प्राची // जूनी 2017 // समीक्षात्मक आलेख // यदि पहल जिजीविषापूर्ण हो // सुषमा श्रीवास्तव

SHARE:

अ नुभूत यथार्थ के विलोड़नकारी तत्वों की साजिश जब अपनी सीमाएं लांघती है, तो किसी रचना का सृजन होता है. यह अनुभव कई धाराओं में बहता है, पर कथान...

नुभूत यथार्थ के विलोड़नकारी तत्वों की साजिश जब अपनी सीमाएं लांघती है, तो किसी रचना का सृजन होता है. यह अनुभव कई धाराओं में बहता है, पर कथानक में यूं पैठ जाता है कि कोई कहानी, या उपन्यास का जन्म होता है.

आलोच्य उपन्यास ‘‘काले सफेद रास्ते’’ 446 पृष्ठों का वृहद उपन्यास है. लेखक हैं राकेश भ्रमर. इसकी आधारभूमि उत्तर प्रदेश का एक गांव कंचनपुर है. गांव-गांव ही होते हैं पर सबकी फिज़ा एक सी नहीं होती. कार्य, पेशा, संस्कार और आबादी के अनुसार स्थितियां भिन्न-भिन्न होती हैं. यूं लोग खुशहाल हैं. गांव में अंग्रेजों के जमाने का प्राइमरी स्कूल है. ग्रामीण अपनी-अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार काम करने, पढ़ने और नौकरी करने पास के कस्बे और शहर जाते रहते हैं.

उपन्यास गांव में सदियों से फैले, जाति, वर्ग, भेद, छुआछूत के इर्द-गिर्द घूमता है. एक सिरे पर रहती है राजनीति, दूसरे छोर पर सामाजिक संरचना, तीसरे छोर पर शिक्षा,

धनी-निर्धन विभेद और सबमें गुंफित है प्रेम.

पन्ने पलटने पर पाया कि पूरा समाज खांचों में बंटा हुआ है. गांव का युवा वर्ग स्कूल कॉलेज जाता है, लेकिन पढ़ाई में रुचि ‘न’ के बराबर है. अधिकांश युवक उच्च वर्ग से आते हैं. लड़के-लड़कियों की पढ़ाई एक साथ होती है. बिना कारण तटस्थ रहते हैं, कारण मिलने पर उन्मादी हो जाते हैं. तिनके का बवंडर और चिंगारी का दावानल बनाना यहां खूब चलता है. आधी-अधूरी बतकही हो, लंबी डोर की पतंग से अफवाहों के बादल उड़ा देना, ये निठल्ले लोग खूब जानते हैं. सफलता मिले न मिले, इनकी कोशिश चालू रहती है.

आबादी का एक तिहाई वर्ग ब्राह्मण, ठाकुर व अन्य ऊंची जातियों का है, बाकी नीची जाति का निर्धन वर्ग. ब्राह्मण, ठाकुर आदि मजदूरों, निर्धन वर्ग को हथियारों की तरह इस्तेमाल करते हैं. वह लोग और उनके परिवार के लोग खटे ही, उसके साथ उनकी खुशामद में लगा रहे, कमर दोहरी करके उनकी जयकार करता रहे. पूर्णतः गुलाम की तरह रहे. कामगार मजदूर लोहार, कुम्हार, धोबी व अन्य. अन्य इसीलिए कि निर्धनता की अपनी पहचान होती है.

किसी बड़े घर में अगर कोई भोज हो रहा है, तो कौन जाति का व्यक्ति कहां बैठेगा, किस पंगत में खाएगा, यह सब पहले ही से तय है. किस-किस वर्ग के व्यक्ति के, कुएं-बावली से पानी निकलने पर कुआं बावली अश्पृश्य हो जाएगी, यह भी तयशुदा होता है. सदियों से चली आ रही परंपराओं की निरंतरता पीढ़ी-दर-पीढ़ी बनी हुई है. गलत-सही का विचार कोई नहीं करता, न विरोध न प्रतिरोध. ‘देवो का भाख है यह,’ कोई क्या कर सकता है?

धनी, सम्माननीय वर्ग अपने रसूख और पैसे के बल पर, गरीबों का खून चूस कर, बेईमानी से गरीबों की जमीन पर कब्जा करता है. वह इस तरह अपनी काश्त बढ़ाते हैं. कर्जों के बीच फंसा गरीब अपने ही खेतों में मजदूरी करने को

बाध्य होता है.

गांवों के कुछ पढ़े-लिखे, जो बाहर रहते हैं, आकर अपनी पुश्तैनी के लिए भिड़ते भी हैं, तो थाना पुलिस की खरीद-फरोख्त के कारण. अपराधी खुली हवा में खेलते हैं और निर्धन माटी का बेटा मार दिया जाता है. सब कुछ इसी रूप में है.

गांव में पहले जो रजवाड़े, सामंत, जमींदार होते थे, वह अब विधायक प्रधान होते हैं. चलती है चुनाव की प्रक्रिया. वोटिंग में धनी वर्ग का ही दबदबा रहता है. वोटरों को मोहित करने की रंग-बिरंगी चालें चली जाती हैं. किसी निर्धन की हिम्मत कहां कि वह ब्राह्मणों ठाकुरों के सामने खड़ा भी हो सके. पुराने राजनीतिबाजों ने नए पांसे फेंकने शुरू कर दिये हैं. गांव के प्रतिष्ठित ठाकुर परिवारों में मुख्य थे- ठाकुर दिग्विजय सिंह, ब्रजपाल सिंह, जगबीर सिंह, रामपाल सिंह आदि.

ठाकुर रामपाल सिंह का व्यक्तित्व भिन्न था. वह खुली सोच वाले बड़े काश्तकार थे. बेटे सौरभ के खेती सम्हाल लेने से कोई जिम्मेदारी नहीं थी. उनका व्यवहार मृदु, संस्कारी बदलाव के समर्थक.....शिक्षा, उनकी प्राथमिकता थी. चिंतन में भी वह पुरानी स्थापनाओं में परिवर्तन के इच्छुक थे. बेटी

सुगन्धा के लिए उनके सपने इन्हीं आदर्शों पर आधारित थे. उनकी सोच थी कि सिद्धांतों की राह पर पहले खुद चलना पड़ता है. उपन्यास की नायिका सुगंधा की परवरिश इसी सोच के अंतर्गत हुई थी. सुगंधा सुंदर, विवेकशील, संस्कारी और

मेधावी लड़की थी.

इसके विपरीत, नायक प्रमोद दलित मजदूर सुखदेव का बेटा था. ह्रष्ट पुष्ट, सौम्य, बुद्धिमान, सुंदर, पढ़ाई में तेज प्रमोद सुगंधा का सहपाठी था. उसे भा गया था. सुखदेव ने प्रमोद की पढ़ाई चलाने के लिए पूरी सामर्थ्य और शक्ति झोंक दी थी, पर खर्च किसी तरह पूरे नहीं पड़ते थे. किसी तरह प्रमोद की पढ़ाई चल रही थी. ऊंची कक्षाओं की पढ़ाई की बड़ी जरूरतें थीं. अभाव ही अभाव की स्थिति थी.

गांव के मित्र स्कूली पढ़ाई के लिए प्रमोद की मदद लेते थे. विशेषकर रेखांकित है मित्र राघवेन्द्र. वह ठाकुर था. सारे स्कूल के काम, प्रश्नोत्तर कॉपी करना, यह वह लापरवाही से प्रमोद के ऊपर डाल देता था. खुद घूमता था और प्रमोद अपनी ढिबरी का तेल जलाता था. मित्र भाव से काम तो कर देता था, लेकिन इस बेगार को लेकर वह एक मानसिक द्वंद्व में फंस जाता था. अपने अस्तित्व का सम्मानजनक स्वीकार उस ग्रामीण समाज में संभव ही नहीं था. उम्र की परिपक्वता के साथ ही, यह सारी चिलगोजियां उसकी समझ में आ रही थीं. मौन रहने पर भी उसकी इंद्रियां इस भेदभाव को गहराई से महसूस करती थीं.

मित्रों के व्यंग्य बाणों से आहत होता प्रमोद पल पल प्रताड़ना झेलता था. अपनी अभावों की धूल से भरी कमीज की सफेदी बनाए रखने में उसे काफी मुश्किल होती थी. स्थिति समझते हुए उसका मौन रहना ही श्रेयस्कर था.

सुगंधा और प्रमोद दोनों को ही उच्च श्रेणी के नंबर मिले थे. आगे की पढ़ाई के लिए सुगंधा लखनऊ चली गई, और प्रमोद इलाहाबाद. सुगंधा समृद्ध थी और प्रमोद को कॉलेज की पढ़ाई जारी रखना मुश्किल था. इसके लिए सुखदेव को गांव की मजदूरी छोड़कर अहमदाबाद जाना पड़ा. प्रमोद के सुंदर मामा ने उन लोगों की मदद की. फिर भी वह देर सबेर ही पैसा भेज पाता था, लेकिन ईश्वर के करोड़ों हाथ हैं. इन्हीं हाथों के रूप में मनोज, सुगन्धा, सुन्दर मामा और उसके कमरे का साथी महेन्द्र उसे मिले थे. इन लोगों ने उसका आत्मिक बल बढ़ाया.

सुगंधा और प्रमोद, जातीय समीकरण के दो ध्रुव, बेमेल संगति, इसका क्या भविष्य हो सकता है. कंकरीली पथरीली पगडंडियों पर चल कर भी कहीं न पहुंचने वाला- समाज में ऐसे जोड़ जल्दी ही समाप्त कर दिए जाते हैं. चाहे वह, कितने भी आदर्शों से बंधे हुए न हों.

प्रेम शाश्वत होता है. दुनिया की सारी भौगोलिक सरहदों को पार करता हुआ, प्रेमियों की उत्यांतिक खोहों में उतर कर कहां छुप जाता है, पता नहीं चलता. प्रेम करने वाले स्वयं में मगन रहते हैं. और प्रेम की खुशबू चारों ओर फैल जाती है.

जहीन, सौम्य, प्रमोद न जाने कब से, कितने ही चोर दरवाजों को पार करता हुआ सुगंधा के अंतर में स्थापित हो गया था. सुगंधा निडर और बेबाक थी, पर प्रमोद आगामी परिस्थितियों को लेकर भयभीत था.

संस्कृति, आचार-विचार रहन-सहन के तौर तरीकों ने मानव को ही टुकड़ों में बांट दिया है. व्यवस्था के इन्हीं दुर्दमनीय खरोंचों से आक्रांत थम थम कर दलदली गलियों में चलने वाले प्रमोद को सफलता की ओर ले जाने वाली पगडंडियों पर, परंपराओं से समन्वय बैठाने में त्रासद दर्द झेलना पड़ा था.

प्रेम ही वह शक्ति थी जिसने प्रमोद को अपना आत्मविश्वास बनाए रखने में मदद की थी. कभी सामाजिक संरचना के उलझे हुए तंतुओं को तोड़ने का साहस वह कर सका.

सुगंधा गांव में प्रमोद के घर गई थी. यह एक कदम ज्वलनशील हो सकता था, लेकिन.....

‘‘उसका चेहरा आत्मविश्वास से भरा हुआ था. उसके चेहरे पर फूल खिले हुए थे.’’

प्रमोद की घबराहट देख कर उसने कहा-

‘‘मुझे जितनी अपनी उड़ान की चिंता है, उतनी ही आपके जीवन की भी.’’

सुगंधा और प्रमोद के इसी प्रेम का एक प्रेरणा, एक लक्ष्य में परिवर्तित होते जाना, कुछ मीठी-मीठी अनुभूति जगाता था. असीम धैर्य से, अपने प्रेम का पाथेय लिए, दोनों ही सब भूलकर पढ़ाई में लग गए. अब उनकी अर्जुन दृष्टि केवल लक्ष्य पर थी.

इधर पिता सुखदेव और माता जगरानी की चिंता.....

‘‘अगर ऐसा हुआ तो न केवल प्रमोद के लिए, बल्कि पूरे परिवार के लिए बुरा होगा. पता नहीं कोई जिन्दा बचेगा भी कि नहीं....एक गरीब मजदूर और ठाकुर परिवार की बराबरी....’’

प्रशासनिक सेवा में चयन के बाद सुगंधा और प्रमोद के चुपचाप, अपने कुछ नजदीकियों के बीच विवाह कर लिया. प्रमोद के माता-पिता का आशीर्वाद मिला. सुगंधा को इस अवसर पर पिता का होना चुभ तो रहा था, पर पिता का सपना पूरा कर, उसने उनका आशीर्वाद प्राप्त कर लिया था. ठाकुर रामपाल सिंह का मानस इस बदलाव के लिए तैयार था. इस जगह पर आने के लिए उन्हें कितने तूफानों से गुजरना पड़ा होगा, यह कोई नहीं जानता.

उपन्यासकार सोचता है कि अंत इसका सुखांत होना चाहिए या दुखांत. सुगंधा और प्रमोद- विपरीत ध्रुवों के इस युग्म को, इस सकारात्मक मोड़ पर लाने के लिए, धारा से उलट चलने के लिए, यह उनका साहसिक कदम है. विशेषकर, गांवों के माहौल को नजर में रखते हुए.

समाज में छुआछूत, जातिभेद के निराकरण के लिए, स्वर्ग से, किसी मसीहा को, नहीं उतरना है. यह पहल खुद ही करनी होगी. शहरों में प्रोफेशलन रिश्तों के लिए जाति कोई टैबू नहीं है.

भाषा में प्रवाह है, शैली रोचक. 446 पृष्ठों का यह उपन्यास पूरे समय आपको बांध कर रखता है. (उपन्यास अपेक्षाकृत आकार में कुछ छोटा हो सकता था, यदि व्यक्तिगत टिप्पणी थोड़ी कम कर देते.) कवर आकर्षक है.

राकेश भ्रमर के इस उपन्यास का पाठक जगत में स्वागत होगा. पाठकों का आशीष मिलेगा. ऐसा मेरा मानना है.

शिक्षा के उजाले, अंधेरों में, अपना रास्ता बनाने में समर्थ होते हैं. आवश्यकता इस बात की है कि पहल जिजीविषा पूर्ण हो.

---------


कृति : काले सफेद रास्ते (उपन्यास)

लेखक : राकेश भ्रमर

प्रकाशक : प्रज्ञा प्रकाशन, 24, जगदीशपुरम्, निकट त्रिपुला चौराहा, रायबरेली-229001 (उ.प्र.)

पृष्ठ : 446

मूल्य : 660 (सजिल्द)

: 400 (पेपरबैक)

सम्पर्कः ई-144, साउथ मोती बाग,

पोस्ट नानकपुरा, नई दिल्ली

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: प्राची // जूनी 2017 // समीक्षात्मक आलेख // यदि पहल जिजीविषापूर्ण हो // सुषमा श्रीवास्तव
प्राची // जूनी 2017 // समीक्षात्मक आलेख // यदि पहल जिजीविषापूर्ण हो // सुषमा श्रीवास्तव
https://lh3.googleusercontent.com/-KpDONCkLJ98/WXcT77FgHiI/AAAAAAAA5sc/Qz4be43QYW0VUVeWjNDgu7opDdN6DcyUwCHMYCw/image_thumb%255B1%255D?imgmax=800
https://lh3.googleusercontent.com/-KpDONCkLJ98/WXcT77FgHiI/AAAAAAAA5sc/Qz4be43QYW0VUVeWjNDgu7opDdN6DcyUwCHMYCw/s72-c/image_thumb%255B1%255D?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2017/07/2017_7.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2017/07/2017_7.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content