इंटरनेट के ज़माने का हिंदी साहित्य // सुशील शर्मा

SHARE:

(रचनाकार.ऑर्ग - इंटरनेट पर यूनिकोड में हिंदी साहित्य की सर्वप्रथम और सर्वाधिक समृद्ध, प्रसारित व लोकप्रिय ई-पत्रिका) पढ़ना मानव सभ्यता की स...

image

(रचनाकार.ऑर्ग - इंटरनेट पर यूनिकोड में हिंदी साहित्य की सर्वप्रथम और सर्वाधिक समृद्ध, प्रसारित व लोकप्रिय ई-पत्रिका)

पढ़ना मानव सभ्यता की सबसे पुरानी आदतों में से एक है और यह सभी समय के महानतम व्यक्तित्वों का जुनून रहा है। पहले पढ़ने के लिए दस्तावेजी स्रोतों में सिर्फ एक पांडुलिपि थी, हालांकि, यह केवल  अभिजात वर्ग तक ही सीमित थी। बाद में, गुटेनबर्ग प्रिंटिंग प्रेस के आने से मुद्रित सामग्री सभी को उपलब्ध होने लगी। गुटेनबर्ग प्रिंटिंग प्रेस  शिक्षित समाज में भारी बदलाव का कारण बना। यह पढ़ने की प्रक्रिया समाज के लिए मानवता की  आगे की यात्रा के लिए निश्चित रूप से एक बड़ी छलांग थी। इंटरनेट के उदय ने पढ़ने की संस्कृति में एक असाधारण परिवर्तन किया है लोगों के पढ़ने के व्यवहार में इस संस्कृति का अस्तित्व पूरी तरह या आंशिक रूप से बना है।

वर्तमान में, पढ़ना अब प्रिंट रीडिंग तक सीमित नहीं है। इंटरनेट क्रांति में वेब साइट्स, ई-पुस्तकों, ई-पत्रिकाओं, ई-पेपर, ई-मेल, चर्चा बोर्ड, चैट रूम, इंस्टेंट मैसेजिंग, ब्लॉग, विकी, और अन्य मल्टीमीडिया दस्तावेज़ अब संभावित पाठक घर पर उसके मस्तिष्क पर पूर्ण प्रभुत्व जमा चुके हैं अब पाठक अपने टर्मिनल का उपयोग करते हुए पूरे वेब से ऑनलाइन जानकारी का उपयोग और ब्राउज़ कर सकते हैं।संचार माध्‍यमों के सिद्धांतों और उनको समझने का कार्य सबसे पहले साहित्‍य जगत के चिंतकों-विचारकों ने ही शुरू किया। भाषा, संचार की प्राथमिक तकनीकों में सबसे महत्‍त्‍वपूर्ण रही है, यही कारण है कि आज भी साहित्‍य,भाषा और संचार के बीच सीधा और साफ संबंध दिखाई देता है।

[ads-post]

एक तेजी से बढ़ते हुए  नेटवर्क वातावरण में, नई पीढ़ी के पाठकों ने धीरे-धीरे पढ़ने के नए व्यवहारों  का विकास किया और अपने पारंपरिक रीडिंग प्रथाओं को तेजी से बदल दिया है । पाठकों का मानना है कि इंटरनेट सर्फिंग इंटरैक्टिव पठन, सतही पढ़ना और व्यापक रीडिंग बढ़ाता है और उसी दर पर अनुक्रमिक पढ़ने, केंद्रित पढ़ाई और गहराई से पढ़ने में कमी आती है। केंद्रित और गहराई से पढ़ने में कमी खतरनाक कारक है। यह इंगित करता है कि ऑनलाइन पाठकों को गहराई और केंद्रित पढ़ने के लिए प्रिंट स्रोत का उपयोग करना है। शिक्षा के साथ-साथ प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के योग्य होने के लिए जानकारी और ज्ञान की वास्तविक खपत के लिए पढ़ने की ये प्रथा बहुत जरूरी है।

हिंदी के विकास में इंटरनेट की भूमिका -

कम्प्यूटर और इंटरनेट के आने के बाद कम्युनिकेशन में मूलगामी बदलाव आया है।राजनीति से लेकर संस्कृति तक सब क्षेत्रों में व्यापक परिवर्तन घटित हुए हैं। विकसित देशों में भी हिंदी को लेकर ललक बढ़ रही है। कारण यह है कि किसी भी बहुराष्ट्रीय कंपनी या देश को अपना उत्पाद बेचने के लिए आम आदमी तक पहुंचना होगा और इसके लिए जनभाषा ही सबसे सशक्त माध्यम है। यही कारक हिंदी के प्रचार-प्रसार में सहायक सिद्ध हो रहा है। आज पचास से अधिक देशों के पांच सौ से अधिक केंद्रों पर हिंदी पढ़ाई जाती है। कई केंद्रों पर स्नातकोत्तर स्तर पर हिंदी के अध्ययन-अध्यापन के साथ ही पीएचडी करने की सुविधा उपलब्ध है। विश्व के लगभग एक सौ चालीस देशों तक हिंदी किसी न किसी रूप में पहुंच चुकी है। आज हिंदी के माध्यम से संपूर्ण विश्व भारतीय संस्कृति को आत्मसात कर रहा है।भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर के वैज्ञानिकों ने इस्की-8 (ISCII- Indian Standard Code for Information Interchange) कोडिंग प्रणाली विकास किय़ा। इस प्रणाली को विकसित करते समय वैज्ञानिकों ने इस बात का ध्यान रखा कि हिंदी के लिए निर्धारित की जाने वाली कोडिंग प्रणाली में रोमनलिपि के समावेश की भी सुविधा हो और रोमनलिपि के लिए विकसित क्वेर्टी (QWERTY) की-बोर्ड में ही हिंदी में टाइप करने की सुविधा हो। हिंदी एवं अन्य भारतीय भाषाओं के लिए वैज्ञानिकों ने अलग से कोई की-बोर्ड की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई।सभी ऑनलाइन औजार यूँ तो प्रत्यक्ष से कोई बड़ी भूमिका में न रहें हों परन्तु हिंदी के समग्र विकास में इनकी सहायता से इंकार नही किया जा सकता है।

भारत जैसे देश में जहाँ महज 10 प्रतिशत से भी कम लोग अंग्रेजी का ज्ञान रखते हैं, वहां हिंदी के इस स्वरूप की आवश्यकता बढ़ जाती है. हिंदी के इसी महत्व पर मशहूर विचारक सच्चिदानन्द सिन्हा ने लिखा है – “ भाषा जो प्रतीकों का समुच्चय होती है, संस्कृतियों के संकलन और सम्प्रेषण का सबसे सरल माध्यम भी होती है. और सम्प्रेषण आम बोलचाल की भाषाओँ से भी होता है – बल्कि अधिक सशक्त रूप से”.यहाँ सम्प्रेषण के एक और सशक्त माध्यम “वेब मीडिया” का भी उल्लेख किया जा सकता है।

हिंदी साहित्य के प्रसार में इंटरनेट बहुत अहम-

इंटरनेट पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 20 प्रतिशत भारतीय उपभोक्ता हिंदी में इंटरनेट सर्फिंग को पसंद करते हैं। इंटरनेट पर हिंदी ब्लागरों की संख्या एक लाख से भी ऊपर पहुंच गई है। आज इंटरनेट पर हिंदी साहित्य से संबंधित लगभग 70 ई-पत्रिकाएं हिंदी में उपलब्ध हैं। 15 से अधिक हिंदी के सर्च इंजन हैं, जो किसी भी वेबसाइट का मिनटों में हिंदी अनुवाद उपलब्ध करा सकते हैं। भारत के लगभग सभी सरकारी संगठनों की वेबसाइट हिंदी यूनिकोड में उपलब्ध हैं। भारत के लगभग सभी हिंदी दैनिक समाचार पत्र और पत्रिकाएं हिंदी यूनिकोड में उपलब्ध हैं। सबसे उत्साहजनक बात है कि सोशल मीडिया- फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्वीटर आदि ने भी हिंदी साहित्य को हाथों हाथ लिया है।

रॉबिन मनसैल ने लिखा कि इंटरनेट पर हिंदी साहित्य सामग्री मूलत: दो कोटि में आती है ,पहली कोटि उस साहित्य की है जो उत्सवधर्मी है और इंटरनेट को महिमामंडित करता है दूसरी कोटि में वह साहित्य आता है जो पलायनवादी है ,ये लोग इंटरनेट की किसी भी किस्म की सकारात्मक भूमिका नहीं देखते। इंटरनेट अध्ययन के क्षेत्र में ये दोनों कोटियां खूब फल फूल रही हैं । इंटरनेट पर हिंदी साहित्य का संसार भी काफी व्यापक हो गया है। एक आकलन के अनुसार साहित्यिक हिंदी वेबपन्नों की संख्या करोड का कांटा छू रही है।अभी भी यह एक यक्ष प्रश्न है कि हिंदी के मुख्यधारा के लेखक इंटरनेटीय माध्यमों को अपनी अभिव्यक्ति को दुनिया तक पहुंचाने का प्रमुख माध्यम बना पाए हैं? क्या ये अपनी नई और अनछपी रचनाओं को सबसे पहले इंटरनेट पर सक्रिय पाठकों तक पहुंचा रहे हैं?हंस के संपादक और प्रख्यात साहित्यकार राजेंद्र यादव कहते हैं 'जो गंभीरता या एकाग्रता किताब पढ़ने में होती है वह मुझे लगता है कि इंटरनेट पर नहीं होती, उस तरह की ग्रहणशीलता भी इंटरनेट पर नहीं बन पाती, वहां सूचनात्मकता ज़्यादा है.'

इंटरनेट का महत्व इन लेखक-कवियों को समझ में तो आ गया है लेकिन पारंपरिक मीडिया में छपने-पहुंचने का मोह अभी कम नहीं हुआ है। मुख्यधारा के ऐसे बहुत कम ही लेखक हैं जो इंटरनेट को पहला माध्यम मानते रहे हैं और आज वे मुख्यधारा में अपना एक खास मकाम बना चुके हैं। यह बात भी गौर करने वाली है कि मुख्यधारा के जो साहित्यकार इंटरनेट पर हाल ही में सक्रिय हुए हैं, वे अपनी पुरानी रचनाओं को इंटरनेट पर ठेलकर आभासी दुनिया के भाषाई माहौल को समकालीनता से दूर कर रहे हैं। पुराने एवं बुजुर्ग लेखक इस बात से बेखबर हैं कि इंटरनेट पर 25 से 40 वर्ष के युवाओं की संख्या सबसे अधिक है। इस वर्ग की अपनी भाषा है। अपनी समझ है। यदि लेखन इनकी भाषा में इनकी समझ के स्तर से अपनी बात नहीं रखता तो उन तक पहुंचने की संभावना बेहद कम है।

हिंदी साहित्य के प्रति बढ़ता रुझान नई-नई वेबसाइटों को तो सामने ला रहा है फिर भी सामग्री गंभीर नहीं और स्तर पर भी पूरा ध्यान अभी नहीं दिया जा रहा। आज मीडिया बाजारोन्मुख होता चला गया। उसमें से जन-सरोकार गायब हो रहे हैं , बौद्धिक तेजस्विता क्षीण हुई और भाषा भी चलताऊ होती चली गई। भाषा के प्रति प्रेम और उसे बरतने के लिए ज़रूरी गंभीरता भी ख़त्म होती चली गई। इस प्रवृत्ति का असर मीडिया के पठन-पाठन पर भी पड़ा। उसमें भाषा का महत्व कम कर दिया गया। तकनीक का प्रभाव बढ़ा तो उसने भी भाषा के महत्व को कम करना शुरू कर दिया। फिलहाल इंटरनेट आधारित माध्‍यम अपने प्रयोगशीलता के दौर से गुजर रहा है। इसीलिए इन माध्‍यमों पर निजता की अभिव्‍यक्ति का बोलबाला है। यह कुछ इसी तरह है जैसे पहले-पहल किसी ने कागज़ पर फाउंटेन पेन से कुछ लिखा हो और लागों ने उसे जादू की संज्ञा दी हो। पर आज यह एक सामान्‍य काम ही है। वैसे ही इंटरनेट तकनीक और माध्‍यम से जुड़ाव भर उसे वैकल्पिक मीडिया नहीं बना सकता जब तक कि आपकी सोच,नजरिया और दर्शन वैकल्पिक न हों। चलिए कुछ ज्यादा न माने तो भी इंटरनेट का इतना अहसान तो मानना पड़ेगा कि आज इंटरनेट के युग में हमारी भारतीय भाषाओं का जो साहित्य पुस्तकालयों की अलमारियों में बंद पड़े थे, वे सभी विश्व स्तर पर इंटरनेट के माध्यम से पाठकों के सामने आ चुके हैं।

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: इंटरनेट के ज़माने का हिंदी साहित्य // सुशील शर्मा
इंटरनेट के ज़माने का हिंदी साहित्य // सुशील शर्मा
https://lh3.googleusercontent.com/-TCTU4hPeG2s/WZ0_giL9juI/AAAAAAAA6cw/eWvtQn_Lvg0dxp81v9BfI02MejdoLwqkQCHMYCw/image_thumb%255B1%255D?imgmax=800
https://lh3.googleusercontent.com/-TCTU4hPeG2s/WZ0_giL9juI/AAAAAAAA6cw/eWvtQn_Lvg0dxp81v9BfI02MejdoLwqkQCHMYCw/s72-c/image_thumb%255B1%255D?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2017/08/blog-post_23.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2017/08/blog-post_23.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content