अनुज कुमार आचार्य के प्रेरक आलेख

SHARE:

गरिमामय युवा नेतृत्व का निर्माण भारतवर्ष युवाओं का देश है और युवाओं में असीम शक्ति होती है, लिहाजा यह अत्यन्त आवश्यक है कि हमारे युवाओं में...

गरिमामय युवा नेतृत्व का निर्माण

भारतवर्ष युवाओं का देश है और युवाओं में असीम शक्ति होती है, लिहाजा यह अत्यन्त आवश्यक है कि हमारे युवाओं में विद्यमान ताकत से न केवल उन्हें परिचित करवाया जाए अपितु उनकी शक्ति को रचनात्मक एवं राष्ट्र उत्थान में नियोजित करने के प्रयास भी हों। कुछ स्वार्थी लोग अपने फायदे के लिए हमारी युवाशक्ति को बहला फुसलाकर उन्हें पथभ्रष्ट करने से भी नहीं चूकते हैं। इसलिए यह अत्यावश्यक है कि बाल्यावस्था से ही बालकों को सुसंस्कारित बनाकर उनमें आध्यात्मिक एवं सृजनात्मक शक्ति को जागृत करके उन्हें समाज तथा राष्ट्रहित में कार्यशील होने के लिए प्रेरित किया जाए। यह किसी एक व्यक्ति का दायित्व न होकर हमारे देश के समस्त माता-पिताओं, गुरूओं एव गुणीजनों की जिम्मेवारी है कि वे इस बात को यकीनी बनाएं की हमारी युवापीढ़ी पथभ्रष्ट न होने पाए।

युवाओं को यह भी समझना होगा कि मनुष्य का वर्तमान जीवन भौतिकतावाद के कारण भागदौड़ से भरा हुआ है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है हमारी महत्वाकांक्षाओं में वृद्धि। हमारी इच्छाओं की पूर्ति के चक्कर में कई बार हमारा मन खिन्न, उचाट और उद्विग्न हो जाता है। ऐसे समय में हमें मानसिक शांति और मनोबल बढ़ाने के लिए आस्तिकता पर भरोसा रखते हुए परमपिता परमात्मा की शरणागति होकर अपने अंदर सकारात्मक भावना का संचार करते रहना चाहिये। वैसे भी मानवीय जीवन में प्रायः नकारात्मक और सकारात्मक भावनाओं के बीच द्वन्द्व की स्थिति बनी रहती है। सकारात्मक सोच जहां हमें उत्थान की ओर ले जाती है तो वहीं नकारात्मक सोच ईर्ष्या, द्वेष भावना के साथ अधोगति की तरफ धकेलती है। अतएव यह भी जरूरी है कि हम अपना बहुमूल्य समय तथा ऊर्जा दूसरों के प्रति ईर्ष्या, डाह और जलन में व्यर्थ न गवाएं बल्कि सदैव, सकारात्मक रहकर अपने आपको इतना व्यस्त कर लें की दूसरों की निंदा इत्यादि के लिए हमारे पास फालतू समय ही न बचे।

हमारी युवा पीढ़ी को चाहिये कि वह अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिए पूर्णतया एक लक्ष्य पर ध्यान केन्द्रित करे और समय रहते उन्हें यह भी तय कर लेना चाहिए कि उनके जीवन का ध्येय क्या होगा ? इसके अलावा स्वयं पर भरोसा रखना ही सफलता की कुंजी माना गया है। इसलिए पूर्ण आत्मविश्वास से ओतप्रोत होकर अपने कार्यों को अंजाम तक पहुंचाएं। केवल अपनी उन्नति के पीछे न पड़े रहकर गांव-समाज की निस्वार्थ सेवा हेतु भी समय निकालें। हमेशा आत्मकल्याण के साथ-साथ समाज एवं राष्ट्रकल्याण हेतु प्रयत्नशील रहें। वर्तमान समय में जीवन पथ पर आगे बढ़ने और सफलता पाने के लिए मनुष्य में एक अनिवार्य गुण और होना चाहिए और वह गुण है उसका व्यवहार कुशल होना। खासकर निजी क्षेत्र में लोगों को उनकी शैक्षणिक योग्यताओं के साथ साथ व्यवहार कुशलता के पैमाने पर भी जांचा परखा जाता है।

वर्तमान जीवन भाग दौड़ से परिपूर्ण है और मनुष्य हर पल तनाव, चिंता, परेशानियों के कारण मुस्कुराना ही भूल बैठा है। इसलिए मुस्कुराहट और अपने जीवन में खुशियां लाईये क्योंकि मुस्कुराहट से जीवन निखरता भी है और हमारा व्यक्तित्व चमकता भी है। अपने जीवन को नित्यप्रति महोत्सव बनाने के लिए और अपने जीवन की बगिया को सजाने संवारने के लिए हमें अपने अंदर ज्ञानरूपी ज्योति से उजाला करने की आवश्यकता हमेशा रहती है। स्वाध्याय, सत्संग से हम अपनी भावनाओं को नियंत्रित करके अपने साथ-साथ अपने परिवार और समाज का भी भला एवं उत्थान करने में अपना बहुमूल्य योगदान कर सकते हैं। इसके साथ ही, जिस तरह से युवाओं को आज हमारे युवा को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी नौकरियों के पीछे भागना पड़ रहा है ऐसी परिस्थितियों में कई बार वे हार मानकर बैठ जाते हैं और अपने आप को निराशा की गर्त में धकेल देते हैं। ऐसे हालात में निरन्तर प्रयत्न करते रहना, हौसला बनाए रखना और जीतने की उम्मीदें जिंदा रखना ही उन्हें उनकी मंजिल तक पहुंचाने में मददगार साबित होता है। हमेशा याद रखें, कामयाबी आपको आपके ‘कम्फर्ट जोन‘ के बाहर जाकर अर्थात् घर की दहलीज छोड़कर निकल जाने पर ही हासिल होती है।

…….

 

जीवन दिशा बदलने वाले सुभाषित

प्रायः विद्यालयों के भीतर-बाहर की दीवारों पर कम शब्दों में लिखी जीवन उपयोगी सुन्दर बातें हमारा ध्यान अपनी ओर आकृष्ट कर लेती हैं और एक बारगी तो हमारा हृदय परिवर्तन हो जाता है और हम तदनुसार आचरण करने के लिए प्रेरित हो उठते हैं। यही वजह भी है कि इन बातों को अनमोल वचन अथवा सुभाषित भी कहते हैं। यह बातें जीवन रूपी सागर में हमारे पूर्वजों, बड़े-बुजुर्गों के अनुभवों का सार होती हैं। जो कम शब्दों में हमारा पथ प्रदर्शन कर देती हैं। इन पर आचरण करके हम अपनी जीवन दिशा को भी बदल सकते है। बुद्धिमत्ता से परिपूर्ण इन अनमोल वचनों का प्रतिदिन स्मरण करना इनका श्रवण-मनन करना और पढ़ना उतना ही आवश्यक है जैसे प्रतिदिन स्नान करना और अपनी दिनचर्या की शुरूआत करना।

कहते हैं कि, अध्यापक राष्ट्र की संस्कृति के चतुर माली होते हैं वे संस्कारों की जड़ों में खाद देते हैं और अपने श्रम से उन्हें सींच-सींच कर महाप्राण शक्तियां बनाते हैं। इस अकेली सूक्ति में गुरूमहिमा का विशद् वर्णन कर दिया गया है। लिहाज़ा समस्त अध्ययनरत विद्यार्थियों एवं युवाओं को सर्वप्रथम गुरू भक्ति एवं गुरू पर आस्था का संकल्प लेना चाहिए ताकि समर्थ गुरू की उन पर कृपा बनी रहे। हमारी वाणी न केवल मीठी होनी चाहिए अपितु हमारे कर्म भी सुन्दर होने चाहिए और इसके लिए जरूरी है कि हताशा हमारे निकट भी फटकनी नहीं चाहिए क्योंकि उत्साह हमेशा मनुष्य को कर्म करने के लिए प्रेरित करता रहता है और उत्साह ही कर्म को सफल बनाता है। मेहनत, लगन, हिम्मत से भरपूर नेक इरादों वाले लोग अपनी कल्पनाओं को साकार कर दूसरों के लिए उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। जिनको अपनी क्षमताओं और शक्तियों पर अटूट विश्वास होता है वे कभी भी असफलता का मुख नहीं देखते हैं।

हमारे शास्त्रों में और अनेक महापुरूषों ने शताब्दियों से विद्याग्रहण एवं ज्ञान प्राप्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। शास्त्रों में तो यहां तक कहा गया है कि ज्ञानेन हीनाः पशुभिः सामानाः अर्थात् ज्ञान विहीन मनुष्य पशु के समान है। उसमें भी अल्पविद्या और अल्प ज्ञान को विषतुल्य भयंकर माना गया है। जोसेफ एडिशन के अनुसार, अध्ययन हमें आनंद प्रदान करता है और योग्य बनाकर अलंकृत करता है। मस्तिष्क की उन्नति के लिए अध्ययन उतना ही आवश्यक है जितना शरीर के लिए व्यायाम करना। यदि हम पुस्तकों, पत्र पत्रिकाओं की ही चर्चा करें तो पठन-पाठन को सबसे सस्ता मनोरंजन माना गया है और पुस्तकों की तुलना एक सुन्दर बागीचे से की गई है। यदि आप महान व्यक्तियों की रूचियों को जानने का प्रयत्न करेंगे तो आप पायेंगे की उनमें सुन्दर ज्ञानवर्धक पुस्तकों को पढ़ने के प्रति जबर्दस्त रूचि पाई जाती है। कहा भी गया है कि, किताबें ऐसी शिक्षक हैं जो बिना कष्ट दिए, बिना आलोचना किए और बिना परीक्षा लिए हमें शिक्षा देती हैं, सुसंस्कृत बनाती हैं। ज्ञानार्जन से मनुष्य का विवेक जागृत होता है और कल्पनाशीलता उसकी मिठास को बढ़ाती है। विवेक जहां मानवीय जीवन को सुरक्षित रखता है तो वहीं कल्पनाशीलता जीवन की मधुरता को बढ़ाती है। पुस्तकों का मूल्य रत्नों से भी अधिक आंका गया है क्योंकि पुस्तकें अन्तःकरण को उज्जवल करती हैं। पुस्तकें ही हमारी सच्ची मित्र और शुभचिन्तक होती हैं।

मनुष्य जीवन में हम निठल्ले बैठे नहीं रह सकते हैं इसलिए हमें प्रतिक्षण कर्मशील बने रहना पड़ता है। जब हम जीवन पथ पर आगे बढ़ते हैं तो हर समय मात्र कामयाबी ही हमारा स्वागत नहीं करती है, अनेकों बार असफलताओं-विफलताओं का सामना भी हमें करना पड़ता है। कष्ट और विपत्तियां हमें सीख देती हैं और जो इनका सामना साहस के साथ करते हैं सफलता उनके कदम चूमती है। इसके लिए जरूरी यह भी है कि हम सबसे पहले अपने ऊपर विजय प्राप्त करें। हमेशा अपने हौसले बुलन्द रखें। आपके जीवन की खुशी आपके विचारों की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। महात्मा बुद्ध के अनुसार, पुष्प की सुगंध वायु के विपरीत कभी नहीं जाती है लेकिन मानव के सद्गुणों की महक सब ओर फैल जाती है। लिहाज़ा हमेशा मधुर वचनों का श्रवण, मनन और अध्ययन करते रहें तथा उन पर आचरण कर अपने उच्च कोटि के चरित्र का निर्माण करें। जीवन में सफल हों - सफल कहलवाएं।

……….

 

ईश्वरीय उपहार है जीवन-इसे संवारें

आरंभिक शिक्षा-दीक्षा प्राप्त कर जब हम धीरे-धीरे जीवन पथ पर अग्रसर होते हैं और सृष्टि में अपने आस-पास की गतिविधियों का मूल्यांकन करने लगते हैं तो कहीं न कहीं हमें यह अहसास हो जाता है कि हमें प्राप्त जीवन, ईश्वरीय उपहार है जो हमें अपनी चेतनावस्था के अनुसार एक बार मिला है, इसलिए हमें इस जीवन के प्रत्येक क्षण का भरपूर आनंद लेना है। इसी के साथ भारतीय धर्म, ज्ञान दर्शन और संस्कृति के अनुसार, हमारा जीवन आध्यात्मिकता से ओत प्रोत है क्योंकि यहां मानवीय आत्मा को परमपिता परमात्मा से जोड़कर देखने की परम्परा है। इतना ही नहीं इस सृष्टि की प्रत्येक गतिविधियां, प्रकृति, पशु-पक्षी और मनुष्य जीवन के क्रियाकलाप यह स्पष्ट संकेत देते हैं कि इस सम्पूर्ण जगत का कोई न कोई नियंता और पालनहार है।

ईश्वर प्रदत्त इस अद्भुत जीवन यात्रा का भरपूर आनंद उठाने के लिए यह आवश्यक है कि हम अपनी कार्यशैली और तौर तरीकों में बदलाव लाएं। खिलते-हंसते चेहरे सभी को अपनी ओर आकर्षित करते हैं, इसलिए खूब हंसे, मुस्कुराएं और अपने साथ-साथ दूसरों को भी खुश रखें। संभव हो तो बड़े बुजुर्गों और नन्हें बच्चों के बीच में रहकर भी कुछ समय बिताएं। अच्छी सेहत से ही सुन्दर जीवन की कल्पना की जा सकती है। अतएव हमेशा सेहतमंद बने रहने के लिए सैर करें, व्यायाम करें, खेलों में भाग लें ताकि शारीरिक तंदुरूस्ती बरकरार रहे और ऊर्जा का स्तर भी ऊंचा हो, साथ में रात को भरपूर नींद भी लें ताकि अगले दिन के लिए पुनः तरो ताजा होकर अपने कार्यों में जोश खरोश से जुट जाएं। प्रतिदिन अपनी सुविधानुसार एकांत में बैठें और अपने जीवन को सुन्दर एवं उत्तम बनाने के लिए स्वयं अपने अंतर्मन से विमर्श करें, अपना साक्षात्कार करें। एक निर्धारित समय पर ज्ञानवर्धक पुस्तकों को भी पढ़ें ताकि हमें बौद्धिक खुराक भी मिलती रहे और हमारा विवेक भी जागृत रहे। प्रातः उठकर ध्यान लगाएं, योग का नियमित अभ्यास करें। जितना ज्यादा हो सके स्वच्छ पेयजल पीयें, संतुलित फाइबर युक्त भोजन करें। नकारात्मक विचारों से दूर रहकर सकारात्मक सोच को अपनी ताकत बनाएं एवं गप्पशप्प बाजी से दूर रहें। अपना कीमती समय ईर्ष्या, द्वेष, निंदा करने जैसी बुराईयों में न गंवाकर अपनी ऊर्जा रचनात्मक कार्यों में लगाएं। जहां तक हो सके साप्ताहिक आधार पर समाज सेवा के लिए भी समय निकालें। यदि संभव हो सके तो गरीबों के बच्चों को मुफ्त पढाएं, अपनी गलियों में स्वच्छता अभियान आदि चलाएं। वर्तमान में जीने की आदत डालें और गढे़ मुर्दे न उखाडे़ं।

जीवन रूपी पाठशाला में हमें कई तरह के सबक सीखने पड़ते हैं। छोटी-बड़ी समस्याएं पैदा होना भी मानवीय जीवन का अंग हैं। लेकिन यहां सीखे गए अनुभव हमारी आगामी जीवन यात्रा को सुगम एवं सफल बनाते हैं। कभी भी अपनी जिंदगी की तुलना दूसरों के साथ न करें क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति के तौर तरीके भिन्न होते हैं। दूसरे लोग आपके बारे में क्या सोचते हैं, पीठ पीछे क्या कहते हैं अथवा आपके बारे में क्या राय रखते हैं यह उनकी सिरदर्दी है। अपने आपको व्यर्थ की सोच में न उलझाएं। जीवन में आने वाली हर अच्छी बुरी परिस्थितियां सदैव एक समान नहीं रहती हैं, वे बदलती रहती हैं अतएव हमें निरन्तर कर्मशील बने रहना चाहिए। दूसरों के प्रति ईर्ष्या भाव रखना अपना दिमागी संतुलन बिगाड़ने जैसा है। जीवन के किसी भी दौर में आप शिखर पर पहुंच सकते हैं इसलिए उठें, तैयार हो और अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करते रहें। अपनी क्षमताओं को बढ़ाते रहें हमेशा आगे बढ़ते रहें और सदैव सही काम करें।

हमें यह भी याद रखना चाहिए की दुख जीवन में इसलिए आते हैं ताकि हम सुख के महत्व एवं मूल्य को समझ सकें। ईमानदारी को अपने जीवन में अपनाएं और उसे जीएं भी। युवाओं को चाहिए की वे अपनी कमजोरियों को पहचाने और उन्हें दूर करें। अपने सपनों को साकार करने के लिए हमें पहले अपने मन की सुननी चाहिए फिर अपना लक्ष्य निर्धारित कर कड़ी मेहनत से अपने मुकाम को हासिल करने के लिए प्राण पण से जुट जाना चाहिए। कामयाबी पाने के सफर में अनेकों उतार-चढ़ाव आते हैं लेकिन यदि इंसान के इरादे बुलंद हों तो सफलता जरूर मिलती है। इसी प्रकार आगे बढ़ने के लिए कई बार हमें जोखिम भी उठाना पड़ता है लेकिन सोच विचार कर उठाया गया जोखिम प्रायः हमें सफलता की ओर ले जाता है। जीवन का अर्थ प्रत्येक प्राणी अपनी पारिवारिक परिस्थितियों परिवेश, विचारों और संस्कारों के अनुसार निर्धारित करता है लेकिन जीवन में कुछ बनने अथवा पदवी हासिल करने के लिए कठोर परिश्रम ही फलदायक साबित होता है।

.................,

गौरवमय देश का आधार है नारी ?

भारतीय धर्म दर्शन, ज्ञान और संस्कृति में नारी महिमा और सामाजिक कुरूतियों के विरूद्ध महिलाओं के योगदान को रेखांकित किया गया है। चाहे वीरता का क्षेत्र हो या विद्वता का प्रत्येक जगह वीरांगनाओं और विदुषियों ने अपनी अप्रतिम छाप छोड़ी है। रानी लक्ष्मीबाई, रानी चिनम्मा, बेगम हजरत महल, कैप्टन लक्ष्मी सहगल हों या प्राचीन काल में लोपामुद्रा, मैत्रेयी, गार्गी और अपाला जैसी विदुषियां, सबने अपने ज्ञान से भारत की गौरवगाथा को चार चांद लगाएं हैं। भारतीय नारी गुणों की खान है कोमलता, स्नेह, दया, प्रेम सहिष्णुता और सहनशीतला से भरपूर महिलाएं आज जीवन के सभी क्षेत्रों में पुरूषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं और पारिवारिक तथा सामाजिक दायित्वों का बखूबी निर्वहन भी कर रही हैं। शिक्षा के प्रचार प्रसार से अब तस्वीर कुछ बदली तो है परन्तु आंकड़े कहते हैं कि आज भी आधी भारतीय आबादी के हितों को सुरक्षित बनाने के लिए मीलों लम्बे सफर को तय करना बाकी है। महिलाओं को न्याय दिलाने और उनके लिए समान अधिकारों की व्यवस्था करके नारी सशक्तिकरण की अवधारणा को पुख्ता बनाने की जरूरत है।

हमारी संसद में महिलाओं का प्रतिनिधित्व इतना कम है कि दक्षिण सूडान और सऊदी अरब जैसे देश भी इस मामले में हमसे आगे हैं। संसद में महिलाओं के प्रतिनिधित्व के मामले में विश्व के 141 देशों में भारत का स्थान 103 वां है जबकि एशिया में 18 देशों में हमारी रेंकिंग 13वीं हैं। वहीं वैश्विक औसत में महिलाओं का संसदीय परम्परा में हिस्सेदारी 22.4 प्रतिशत है तो भारत में यह प्रतिशत मात्र 12 फीसदी ही है। भारतीय संघ के राज्यों में कुल विधायकों की संख्या 4,120 है और 31 दिसम्बर 2014 की स्थिति के मुताबिक मात्र 360 महिला विधायक ही चुनाव में जीतकर विधान सभाओं में सुशोभित हो पाई थीं जबकि राज्य सरकारों में कुल 568 मंत्रियों में 39 महिलाएं ही मंत्री पद पर आसीन थीं। जब तक महिलाओं को टिकट बंटवारे में पूरा प्रतिनिधित्व नहीं दिया जाएगा तब तक मंत्रिमण्डल में उनकी उचित भागीदारी भी सुनिश्चित नहीं हो पायेगी।

न्यूयार्क स्थित ‘इंटरनेशनल कमीशन आन फाइनांसिंग ग्लोबल एजुकेशन आपर्चुनिटी’ के ताजा शोध के अनुसार भारत में महिला साक्षरता की स्थिति पड़ोसी देशों के मुकाबले बेहद खराब है प्राइमरी शिक्षा में पांचवी कक्षा तक साक्षर महिलाओं का अनुपात हमारे देश में 48 फीसदी है जबकि नेपाल में यह 92,पाकिस्तान में 74 और बांग्लादेश में 54 फीसदी है। 1951 में भारत की कुल साक्षरता दर 18.33 फीसदी थी, जिसमें 27.16 फीसदी पुरूष और 8.86 फीसदी महिलाओं साक्षर थीं। 2011 की जनगणना के मुताबिक इस मामले में प्रगति हुई है और कुल 74.06 फीसदी साक्षरता दर में 82.14 पुरूष और 65.46 प्रतिशत महिलाएं साक्षर थीं अर्थात् महिला साक्षरता को लेकर अभी भी लम्बा सफ़र तय करना पड़ेगा। ‘पापुलेशन रिसर्च इंस्टीट्यूट’ की रिपोर्ट के अनुसार, विश्व के देशों में भारत में वर्ष 2004 से 2014 के बीच लैंगिक आधार पर गर्भपात के कुल 8,51,403 मामले दर्ज किये गए थे और इस मामले में भारत पहले स्थान पर है। 1901 में 1000 पुरूषों पर 972 महिलाएं थी तो 2011 की जनगणना के अनुसार यह आंकड़ा गिरकर 940 पर आ गया है। वैसे तो भारत में कानूनन लड़कियों की विवाह योग्य आयु कम से कम 18 वर्ष निर्धारित की गई है तथापि वर्तमान में महिलाओं की औसत आयु 19.5 वर्ष है, जो कहीं न कहीं लड़कियों की शिक्षा-दीक्षा को भी प्रभावित करती है।

20वीं आर्थिक जनगणना के आंकड़ों के अनुसार हमारे देश में 5 करोड़ 85 लाख उद्यम हैं जिनमें मात्र 14 फीसदी व्यवसायों की बागडोर महिलाओं के हाथ में है। महिलाओं द्वारा संचालित उद्यमों में से ज्यादातर व्यवसाय छोटे स्तर के हैं और 79 फीसदी स्ववित्तपोषित हैं। यदि महिलाओं के प्रति अपराधों के आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो एनसीआरबी- 2014 के मुताबिक पिछले 10 वर्षों में महिलाओं के खिलाफ हुए अपराध के आंकडे़ बताते है कि प्रति घंटे ऐसे 26 अपराध यानि हर दो मिनट में एक शिकायत दर्ज होती है। पिछले एक दशक में 22 लाख 40 हजार महिलाओं के प्रति अपराधों की शिकायतें दर्ज की गईं। एनसीआरबी के आंकड़ों को देखें तो पता चलता है कि वर्ष 2015 में हमारे देश में बलात्कार के 34051 मामले दर्ज़ किए गए थे जिनमें 33098 मामलों में इस घृणित अपराध को अंजाम देने वाले पीडि़ता के परिचित अथवा रिश्तेदार थे। सख्त कानून बनाने के बावजूद 2004 से 2014 के बीच स्त्रियों के विरूद्ध अपराधों में ज्यादातर मामले हत्या, हत्या की कोशिश, बलात्कार, अपहरण, लूटपाट, दहेज हत्या, उत्पीडन, पति द्वारा क्रूरता अपमान और स्त्रियों पर हमले के दर्ज किए जाते हैं। ब्यूरो आफ पुलिस रिसर्च एंड़ डिवेल्पमेंट, यू.एन वूमन रिर्पोट और सी.एच.आर.आई के साथ-साथ एन.सी.आर.बी. के आंकडे़ बताते हैं कि महिलाओं के खिलाफ अपराध बड़ी तेजी से बढे़ हैं। हमारे देश में महिला पुलिसकर्मियों की संख्या मात्र 6.11 प्रतिशत ही है। भारत में कुल पुलिस बल की आधिकारिक संख्या 17 लाख 22 हजार 786 हैं उसमें से महिला पुलिस कर्मियों की संख्या मात्र 1 लाख 5 हजार 325 है। विकसित देशों में कुल पुलिस बल में 25 प्रतिशत महिलाएं हैं तो वैश्विक 9 फीसदी है और भारत में यह औसत 6.11 प्रतिशत ही है। महिला पुलिस कर्मचारियों वाले शीर्ष केन्द्र शासित एवं राज्यों में 14.16 प्रतिशत के साथ चण्डीगढ़ पुलिस पहले स्थान पर है तो 11.07 फीसदी के साथ हिमाचल प्रदेश चैथे नम्बर तथा राज्यों में तमिलनाडू के बाद दूसरे स्थान पर है। पुलिस विभाग में पुरूष वर्चस्व के चलते अभी इस दिशा में व्यापक सुधार किए जाने की जरूरत है।

भारत वर्ष में महिलाओं की आबादी का लगभग 48 प्रतिशत है लेकिन महिला केन्द्रित योजनाओं पर कुल बजट का बहुत ही कम हिस्सा खर्च किया जाता है। 2011 में जहां यह बजट आबंटन मात्र 6.22 प्रतिशत था तो 2016 में घटकर 4.50 प्रतिशत रह गया है। केन्द्र सरकार ने चौदहवें वित्त आयोग की सिफारिश के मुताबिक, केन्द्रीय राजस्व में राज्यों का हिस्सा बढ़ा दिया है और सामाजिक कल्याण पर अपना खर्च घटा दिया है, अब यह राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है कि वे महिला केन्द्रित योजनाओं को आगे बढ़ाएं। महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम के अन्तर्गत मार्च 2008 तक महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से स्वयंसिद्धा कार्यक्रम चलाया जा रहा था। इस स्कीम के तहत 650 ब्लाकों में 10.02 लाख लाभार्थियों के 69,774 स्वयं सहायता समूह गठित किए जा चुके थे वस्तुतः महिला सशक्तिकरण का अर्थ एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें महिलाओं को अपने आपको संगठित करने की क्षमता बढ़ती और सुदृढ़ होती है। उनमें लिंग, सामाजिक आर्थिक स्थिति और परिवार एवं समाज में भूमिका के आधार पर आत्मनिर्भरता बढ़ती है। महिला सशक्तिकरण की राह में अभी भी कई दुश्वारियां हैं और आंकड़ों की बानगी तो जाहिर कर रही है कि जब तक लैंगिक भेदभाव, घरेलू हिंसा, बलात्कार, यौनहिंसा, असमानता, वेश्यावृत्ति, मानव तस्करी और महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराधों पर काबू नहीं पाया जाता तब तक महिलाओं को सशक्त नहीं बनाया जा सकता है। यदि समाज को जगाना, जागृत और आगे बढ़ाना है तो महिलाओं के अधिकारों का संरक्षण और रक्षा जरूरी है। संसद द्वारा बनाए गए कई कानूनों को धरातल पर लागू करके ही हम भारत की आधी आबादी को शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से सशक्त बना सकते हैं।

--

अनुज कुमार आचार्य

बैजनाथ

मो. नं. 9736443070

COMMENTS

BLOGGER
नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4288,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3239,कहानी,2360,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,1,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: अनुज कुमार आचार्य के प्रेरक आलेख
अनुज कुमार आचार्य के प्रेरक आलेख
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2017/04/blog-post_63.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2017/04/blog-post_63.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content