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मथुरा के साहित्यकार डॉ.दिनेश पाठक शशि को मिला -उ.प्र.हिन्दी संस्थान का "अमृत लाल नागर बाल कथा सम्मान"

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गत चार दशक से हिन्दी साहित्य की विभिन्न विधाओं यथा-बाल कहानी,बाल उपन्यास, लघुकथा,व्यंग्य,समीक्षा और बड़ों के लिए कहानी, रेडियो नाटक, रेडियो झलकियां, हाइकु आदि में लिख रहे ,oa   "जुलाई-2017 में मथुरा जंक्शन रेलवे से सीनियर सेक्शन इंजीनियर के पद से सेवानिवृत्त हुए" मथुरा के साहित्यकार डॉ.दिनेश पाठक शशि को बाल दिवस के अवसर पर लखनऊ में उ.प्र.हिन्दी संस्थान के यशपाल सभागार में आयोजित कार्यक्रम में संस्थान के निदेशक शिशिर जी, कार्यकारी अध्यक्ष डॉ.सदानन्द प्रसाद गुप्त व प्रख्यात साहित्यकार डॉ.सूर्यप्रसाद दीक्षित जी ने डॉ.दिनेश पाठक शशि को शाल उड़ाकर एवं सम्मान पत्र व इक्यावन हजार की राशि प्रदान कर सम्मानित किया।

डॉ.दिनेश पाठक शशि की हजारों रचनाएं देश-विदेश की अनेक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित एवं आकाशवाणी के मथुरा, ग्वालियर, रोहतक , दिल्ली एवं राष्ट्रीय चैनल दिल्ली से प्रसारित हुई हैं।

उनकी मूल एवं संपादित दो दर्जन से अधिक पुस्तकों का प्रकाशन हो चुका है साथ ही उनकी एक बाल कथा "भूल" पर डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी बनाई गई है।

आगरा विश्वविद्यालय से उनके साहित्य पर एक छात्रा द्वारा -"कथा साहित्य शिल्पी डॉ.दिनेश पाठक शशि  : व्यक्तित्व एवं कृतित्व" विषय में शोध करके डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है।

उनकी की बाल कहानी कक्षा एक,चार व छह के हिन्दी पाठ्य पुस्तकों में समाहित की गई है।

भारत सरकार के"प्रेमचंद पुरस्कार" एवं "लाल बहादुर शास्त्री पुरस्कार" सहित अनेक साहित्यिक संस्थाओं द्वारा उन्हें पुरस्कृत/सम्मानित किया जा चुका है।

उनकी अनेक रचनाओं का नौ भाषाओं में अनुवाद भी हुआ है।

गत बीस वर्ष से वह अपने पिता श्री की स्मृति में गठित "पं.हरप्रसाद पाठक-स्मृति बाल साहित्य पुरस्कार समिति मथुरा के सचिव के रुप में तथा "तुलसी साहित्य अकादमी मथुरा के संरक्षक के रूप में अनेक साहित्यकारों को पुरस्कृत कर चुके हैं।

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