विज्ञान-कथा : जुलाई-सितंबर 2017 - डॉ. कलाम : विमुक्‍त भागीदारी का मंत्र -लक्ष्‍मण प्रसाद’

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डॉ. ए.पी.जे. अब्‍दुल कलाम का व्‍यक्‍तित्‍व सम्‍मोहक तथा बहुपक्षीय था। उनका महत्त्व रामेश्‍वरम्‌ के एक अनजान ग्रामीण लड़के से राष्‍ट्रपति भवन...

डॉ. ए.पी.जे. अब्‍दुल कलाम का व्‍यक्‍तित्‍व सम्‍मोहक तथा बहुपक्षीय था। उनका महत्त्व रामेश्‍वरम्‌ के एक अनजान ग्रामीण लड़के से राष्‍ट्रपति भवन तक की यात्रा तक सीमित नहीं था। वह बचपन से ही मानवीयता तथा आध्‍यात्‍मिकता से प्रेरित रहे। उन्‍होंने अपने जीवन में सपनों को साकार करने का प्रयत्‍न किया और सफलता ने उनका दामन नहीं छोड़ा। ‘मिसाइल पुरुष’ नाम से प्रख्‍यात्‌ डॉ. कलाम सन्‌ 2020 तक भारत को विकसित राष्‍ट्र का दर्जा दिलाना चाहते थे। वह हमेशा आकाश की ऊँचाईयों तक पहुँचने के इच्‍छुक रहे। वे समाज के सभी वर्गों के साथ-साथ विशेषरूप से बच्‍चों के मस्‍तिष्‍क को प्रज्‍वलित करने के लिए जीवनपर्यन्‍त प्रयत्‍नशील रहे। जो भी व्‍यक्‍ति उनके सम्‍पर्क में आता था, वह उनके अनेक गुणों जैसे ः सादगी, सद्‌भावना, संवेदनशीलता, विनम्रता, आत्‍मीयता, मैत्राीपूर्ण व्‍यवहार आदि से प्रभावित हुए बिना नहीं रहता था। वे सदैव अच्‍छे कार्यों की प्रशंसा करके उनको अपने-अपने क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्‍साहित करने का उनमें एक विशेष गुण था। ऐसे अनेकों व्‍यक्‍ति हैं जिन्‍होंने उनके द्वारा बताये गए मार्ग पर चलकर जीवन में सफलता के साथ अनेक प्रकार की उपलब्‍धियाँ अर्जित की हैं। ऐसे महान व्‍यक्‍तित्‍व को कोई कैसे भूल सकता है? राष्‍ट्रपति के रूप में भी उनकी सादगी एवं विनम्रता में कोई कमी नहीं देखी गयी। उनको शैक्षिक एवं धार्मिक संस्‍थाओं एवं स्‍थलों में जाना सदैव रुचिकर लगता था। प्रत्‍येक धर्म के धर्मगुरुओं से विस्‍तृत चर्चा करने में बहुत आनन्‍द आता था और वे बिना भेदभाव सभी धर्मों के श्रेष्‍ठ विचारों एवं आस्‍थाओं को ग्रहण करने में संकोच नहीं करते थे। एक बार जब वे गुजरात के एक आश्रम में गये तो वहाँ के एक संन्‍यासी ने पूछा कि डॉ. कलाम आप हर समय इतने ऊर्जावान एवं उत्‍साही कैसे रहते हैं? तो उन्‍होंने सहज भाव से उत्‍तर दिया और कहा कि स्‍वामी जब मैं लिफ्‍ट से प्रथम तल से भू तल तक आता हूँ तो उस अल्‍प समय में भी मैं सदैव एक ही बात सोचता रहता हूँ कि मैं लोगों को एवं समाज को क्‍या दे सकता हूँ? जब मैं किसी बच्‍चे से मिलता हूँ तो मैं उसे क्‍या दे सकता हूँ जिससे उसे खुशी मिले। इसी प्रकार जब मैं किसी संन्‍यासी/साधु से मिलता हूँ तो मैं सदैव सोचता रहता हूँ कि मैं क्‍या दे सकता हूँ? इसी से मैं हर पल ऊर्जावान एवं उत्‍साहित बना रहता हूँ। उन्‍होंने स्‍वामी से कहा कि दुनिया हमको बताती है कि हम दूसरों से क्‍या ले सकते हैं? क्‍या हम कभी सोचते हैं कि हम दूसरों को क्‍या दे सकते हैं जिससे उनको आगे बढ़ने में मदद मिले? स्‍वामी ने बताया कि अहमदाबाद एक ऐसा नगर है जहाँ हम सदैव दूसरों से लेने की बात लगातार करते रहते हैं और देने की बात पर हम ध्‍यान ही नहीं देते। यदि जब हम किसी को कभी कुछ देते हैं तो उसके बदले में हमको क्‍या लाभ मिलेगा, ऐसी हमारी मानसिकता बन गयी है। इस प्रकार की सोच में कैसे परिवर्तन लाया जा सकता है? इसके उत्तर में डॉ. कलाम ने कहा कि हमको समाज में पूर्ण रूप से सकारात्‍मक सोच विकसित करनी होगी, उसी सोच के द्वारा हम समाज में परिवर्तन ला सकते हैं। इसलिए लोगों को एवं समाज को आगे बढ़ाने के लिए सकारात्‍मक सोच और विचारों की बहुत ही आवश्‍यकता होती है।

इस कार्यक्रम के बाद जब डॉ. कलाम आश्रम से बाहर जा रहे थे तो लगभग 40 मीडिया कर्मियों ने उन्‍हें घेर लिया और बातचीत करने के लिए आग्रह किया। उनके आग्रह पर डॉ. कलाम ने उनसे कहा कि आप सर्वप्रथम अपने कैमरे अलग कर लें और उसके उपरान्‍त एक शिक्षक के रूप में कहा कि आप अपने कलम और पैड भी अलग रख दें। सभी मीडियाकर्मियों ने उनके इस सुझाव का पालन किया। उसके उपरान्‍त डॉ. कलाम ने कहा कि मैं आपको ‘‘फ्री पार्टनरशिप’’ को ग्रहण करने का सुझाव देता हूँ। सभी उपस्‍थित महानुभावों ने बहुत ही उत्‍सुकता से पूछा कि यह ‘‘फ्री पार्टनरशिप’’ क्‍या चीज होती है? इसके उत्तर में डॉ. कलाम ने कहा कि ‘‘बिना किसी स्‍टेक के आप अपने-अपने तरीके से देश की प्रगति/उन्‍नति में भागीदार/साझेदार बनें।’’ आगे कहा कि आप अपने घर की प्रगति के साथ-साथ अपनी पत्‍नी की प्रगति में भागीदार बनें और आपकी पत्‍नी भी आपकी प्रगति में भागीदार बनने की भूमिका निभाये और आपस में किसी भी प्रकार की प्रतिस्‍पर्धा नहीं होनी चाहिए। इसी प्रकार आप अपने बच्‍चे के उत्‍थान में भागीदार बनें और अपने-अपने कार्यालयों में अपने वरिष्‍ठ अधिकारियों एवं कनिष्‍ठों की उन्‍नति में भी भागीदारी की सक्रिय भूमिका निभायें। इस प्रकार के विचारों का पालन वही व्‍यक्‍ति कर सकता है जिसकी सोच पूर्ण रूप से सकारात्‍मक होती है। इन सकारात्‍मक विचारों को सुनने के उपरान्‍त कुछ मीडिया कर्मियों ने कलाम साहब से मुस्‍कुराने के लिए कहा तो तुरन्‍त इसके उत्तर में, उन्‍होंने बताया कि जैसे आप मुझे मुस्‍कुराने के लिए कह रहे हैं वैसे ही आपके द्वारा किये गये सकारात्‍मक कार्यकलापों से ‘‘देश मुस्‍कुराए’’।

डॉ. कलाम के इस गूढ़ संदेश में बहुत कुछ छिपा है। ‘‘देश तभी मुस्‍कुरायेगा’’ जब देश का प्रत्‍येक नागरिक अपने-अपने कार्य को ईमानदारी एवं पूर्ण निष्‍ठा के साथ समर्पित भाव से पूरा करे। जिस प्रकार की समाज की वर्तमान स्‍थिति है उसमें प्रत्‍येक छोटे-बड़े न्‍यायाधीश को बिना भेदभाव, लालच आदि में न फँसकर सत्‍यनिष्‍ठा से न्‍याय करना होगा। इसी प्रकार नेताओं और राजनेताओं को भी निजी स्‍वार्थ त्‍याग कर देश एवं समाज की उन्‍नति के लिए घोर ईमानदारी से कर्तव्‍य निभाना होगा। इसके अलावा समाज के एक और महत्‍वपूर्ण अंग हमारे ‘शिक्षकों’ को सबसे अधिक जिम्‍मेदारी से, बिना किसी भेदभाव के, लालच आदि में न फँसकर निःस्‍वार्थ भाव से छात्रा/छात्रााओं को अत्‍यंत योग्‍य बनाना होगा। इसी प्रकार चिकित्‍सकों को भी धनलोलुपता से दूर रहकर राष्‍ट्र को स्‍वस्‍थ बनाने में अपनी अहम भूमिका निभानी होगी। देश की नौकरशाही को भी पूर्ण रूप से पाक-साफ बनाने की आवश्‍यकता को नकारा नहीं जा सकता। देश की आर्थिक एवं सामाजिक प्रगति में उद्योगपतियों की एक अहम भूमिका होती है, उनको भी इस दिशा में सत्‍यनिष्‍ठा से आदर्श स्‍थापित करने की आवश्‍यकता है। जिससे उनके उद्योगों में कार्य करने वाले सभी छोटे-बड़े कर्मचारियों एवं अधिकारियों का े भी बहुत ही महे नत आरै ईमानदारी के साथ अपने अपने कार्य को कर्मठता के साथ अंजाम देने की आवश्‍यकता है। वैज्ञानिकों एवं टैक्‍नोलॉजिस्‍ट्‌स को भी ‘‘देश के मुस्‍कुराने’’ में नयी-नयी खोजों एवं नये-नये उपकरणों, उत्‍पादों के विकास के द्वारा समाज की सेवा करने में सत्‍यनिष्‍ठा से योगदान करना होगा। समाज के अति पिछड़े वर्ग जैसे- किसान, मजदूर आदि को भी लगन एवं कठिन मेहनत के साथ अपने-अपने कामों को समर्पित भाव से करने की आवश्‍यकता है जिससे उनकी खुशहाली के साथ-साथ समाज की सोच में भी बदलाव आयेगा। इस प्रकार हम डॉ. कलाम द्वारा प्रतिपादित प्रस्‍ताव ‘‘फ्री पार्टनरशिप’’ में भाग लेकर उनके इस मंत्रा द्वारा भारत को विश्‍व के सर्वश्रेष्‍ठ देशों की श्रेणी में महत्‍वपूर्ण स्‍थान दिलाने में सक्रिय भूमिका निभायें। दूसरे शब्‍दों में, जिस प्रकार आज़ादी की लड़ाई के लिए महात्‍मा गाँधी ने ‘‘करो या मरो’’ का नारा दिया था, उसी प्रकार भारत को एक ‘‘विकसित राष्‍ट्र’’ बनाने के लिए डॉ. कलाम ने ‘फ्री पार्टनरशिप’’ का मूलमंत्र दिया है, जो वास्‍तव में देश की उन्‍नति का मार्ग प्रशस्‍त करेगा। ई-मेल ः lakshmanratna@yahoo.co.in

नाम

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आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र 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मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi 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रचनाकार: विज्ञान-कथा : जुलाई-सितंबर 2017 - डॉ. कलाम : विमुक्‍त भागीदारी का मंत्र -लक्ष्‍मण प्रसाद’
विज्ञान-कथा : जुलाई-सितंबर 2017 - डॉ. कलाम : विमुक्‍त भागीदारी का मंत्र -लक्ष्‍मण प्रसाद’
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रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2017/06/2017_27.html
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