पृथ्वी गरम हो रही है - राजकुमार कुम्भज

SHARE:

इस बार सर्दियाँ समय से पहले ही लौट गई हैं और बसंत ने अत्यंत ही प्रभावशाली ढंग से अपनी उपस्थिति दर्ज़ करवाना शुरू कर दिया है। हालाँकि दोपहर ...

image

इस बार सर्दियाँ समय से पहले ही लौट गई हैं और बसंत ने अत्यंत ही प्रभावशाली ढंग से अपनी उपस्थिति दर्ज़ करवाना शुरू कर दिया है। हालाँकि दोपहर की धूप अभी असहनीय नहीं हुई है, लेकिन वह गर्माहट का अहसास करवाने के लिए पर्याप्त साबित हो रही है और स्वेटर, कोट, जैकेट आदि की ज़रूरत नहीं रह गई है। धूप सेकने के लिए घना इंतज़ार करने वालों की संख्या में भी तेज़ी से गिरावट आ रही है, किन्तु ऐसा भी नहीं हुआ है कि सर्दियाँ सिरे से ही ग़ायब हो गई हों। सुबह-शाम की शरारती सर्दी अब भी कायम है और इसी सब के साथ कमोबेश यह कहने वाले भी मिल ही जाएँगे, जो कह रहे हैं कि इस बरस कड़ाके की सर्दियाँ आई ही नहीं। इस तरह के उलाहने शायद सही नहीं हैं, लेकिन हमारी यह पृथ्वी तेज़ गति से गरम हो रही है और हम ग्लोबल वार्मिंग की तरफ बढ़ रहे हैं, यही ज़्यादा सही है।

स्मरण रखा जा सकता है कि उत्तर भारत के कई-कई इलाकों में इस बरस हाड़ कँपा देने वाली ज़बर्दस्त सर्दियाँ आई हैं और इसी बरस पहाड़ों पर तो हिमपात के रिकॉर्ड भी टूटे हैं, लेकिन यह कहा जाना ज़रा भी अन्यथा नहीं होगा कि इधर बरस-दर-बरस कड़ाके की सर्दियों की अवधि निरंतर घटती जा रही है। सर्दियों के मौसम में कुछ ही ख़ास दिन ऐसे होते हैं, जब कड़ाके की सर्दियाँ हमें चिढ़ाती हैं। ज़ोरदार सर्दियों के दिनों की दिनोंदिन कमी अखरती भी है और समूची सर्दी का मौसम बस थोड़ी शरारती सर्दी के तोहफे में ही गुज़र जाता है। अन्यथा नहीं है कि ऐसा सब ग्लोबल वार्मिंग की वज़ह से ही हो रहा है। पिछले एक दशक से दुनियाभर के वैज्ञानिक इस समस्या से जूझ रहे हैं कि ग्लोबल वार्मिंग के ख़तरे से कैसे निपटा जाए ?

वैज्ञानिकों के शोध बता रहे हैं कि देश का न्यूनतम तापमान तेज़ी से बढ़ रहा है और आनेवाले बरस-दर-बरस में यह और भी ज़्यादा तेज़ी से बढ़ता दिखाई देगा। एक अनुमान के मुताबिक अगले चार बरस में न्यूनतम तापमान 0.9 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। दावा तो यहाँ तक किया जा रहा है कि वर्ष 2050 तक न्यूनतम तापमान 2.3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाएगा और अगले तीस बरस में यह 3.6 डिग्री सेल्सियस तक उछल जाएगा। न्यूनतम तापमान में दिखाई देने वाली यह गति की अति कोई सिर्फ मौसम आधारित अति नहीं है, बल्कि यह हमारे मौज़़ूदा समय का एक ख़तरनाक संकेत भी है। ऐसी चेतावनीभरी ख़बरें कुछेक अंतराल से लगभग आए ही दिन आती रहती हैं कि ग्लोबल वार्मिंग के ख़तरे बढ़ते जा रहे हैं और हमें इनसे बचाव में ज़रूर कुछ बेहतर करना चाहिए। चुनौती साधारण नहीं है।

चेन्नई स्थित सेंटर फॉर क्लाइमेट चेंज एंड एडोप्टेशन रिसर्च का कहना है कि सर्दियों के मौसम में दिखाई देने वाली शरारती सर्दियों का होना एक सामान्य स्थिति है। इसका यह अर्थ नहीं है कि अब से कड़ाके की सर्दियों के दिन लद गए हैं, बल्कि इसका अर्थ यह है कि अब से जब भी कड़ाके की सर्दियाँ आएँगी, तो वह सर्दियों का असामान्य मौसम ही रहेगा और सामान्य सर्दियों का मौसम सामान्य शरारती सर्दियों का ही मौसम बना रहेगा। यह निष्कर्ष हमारे देश के परिवर्तनशील पर्यावरण पर ग्रीनहाउस गैसों के प्रभाव को नापने के लिए किए गए अनुसंधानों का नतीजा है। हमें जानना चाहिए कि पृथ्वी क्यों गरम हो रही है ?

तमाम कोशिशों, सम्मेलनों और संधि-समझौतों के बावजूद हम अभी तक इस समस्या का कोई विश्वसनीय समाधान नहीं निकाल पाए हैं कि आख़िर ग्लोबल वार्मिंग के ख़तरों को कैसे टाला जाए ? यहाँ यह देखा जाना वाकई बेहद दिलचस्प हो सकता है कि ग्लोबल वार्मिंग के लिए सबसे ज़्यादा ज़िम्मेदार और गुनहगार विकसित देश पीछे हटने को तैयार नहीं हैं, जबकि विकासशील देश अपने-अपने अंदाज़ में और अपने-अपने अंदाज़ से विकसित देश बन जाने की ''हर संभव कोशिश'' करने में सक्रिय हैं। धन-संपदा बढ़ाने और वन-संपदा घटाने सहित इस 'हर संभव कोशिश' में ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ाने वाला हर कोई ज्ञात-अज्ञात कारनामा शामिल है।

अभी-अभी संपन्न हुए पेरिस जलवायु-सम्मेलन में शामिल दुनिया के तकरीबन दो सौ देशों ने मिल-जुलकर तय किया था कि वे दुनिया के तापमान को, औद्योगिक क्रांति से पूर्व उपलब्ध तापमान से डेढ़ डिग्री ज़्यादा तक सीमित करने के प्रावधान को अपनाएँगे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। पेरिस जलवायु सम्मेलन वर्ष 2015 दिसम्बर में संपन्न हुआ था और वर्ष 2016 की जनवरी, इतिहास की दूसरी सबसे गरम जनवरी हमारे सामने थी। फिर वर्ष 2016 इतिहास का सबसे गरम वर्ष भी रहा और अब इधर नासा के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए वैश्विक-तापमान विश्लेषण में पाया गया है कि वर्ष 2017 की जनवरी हमारे समय की अब तक की तीसरी सबसे गरम जनवरी रही। यह सब हमारे दैनिक क्रिया-कलापों का ही नतीज़ा है, जिसके पीछे विकसित देशों की हठधर्मिता ही ज़्यादा ज़िम्मेदार है।

वर्ष 2017 की जनवरी चीन में भी पर्यावरण असंतुलन लेकर आई ग्लोबल वार्मिंग के कारण ही चीन में भी जनवरी माह 'ज़्यादा वायु-प्रदूषण का ज़्यादा दिनों तक शिकार' बना रहा। चीन का उत्तरी इलाका इस सब समस्या से कुछ अधिक ही प्रभावित रहा। याद रहे कि उक्त जानकारी चीन के पर्यावरण सुरक्षा मंत्रालय द्वारा उपलब्ध करवाए गए आधिकारिक आँकड़ों में ही दी गई है। स्मॉग पैदा करने वाले सूक्ष्म कण पीएम 2.5 का औसतन घनत्व 14.7 फीसदी अधिक अर्थात् 78 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर अधिक पाया गया। चीन के 74 बड़े शहरों में से, हैनान प्रांत के हाइकू शहर में हवा सबसे ज़्यादा साफ रही, जबकि हेबेई प्रांत का शिजियाजहुआंग शहर सबसे अधिक बुरी तरह प्रभावित पाया गया। इस समस्त प्रसंग को गंभीरता से क्यों नही समझा जाना चाहिए ? पड़ोसी होने के साथ ही साथ भारत और चीन इसी विश्व का हिस्सा भी हैं और परिवर्तनशील-पर्यावरण के प्रति उतनी ही संवेदनशीलता से सक्रिय हैं।

अमेरिका स्थित नासा के 'गोडार्ड इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस स्टडीज़' के वैज्ञानिकों का अध्ययन बता रहा है कि उत्तरी अमेरिका और साइबेरिया का अधिकतर हिस्सा वर्ष 1951 से 1980 की आधार अवधि अनुसार, वर्ष 2017 जनवरी में औसतन 0.92 डिग्री सेल्सियस गर्म रहा। इस तरह नासा के एक अध्ययन अनुसार वर्ष 2017 की यह तीसरी जनवरी रही, जो सबसे गरम रही। दूसरी सबसे गरम जनवरी वर्ष 2016 की थी और पहली वर्ष 2007 की, अब से दस बरस पहले रही थी। 137 बरस पहले ही हमने आधुनिक तरीके से मौसम का रिकॉर्ड रखना प्रारंभ किया था; क्योंकि 137 बरस से पहले का मौसमी रिकॉर्ड हमारे पास उपलब्ध ही नहीं है। जनवरी 2016 के मुकाबले वर्ष 2017 की जनवरी 0.20 डिग्री सेल्सियस कम गरम थी, ज़ाहिर है कि 137 बरस के उपलब्ध मौसमी-इतिहास में हमें अभी तक जो तीन सबसे गरम जनवरी मिली हैं, वे वर्ष 2007 से 2017 के एक दशक में ही मिली हैं। पृथ्वी का इस तरह गरम होना कोई आकस्मिक नहीं है।

इधर फरवरी ने भी अपने बढ़ते तापमान में एक दशक का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। फरवरी में अप्रैल-मई जैसी गर्मियाँ देखी जा रही हैं। दिन का तापमान 34 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुँच चुका है। ऊपरी हवाओं में बनने वाले सभी सिस्टम तकरीबन कमज़ोर पड़ चुके हैं। इस सबसे ठंडी हवाओं के लौटने की उम्मीद भी ठंडी पड़ चुकी है। वैसे देखा जाए तो 15 मार्च तक ठंड का सिस्टम बना रहता है। इस वर्ष गर्मी पिछले वर्षों की तुलना में कहीं अधिक होने की संभावना है। बहुत संभव है कि पिछले सभी रिकॉर्ड टूट जाएँ। अंतर्राष्ट्रीय मौसम वेबसाइट स्काईमेट का कहना है कि गत वर्ष के अधिकतम तापमान में इस वर्ष एक से दो डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि हो सकती है। इसकी वज़ह ग्लोबल वार्मिंग, बार-बार आ रहे पश्चिमी विक्षोभ और स्थानीय शहरी कारक ज़िम्मेदार हैं। स्मरण रखा जा सकता है कि पिछले बरस फरवरी में विश्व का तापमान बीसवीं सदी के औसत तापमान से 0.16 डिग्री सेल्सियस अधिक पाया गया था।

137 वर्षों के मौसमी-रिकॉर्ड के मुताबिक, पहले वर्ष 2015 सबसे गर्म साबित हुआ, फिर वर्ष 2016 ने यह तमग़ा हासिल कर लिया और अगर मौसम यूँ ही परिवर्तनशील बना रहा तो बहुत संभव है कि वर्ष 2017 अब तक का सबसे गर्म वर्ष साबित हो जाए; क्योंकि इस बरस की गर्मियाँ पचास डिग्री सेल्सियस तक का पारा छू सकती हैं, तब सामान्य मनुष्यों और मवेशियों का क्या होगा ?

दूसरी तरफ कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि गरम और ठंडे होने का एक प्राकृतिक चक्र होता है, जो हमारी सभ्यता के उद्गम की अवधारणा के पहले से ही चल रहा है और अनुमानतः आगे भी ऐसा ही चलता रहेगा। हमारी यह पृथ्वी अभी तो उसी अवधारणा से प्रेरित गरम-ठंडा होने के प्राकृतिक-चक्र का अनुशरण कर रही है, किन्तु यहाँ उन वैज्ञानिकों के मत का भी पर्याप्त सम्मान किया जाना चाहिए। जिनकी मान्यता है कि हमारी यह पृथ्वी गरम होने से पहले एक बार फिर हिमयुग के दौर में लौट सकती है, जबकि इधर के ज़्यादातर वैज्ञानिकों का मत यही है कि हमारी यह पृथ्वी गरम होने की ओर ही बढ़ अधिक रही है, जो सहज ही काल-अकाल का कारण भी है।

गौरतलब है कि इक्कीसवीं सदी के ताज़ा इतिहास में दक्षिण सूडान अकाल की गिरफ़्त में आ गया है। दक्षिण सूडान एक लम्बी लड़ाई के बाद जुलाई 2011 में सूडान से अलग होकर आज़ाद हुआ था और अब छः बरस बाद वह अकाल की गिरफ़्त में है। यह विश्व का 196वाँ स्वतंत्र देश, संयुक्त राष्ट्र का 193वाँ सदस्य देश और अफ्रीका का 55वाँ देश है। अपनी आज़ादी के बाद इस तेल समृद्ध देश दक्षिण सूडान में वर्ष 2013 में युद्ध भड़क उठा था। राष्ट्रपति सालवा कीर और उपराष्ट्रपति रिक माछर की वफादार सेनाएँ आपस में भिड़ गईं थीं। फिर अगस्त 2015 में शांति समझौते के बाद बनी यूनिटी सरकार भी जुलाई 2016 में फिर से टूट गई। दक्षिण सूडान की तकरीबन 82 लाख आबादी में से 49 लाख आबादी को तत्काल भोजन की ज़रूरत है अर्थात् दक्षिण सूडान की 40 फीसदी अथवा 50 लाख आबादी अकाल की चपेट में है। दक्षिण सूडान में अभी संयुक्त राष्ट्र की ओर से भोजन उपलब्ध करवाया जा रहा है। इस मुसीबत की जड़ में बदलते मौसम का मिजाज़़ ही ज़िम्मेदार है। यमन, सोमालिया और उत्तर पूर्वी नाइज़ीरिया भी सूखे और भूखमरी से जूझ रहे हैं।

वैज्ञानिकों ने न्यूनतम तापमान बढ़ने के जो कारण बताए हैं, उन पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि ग्रीनहाउस गैसें रात को ज़्यादा सक्रिय होती हैं। रात में वे, इंफ्रारेड किरणें ज़्यादा सोखती हैं, जिससे तापमान बढ़ जाता है। हर किसी मौसम में रात के समय ही मौसम के न्यूनतम तापमान में परिवर्तन देखा जाता है। वैज्ञानिकों का मत है कि जितनी तेज़ी से न्यूनतम तापमान बढ़ता है, उतनी तेज़ी से अधिकतम तापमान नहीं बढ़ता है। अधिकतम तापमान दिन में ही रिकॉर्ड होता है, रात में नहीं। ज़ाहिर है कि हमारी यह पृथ्वी तेज़ी से गरम हो रही है और हम ग्लोबल वार्मिंग की तरफ बढ़ रहे हैं। पृथ्वी का गरम होना अनर्थकारी साबित होगा। चुनौती बड़ी है।

--

· राजकुमार कुम्भज

· 12 फ़रवरी 1947 , मध्यप्रदेश

· स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं किसान परिवार / छात्र जीवन में सक्रिय राजनीतिक भूमिका के कारण पुलिस-प्रशासन द्वारा लगातार त्रस्त / बिहार 'प्रेस-विधेयक' 1982 के विरोध में सशक्त और सर्वथा मौलिक-प्रदर्शन / आपात्काल 1975 में भी पुलिस बराबर परेशान करती रही / अपमानित करने की हद तक 'सर्च' ली गई / यहाँ तक कि निजी ज़िन्दगी में भी पुलिस-दखलंदाज़ी भुगती / 'मानहानि विधेयक' 1988 के खिलाफ़ ख़ुद को ज़ंजीरों में बाँधकर एकदम अनूठा सर्वप्रथम सड़क-प्रदर्शन / डेढ़-दो सौ शीर्ष स्थानीय पत्रकारों के साथ जेल / देशभर में प्रथमतः अपनी पोस्टर कविताओं की प्रदर्शनी कनॉट-प्लेस नई दिल्ली 1972 में लगाकर बहुचर्चित / गिरफ़्तार भी हुए / दो-तीन मर्तबा जेल यात्रा / तिहाड़ जेल में पंद्रह दिन सज़ा काटने के बाद नए अनुभवों से भरपूर / फिर भी संवेदनशील, विनोदप्रिय और ज़िंदादिल / स्वतंत्र-पत्रकार

· स्वतंत्र - कविता - पुस्तकें अभी तक :

1. कच्चे घर के लिए 1980

2. जलती हुई मोमबत्तियों के नीचे 1982

3. मुद्दे की बात 1991 (अप्रसारित)

4. बहुत कुछ याद रखते हुए 1998 (सीमित प्रसार)

5. दृश्य एक घर है 2014

6. मैं अकेला खिड़की पर 2014

7. अनवरत 2015

8. उजाला नहीं है उतना 2015

9. जब कुछ छूटता है 2016

10. बुद्ध को बीते बरस बीते 2016

11. मैं चुप था जैसे पहाड़ 2016

12. प्रार्थना से मुक्त 2016

13. अफ़वाह नहीं हूँ मैं 2016

14. जड़ नहीं हूँ मैं 2017

· व्यंग्य -संग्रह : आत्मकथ्य 2006

· अतिरिक्त : विचार कविता की भूमिका 1973 / शिविर 1975 / त्रयी 1976 / काला इतिहास 1977 / वाम कविता 1978 / चौथा सप्तक 1979 / निषेध के बाद 1981 / हिंदी की प्रतिनिधि श्रेष्ठ कविता 1982 / सदभावना 1985 / आज की हिंदी कविता 1987 / नवें दशक की कविता-यात्रा 1988 / कितना अँधेरा है 1989 / झरोखा 1991 / मध्यांतर 1992 - 94 , 1995 / Hindi Poetry Today Volume -2 1994 / छंद प्रणाम 1996 / काव्य चयनिका 2015 आदि अनेक महत्वपूर्ण तथा चर्चित कविता-संकलनों में कविताएँ सम्मिलित और अंग्रेज़ी सहित भारतीय भाषाओँ में अनुदित ।

· देश की लगभग सभी महत्वपूर्ण , प्रतिष्ठित , श्रेष्ठ पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर रचनाओं का प्रकाशन ।

· संपर्क : 331 , जवाहरमार्ग , इंदौर , 452002 (म.प्र.) फ़ोन : 0731 – 2543380 ईमेल: rajkumarkumbhaj47@gmail.com

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: पृथ्वी गरम हो रही है - राजकुमार कुम्भज
पृथ्वी गरम हो रही है - राजकुमार कुम्भज
https://lh3.googleusercontent.com/-vB2pM2rrUP4/WLqGiZ2cdPI/AAAAAAAA3Eg/QeCBL-achlc/image_thumb%25255B1%25255D.png?imgmax=800
https://lh3.googleusercontent.com/-vB2pM2rrUP4/WLqGiZ2cdPI/AAAAAAAA3Eg/QeCBL-achlc/s72-c/image_thumb%25255B1%25255D.png?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2017/03/blog-post_44.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2017/03/blog-post_44.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content