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रिपोर्ट : राष्ट्रीय बाल साहित्यकार सम्मेलन

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रिपोर्ट : राजस्थान-सलूम्बर,   राष्ट्रीय बाल साहित्यकार सम्मेलन 2 व 3 अक्टूबर 2017 बाल साहित्य और साहित्यकारों से बालकों को जोड़कर उनमें साहित...

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रिपोर्ट : राजस्थान-सलूम्बर,   राष्ट्रीय बाल साहित्यकार सम्मेलन 2 व 3 अक्टूबर 2017

बाल साहित्य और साहित्यकारों से बालकों को जोड़कर उनमें साहित्य संस्कार डाले जाय इस लक्ष्य को केन्द्रित कर निरंतर आठवें वर्ष में प्रवेश करता सलूम्बर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय बाल साहित्यकार सम्मेलन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। देश के पांच राज्यों से आये लगभग 50-60 साहित्यकारों ने आयोजन में शिरकत की।

स्थानीय स्तर पर सरकारी और गैर सरकारी महाविद्यालय और विद्यालय के बालकों की मंच प्रस्तुति देकर उन्हें सक्रिय रूप से इसमें जोड़ गया। यही इस कार्यक्रम की विशेषता, अन्य से विभिन्नता रही।

बालकथा को लेकर नये सृजन की निजता भी इस कार्यक्रम के संभागियों का आकर्षण रहा। जिसकी भूमिका मार्च माह में सलिला संस्था द्वारा मांगी गई प्रतियोगिता प्रविष्टि के समय ही रख दी गई थी। इस वर्ष के स्वतंत्रता सैनानी औंकारलाल शास्त्री स्मृति पुरस्कार के लिये मौलिक बाल कथाओं पर प्रविष्टि के लिये विज्ञप्ति निकाली गई। जिसके तहत 70 प्रतिभगियों की 130 रचनाएं आयी। उनके तीन स्तर पर आकलन के बाद प्रथम, द्वितीय तृतीय और 10 श्रेष्ठ पुरस्कार विजेताओं की सूचना प्रसारित की गई। 13 चयनित बालकहानी के अतिरिक्त और बेहतरीन 14 कहानियां जो प्रतियोगिता के जरिए इसमें सम्मिलित हुई, सरस बाल कहानी के नाम से रेखांकित कर और 7 प्रतिनिधि बालकहानी जो सलिला परिवार से है उन सभी को संकलित कर 34 बालकहानियों की पुस्तक प्रकाशन की योजना बनी। सम्मेलन में 34 बालकथाओं का चित्रमय नई साज-सज्जा युक्त यह गुलदस्ता ‘‘हमारे समय की श्रेष्ठ बालकथाएं’’ पुस्तक आकार में कार्यक्रम का आकर्षण बिन्दु बना। जिसने हमारे समय के लेखन को रेखांकित करने का सजग बेहतरीन प्रयास किया।

मेवाड़ गौरव पुरस्कार, बाल प्रतिभा पुरस्कार, सलिला साहित्य सम्मान, कविता की साख, एकल काव्य पाठ, गायिकी, पुस्तकों के लोकार्पण एवं उनकी समीक्षा, ‘‘टी.वी. कार्टून धारावाहिक, हिन्दी बाल साहित्य और बच्चे’’ विषय पर शोधपत्र वाचन, साहिर लुधियानवी के गीतों में बालक विषय पर शोधवार्ता, काव्य गोष्ठी, जनचेतना कार्टून प्रदर्शनी ‘‘खरी-खरी’’, लेखकीय अभिव्यक्ति जैसे अनूठे अल्प समय की छोटी-छोटी प्रस्तुतियों ने आयोजन के कार्यक्रम में विविधता के रंग भरते हुए रोचक बनाया। इस कारण सभागार में साहित्यकारों के अलावा साधारणजन समुदाय से लेकर बालक, शिक्षक, अभिभावक की उपस्थिति ने सम्मेलन को सफल और सार्थक बनाया। समय का पूरा ध्यान रखा गया। पूरा समारोह श्रेष्ठ संचालन से सुचारू रूप में अनुशासित, समयबद्ध गतिमान रहा। इस आयोजन में हर उम्र और विभिन्न गुणों वाले व्यक्तियों की सहभागिता ने इसे सफल बनाया।

पहला दिन -

बच्चों का सत्र :

दो दिवसीय राष्ट्रीय बाल साहित्यकार सम्मेलन 2 अक्टूबर को प्रातः ठीक 11 बजे प्रारंभ हो गया। प्रथम सत्र बालकों द्वारा प्रस्तुतियों का रहा। जिसमें ग्रामीण क्षेत्र- सेमाल राजकीय माध्यमिक विद्यालय के बालकों ने संस्थागीत ‘‘बहती रहे सलिला साहित्य और सृजन की...’’ गीत गाकर प्रारंभ किया। इससे पूर्व द्वितीय सत्र के अतिथियों द्वारा सरस्वती दीप प्रज्वलन किया गया। उदयपुर की प्रमिला ‘शरद’ ने सरस्वती वंदना गायी। सलिला परिवार के सदस्यों ने अतिथियों को माला व गुलाब पुष्प भेंट कर स्वागत किया। सलिला के उपाध्यक्ष चन्द्र प्रकाश मंत्री ने आये हुए अतिथि साहित्यकारों एवं नगरवासियों का स्वागत किया।

इसके बाद विधिवत रूप से सत्र प्रारंभ हुआ। स्कॉलर इंटरनेशनल स्कूल के बालकों ने बाल नाटक का मंचन किया। बाल नाटक ‘‘हमारे संस्कार है वैज्ञानिक आधार’’ कुसुमलता अग्रवाल का लिखा हुआ है। नाटक की लेखिका मंच पर बच्चों के बीच मौजूद थी।

सलिला संस्था द्वारा बालकों को हार्ड क्लिपबोर्ड्र और लेखिका से पुस्तकें पुरस्कार के रूप में दिलाई गई। लेखिका कुसुमलता और निधि सिंह, निदेशक, स्कॉलर इंटरनेशनल स्कूल को मंच पर शॉल ओढ़ाकर और स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। डॉ. विमला भंडारी ने बीज वक्तव्य देते हुए दो दिवसीय सम्मेलन के विभिन्न कार्यक्रम की जानकारी दी। सहभागियों का परिचय दिया। प्रतियोगिता की निर्णय प्रक्रिया से अवगत कराते हुए इसके निष्पक्ष चयन प्रक्रिया और उसके प्रायोगिक मूल्याकंन में बच्चों की भूमिका को रेखांकित किया। स्वतंत्रता सैनानी औंकारलाल शास्त्री स्मृति पुरस्कार वाले एवं सलिला सम्मान ग्रहण करने वाले साहित्यकारों, समाजसेवियों को बधाई दी एवं बालकों का अभिनंदन किया।

‘कविता की साख’ सत्र :

इस सत्र में कुल आठ प्रतिष्ठित कवियों की रचना का पाठ उनके सम्मुख उनकी अनुमति से बालक-बालिकाओं द्वारा किया गया। इस विशेष प्रयोग के तहत कवि ने अपनी ओर से कुछ पुस्तकें को बालकों को उपहार में दी।

सर्वप्रथम सिरसा, हरियाणा से आयी डॉ. शील कौशिक को डॉ. विमला भंडारी सम्मान के साथ मंच पर लेकर आयी। राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय की छात्रा सुमन साल्वी द्वारा शील कौशिक की लिखी चर्चित कविता ‘‘मत रो लड़की’’ का पाठ किया। डॉ. शील ने अपनी ओर से बालिका को पुस्तकें भेंट में दी।

उदयपुर से आयी प्रीता भार्गव को शकुंतला सरूपरिया सम्मानपूर्वक मंच पर लेकर आयी। राज. बा. मा. वि. की बालिका जया चौबीसा ने प्रीता की सुप्रसिद्ध कविता ‘‘जागी हुई नदी’’ का ओजपूर्ण स्वर में पाठ किया। प्रीता ने बालिका को उपहार में पुस्तके दी। शंकुंतला सरूपरिया ने प्रीता भार्गव को स्मृति चिन्ह देकर सम्मान दिया। अगली कड़ी के बांसवाड़ा निवासी कवि भरत चन्द्र शर्मा को प्रहलाद पारीक द्वारा सम्मानपूर्वक मंच पर लाया गया। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के छात्र अनिल राजपूत ने उनकी कविता ‘‘एक पत्र बेटी मान्या के नाम’’ कविता का पाठ किया। रचनाकार ने बालक को पुस्तकें भेंट में दी और प्रहलाद पारीक ने भरत चन्द्र शर्मा को स्मृति चिन्ह देकर सम्मान दिया। अगली कड़ी में कोटा से आये जितेन्द्र ‘निर्मोही’ की कविता का पाठ होना था अतः उन्हें सम्मान के साथ मंच पर सलिला के सचिव मुकेश राव लेकर आये। राज. उ.मा.वि. के छात्र प्रवीण सिंह ने जितेन्द्र जी की कविता ‘वक्त को हिसाब दीजिये’ का पाठ किया। विद्वान साहित्यकार ने बालक को सलिला का प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। अब तक कार्यक्रम बहुत अच्छी गति पकड़ चुका था। कविता पाठ करने वाले बालको को सदन में उपस्थित साहित्यकारों द्वारा नकद राशि देकर उत्साहवर्द्धन किया जाने लगा। यह राशि 100-200 रूपये से लेकर 500 रूपये तक रही। ऐसा पहली बार हो रहा था। राजकुमार जैन ने प्रत्येक बालक को 200 रू. नकद दिये।

अग्रिम कड़ी में राजस्थान के प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. जयप्रकाश पंड्या ‘ज्योतिपुंज’ को दौसा के अंजीव ‘अंजुम’ अपने साथ मंच पर लेकर आये। राजकीय हाड़ारानी महाविद्यालय के छात्र जयेश खटीक द्वारा ज्योतिपुंज की नवीन रचना ‘‘राष्ट्र की जय बोल राणा’’ का पाठ किया। डॉ. ज्योतिपुंज ने छात्र को प्रोत्साहन स्वरूप पुस्तकें भेंट में दी। डॉ. ज्योतिपुंज को अंजीव द्वारा स्मृति चिन्ह देकर सम्मान दिया गया। मथुरा से आये संतोष कुमार सिंह आगे कड़ी के कवि थे। उन्हें शिव नारायण आगाल सम्मान के साथ मंच पर लेकर आये। राज. उ.मा.वि. के बालक महेश खटीक ने उनकी कविता ‘‘कैसे भूलूं?’’ का पाठ किया। संतोष कुमार ने बालक को पुस्तकें उपहार में दी। शिवनारायण आगाल ने स्मृति चिन्ह देकर कवि संतोष कुमार का सम्मान किया। अंतिम कड़ी में पं. नन्दकिशोर ‘निर्झर’ को राजकुमार जैन ‘राजन’ सम्मानपूर्वक मंच पर लेकर आये। स्कॉलर इंटरनेशनल स्कूल के बालक पुलकित भंडारी ने उनकी कविता ‘‘आम’’ का पाठ किया। निर्झर ने बालक को पुस्तकें उपहार में दी एवं राजकुमार जैन ने नन्दकिशोर को स्मृति चिन्ह देकर सम्मान दिया। कविता की साख के अर्न्तगत आठवें कवि उदयपुर के तेजसिंह ‘तरूण’ थें जो अस्वस्थता की वजह से आ नहीं सके किन्तु हाड़ारानी महाविद्यालय के छात्र अभिषेक मेहता अपनी तैयारी के साथ सभागार में उपस्थित थे। उन्हें मौका दिया गया और उन्होंने कवि की अनुपस्थिति में उनकी कविता ‘‘सम्बोधन राष्ट्र के नाम’’ का पाठ किया। विमला भंडारी ने अभिषेक को स्मृति चिन्ह देकर प्रोत्साहित किया। इसके साथ यह कार्यक्रम समाप्त हुआ।

लोकार्पण : हमारे समय की श्रेष्ठ बालकथाएं

सलिला संस्था की इस वर्ष की उपलब्धि बाल कहानी संकलन- ‘‘हमारे समय की श्रेष्ठ बालकथाएं’’ का लोकार्पण द्वितीय सत्र के अतिथियों द्वारा हुआ। इसकी समीक्षा गाजियाबाद के साहित्यकार रजनीकान्त शुक्ल और बी. एन. गर्ल्स कॉलेज की छात्रा चेतना सुथार ने की।

रजनीकान्त ने समीक्षा करते हुए कहा कि इसमें पुरस्कृत कहानियों के दो पक्ष रहे। एक पक्ष सैद्धान्तिक और दूसरा व्यवाहारिक रहा। दो तरह के निर्णायक रहे- एक विषय विशेषज्ञ विद्वान और दूसरे विद्यालय के बालक और शिक्षक। विद्वान निर्णायक में एक युवा औेर पुरूष और एक वृद्ध और महिला रही। यानि हर तरह का संयोजन यहां निर्णय में रहा और यह भी हुआ कि निर्णायकों के क्रम को विद्यार्थियों की राय से बदल गया। यह एक विषय की वैविध्यता लिये स्थायी महत्व का कार्य हुआ है। इसका आवरण और भीतर का चित्राकंन सुन्दर है। मूल्य भी उचित है। पुस्तक आकर्षित करती है। यह सही है कि यह पुस्तक अर्न्तराष्ट्रीय महत्व की है जैसा कि इसके प्रकाशक जयपुर के 82 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक रमेशचन्द्र वर्मा ने कहा।

एकल काव्यपाठ : जनकवि माधव दरक

अगली कड़ी एकल काव्य पाठ की थी। जिसमें कुम्भलगढ़ निवासी प्रसिद्ध जनकवि माधव दरक ने अपनी कविताओं का पाठ किया। 19 पुस्तकों के रचियता और 52 पुरस्कार प्राप्त कवि माधव दरक का परिचय जयेश खटीक, महाविद्यालय के छात्र ने दिया। छात्र ने उनके रचित प्रसिद्ध दोहे और कविता के कुछ अंश सुनाकर उनका बेतरीन परिचय दिया। इसके बाद राजस्थानी भाषा के 83 वर्षीय इस जनकवि ने कुम्भलगढ़ जन्मभूमि, आप पधारे बंधुवर, राजस्थान की वीर भूमि, मेवाड़ दर्शन और हाड़ीरानी का बलिदान जैसी अनेक प्रसिद्ध रचनाओं के अंश ओजपूर्ण स्वर में गाकर सुनाये। प्रथम सत्र का कुशल संचालन भीलवाड़ा निवासी कवि प्रहलाद पारीक ने किया। बाद इसके सभी ने सुस्वाद भोजन का आनन्द लिया।

द्वितीय सत्र :

पुरस्कार समारोह :

डॉ. देव कोठारी, पूर्व निदेशक साहित्य संस्थान, उदयपुर के मुख्य आतिथ्य में यह द्वितीय सत्र ठीक दोपहर 3.30 प्रारंभ हुआ। इस अवसर पर अध्यक्ष मंडल में उदयपुर के डॉ. जय प्रकाश पंड्या, नई दिल्ली के डॉ. रवि शर्मा ‘मधुप’, जोधपुर के डॉ. रमाकान्त शर्मा और सिरसा, हरियाणा की डॉ. शील कौशिक मंच पर आसीन हुए। सत्रारंभ शकुंतला सरूपरिया की सरस्वती वंदना से हुआ। मंचस्थ अतिथियों का सलिला के पदाधिरियों ने माल्यार्पण से स्वागत किया गया। सलिला परिवार की मधु माहेश्वरी ने स्वागत गीत ‘‘अभिनन्दन करते हैं....’’ गाकर सभी का स्वागत किया। बीकानेर से आयी इंजीनियर आशा शर्मा ने कविता पाठ किया। नई दिल्ली से पधारे प्रसिद्ध गायक किशोर श्रीवास्तव ने बाल केन्द्रित फिल्मी गीतों का गायन किया। पुरस्कार प्राप्त करने वाले प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान पर आने विजेता क्रमशः डॉ. मो. साजिदखान, रजनीकान्त शुक्ल, डॉ. लता अग्रवाल ने अपनी पुरस्कृत कृति की रचना प्रक्रिया और कहानी के कथ्य को लेकर मंच से अपने लेखकीय अनुभव साझा किये।

स्वतंत्रता सैनानी औंकारलाल शास्त्री स्मृति बालसाहित्य प्रतियोगिता पुरस्कार

मंचस्थ अतिथियों, मुकेश मेवाड़ी और विमला भंडारी द्वारा प्रथम पुरस्कार 3000 रू. का- मोहम्मद साजिद खान, शाहजहांपुर उ.प्र. को बाल कहानी - पेड़ां ने मनाया बसन्तोत्सव के लिए, द्वितीय पुरस्कार 2000 रू. का- रजनीकान्त शुक्ल, गाजियाबाद उ.प्र. को बाल कहानी - बेफिजूल की बात के लिए, तृतीय पुरस्कार 1500 रू. का- डॉ. लता अग्रवाल, भोपाल, म.प्र. को बाल कहानी - गुड टच बेड टच के लिए सभी को नकद राशि, शॉल, सम्मान पत्र प्रदान कर पुरस्कृत किया गया। मेवाड़ गौरव अलंकरण माधव दरक, केलवाड़ा, राजसमंद राज.को मेवाड़ के लिए स्थायी महत्व की सेवाओं के लिए 2500 रू. नकद, शॉल, सम्मान पत्र प्रदान कर पुरस्कृत किया गया।

तत्पश्चात डॉ. विमला भंडारी ने अपने उद्बोधन में लेखकीय क्षमता और दक्षता को रेखाकिंत किया। सलिला संस्था के उद्भव एवं विकास की कहानी पर प्रकाश डाला। अतिथियों के हाथों श्रेष्ठ बाल कहानी पुरस्कार दिए गए। जिनमें डॉ. पंकज वीरवाल, सलूम्बर - बाल कहानी - अनछई, अलका प्रमोद, लखनऊ - बाल कहानी - एक वादा, कमलेश चौधरी, बाबैन, कुरूक्षेत्र - बाल कहानी - मेहनत की कमाई, सावित्री चौधरी, जयपुर - बाल कहानी - दयावान दीनू, राजेन्द्र श्रीवास्तव, विदिशा - बाल कहानी - जैसा खोया वैसा पाया, डॉ. देशबंधु ‘शाहजहांपुरी’, शाहजहांपुर - बाल कहानी - भूल सुधार, गुडविन मसीह, बरेली - बाल कहानी - गुलाटीबाज, ओम प्रकाश क्षत्रिय, रतनगढ़ - बाल कहानी - बस्ता खुश हो गया, किशोर श्रीवास्तव, नई दिल्ली - बाल कहानी - अहसास के लिए पुरस्कृत किया गया। प्रत्येक को 1000 रू. शॉल, सम्मान पत्र, माला पहना कर सम्मान दिया गया।

राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के पूर्व अध्यक्ष एवं इस सत्र के मुख्य अतिथि डॉ. देव कोठारी का उद्बोधन हुआ। उन्होंने सलूम्बर के इतिहास सृजन से जुड़ी यादों को ताजा किया और इस दिशा में और ज्यादा काम करने की आवश्यकता जताई। दिनेश मेवाड़ी और जगदीश भंडारी ने उन्हें स्मृति चिन्ह देकर सम्मान दिया। अध्यक्षता करते हुए युगधारा के संस्थापक डॉ. जयप्रकाश पंड्या ‘ज्योतिपुंज’ ने सलिला के सम्मेलन व प्रतियोगिता जैसे राष्ट्रीय आयोजन की उपादेयता को रेखांकित किया। डॉ. शील कौशिक ने भी मंच से अपने विचार व्चार व्यक्त किए एवं दोहे सुनाये।

सलिला साहित्य सम्मान की कड़ी में पहले सलिला विशिष्ट साहित्यकार सम्मान दिये गये। यह सम्मान पाने वाले इस वर्ष जोधपुर के प्रबुद्ध साहित्यकार डॉ. रताकान्त शर्मा और सिरसा, हरियाणा की प्रख्यात साहित्यकार डॉ. शील कौशिक ने मंच पर आकर पुरस्कार ग्रहण किया। सम्मान स्वरूप दोनों रचनाकारों को 1100 रूपये की नकद राशि, सम्मान पत्र, शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।

इस वर्ष का सलिला साहित्य रत्न सम्मान कोटा के जितेन्द्र ‘निर्मोही, बीकानेर के सुनील गज्जाणी एवं उदयपुर युगधारा के अध्यक्ष लालदास ‘पर्जन्य’ एवं गीतकार प्रमिला शरद को सम्मान पत्र देकर शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। सलूम्बर नगर पालिका की अध्यक्ष कमला गांधी ने मंच को संबोधित किया। तत्पश्चात् किशोर श्रीवास्तव की जनचेतना कार्टून प्रदर्शनी खरी-खरी का उद्घाटन मंचस्थ अतिथियों के साथ किया। इसमें करीब 50 पोस्टर लगाए गये थे। जिसमें काटून व सूक्तियों के जरिये रोचक व चुटीले अंदाज में समाज की विसंगतियों को दर्शाया गया। बाद इसके अल्पाहार के लिए एक लघु विराम लिया गया।

काव्य गोष्ठी :

काव्य गोष्ठी का शुभारंभ डॉ. रमाकांत शर्मा ने ‘शहर’ कविता पाठ से किया। कोटा के जितेन्द्र ‘निर्मोही’ के मुक्तक प्रस्तुति ने खूब तालियां बटोरी।

‘‘बलिदान से मिलती है आजादियां

क्रांति की मांग जब लहू से भरो।’’

शहीदों के लिये चार पंक्तियां समर्पित करके नन्दकिशोर ‘निर्झर’ ने ‘‘जीते जीना’’ कविता पढ़कर सभा का रंग बदल दिया। अगली कड़ी में अंजीव ‘अंजुम’ ‘‘उठो स्वाधीनता की वह प्रथम ललकार गूंजी है....’’ कविता के बाद गजल और धरम ध्वजा केसरिया... शेर को पढ़ा। राजकुमार जैन ने बाल कविताओं ‘‘मम्मी अब तो दया करो, रूप लंच का नया करो... दूसरी कविता रोबोट एक दिला दो राम... बाल कविताओं का सुमुधर कंठ से पाठ किया। लखनऊ से पधारी साहित्यकार अलका प्रमोद ने अपनी कविता ‘‘चलो छोड़कर घर की चौखट, हम तुम सैनानी हो जाए...’’ प्रस्तुत की। संतोष कुमार सिंह ने कविता गीत और मुक्तक प्रस्तुत किये- ‘‘अपने आंसुओं को पलकों पर न लाया करो, अपने गमों को गैरों को मत बताया करो...’’। कदम्ब के वृक्ष पर... आदि गीत गाये।

किशोर श्रीवास्तव ने गीत ‘‘फेसबुक पर बिरले...’’और ‘‘जहां नुक्सान होना ही नियम.....’’ गजल पढ़ी। शशीराज सिंह मेजर ने ‘‘नानी जी ओ नानी जी, लिख लिख वही कहानी जी..’’ और ‘‘महकी महकी बगिया’’ बाल रचनाएं पढ़ी। डॉ. देशबन्धु ‘शाहजहांपुरी’ ने ‘‘तुम कितनी अच्छी हो अम्मा...’’ प्रस्तुत की। नवोदित युवा रचनाकार दिनेश जालेरी ने अपनी रचना ‘‘वीणा वादिनी मां मेरी सुन विनती, कलमकारों में करो मेरी गिनती...’’सुनाई। डॉ. सुधा शर्मा ने ‘‘हल्लो 101 आग जल्दी बुझाये...श्रीचैनराम शर्मा ने ‘‘तब से लगाकर अब तक विधाता थ्हारी कलम क्यूं नीं....’’प्रस्तुत की।

इस सत्र की संचालिका प्रसिद्ध गीतकार शंकुंतला सरूपरिया ने अपना लोकप्रिय गीत ‘‘जहां बेटी ना हो वहां देहरी गरीब होती है...’’ और ‘‘बेटियों के जन्म पर बधाई दीजिये..’’ गाकर मंच को मंत्रमुग्ध कर दिया। बरेली के गुडविन मसीह ने ‘‘दादाजी के दांत निराले...’’ और ‘‘गुड़िया तुम हो चांद का टुकड़ा...’’ बाल कविताएं प्रस्तुत की। मुकेशराव ने अपनी कविता ‘‘खाकर पान का गुटखा....’’ पढ़ी। सरिता गुप्ता ने अपने मधुर कंठ से ‘‘गिर गिर कर संभलना हमें आता है...’’और ‘‘कोई क्या जाने कितने आंसू पीकर हमने गीत लिखे... गीतों को गाया। ‘‘मेरा गीत अधूरा है कोई बिखरे ताल सजा दे...’’ पंकज वीरवाल ने इस सुन्दर गीत को गाया। राजन्द्र श्रीवास्तव ने रचना ‘‘कोई मुझसे अपना तन मन मांगे तो अपना जीवन दे दूंगा..’’ तथा ‘‘मेरी अच्छी मित्र किताबें..’’प्रस्तुत की। शशी श्रीवास्तव ने अपनी रचना ‘‘मेरा है दो मन..’’ प्रकाश तातेड़ ने अपनी रचना ‘‘हम भारत की तरूणाई, हम ही भारत की अरूणाई है....’’ प्रस्तुत की। डॉ. दिनेश पाठक ने ‘‘चन्दा मामा मुझको बहुत सताते हो, तकती रहती राहे तुम नहीं आते हो....।’’ व्यापक कैनवास पर फैले इस काव्य गोष्ठी को समय सीमा पार होने पर समेटना पड़ा। आभार मुकेश राव ने दिया।

इस सत्र का सफल संचालन तनिमा पत्रिका की संपादिका शकुंतला सरूपरिया ने किया।

दूसरा दिन :

प्रातः 9.00 बजे सभी साहित्यकार पैलेस रोड स्थित भंडारी सदन में एकत्रित हुए।  9.30 बजे हाड़ीरानी प्रतिमा को पुष्पाजंलि अर्पित करने के लिए नियत समय पर सभी ने राजमहलों की ओर एक साथ प्रस्थान किया। वहां पहुंच कर संचालन का दायित्व पं. नन्दकिशोर ‘निर्झर’ ने संभाला। सभी को हाड़ीरानी के बलिदान की ऐतिहासिक घटनाक्रम को सुनाकर काव्यपाठ किया। इस बीच साहित्यकारों ने राव चूंडा की हाड़ीरानी के मुण्ड युक्त प्रतिमा पर गुलाब के फूलों की पुष्पवर्षा करते रहे। मुकेश राव ने रानी के अमर बलिदान को याद करते गीत पढ़ा।

तृतीय सत्र :

यह ठीक 11.00 बजे जिला पुस्तकालय भवन के हॉल में प्रारंभ हुआ। इस सत्र को सलूम्बर कॉलेज के व्याख्याता पंकज वीरवाल और उदयपुर के साहित्यकार प्रकाश तांतेड़ ने संभाला। सर्व प्रथम मंचस्थ अतिथियों ने आसन ग्रहण कर सरस्वती प्रतिमा के सामने दीप प्रज्जवलन कर अपना आसन ग्रहण किया। मंच पर मुख्य अतिथि के तौर पर नई दिल्ली स्थित श्रीराम कॉलेज के हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. रवि शर्मा थे। अध्यक्ष मंडल में लखनऊ की अलका प्रमोद, मथुरा के डॉ. दिनेश पाठक ‘शशि’, आकोला-चितौड़गढ चित्रा फाउंडेशन निदेशक एवं साहित्यकार राजकुमार जैन ‘राजन’, दौसा के अंजीव ‘अंजुम’, मो. सु. यूनिवर्सिटी के पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष और बाल कहानी प्रतियोगिता के निर्णायक डॉ. कुजन आचार्य मंचस्थ थे। सभी अतिथियों को माला पहना कर स्वागत किया गया। मंच पर डॉ. देशबंधु ने सरस्वती वंदना पढ़ी। शकुंतला सरूपरिया ने राजस्थानी भाषा में स्वागत गीत गाया। शशी श्रीवास्तव और गीता शुक्ल द्वारा शंकुतला सरूपरिया को स्मृति चिन्ह भेंट दिया गया। अतिथियों का स्वागत करते हुए विमला भंडारी ने आज के कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। श्रेष्ठ बाल कहानी पुरस्कार विजेता जयपुर की सावित्री चौधरी ने अपनी रचना प्रक्रिया को साझा किया। इसके बाद उन्हें मचस्थ अतिथियों द्वारा पुरस्कार-सम्मान दिया गया। अस्वस्थता के कारण वे कल पुरस्कार सत्र में मौजूद नहीं हो सकी अतः उन्होंने यह पुरस्कार दूसरे दिन ग्रहण किया। इसके बाद महाविद्यालय और विद्यालय की बाल प्रतिभाओं स्वतंत्रता सैनानी औंकारलाल शास्त्री स्मृति पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया। जो इस क्रम में रहा- पहले राज. हाडा रानी महाविघालय के दीपक मेहता फिर बी. एन. गर्ल्स कॉलेज की चेतना सुथार। दोनों को 1000 रू. की नकद राशि, सम्मान पत्र और साहित्य की पुस्तकें प्रदान की गई। विद्यालय के विद्यार्थियों में पहले सुनील पटेल, राज. उ.मा.विघालय से फिर जया चौबीसा राज. बा.उ.मा. विद्यालय को बाद में विद्यानिकेतन के भावेश पानेरी और स्कॉलर इंटरनेशनल की विशाखा जैन को दिया गया। सभी को 500 रू. नकद राशि के साथ सम्मान पत्र दिया गया। बालक अपने अभिभावक व माता पिता के साथ उपस्थित हुए।

सलिला बाल प्रतिभा सम्मान के अर्न्तगत 1100 रू. की नकद राशि व सम्मान पत्र प्रज्ञा वैष्णव का सम्मान उनके माता-पिता ने ग्रहण की।

किशोर श्रीवास्तव ने अपनी गायिकी में मानवता और राष्ट्रभक्ति के गीतों को सुनाकर जादू बिखेरा। उनके मिमिक्री कला प्रदर्शन सभी को खूब हंसाया-गुदगुदाया।

इस सम्मेलन का अन्य आकर्षण साहित्य की विभिन्न विधाओं की पुस्तकों का लोकार्पण था। इसके अर्न्तगत मंचस्थ अतिथियों द्वारा कई कृतियां लोकार्पित हुई। जो क्रमशः इस प्रकार है- बचपन के आईने से, बालकथा संग्रह- डॉ. शील कौशिक। फूल खिले है सरसों के, बाल कविता संग्रह- पं. नन्दकिशोर ‘निर्झर’। आओ! क्रें बुद्धि का विकास, प्रश्न-पहेली, प्रकाश तातेड़। विज्ञान के बढ़ते कदम, विज्ञानलेख संग्रह- अलका प्रमोद। तेरे शहर में, उपन्यास- सारिका कालरा। दोस्त हमारा इतना प्यारा, बाल कविता संग्रह- डॉ. देशबंधु ‘शाहजहांपुरी’। लोकार्पण के बाद इन पुस्तकों पर विद्वानों ओर बालकों ने समीक्षा की। जिसमें प्रकाश तातेड़, मुकेश राव, रजनीकांत शुक्ल और चेतना सुथार ने लोकार्पित पुस्तकों पर राय दी। प्रकाश तातेड़ की लिखी पहेली की पुस्तक को लता अग्रवाल ने मल्टी विटामिन केप्सूल बताया।

लोकार्पण-समीक्षा के बाद गाजियाबाद के रजनीकान्त शुक्ल की शोधवार्ता ‘‘साहिर के गीतों में बालक’’ प्रस्तुत हुई। उन्होंने साहिर के लिखे गीतों में सद्भाव, समानता, प्यार, आनन्द व सकारात्मक सोच को प्रकट करते हुए अनेक गीतों की लेखनी को रेखाकिंत किया। कुछ राष्ट्रीय चेतना के गीतों को गाकर सुनाया भी।

तत्पश्चात डा. शील कौशिक ने अपना पत्रवाचन किया। विषय था टी.वी. कार्टून धारावाहिक, हिन्दी बाल साहित्य और बच्चे। इस विषय पर बोलते हुए उन्होंने सटीक विश्लेषण से सभा को सहमत किया। निराकरण के उपाय बताते हुए कहा कि अभिभावकों को बालकों को समय अवश्य देना चाहिये। उनकी गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिये।

सभा में उपस्थित संभागियों की प्रतिक्रिया स्वरूप डॉ. दिनेश पाठक ‘शशी’ ने हाईकू पढ़े। सलूम्बर के अभिभावक भंवरलाल पानेरी ने सम्मेलन की उपादेयता पर विचार व्यक्त किये।

साहित्यकारों ने सलिला संस्था की अध्यक्ष विमला भंडारी को मंच आकर अपनी पुस्तकें भेंट में दी। डॉ. शील कौशिक और राजकुमार जैन ने सम्मान स्वरूप शॉल ओढ़ाया। स्थानीय पत्रकार सुरेश टेलर को डॉ. कुंजन आचार्य ने शॉल ओढ़ाकर स्मृति चिन्ह भेंट दिया। डॉ. कुजन आचार्य को डॉ. रवि शर्मा ने शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया।

मंचासीन अतिथियों में मो. साजिदखान ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह समारोह साहित्य, कला, संगीत का अद्भुत संगम है। भाषा शुद्धता की ओर ध्यान देना अपेक्षित है। बाल मन के संदर्भ में शोध होना चाहिये। अंजीव ‘अंजुम’ ने अपने विचार रखे। राजकुमार जैन ‘राजन’ ने कहा कि जिन घरों में साहित्य नहीं वहां संस्कर नहीं। बालक के हाथ में पुस्तक देना बहुत जरूरी है। विमला भंडारी को इस नवीन प्रयोग हेतु धन्यवाद दिया। सभागार में युगधारा के सचिव चेतन औदिच्य ओर सरस्वती सभा के सदस्य गौरीकांत शर्मा उपस्थित थे। उन्हें अतिथियों ने स्मृति चिन्ह प्रदान किया। सीागार में उपस्थित बालकों को, मंचस्थ अतिथियों को, राज. बा.उ.मा. विद्यालय की प्रचार्या मीना रोत, मुस्लिम महासभा के उपाध्यक्ष हब्बीबुर्ररहमान को स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया। सलिला संस्था की ओर से जगदीश भंडारी और चन्द्र प्रकाश मंत्री ने शास्त्री परिवार के संजय शास्त्री, दिनेश मेवाड़ी को सलिला भामाशाह सम्मान देकर नवाजा। यह सममान मंच पर उन्हीं के परिवार के मुकेश मेवाड़ी ने उनकी अनुपस्थिति में ग्रहण किया। सुधा जौहरी का सलिला भामाशाह सम्मान उनकी अनुपस्थिति में सावित्री चौधरी ने ग्रहण किया। ज्ञातव्य है कि वे तीन वर्ष से स्वेच्छा से सलिला को आर्थिक सहयोग भेजती है।

समापन समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. रवि शर्मा ‘मधुप ने अपने वक्तव्य में कहा कि साहित्य सृजन एक कठिन मार्ग है। बाल साहित्य सृजन के लिये लेखक को स्वयं बालक बनना पड़ता है। लेखक साहित्य द्वारा वाचिक एवं लिखित शब्दज्ञान की प्रस्तुति भी करता हे अतः बाल साहित्य का त्रुटिहीन होना अत्यावश्यक है। आपने वर्तमान बाल साहित्य के कुछ उदाहरणों से व्याकरण की कमियों की ओर संकेत किया। एक वचन बहु वचन को ध्यान में रखने की बात कही। इस वक्तव्य से भाषा और व्याकरण संबंधित जानकारी को देकर परिशोधन किया गया। डॉ. कुंजन आचार्य ने समय बदलने के साथ लेखन के विषय बदलने की बात पर जोर देते हुए कहा कि आज बच्चे उम्र से कहीं अघिक आगे है। अब पुराने प्रतीमानों या विषय से काम चलने वाला नहीं। अब बच्चे किसी भी चीज को आसानी से स्वीकारते नहीं। उन्होंने बाल कहानी प्रतियोगिता की निर्णय प्रक्रिया को लेकर अपने अनुभव साझा किये। मंच पर साहित्यकारों के साथ आये जीवनसाथियों ने भी अपने उद्गार व्यक्त किये। जिनमें शील कौशिक के पति मेजर सा. अलका प्रमोद के पति प्रमाद, मधु माहेष्वरी के पति शिवनारायण आगाल, सभी को अभिव्यक्ति का अवसर मिला। स्मृति चिन्ह रूप् में सलिला संस्था का सम्मान और आतिथ्य मिला। अंत में माहौल बहुत ही भावुक और संवेदना से भर गया। विदाई के इन पलों को आभार में बांधा जगदीश भंडारी ने। उन्होंने कहा कि आप सभी को जो कुछ असुविधाएं या तकलीफ हुई या कहीं कोई त्रुटि रही वह मेरी है। मैं इसे स्वीकारता हू। क्षमा करे। जो कुछ मान सम्मान आपको दे सके वह आपका है और यह हमारा सौभाग्य है। आप अच्छी यादें यहां से लेकर जाये। जब भी संस्था आपको याद करें आप पुनः इस पावन धरा पर पधारें।

पश्चात सबने भोजन किया। पूरे सम्मेलन में निरंतर सक्रिय कई मोबाईल कैमरे फिर चमक उठे। अनगिनत यादगार पलों का छायांकन इस समारोह का एक सुखद पक्ष बन गया। पुस्तकें और पतों का आदान प्रदान हुआ। धीरे धीरे यहां एकत्रित राष्ट्र की साहित्यकार संपदा अपने गंतव्य की ओर बढ़ चली।

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समाचार संकलन व प्रस्तुति - प्रकाश तातेड़

डॉ. विमला भंडारी, अध्यक्ष, सलिला संस्था, सलूम्बर-राज. 9414759359

प्रकाशन/प्रसारण हेतु जारी-

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रचनाकार: रिपोर्ट : राष्ट्रीय बाल साहित्यकार सम्मेलन
रिपोर्ट : राष्ट्रीय बाल साहित्यकार सम्मेलन
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