रचनाकार में खोजें -
 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें.

स्मृति - शेष : “जबकि अगस्त दस्तक दे रहा था” // राजकुमार कुम्भज

SHARE:

अकविता की कठिन अराजकता से मोहमुक्त होकर समकालीन हिंदी कविता में अपनी बेहद ख़ास पहचान बनाने वाले धूमिल और जगूड़ी के साथ-साथ चंद्रकांत देवताले ...

चंद्रकांत देवताले

अकविता की कठिन अराजकता से मोहमुक्त होकर समकालीन हिंदी कविता में अपनी बेहद ख़ास पहचान बनाने वाले धूमिल और जगूड़ी के साथ-साथ चंद्रकांत देवताले का भी अपना महत्वपूर्ण स्थान सुनिश्चित है। मराठी भाषी परिवार में पैदा होने वाले देवताले का मराठी भाषा के अनेकों कविता आन्दोलनों से जुड़े रहने का एक विस्तृत कारण यह भी था कि उनकी दलित कवि नामदेव ढसाल, अस्तित्ववादी दिलीप चित्र है और अन्य दलित-पैंथर आन्दोलनकारी कवियों-लेखकों से गहरी मित्रता थी। एक ऐसे समय में जबकि ‘यक़ीनों के जंगल धू-धूकर’ जल रहे हैं और ‘अच्छाइयों का अपहरण’ हो रहा है, तब देवतालेजी की गै़रहाज़िरी अखरती है; क्योंकि ‘ख़ुद पर निग़रानी के वक्त’ में ताक़त के यंत्रों द्वारा पेश की जा रही ‘उम्मीद’ भी अब ‘एक मुहावरा है/ गुमराह करने को’

“गांव-के-गांव बाढ़ की चपेट में थे/ और गांव-के-गांव बूंद-बूंद पानी के लिए तरस भी रहे थे/ और मेरे यार, संस्कृति और/ लोक-कलाओं के/ आयात-निर्यात में इतने मुब्तिला थे/ कि उन्होंने आकाश की तरफ़ एक बार भी नहीं देखा/ जबकि अगस्त दस्तक दे रहा था/ मैं भाँप गया/ कि यह कोरामकोर ऐसा गोलमाल है/ जिसमें रहने से बेहतर है/ किसी भी जगह से कहीं भी कूद जाना”- (आग हर चीज़ में बतायी गयी थी)

“हरी पत्तियों के गुच्छे नहीं होंगे/ तो मैं कैसे मरूँगा/ मैं घर में पैदा हुआ/ घर पेड़ का सगा था/ गाँव में बड़ा हुआ/ गाँव खेत-मैदान का सगा था/ पर अब किस तरह रंग बदल रही है दुनिया/ मैं कारख़ाने में फँसी आवाज़ों के बिस्तर पर/ नहीं मरूँगा”-(कैसा पानी कैसी हवा)

“कविता से प्रेम बहुत अच्छा/ पर इतना नहीं/ कि मरते वक्त अपनी या किसी की कविता ही याद आए/ और तुम भूल जाओ महत्वपूर्ण सर्वोपरि बातें/ जो तुम्हें याद करनी या दोहरानी है करोड़वीं बार मरते दम” -(निहत्थे ही मारे जाओगे)

उपरोक्त तीनों कविता-उद्धरण प्रख्यात हिंदी कवि चंद्रकांत देवताले की कविताओं से प्राप्त किये गए हैं। इन कविता-पंक्तियों को आज गंभीरता से पढ़ने के उपरांत ज्ञात होता है कि कवि की ‘चैतन्यता का ताप’ अपने आसपास और अपने भीतर खदबदा रही मनुष्यता को लेकर किस तरह की मृत्युपरक बेचैनी महसूस कर रहा था? उनकी यह बेचैनी सत्ता-प्राप्ति के लिए की जाती रही, किसी भी राजनीतिक-बेचैनी से सर्वथा भिन्न तो है ही, बल्कि उस एक ‘संवेदनशील छटपटाहट’ का भी पता देती है, जो इधर अकारण ही लुप्त होती जा रही है। इस मायने में चंद्रकांत देवताले हमारे समय की ‘चैतन्यता का ताप’ रखने वाली ‘संवेदनशील छटपटाहट’ के कवि थे, ‘जबकि अगस्त दस्तक दे रहा था’।

चौदह-पंद्रह अगस्त की दरम्यानी-रात 81 बरस की उम्र में चंद्रकांत देवताले का दिल्ली में निधन हो गया। उनका जन्म 7 नवम्बर 1936 को ज़िला बैतूल, गाँव जौलखेड़ा में हुआ था, तब हिटलर युद्ध की तैयारी कर रहा था। चंद्रकांत देवताले का पठन-पाठन इन्दौर में हुआ था। रचनात्मक-विरोध, चैतन्यता का ताप, निर्विकार सह्दयता और संवेदनशील छटपटाहट के साथ ‘भाषिक-अनुशासन’ चंद्रकांत देवताले की ‘कविता के बृहत्तर औज़ार हैं’, जो कि कभी भी, कहीं भी, अपने आसपास, घर-परिवार, प्रेम, विद्रोह सहित मानसिक-मित्रों और सामाजिक-सरोकारों आदि के लिए सदैव उपलब्ध हैं। उनकी ‘कविता में नारेबाज़ी’ से कहीं अधिक ‘जीवन के सौंदर्यबोध’ की स्थापना और मुक्त-अभिव्यक्ति दिखाई देती है। चंद्रकांत देवताले की कविता ‘बताती’ कम है और ‘जताती-जगाती’ ज़्यादा है। इस मायने में चंद्रकांत देवताले हमारे समय की ‘पूर्व-निर्धारित विचारप्रणाली से मुक्त’ आवेदन देने वाली ‘वास्तविक-अनुभूति’ के कवि थे।

यहाँ स.ही. वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ की कविता- पंक्तियाँ याद आ जाना ज़रा भी अस्वाभाविक नहीं है, कि’ खोज में जब निकल ही आया, सत्य तो बहुत मिले-एकही पाया’ और समकालीन कविता के सशक्त कवि चंद्रकांत देवताले ने जो पाया, वह शायद जन-पथ से सराबोर जीवन-सत्य ही था। वे सरल स्वभाव के विरल व्यक्ति थे और विरल कवि तो थे ही। उनकी कविताओं में वायवीय अथवा ऐंद्रियता-बोध जमकर ज़ाहिर हुआ है। समयबोध के प्रति भी वे सदैव सजग रहते थे। ‘शब्दों की मुक्ति’ के लिए भी उनके यहाँ पर्याप्त समय और पर्याप्त जगह है। वे अपने किसी भी साधारण अनुभव को असाधारण अभिव्यक्ति प्रदान कर देने में सिद्धहस्त थे। उनकी कविताओं में ‘जीवन की उत्कट-तीव्रता’ और ‘अनुभव की तीव्र-तीक्ष्णता’ दिखाई देती है। इस मायने में चंद्रकांत देवताले हमारे समय की ऐंद्रियबोध -चेतना और अभिव्यक्ति की असाधारणता के भी कवि थे।

अन्यथा नहीं है कि मुक्तिबोध की कविताओं की तरह ही चंद्रकांत देवताले की कविताओं को भी ऐंद्रियता और असाधारणता के साथ-साथ देखा जाना चाहिए, जिसका कि जर्मन दार्शनिक हिगेल ने खुला समर्थन किया है। आख़िर उनकी इन पक्तियों के अर्थ कहाँ खोजे जाना चाहिए, जब वे कहते हैं कि “ख़ूब जाड़ा पड़ेगा और मज़ा आएगा सोचकर/ हम लबादे ओढ़कर निकले घर से/ पर शीत लहर की ख़बर ने दग़ा ही दिया/ चमकता हुआ सूरज था इन्दौर के आकाश में, हमें कोट उतारना ही पड़े..... और सबसे बड़ा काम किया/ हमने बीयर पीकर/ एक महँगी होटल में खाना खाया......?

चंद्रकांत देवताले की इस कवि-कीड़ा में बह सब नहीं है, जिसे वैचारिक-दुराग्रह की अनिवार्यता के लिए शब्दशः और शब्दबद्ध स्वीकार कर लिया गया है। कवि मित्र देवताले की कविताओं में यहाँ उसी साधारण-असाधारणता के दर्शन होते हैं, जिसे ‘निजता’ और ‘साम्यता’ कहते हुए जर्मन दार्शनिक हीगेल अपनी सम्पूर्ण ज्ञानात्मक-संवेदना के साथ सहर्ष स्वीकार करते हैं। कहने की ज़्यादा ज़रुरत नहीं है कि प्रखर मानवतावादी विचारक कार्ल मार्क्स ने भी हीगेल से ही बहुत कुछ सीखा-समझा था।

बहुत संभव है कि भावनात्मक और संवेदनात्मक दिशा-निर्देशों के अनुभवबद्ध-अभिव्यक्ति के तर्किक-संज्ञान में, कुछेक ‘ज्ञानात्मक-स्व’ अधिक विस्तार से मुखरता पा गए हों, लेकिन फिर कविता की उस असाधारणता को कैसे पाया जा सकता है, जो साधारण जीवन को देखने-समझने और जीने की उज्जवल-ज्वलन्तता से आती है? क्या चंद्रकांत देवताले की ‘बौद्धिक अनुभूति’ में भावनात्मक और संवेदनात्मक दिशा-निर्देशों का एक चुलबुल उत्सवप्रिय-नागरिक भी नहीं ढूँढा जाना चाहिए? क्या तब कविता की उस दशा और दिशा का पता लगाया जाना थोड़ा अधिक सरल-स्वाभाविक नहीं हो जाता है, जिसमें कोई भी कवि जीवनभर अपने लिए मुट्ठीभर जगह ढूँढने की स्वाभाविक उधेड़बुन में लगा रहता है? यह कविता का अवमूल्यन नहीं, बल्कि अर्थ-विस्तार की एक अवधारणा ही अधिक है। इस मायने में चंद्रकांत देवताले ‘अर्थ-विस्तार’ की ‘अवधारणा’ के एक सक्षम,सजग व समर्थ कवि थे।

अकविता-आन्दोलन के अराजक एवं भयंकर यौनवादी-देहवादी स्कूल से अपनी कविता की प्राथमिक शिक्षा-दीक्षा और कविता-संसार का सामान्य अधिग्रहण करने वाले चंद्रकांत देवताले ने कालान्तर में प्रगतिशीलता को अपना केंद्रीय-विचार बना लिया था, किंतु उन्होंने अकविता और प्रगतिशीलता दोनों को ही प्रश्नांकित भी किया था। इसी बीच वे जटिल-कठिन होते हुए अपनी कविता के ‘उत्स’ को निरंतर सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक प्रतिबद्धताओं से भी जोड़ते चले गए। उलझनें और अंतर्विरोध किस कवि में नहीं होते हैं? जीवन की उलझनें और सामाजिक अंतर्विरोध का खुलासा होने पर ही कविताओं के मर्म और अर्थ को बेहतर समझा जा सकता है। चंद्रकांत देवताले किसी भी निरंकुश सत्ता के विरुद्ध, अपनी तमाम कमज़ोरियों के साथ, अपनी कविता को ही अपना सार्थक हथियार बनाते हैं। वे, अतीत की प्रश्नोत्तरी न रचते हुए, वर्तमान के व्याकरण का मानवीय सरलता व सहजता से पोस्टमार्टम करते थे। उन्होंने अपनी कविताओं में शब्दों के ताप का जो महापर्व रचा था, वह अनुकरणीय है।

सामान्य बातचीत और फ़ोन-चर्चाओं में उनकी प्रतिबद्धता तथा सक्रियता प्रायः देखी जाती रही है, वे बड़े क़द के महत्वपूर्ण, किंतु परिवर्तनशील कवि थे। वे, पूंजीवादी-साम्राज्यवाद और सांस्कृतिक-साम्राज्यवाद को भिन्न अवधारणाएं नहीं मानते थे। देश, काल और परिस्थिति के मुताबिक़ उनकी कविताओं में राजनीतिक हस्तक्षेप की सघनता का विचार-विस्तार साफ़-साफ़ देखा जा सकता है। चर्चित-अचर्चित की बाज़ारवादी मूल्यपरकता के स्वभावगत आश्रय से वे नितांत मुक्त थे, तभी तो ‘असहिष्णुता’ के मुद्दे पर उन्होंने अपना ‘साहित्य अकादमी सम्मान’ लौटाने से खुद को अलग कर लिया था। चंद्रकांत देवताले ‘महत्वाकांक्षी कवि’ से कुछ अधिक ‘आलोकांक्षी कवि’ थे। दु:ख, दर्द, प्रेम, वात्सल्य, संघर्ष और विरोधाभासी विडंबनाएं उनकी कविताओं में बेहद ही सहज हैं।

शिक़ायत बनी रहेगी कि जब उन्हें ‘किसी भी जगह से कहीं भी कूद जाना था’, तो इन्दौर या उज्जैन से दिल्ली कैसे बेहतर जगह हो गई, ‘जबकि अगस्त दस्तक दे रहा था?’ दिल्ली का अगस्त चंद्रकांत देवताले को वहाँ ले गया, जहाँ से वापसी असंभव है। किंतु वे अपनी कविताओं के साथ हमारी स्मृतियों में सदैव बने रहेंगे। अगस्त का आना-जाना चलता रहेगा, तो कवियों का आना-जाना भी चलता रहेगा। क्रूरता विरुद्ध कायरता नहीं, बल्कि कविता ही एक कारगर हथियार हो सकती है। शायद कवि चंद्रकांत देवताले का यही मुख्य कविता-विचार हमारे काम आएगा। कविता में सब है, सब में कविता है। कविता में जीवन है, जीवन में कविता है और कविता ही जीवन है, जीवन ही कविता है। वे अपनी भाषा के मैदान में बेहद मासूमियत के साथ आत्मा की खिड़की खोलते थे।

चंद्रकांत देवताले साठोत्तरी कविता के महत्त्वपूर्ण हस्ताक्षरों में शुमार किये जाते हैं। सन् साठ के दशक में अकविता का दौर था तब देवताले ने अकविता की अराजकता से अपनी कविताओं का प्रारंभिक रुझान एवं आकार लेने के बाद जल्द ही अपनी नई दिशा ले ली। वे एक ऐसी कविता की तरफ़ बेधड़क चल पड़े जहाँ प्रेम, दाम्पत्य, समाज, घर, परिवार, माँ और प्रतिबद्धता से परिपूर्ण राजनीतिक-समझ व प्रगतिशील आशय भरे पड़े थे। हिंदी में एम.ए. करने के बाद उन्होंने अध्यापन को चुना और मुक्तिबोध पर नए अर्थ खोजने वाली पी.एच.डी भी की, किंतु उन्हें जल्द ही ये आभास हो गया कि ये दुनिया सिर्फ़ आपकी ही नहीं है, यहाँ ‘लकड़बग्घे’ भी रहते हैं।

मध्यप्रदेश शिखर सम्मान, मैथिलीशरण गुप्त सम्मान और साहित्य अकादमी सम्मान जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से विभूषित देवताले का कविता-संसार उनकी दर्ज़नभर से अधिक कविता-पुस्तकों में सुरक्षित है। हिंदी के कालजयी कवि गजानन माधव मुक्तिबोध पर लिखी गई उनकी दो पुस्तकें विशेषतः याद रखी जाने वाली कृतियाँ हैं। उन्होंने मराठी से तुकाराम के अभंगों और दिलीप चित्रे की कविताओं के हिंदी अनुवाद पर कठोर श्रम-साध्य, ज्ञान-साध्य काम किया था, जिसे आधुनिक हिंदी साहित्य की अमूल्य धरोहर माना गया है। वे नई कविता में नए परिवर्तनों और नई अवधारणाओं के एक ऐसे कवि थे, जिन्हें प्रेमचंद सृजन पीठ के निदेशक होने का गौरव भी मिला था, किंतु इन सबका उन्हें कभी कोई दंभ नहीं था, बल्कि इन सब चीज़ों को अपने परिचय से वे अलग ही रखते थे।

उनकी कविताओं में आधुनिक चुनौतियों पर राजनीतिक-विमर्श तो है ही, किंतु वे दलितों, वंचितों, शोषितों और आदिवासी-जीवन की चिंताओं को भी अपनी कविताओं के केंद्र में ले आते थे। वे अक्सर कहा करते थे कि ‘स्त्रियों ने मुझे मनुष्य बना दिया, वर्ना मैं बड़ा नामुराद इंसान था’। वे साधारण आदमी की साधारण संवेदनाओं और साधारण चिंताओं के असाधारण कवि थे, जिसमें आज भी ‘भूखंड तप रहा है’ और ‘लकड़बग्घा हँस रहा है!’

जिस तरह से मुक्तिबोध की ‘अंधेरे में’, राजकमल चौधरी की ‘मुक्तिप्रसंग‘, धूमिल की ‘मोचीराम’, अज्ञेय की ‘असाध्यवीणा’ और निराला की ‘राम की शक्तिपूजा’ आदि रचनाएं अमर व अद्वितीय कृतियाँ हैं, ठीक उसी तरह से ‘लकड़बग्धा हँस रहा है’ के लिए देवताले भी याद आते रहेंगे, जिसमें वे कहते हैं कि ‘इस अंधेरी रात की नब्ज़ को थामे हुए/ कह रहा हूँ/ यह तीमारदार नहीं, हत्यारे हैं/ और वह आवाज़/ ख़ाने की मेज़ पर/ बच्चों की नहीं/ लकड़बग्घे की हंसी है/ सुनो....../ यह दहशत तो है/ चुनौती भी/ लकड़बग्घा हँस रहा है’

स्वतंत्रता-वर्ष सन् उन्नीस सौ सैंतालीस से लेकर दो हज़ार सत्रह तक का ‘न्यू इंडिया’ आजाने के बाद भी हैरानी का विषय है कि चंद्रकांत देवताले का ‘लकड़बग्घा हँस रहा है’। नेहरु युगीन-महास्वप्न से मोह भंग का साक्षात्कार करने वाली एक समूची पीढ़ी बदल गई। देश और दुनिया ने कई-कई राजनीतिकन-परिवर्तनों से साक्षात्कार कर लिया। ठेठ राजनीति ही नहीं, बल्कि समाज और सामाजिक-मूल्यों में भी आमूलचूल मनुष्यविरोधी-परिवर्तनों ने ‘हैरतअंगेज़ जगह’ हथिया ली और ईमानदारी आदि जैसे संवेदनशील मानवीय मूल्यों को अपदस्थ करते हुए शिखर पर शिकारियों ने अतिक्रमण कर लिया। किसानों की आत्महत्या और स्त्रीदेह से, जैसी पाशविकता, आज़ादी के बाद बढ़ती गई, वह ‘दुर्लभ शर्म’ का विषय बन गई, तभी तक़रीबन चालीस बरस पहले लिखी गई चंद्रकांत देवताले की ‘औरत’ कविता आज भी अपनी प्रासंगिकता में स्त्री विमर्श के नए अर्थ और नए द्वार खोलती नज़र आती है, तो क्यों? चेहरे बदल गए, नेता-अभिनेता बदल गए, रंगमंच के आकार-प्रकार बदल गए, पार्टियों के डंडे-झंडे बदल गए, लेकिन चरित्र नहीं बदला। और वक़्त का कमाल देखिए कि आज भी अपनी अंतर्शक्ति से ओत-प्रोत ‘लकड़बगघा हँस रहा है’।

चंद्रकांत देवताले तथाकथित संभ्रांतता से मुक्त हमेशा आग, गुस्से और निडरता से भरे रहते थे। यही उनके व्यक्तित्व की मासूमियत भरी ख़ास पहचान बन गई थी ‘जबकि अगस्त दस्तक दे रहा था’। उनकी स्मृति;शेष को नमन।

संपर्क- 331, जवाहरमार्ग, इन्दौर, 452002, फ़ोन- 0731-2543380, email-rajkumarkumbhaj47@gmail.com

COMMENTS

BLOGGER
---*---

-----****-----

|नई रचनाएँ_$type=complex$tbg=rainbow$count=6$page=1$va=0$au=0

विज्ञापन --**--

|कथा-कहानी_$type=complex$tbg=rainbow$au=0$count=6$page=1$src=random-posts$s=200

|हास्य-व्यंग्य_$type=blogging$au=0$count=6$page=1$src=random-posts

-- विज्ञापन --

---

|लोककथाएँ_$type=complex$tbg=rainbow$au=0$count=6$page=1$src=random-posts

|लघुकथाएँ_$type=list$au=0$count=5$com=0$page=1$src=random-posts

|काव्य जगत_$type=complex$tbg=rainbow$au=0$count=6$page=1$src=random-posts

-- विज्ञापन --

---

|बच्चों के लिए रचनाएँ_$type=complex$tbg=rainbow$au=0$count=6$page=1$src=random-posts

|विविधा_$type=complex$tbg=rainbow$au=0$va=0$count=6$page=1$src=random-posts

 आलेख कविता कहानी व्यंग्य 14 सितम्बर 14 september 15 अगस्त 2 अक्टूबर अक्तूबर अंजनी श्रीवास्तव अंजली काजल अंजली देशपांडे अंबिकादत्त व्यास अखिलेश कुमार भारती अखिलेश सोनी अग्रसेन अजय अरूण अजय वर्मा अजित वडनेरकर अजीत प्रियदर्शी अजीत भारती अनंत वडघणे अनन्त आलोक अनमोल विचार अनामिका अनामी शरण बबल अनिमेष कुमार गुप्ता अनिल कुमार पारा अनिल जनविजय अनुज कुमार आचार्य अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ अनुज खरे अनुपम मिश्र अनूप शुक्ल अपर्णा शर्मा अभिमन्यु अभिषेक ओझा अभिषेक कुमार अम्बर अभिषेक मिश्र अमरपाल सिंह आयुष्कर अमरलाल हिंगोराणी अमित शर्मा अमित शुक्ल अमिय बिन्दु अमृता प्रीतम अरविन्द कुमार खेड़े अरूण देव अरूण माहेश्वरी अर्चना चतुर्वेदी अर्चना वर्मा अर्जुन सिंह नेगी अविनाश त्रिपाठी अशोक गौतम अशोक जैन पोरवाल अशोक शुक्ल अश्विनी कुमार आलोक आई बी अरोड़ा आकांक्षा यादव आचार्य बलवन्त आचार्य शिवपूजन सहाय आजादी आदित्य प्रचंडिया आनंद टहलरामाणी आनन्द किरण आर. के. नारायण आरकॉम आरती आरिफा एविस आलेख आलोक कुमार आलोक कुमार सातपुते आशीष कुमार त्रिवेदी आशीष श्रीवास्तव आशुतोष आशुतोष शुक्ल इंदु संचेतना इन्दिरा वासवाणी इन्द्रमणि उपाध्याय इन्द्रेश कुमार इलाहाबाद ई-बुक ईबुक ईश्वरचन्द्र उपन्यास उपासना उपासना बेहार उमाशंकर सिंह परमार उमेश चन्द्र सिरसवारी उमेशचन्द्र सिरसवारी उषा छाबड़ा उषा रानी ऋतुराज सिंह कौल ऋषभचरण जैन एम. एम. चन्द्रा एस. एम. चन्द्रा कथासरित्सागर कर्ण कला जगत कलावंती सिंह कल्पना कुलश्रेष्ठ कवि कविता कहानी कहानी संग्रह काजल कुमार कान्हा कामिनी कामायनी कार्टून काशीनाथ सिंह किताबी कोना किरन सिंह किशोरी लाल गोस्वामी कुंवर प्रेमिल कुबेर कुमार करन मस्ताना कुसुमलता सिंह कृश्न चन्दर कृष्ण कृष्ण कुमार यादव कृष्ण खटवाणी कृष्ण जन्माष्टमी के. पी. सक्सेना केदारनाथ सिंह कैलाश मंडलोई कैलाश वानखेड़े कैशलेस कैस जौनपुरी क़ैस जौनपुरी कौशल किशोर श्रीवास्तव खिमन मूलाणी गंगा प्रसाद श्रीवास्तव गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर ग़ज़लें गजानंद प्रसाद देवांगन गजेन्द्र नामदेव गणि राजेन्द्र विजय गणेश चतुर्थी गणेश सिंह गांधी जयंती गिरधारी राम गीत गीता दुबे गीता सिंह गुंजन शर्मा गुडविन मसीह गुनो सामताणी गुरदयाल सिंह गोरख प्रभाकर काकडे गोवर्धन यादव गोविन्द वल्लभ पंत गोविन्द सेन चंद्रकला त्रिपाठी चंद्रलेखा चतुष्पदी चन्द्रकिशोर जायसवाल चन्द्रकुमार जैन चाँद पत्रिका चिकित्सा शिविर चुटकुला ज़कीया ज़ुबैरी जगदीप सिंह दाँगी जयचन्द प्रजापति कक्कूजी जयश्री जाजू जयश्री राय जया जादवानी जवाहरलाल कौल जसबीर चावला जावेद अनीस जीवंत प्रसारण जीवनी जीशान हैदर जैदी जुगलबंदी जुनैद अंसारी जैक लंडन ज्ञान चतुर्वेदी ज्योति अग्रवाल टेकचंद ठाकुर प्रसाद सिंह तकनीक तक्षक तनूजा चौधरी तरुण भटनागर तरूण कु सोनी तन्वीर ताराशंकर बंद्योपाध्याय तीर्थ चांदवाणी तुलसीराम तेजेन्द्र शर्मा तेवर तेवरी त्रिलोचन दामोदर दत्त दीक्षित दिनेश बैस दिलबाग सिंह विर्क दिलीप भाटिया दिविक रमेश दीपक आचार्य दुर्गाष्टमी देवी नागरानी देवेन्द्र कुमार मिश्रा देवेन्द्र पाठक महरूम दोहे धर्मेन्द्र निर्मल धर्मेन्द्र राजमंगल नइमत गुलची नजीर नज़ीर अकबराबादी नन्दलाल भारती नरेंद्र शुक्ल नरेन्द्र कुमार आर्य नरेन्द्र कोहली नरेन्‍द्रकुमार मेहता नलिनी मिश्र नवदुर्गा नवरात्रि नागार्जुन नाटक नामवर सिंह निबंध नियम निर्मल गुप्ता नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’ नीरज खरे नीलम महेंद्र नीला प्रसाद पंकज प्रखर पंकज मित्र पंकज शुक्ला पंकज सुबीर परसाई परसाईं परिहास पल्लव पल्लवी त्रिवेदी पवन तिवारी पाक कला पाठकीय पालगुम्मि पद्मराजू पुनर्वसु जोशी पूजा उपाध्याय पोपटी हीरानंदाणी पौराणिक प्रज्ञा प्रताप सहगल प्रतिभा प्रतिभा सक्सेना प्रदीप कुमार प्रदीप कुमार दाश दीपक प्रदीप कुमार साह प्रदोष मिश्र प्रभात दुबे प्रभु चौधरी प्रमिला भारती प्रमोद कुमार तिवारी प्रमोद भार्गव प्रमोद यादव प्रवीण कुमार झा प्रांजल धर प्राची प्रियंवद प्रियदर्शन प्रेम कहानी प्रेम दिवस प्रेम मंगल फिक्र तौंसवी फ्लेनरी ऑक्नर बंग महिला बंसी खूबचंदाणी बकर पुराण बजरंग बिहारी तिवारी बरसाने लाल चतुर्वेदी बलबीर दत्त बलराज सिंह सिद्धू बलूची बसंत त्रिपाठी बातचीत बाल कथा बाल कलम बाल दिवस बालकथा बालकृष्ण भट्ट बालगीत बृज मोहन बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष बेढब बनारसी बैचलर्स किचन बॉब डिलेन भरत त्रिवेदी भागवत रावत भारत कालरा भारत भूषण अग्रवाल भारत यायावर भावना राय भावना शुक्ल भीष्म साहनी भूतनाथ भूपेन्द्र कुमार दवे मंजरी शुक्ला मंजीत ठाकुर मंजूर एहतेशाम मंतव्य मथुरा प्रसाद नवीन मदन सोनी मधु त्रिवेदी मधु संधु मधुर नज्मी मधुरा प्रसाद नवीन मधुरिमा प्रसाद मधुरेश मनीष कुमार सिंह मनोज कुमार मनोज कुमार झा मनोज कुमार पांडेय मनोज कुमार श्रीवास्तव मनोज दास ममता सिंह मयंक चतुर्वेदी महापर्व छठ महाभारत महावीर प्रसाद द्विवेदी महाशिवरात्रि महेंद्र भटनागर महेन्द्र देवांगन माटी महेश कटारे महेश कुमार गोंड हीवेट महेश सिंह महेश हीवेट मानसून मार्कण्डेय मिलन चौरसिया मिलन मिलान कुन्देरा मिशेल फूको मिश्रीमल जैन तरंगित मीनू पामर मुकेश वर्मा मुक्तिबोध मुर्दहिया मृदुला गर्ग मेराज फैज़ाबादी मैक्सिम गोर्की मैथिली शरण गुप्त मोतीलाल जोतवाणी मोहन कल्पना मोहन वर्मा यशवंत कोठारी यशोधरा विरोदय यात्रा संस्मरण योग योग दिवस योगासन योगेन्द्र प्रताप मौर्य योगेश अग्रवाल रक्षा बंधन रच रचना समय रजनीश कांत रत्ना राय रमेश उपाध्याय रमेश राज रमेशराज रवि रतलामी रवींद्र नाथ ठाकुर रवीन्द्र अग्निहोत्री रवीन्द्र नाथ त्यागी रवीन्द्र संगीत रवीन्द्र सहाय वर्मा रसोई रांगेय राघव राकेश अचल राकेश दुबे राकेश बिहारी राकेश भ्रमर राकेश मिश्र राजकुमार कुम्भज राजन कुमार राजशेखर चौबे राजीव रंजन उपाध्याय राजेन्द्र कुमार राजेन्द्र विजय राजेश कुमार राजेश गोसाईं राजेश जोशी राधा कृष्ण राधाकृष्ण राधेश्याम द्विवेदी राम कृष्ण खुराना राम शिव मूर्ति यादव रामचंद्र शुक्ल रामचन्द्र शुक्ल रामचरन गुप्त रामवृक्ष सिंह रावण राहुल कुमार राहुल सिंह रिंकी मिश्रा रिचर्ड फाइनमेन रिलायंस इन्फोकाम रीटा शहाणी रेंसमवेयर रेणु कुमारी रेवती रमण शर्मा रोहित रुसिया लक्ष्मी यादव लक्ष्मीकांत मुकुल लक्ष्मीकांत वैष्णव लखमी खिलाणी लघु कथा लघुकथा लतीफ घोंघी ललित ग ललित गर्ग ललित निबंध ललित साहू जख्मी ललिता भाटिया लाल पुष्प लावण्या दीपक शाह लीलाधर मंडलोई लू सुन लूट लोक लोककथा लोकतंत्र का दर्द लोकमित्र लोकेन्द्र सिंह विकास कुमार विजय केसरी विजय शिंदे विज्ञान कथा विद्यानंद कुमार विनय भारत विनीत कुमार विनीता शुक्ला विनोद कुमार दवे विनोद तिवारी विनोद मल्ल विभा खरे विमल चन्द्राकर विमल सिंह विरल पटेल विविध विविधा विवेक प्रियदर्शी विवेक रंजन श्रीवास्तव विवेक सक्सेना विवेकानंद विवेकानन्द विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक विश्वनाथ प्रसाद तिवारी विष्णु नागर विष्णु प्रभाकर वीणा भाटिया वीरेन्द्र सरल वेणीशंकर पटेल ब्रज वेलेंटाइन वेलेंटाइन डे वैभव सिंह व्यंग्य व्यंग्य के बहाने व्यंग्य जुगलबंदी व्यथित हृदय शंकर पाटील शगुन अग्रवाल शबनम शर्मा शब्द संधान शम्भूनाथ शरद कोकास शशांक मिश्र भारती शशिकांत सिंह शहीद भगतसिंह शामिख़ फ़राज़ शारदा नरेन्द्र मेहता शालिनी तिवारी शालिनी मुखरैया शिक्षक दिवस शिवकुमार कश्यप शिवप्रसाद कमल शिवरात्रि शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी शीला नरेन्द्र त्रिवेदी शुभम श्री शुभ्रता मिश्रा शेखर मलिक शेषनाथ प्रसाद शैलेन्द्र सरस्वती शैलेश त्रिपाठी शौचालय श्याम गुप्त श्याम सखा श्याम श्याम सुशील श्रीनाथ सिंह श्रीमती तारा सिंह श्रीमद्भगवद्गीता श्रृंगी श्वेता अरोड़ा संजय दुबे संजय सक्सेना संजीव संजीव ठाकुर संद मदर टेरेसा संदीप तोमर संपादकीय संस्मरण संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018 सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन सतीश कुमार त्रिपाठी सपना महेश सपना मांगलिक समीक्षा सरिता पन्थी सविता मिश्रा साइबर अपराध साइबर क्राइम साक्षात्कार सागर यादव जख्मी सार्थक देवांगन सालिम मियाँ साहित्य समाचार साहित्यिक गतिविधियाँ साहित्यिक बगिया सिंहासन बत्तीसी सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध सीताराम गुप्ता सीताराम साहू सीमा असीम सक्सेना सीमा शाहजी सुगन आहूजा सुचिंता कुमारी सुधा गुप्ता अमृता सुधा गोयल नवीन सुधेंदु पटेल सुनीता काम्बोज सुनील जाधव सुभाष चंदर सुभाष चन्द्र कुशवाहा सुभाष नीरव सुभाष लखोटिया सुमन सुमन गौड़ सुरभि बेहेरा सुरेन्द्र चौधरी सुरेन्द्र वर्मा सुरेश चन्द्र सुरेश चन्द्र दास सुविचार सुशांत सुप्रिय सुशील कुमार शर्मा सुशील यादव सुशील शर्मा सुषमा गुप्ता सुषमा श्रीवास्तव सूरज प्रकाश सूर्य बाला सूर्यकांत मिश्रा सूर्यकुमार पांडेय सेल्फी सौमित्र सौरभ मालवीय स्नेहमयी चौधरी स्वच्छ भारत स्वतंत्रता दिवस स्वराज सेनानी हबीब तनवीर हरि भटनागर हरि हिमथाणी हरिकांत जेठवाणी हरिवंश राय बच्चन हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन हरिशंकर परसाई हरीश कुमार हरीश गोयल हरीश नवल हरीश भादानी हरीश सम्यक हरे प्रकाश उपाध्याय हाइकु हाइगा हास-परिहास हास्य हास्य-व्यंग्य हिंदी दिवस विशेष हुस्न तबस्सुम 'निहाँ' biography dohe hindi divas hindi sahitya indian art kavita review satire shatak tevari undefined
नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3793,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,326,ईबुक,182,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,257,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,105,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2744,कहानी,2069,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,484,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,129,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,30,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,87,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,22,पाठकीय,61,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,309,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,326,बाल कलम,23,बाल दिवस,3,बालकथा,48,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,8,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,16,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,224,लघुकथा,806,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,306,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,57,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1882,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,637,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,676,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,14,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,52,साहित्यिक गतिविधियाँ,181,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,51,हास्य-व्यंग्य,52,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: स्मृति - शेष : “जबकि अगस्त दस्तक दे रहा था” // राजकुमार कुम्भज
स्मृति - शेष : “जबकि अगस्त दस्तक दे रहा था” // राजकुमार कुम्भज
https://lh3.googleusercontent.com/-BFVkKc61CM8/WaPjZGvBKzI/AAAAAAAA6jQ/UUR4F5qkdlASq2DqTFZ4IOa41TkJq3VNgCHMYCw/image_thumb%255B4%255D?imgmax=800
https://lh3.googleusercontent.com/-BFVkKc61CM8/WaPjZGvBKzI/AAAAAAAA6jQ/UUR4F5qkdlASq2DqTFZ4IOa41TkJq3VNgCHMYCw/s72-c/image_thumb%255B4%255D?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2017/08/blog-post_28.html
https://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/2017/08/blog-post_28.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय खोजें सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है चरण 1: साझा करें. चरण 2: ताला खोलने के लिए साझा किए लिंक पर क्लिक करें सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ