेरेसा संदीप तोमर संपादकीय संस्मरण संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018 सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन सतीश कुमार त्रिपाठी सपना महेश सपना मांगलिक समीक्षा सरिता पन्थी सविता मिश्रा साइबर अपराध साइबर क्राइम साक्षात्कार सागर यादव जख्मी सार्थक देवांगन सालिम मियाँ साहित्य समाचार साहित्यिक गतिविधियाँ साहित्यिक बगिया सिंहासन बत्तीसी सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध सीताराम गुप्ता सीताराम साहू सीमा असीम सक्सेना सीमा शाहजी सुगन आहूजा सुचिंता कुमारी सुधा गुप्ता अमृता सुधा गोयल नवीन सुधेंदु पटेल सुनीता काम्बोज सुनील जाधव सुभाष चंदर सुभाष चन्द्र कुशवाहा सुभाष नीरव सुभाष लखोटिया सुमन सुमन गौड़ सुरभि बेहेरा सुरेन्द्र चौधरी सुरेन्द्र वर्मा सुरेश चन्द्र सुरेश चन्द्र दास सुविचार सुशांत सुप्रिय सुशील कुमार शर्मा सुशील यादव सुशील शर्मा सुषमा गुप्ता सुषमा श्रीवास्तव सूरज प्रकाश सूर्य बाला सूर्यकांत मिश्रा सूर्यकुमार पांडेय सेल्फी सौमित्र सौरभ मालवीय स्नेहमयी चौधरी स्वच्छ भारत स्वतंत्रता दिवस स्वराज सेनानी हबीब तनवीर हरि भटनागर हरि हिमथाणी हरिकांत जेठवाणी हरिवंश राय बच्चन हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन हरिशंकर परसाई हरीश कुमार हरीश गोयल हरीश नवल हरीश भादानी हरीश सम्यक हरे प्रकाश उपाध्याय हाइकु हाइगा हास-परिहास हास्य हास्य-व्यंग्य हिंदी दिवस विशेष हुस्न तबस्सुम 'निहाँ' biography dohe hindi divas hindi sahitya indian art kavita review satire shatak tevari undefined
नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3793,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,326,ईबुक,182,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,257,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,105,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2744,कहानी,2070,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,484,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,129,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,30,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,87,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,22,पाठकीय,61,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,309,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,326,बाल कलम,23,बाल दिवस,3,बालकथा,48,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,8,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,16,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,226,लघुकथा,808,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,306,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,57,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1882,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,637,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,676,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,14,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,52,साहित्यिक गतिविधियाँ,181,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,51,हास्य-व्यंग्य,52,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: धरती हमारे लिए स्वर्ग सी सुंदर बन सकती है : स्टीफन हॉकिंग को पत्र / राजकुमार झांझरी
धरती हमारे लिए स्वर्ग सी सुंदर बन सकती है : स्टीफन हॉकिंग को पत्र / राजकुमार झांझरी
https://lh3.googleusercontent.com/-NTwGSdkIwoU/WLZyuChF6ZI/AAAAAAAA26o/N0plO_5D0kQ/image_thumb%25255B1%25255D.png?imgmax=800
https://lh3.googleusercontent.com/-NTwGSdkIwoU/WLZyuChF6ZI/AAAAAAAA26o/N0plO_5D0kQ/s72-c/image_thumb%25255B1%25255D.png?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2017/03/blog-post_1.html
https://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/2017/03/blog-post_1.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय खोजें सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है चरण 1: साझा करें. चरण 2: ताला खोलने के लिए साझा किए लिंक पर क्लिक करें सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ