भीषण गरमी का प्रकोप दुनिया को ले डूबेगा - राजकुमार कुम्भज

SHARE:

औसत वैश्विक तापमान का रिकार्ड रखने की आधुनिक व्यवस्था प्रारम्भ किए जाने के बाद से, पिछले 137 बरस में यह मई का महीना दूसरी बार सर्वाधिक गरम र...

औसत वैश्विक तापमान का रिकार्ड रखने की आधुनिक व्यवस्था प्रारम्भ किए जाने के बाद से, पिछले 137 बरस में यह मई का महीना दूसरी बार सर्वाधिक गरम रहा। सबसे ज़्यादा तापमान के संदर्भ में इससे पहले सर्वाधिक गरम मई माह वर्ष 2016 में रहा था। वर्ष 2016 और वर्ष 2017 में निरंतर मई माह का सर्वाधिक तापमान चिंता का विषय बनता जा रहा है।


नासा स्थित ‘गोडार्ड इंस्टीट्यूट फार स्पेस स्टडीज़ अर्थात जीआईएसएस’ के वैज्ञानिकों ने दुनियाभर के तकरीबन छः हज़ार तीन सौ मौसम विज्ञान केन्द्रों, समुद्र की सतह नापनेवाले उपकरणों और अंटार्कटिक अनुसंधान केन्द्रों द्वारा सार्वजनिकतौर पर उपलब्ध करवाए गए आंकड़ों का सूक्ष्म अध्ययन करने के बाद ही इस चिंता का खुलासा किया है। वैसे तो नासा द्वारा किया गया यह एक मासिक मौसम विश्लेषण है, किन्तु वैश्विक तापमान में निरंतर वृद्धि होते जाना बेहद खतरनाक संकेत हैं। भीषण गरमी का भीषण प्रकोप दुनिया को ले डुबेगा।


स्मरण रखा जा सकता है कि वैश्विक तापमान का रिकार्ड रखने की आधुनिक व्यवस्था वर्ष 1880 के आसपास शुरू हुई थी; क्योंकि इसके पहले के सर्वेक्षणों में पृथ्वी के पर्याप्त भाग का, पर्याप्त सर्वेक्षण सम्भव नहीं हो पाता था। इस आधुनिक पद्धति से ही अब दुनिया समझ पा रही है कि हम किस तरह, कितनी भीषण गरमी की चपेट में आते जा रहे हैं और यह पृथ्वी धीरे-धीरे कैसे ग्लोबल-वार्मिंग की गिरफ्त में फंसती जा रही है ?


पिछले बरस अर्थात् वर्ष 2016 के मई माह में विशेष सांख्यिकी गणना के मुताबिक औसत तापमान 0.93 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया था, जबकि इस बरस अर्थात् वर्ष 2017 का मई माह गत वर्ष की तुलना में 0.88 डिग्री सेल्सियस ही अधिक रहा, जो कि पिछली मई के मुकाबले 0.05 डिग्री कम रहा, किन्तु सबसे ज़्यादा तापमान के मामले में तीसरे क्रम पर रहने वाले वर्ष 2014 की तुलना में इस वर्ष का तापमान 0.01 डिग्री अधिक रहा अर्थात् वर्ष 2014 के मई माह में तापमान 0.87 डिग्री सेल्सियस आँका गया था। वह मई माह भी कोई कम गरम नहीं कहा गया था।


वर्ष 1951 से वर्ष 1980 तक के मई माह के तुलनात्मक तापमान अध्ययन में यही बात सामने आई है। इस सबकी वज़ह ग्लोबल-वार्मिंग ही बताई गई है, जो कि भीषण गरमी के भीषण प्रकोप का बेहद जि़म्मेदार घटक है। ऐसे में तय है कि भीषण गरमी का भीषण प्रकोप दुनिया को ले डूबेगा।


ग्लोबल-वार्मिंग की वज़ह से भारत का तापमान भी तेज़ी से प्रभावित हो रहा है। देष का वार्षिक औसत तापमान बीसवीं सदी की तुलना में 1.2 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है। पर्यावरण से जुड़ी संस्था ‘सेंटर फार साइंस एंड एन्वायरमेंट अर्थात् सीएसई’ ने भी वर्ष 1901 से अभी तक के सभी वर्षों के तापमान-अध्ययन का विश्लेषण करते हुए पाया है कि हमारे देश में जिस तेज़ी से तापमान-वृद्धि देखी जा रही है, उससे तो यही प्रतीत होता है कि अगले दो दशक में ही देश का तापमान 1.5 डिग्री के स्तर को पार कर जाएगा।


पेरिस जलवायु समझौते के तहत भी तापमान-वृद्धि का यही स्तर-लक्ष्य आँका गया है। वैश्विक तापमान की यह वृद्धि-दर न तो सामान्य है और न ही अनुकूल। यह स्थिति पर्यावरण प्रतिकूल तो है ही बल्कि अर्थव्यवस्था और समाज के लिए भी अनुकूल नहीं है। देष, दुनिया, समाज और प्राणी-मात्र पर्यावरण-परिवर्तन की अनर्थकारी प्रतिकूलताओं के दुष्चक्र का सामना करने को अभिशप्त हो गए हैं।


अन्यथा नहीं है कि इन पर्यावरणीय-प्रतिकूलताओं के लिए हम, हमारी आधुनिकता और सुविधाभोगी जीवन-शैली ही पर्याप्त जि़म्मेदार हैं। इसी वज़ह से दुनिया की तमाम अर्थव्यवस्थाएँ प्रभावित हो रही हैं और हमारी सामाजिकता में भी दरारें आती जा रही हैं। क्या यह अन्यथा है कि बढ़ती गर्मियों की वज़ह से पारिवारिकताएँ घटती जा रही है?
कदाचित यह विस्मय का विषय हो सकता है कि पर्यावरण-प्रदूषण, ग्लोबल-वार्मिंग सहित प्री-मानसून और पोस्ट-मानसून के कारण हमें अकस्मात् ही हो रहे मौसम-परिवर्तन का सामना करना पड़ रहा है। ऐसा नहीं है कि सिर्फ गर्मियों का ही तापमान बढ़ रहा है, बल्कि असामान्यतः सर्दियों के भी औसत तापमान में वृद्धि देखी जा रही है।
सीएसई की रिपोर्ट की अनुसंधान रिपोर्ट के मुताबिक सर्दियों का औसत तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस से कहीं ज़्यादा बढ़ चुका है। इधर की सर्दियों में औसत तापमान 2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ा हुआ देखा जा चुका है, जबकि वर्ष 2017 जनवरी-फरवरी की सर्दियाँ अब तक के इतिहास की सबसे गरम सर्दियाँ रही हैं। वर्ष 1901 से 1930 के बेसलाइन तापमान की तुलना में इस बरस जनवरी-फरवरी की सर्दियों का तापमान औसत तकरीबन तीन डिग्री तक अधिक देखा गया। वर्ष 2016 में ही भारत ने चार-चार साइक्लोन तूफान भी देखे हैं, जबकि वर्ष 2010 में बेसलाइन के मुकाबले तापमान तकरीबन दो डिग्री अधिक था।


2010 का वर्ष भारत में लू के कारण तीन सौ से ज़्यादा लोगों की हुई असामयिक मौतों के लिए भी जाना जाता है। सीएसई के अनुसार वर्ष 1995 पहला-पहला सबसे गरम वर्ष और वर्ष 2016 दूसरा सबसे गरम वर्ष रहा किन्तु 116 वर्षों के इतिहास में, पंद्रह सबसे गरम वर्षों में से, कुल जमा तेरह बरस 2002 से 2016-17 के दौरान रहे। वर्ष 2016-17 में ही दक्षिण भारत के चारों राज्यों ने सर्दी के सबसे भयंकर सूखे का सामना किया। यहाँ तक कि इसकी जद में केरल, कर्नाटक, आंध्र और तमिलनाडु के तकरीबन तैंतीस करोड़ लोग आए। अब यह अप्रत्याशित नहीं है कि पेरिस जलवायु समझौते से अमेरिका के अलग हो जाने के बाद, वैश्विक तापमान में आ रहे परिवर्तनों को नियंत्रित करना एक बड़ी व गंभीर चुनौती बन गई है।


दूरविन स्थित ‘यूनिवर्सिटी आफ कैलिफोर्निया’ के अनुसंधान कर्ताओं का कहना है कि भारत में इस सदी के अंत तक तापमान में 2.2 से लेकर 5.5 डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि हो सकती है, जो कि बेहद प्राणघातक साबित होगी। इस कारण भारत सहित अन्य एशियाई देशों में भी लू से मरने वालों की संख्या अच्छी खासी बढ़ेगी। यह जानकर आश्चर्य हो सकता है कि तापमान में मामूली बढ़ोत्री से भी लू और लू से मरने वालों की तादाद बढ़ने की आशंका बढ़ जाती है।


भारत में पिछले पचास वर्षों के दौरान मात्र आधा फीसदी तापमान वृद्धि देखी गई है, लेकिन लू से मरनेवालों की संख्या, औसत-संभावना से अधिक ही रही। आशंका व्यक्त की गई थी कि इस दौरान लू से तेरह फीसदी जनहानि होगी, लेकिन तब लू से मरने वालों की संख्या बढ़कर बत्तीस फीसदी तक पहुँच गई।


अनुसंधानकर्ताओं ने आगाह किया है कि बरस-दर-बरस बढ़ती जा रही गरमी आगे और अधिक भीषण आकार ले सकती है। आनेवाले वर्षों में बढ़ते तापमान से स्थितियाँ और अधिक खराब होने वाली हैं। इस दौरान चिलचिलाती धूप और लू की वजह से मरने वालों का आँकड़ा आश्चर्यजनक ढंग से बढ़ सकता है।


हालाँकि कुशल अध्ययनकर्ताओं ने यह भी कहा है कि बिजली की बढ़ती पहुँच और खासकर एयर-कंडीशनर की सहायता व सुविधा से इन होने वाली मौतों की संख्या को किसी एक हद तक सीमित किया जा सकता है, किन्तु वे गरीब और मज़दूर-वर्ग के लोग कहाँ व कैसे बच पाएँगे, जो आज भी बिजली की पहुँच में हैं ही  नहीं ? गरीबों के लिए एयर-कंडीशनर का सुझाव सोचना तो बेहद बड़ी मूर्खता ही है।


कौन नहीं जानता है कि तकरीबन एक तिहाई भारतीय आज आज़ादी के सत्तर बरस बाद भी बिजली की पहुँच से दूर ही अपना जीवनयापन कर रहे हैं। आँकड़ों में देखा जाए तो वर्ष 1975 और 1976 में लू लगने से भारत में क्रमशः 43 और 34 लोग मरे थे, जबकि आगे आने वाले वर्षों में लू में उछाल आने के साथ ही लू से मरनेवालों की संख्या में भी भारी उछाल देखा गया। वर्ष 1998 और 2003 में भीषण गरमी के दौरान लू लगने से क्रमशः सोलह सौ और पंद्रह सौ लोगों की मौतें हुई थीं। ज़ाहिर है कि वे सभी, मुट्ठीभर अनाज और मुट्ठीभर बिजली को तरसनेवाले गरीब और मज़दूर-वर्ग के ही लोग थे।


किन्तु भीषण गर्मी के प्रकोप अथवा लू से बचाव के लिए यहाँ जिस एयर-कंडीशनर की सहायता व सुविधा के विकल्प की चर्चा की जा रही है, उसमें हाल-फिलहाल तक हाइड्रो-क्लोरो-फ्लोरो-कार्बन और हाइड्रो-क्लोरो-कार्बन श्रेणी की गैसों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे ओजोन परत को बहुत ज़्यादा ही नुकसान पहुँच रहा है। देश में इसका प्रयोग वर्ष 2025 तक बंद किया जाना प्रस्तावित है। बाद उसके हाइड्रो फ्लोरो आफिन्स श्रेणी की गैस इस्तेमाल करने की तैयारी है, जो न तो ओजोन परत को नुकसान पहुँचाती है और न ही ग्लोबल-वार्मिंग बढ़ाती है, लेकिन तब तक ? तब तक तो क्या भीषण गरमी का भीषण प्रकोप दुनिया के प्राण नहीं ले लेगा ? प्राण बचाने के लिए पर्यावरण बचाना क्या ज़रूरी नहीं हो जाता है ?


ओजोन परत का स्तर इसी वर्ष 2017 फरवरी के दौरान 12 फीसदी था। मार्च में 19, अप्रैल में 52 और मई माह में एक बेहद लम्बी छलांग लगाते हुए 77 फीसदी पर पहुँच गया, जो कि मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। यहाँ यह जान लेना भी बेहद ज़रूरी हो जाता है कि ओजोन के कारण, समय-पूर्व होनेवाली मौतों के मामलों में हमारा देष भारत सबसे आगे है। ग्राउंड-लेवल ओजोन किसी भी स्त्रोत से सीधे-सीधे नहीं निकलती है, बल्कि यह तब बनती है, जब नाइट्रोजन के आक्साइड तथा खासतौर से मोटर वाहनों और अन्य स्त्रोतों से निकलने वाली विषैली गैसों की एक किस्म, सूर्य-प्रकाश में, एक-दूसरे के संपर्क में आते हैं; ज़ाहिर है कि तब गरम और स्थिर हवा में ओजोन निर्माण बढ़ जाता है।


इस सबसे बचाव के लिए कुछ गंभीर और दीर्घकालीन नीतियों की ज़रूरत है, वर्ना बढ़ती गरमी का बढ़ता प्रकोप दुनिया को ले डूबेगा। दमा और सांस संबंधित बीमारियों की जननी विषैली गैसें, गरम हो रहे तापमान में सूर्य-किरणों से मिलकर, जो काकटेल बना रही हैं, उस सबसे ओजोन गैस बनने में काफी मदद मिल रही है। ऐसे में भीषण गरमी के भीषण प्रकोप से पृथ्वी को कौन बचाएगा ?


विस्मय होता है कि हानिकारक गैसों का सर्वाधिक उत्सर्जन करने वाले अमेरिका ने पेरिस जलवायु समझौते से हटकर उन वैश्विक-प्रयासों को एक बड़ा झटका दिया है, जिनके लिए दुनियाभर के तकरीबन दो सौ देशों ने एक बेहतर, सेहतमंद और सुरक्षित दुनिया बनाने का संकल्प लिया है। शर्म है, कि उन्हें आती नहीं है, जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पेरिस जलवायु समझौते से वापसी पर गर्व करते हैं ? भीषण गरमी का भीषण प्रकोप किसी के भी प्राण नहीं छोड़ेगा।                                
  
सम्पर्क - 331, जवाहरमार्ग, इंदौर-452002 फोन - 0731-2543380 ईमेलः rajkumarkumbhaj47@gmail.com

COMMENTS

BLOGGER
नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4288,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3239,कहानी,2360,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,1,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: भीषण गरमी का प्रकोप दुनिया को ले डूबेगा - राजकुमार कुम्भज
भीषण गरमी का प्रकोप दुनिया को ले डूबेगा - राजकुमार कुम्भज
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2017/07/blog-post_5.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2017/07/blog-post_5.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content