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लघु कथा / मुझे सोने दो / सुशील शर्मा

रोहित वर्मा की कलाकृति

*नितिन ने कल ही तो प्रोजेक्ट जमा किया था वह आत्महत्या कैसे कर सकता है।*नितिन का दोस्त मुकुल सुबक उठा पुलिस के सामने।

नितिन आई आई टी के अंतिम वर्ष का छात्र था।एक सामान्य घर का मेधावी छात्र।

आज अपने होस्टल के कमरे में पंखे से लटका मिला।

पुलिस पूछ ताछ कर रही थी।

*कुछ दिनों से मानसिक प्रेसर में था नितिन*उसके दोस्त मुकुल ने पुलिस को बताया *वोकह रहा था मैं जो करना चाहता हूं वो कर नही पा रहा हूँ।अच्छे मार्क्स आ नही रहे हैं।नौकरी का कोई भरोसा नही है।माँ बाबूजी कब तक पैसे देंगे।*

वो बहुत भावुक लड़का था वो प्रकृति से बहुत प्यार करता था।वो चित्रकार था ।बहुत सुंदर चित्रकारी करता था।लेकिन बहुत मायूस और टूटा हुआ था।

कल प्रोजेक्ट जमा करते हुए मुझ से कह रहा था।यार बहुत थक गया हूँ।

मेरी नींद लग जाये तो मुझे जगाना नहीं।

पुलिस को उसके कमरे से एक सुसाइड नोट मिला था जिसमें लिखा था।

*मुझे सोने दो*

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