वसंत के इस मतवाले समीरण में // डॉ. रानु मुखर्जी

SHARE:

प्रकृति को हमने माँ कहा, आकाश को हमने पिता, पृथ्वी को माँ कहने में कोई काव्य नहीं है, एक दॄष्टि है, जिसमें हम प्रकृति को एक समग्रीभूत परिवार...


प्रकृति को हमने माँ कहा, आकाश को हमने पिता, पृथ्वी को माँ कहने में कोई काव्य नहीं है, एक दॄष्टि है, जिसमें हम प्रकृति को एक समग्रीभूत परिवार मानते हैं। इसलिए हम अपना सुख, आनन्द सब कुछ प्रकृति में ही ढूंढते हैं। क्योंकि हम प्रकृति के ही तो अंश हैं।

अपनी रचनाओं में विविधता और श्रेष्ठता के कारण विश्व कवि रवीन्द्रनाथ को सहज ही भारत का ही नहीं विश्व का और सभी समय का एक श्रेष्ठ कलाकार कहा जाता है। उनकी रचनाओं में प्रकृति मूलरुप में रहती है। प्रकृति का मानवीकरण करने की कला में सिद्धहस्त है। वसंत को उन्होंने ऋतुओं का राजा कहा है – “ऋतुराज वसंत” भावना की स्वरबद्धता और सत्यता की कल्पना की विविधता और संगीतमयता के कारण वसंत से संबंधित उनकी रचनाएं अप्रतिम मिठास से भरी है-

हे वसंत, हे सुन्दर धरणीर ध्यान-भरा धन,

वत्सरेर शेषे

शुधु एकबार मर्ते तुमि धरो भूवनमोहन

नव वर वेश ।

तारी लागी तपस्विनी की तपस्या करे अनुक्षण –

आपनारे तप्त करे, धौत करे, छाडे आभरण

त्यागेर र्स्वस्व दिए फल – अर्घ्य करे आहरण

तोमार उद्देश्ये” (“वसंत” शांतिनिकेतन में)

वसंत का मानवीकरण है. उनसे बिनती करते है कि एकबार भूवनमोहन नववररुप धारण करके पृथ्वी पर अवतरण करो कि यह (पृथ्वी) स्वयं को तपाती है, धोती है, आवरण बदलती है।

सब कुछ त्याग करके फलों का अर्घ्य देती है केवल तुम्हारे ही उद्देश्य में.

‘आजी वसंत जाग्रत द्वारे

तब अवगुन्ठीत कुन्ठीत जीवने ।

कोरो ना बिडिम्बीत तारे ।

आजी खुलिओ हृदयदल खुलिओ,

आजी भूलिओ आपन पर भूलिआ,

एई – मुखरित गगने

तब गंध तंरगित तुलिओ’ (गीतांजली से)

वसंत का मानवजीवन में महत्व को दिखाते हुए कवि कहते हैं – द्वार पर वसंत आया है। दिल खोलकर उसका स्वागत करें। आपसी भेदभाव को भूलकर संगीत मुखरित गगन में इसको अपनी अवगुंठित् कुंठित जीवन में, हृदय में स्थान देने की बात करते हैं।

धरा में विभिन्न ऋतुओं का आगमन केवल और केवल वसंत के लिए है. इसे बडे सुन्दर रुप से कविन्द्र ने समजाया है। सभी ऋतुओं को अपने जीवन में समाहित कर अपने तरीके से रंग भरकर मानव उसे अपने अनुसार ढाल लेता है। वसंत जब आता है तब जीवन को इतना तरंगित करता है, इतनी ताजगी से भर देता है कि जीवन आनन्दमय हो उठता है। कवि रविन्द्रनाथ ने यहाँ वसंत को दुल्हे के रुप में प्रस्तुत किया है।

वसंत का रंगीन उल्लास मानव के लिए जीवनदायिनी शक्ति है। कविवर रवीन्द्रनाथ के लिए प्रकृति और मानव का संबंध अभिन्न है जो कवि के सारे जीवन में, कवितओं में यत्र – तत्र, बिखरा पडा है परंतु इसे (वसंत को) अपने साथ बांधकर रखने की क्षमता इस धरा में नहीं है। अर्थात सुख – आनन्द के क्षण स्थायी अवस्था को कवि समझाते है। आगे कहते हैं –

हे वसंत हे सुन्दर, हाय हाय, तोमार करुणा

क्षणकाल – तरे।

मिलाईबे ए उत्सव, एई हांसी, एई देखा सुना

शुन्य निलाम्बरे!

तोमर करिबे बंदी नित्यकाल मुक्तिकाशृंखले

शक्ति आछे कार ?

अतः जीवन के आनन्दमय क्षण में भरपूर शक्ति का संचय कर लेने की सलाह कवि देते हैं क्योंकि यह उत्सव, यह खुशी, यह हंसी धरा के रंगीन, सजावट सब विलीन हो जाने वाले हैं। इसलिए वसंत को जीवनदायीनी कहा जाता है। कवि की रचना यही संदेश देती हैं।

जीवन में ऋतुराज वसंत की महत्व को दर्शाते हुए कवि ने इस ऋतु को उत्सव में बदल दिया है। उन्होंने इस ऋतु में शांतिनिकेतन विश्व विद्‌यालय परिसर में “वसंतोत्सव” मनाने की प्रथा का आरंभ किया. लगातार कई दिनों तक विद्यार्थी विद्यालय परिसर में नृत्यगीत में रत हो जाते हैं। वसंत के साथ स्वागत में नृत्यगीत आरंभ हो जाता है।

नए नए परिधान फूल-मालाओं से सज्जित होकर नाच गान करते हैं। आपसी भेदभाव को भुलाकर, छोटे बडे का भेदभाव को मिटाकर, विद्यार्थी, शिक्षक सब एक होकर इस उत्सव में एकसाथ झूमते हैं। ढोल, मृदंग, करताल के साथ छंद बद्ध रुप से सब एक हो जाते हैं। और यह परंपरा लगातार होली तक चलती है।

शांतिनिकेतन में होली के त्यौहार को मनाने की भी एक विशिष्ट परंपरा है। यहां अबीर गुलाल और फुलों से होली खेली जाती है। झुंड में नृत्यगीत के साथ बाजे-गाजे के साथ झूमते हुए होली खेलने निकलतें है। यहाँ भी ऋतुराज वसंत सिरमौर होतें हैं। जिसने एकबार कविवर रविन्द्रनाथ द्वारा प्रचलित वसंतोत्सव में हिस्सा लिया हो वह बार बार इस मौसम में शांतिनिकेतन जाना चाहेगा। सच्चे अर्थ में अगर ऋतु में महत्व को समझना है, इसके गुण को परखना है तो अवश्य वसंतोत्सव में भाग लेना चाहिए। प्रेम और भाईचारे का मूर्तरुप देखने को मिलता है।

जीवन का आधार प्रेम है। प्रेम एक शक्ति है, एक आकर्षण है। जिससे जग को आधार मिलता है, अभिव्यक्ति मिलती है। वसंत उत्सव प्रेम का उत्सव है, प्रकृति पुजा का उत्सव है, प्रकृति के रंगो का आभास मानव में प्रतिफलित होता है और आपस में इर्ष्या द्वेष, मलिनता, घृणा के भाव को भूलकर प्रेममय होकर एकदूसरे से हिलमिल कर बन्धुत्व, एकात्मा, नए जोश के उर्जा का संचार मानव मन में होना ही वसंत का मूल संदेश होता है।

आज ज्योत्सना राते सबाई गेछे बोने

वसंतेर एई माहाल समीरणे”

जाबो ना गो जाबो ना रे

रोईनू बोसे घरेर माझे एई निरालाय

एई निरालाय रबो आपन कोने”

वसंत के मतवाले समीकरण से बच पाना संभव नहीं। अगर न भी सहयोग करना हो तो ज्योत्सना से भरी रात इतनी मतवाली है कि स्वयं को अपना सब कुछ विसर्जन कर प्रकृति के संग घुल-मिल जाना ही पड्ता है।

कवि के अनुसार वसंत प्रकृति पूजा क उत्सव है। सदैव सुन्दर दिखनेवाली प्रकृति वसंतऋतु में सोलह शृंगार से दीप्त हो उठती है। यौवन हमारे जीवन का मधुमास वसंत है तो वसंत इस सृष्टि का यौवन है। जीवन के सौन्दर्य के लिए प्रकृति के अनुपम सान्निध्य में जाना चाहिए। निसर्ग का जादू मानव को वेदना रहित बना देता है। इसमें अहंकार नहीं होता है अतः ईश्वरीय भाव से समृद्ध होता है। अतः निसर्ग का सान्निध्य हमें ईश्वर के सान्निध्य में ले जाता है। कुछ हद तक कविवर का यह महोत्सव अध्यात्मा भावना भी संचार करता है।

“वसंत आ गया है” लेख में हजारी प्रसाद द्विवेदीजी ने लिखा है – “मुझे ऐसा लगता है कि वसंत भगता भागता चलता है। देश में नहीं काल में। किसी का वसंत पन्द्रह दिन का है तो किसी का नौ महीने का। मौजी है अमरुद बारह महीने इसका वसंत ही वसंत है”।

द्विवेदीजी ने भी अपने लेख में वसंत का वही रुप दिखाना चाहा है जो विश्व कवि रवीन्द्रनाथ ने दिखाया है। अर्थात प्रकृति और मन क समन्वय। प्रेम और मानव। मानव प्रेम और सदभावना। सभी भाव मन से जुडे है। और अगर मन चाहे तो बारह महीने वसंत ऋतु छाया रह सकता है, जैसे अमरुद का। सृष्टि की सुन्दरता और यौवन की रसिकता का जहा सुमेल हो वहां निराशा निष्क्रियता का कोई स्थान नहीं. निसर्ग की सुंदरता व मानव की रसिकता में अगर प्रभु का स्वर ना हो तो वह विनाश का मार्ग बन जाता है। इसलिए वसंत के संगीत में गीता के स्वर का आभास दिखता है। हिन्दी साहित्य, वसंत की सुमधुर रचनाओं से समृद्ध है ऋतुराज वसंत सचमुच प्रेम मुकुट धारण करके मानव – प्रकृति के सिरमौर बन बैठें हैं।

फिर भी वसंत आता है डॉ. रानु मुखर्जी

कोहरा भरा आसमां हो, चाँद भी परेशान हो

तारे मुंह छीपा रहे हो, धरती बदहवास हो – फिर भी वसंत आता है.

पतझड़ का मौसम हो, हरियाली का नाम न हो, फूलों का अकाल हो,

और भौंरे अकुला रहे हो – फिर भी वसंत आता है.

चूल्हे पर हंडिया न हो, पानी में चावल न हो,

अंतडिया कुलबुला रही हो, आंखों तले अंधेरा हो – फिर भी वसंत आता है.

तलवारें एक दूजे पर तनी हो, आपस में सबकी ठनी हो

नदियाँ खून की बहती हो, जुल्म की चादर फैली हो - फिर भी वसंत आता है.

रंगराग से भरी खुशनुमा शाम हो, हर चेहरे पर गुलाल हो,

आपको बस केवल एक मुस्कुराहट की चाह हो,

पर वह कहीं भी किसी से न मिले फिर भी वसंत आता है फिर भी वसंत आता है.

---


परिचय -

नाम - डॉ. रानू मुखर्जी

जन्म - कलकता

मातृभाषा - बंगला

शिक्षा - एम.ए. (हिंदी), पी.एच.डी.(महाराजा सयाजी राव युनिवर्सिटी,वडोदरा), बी.एड. (भारतीय

शिक्षा परिषद, यु.पी.)

लेखन - हिंदी, बंगला, गुजराती, ओडीया, अँग्रेजी भाषाओं के ज्ञान के कारण अनुवाद कार्य में

संलग्न। स्वरचित कहानी, आलोचना, कविता, लेख आदि हंस (दिल्ली), वागर्थ (कलकता), समकालीन भारतीय साहित्य (दिल्ली), कथाक्रम (दिल्ली), नव भारत (भोपाल), शैली (बिहार), संदर्भ माजरा (जयपुर), शिवानंद वाणी (बनारस), दैनिक जागरण (कानपुर), दक्षिण समाचार (हैदराबाद), नारी अस्मिता (बडौदा), पहचान (दिल्ली), भाषासेतु (अहमदाबाद) आदि प्रतिष्ठित पत्र – पत्रिकाओं में प्रकशित। “गुजरात में हिन्दी साहित्य का इतिहास” के लेखन में सहायक।

प्रकाशन - “मध्यकालीन हिंदी गुजराती साखी साहित्य” (शोध ग्रंथ-1998), “किसे पुकारुँ?”(कहानी

संग्रह – 2000), “मोड पर” (कहानी संग्रह – 2001), “नारी चेतना” (आलोचना – 2001), “अबके बिछ्डे ना मिलै” (कहानी संग्रह – 2004), “किसे पुकारुँ?” (गुजराती भाषा में आनुवाद -2008), “बाहर वाला चेहरा” (कहानी संग्रह-2013), “सुरभी” बांग्ला कहानियों का हिन्दी अनुवाद – प्रकाशित, “स्वप्न दुःस्वप्न” तथा “मेमरी लेन” (चिनु मोदी के गुजराती नाटकों का अनुवाद शीघ्र प्रकाश्य), “गुजराती लेखिकाओं नी प्रतिनिधि वार्ताओं” का हिन्दी में अनुवाद (शीघ्र प्रकाश्य), “बांग्ला नाटय साहित्य तथा रंगमंच का संक्षिप्त इति.” (शिघ्र प्रकाश्य)।

उपलब्धियाँ - हिंदी साहित्य अकादमी गुजरात द्वारा वर्ष 2000 में शोध ग्रंथ “साखी साहित्य” प्रथम

पुरस्कृत, गुजरात साहित्य परिषद द्वारा 2000 में स्वरचित कहानी “मुखौटा” द्वितीय पुरस्कृत, हिंदी साहित्य अकादमी गुजरात द्वारा वर्ष 2002 में स्वरचित कहानी संग्रह “किसे पुकारुँ?” को कहानी विधा के अंतर्गत प्रथम पुरस्कृत, केन्द्रीय हिंदी निदेशालय द्वारा कहानी संग्रह “किसे पुकारुँ?” को अहिंदी भाषी लेखकों को पुरस्कृत करने की योजना के अंतर्गत माननीय प्रधान मंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेयीजी के हाथों प्रधान मंत्री निवास में प्र्शस्ति पत्र, शाल, मोमेंटो तथा पचास हजार रु. प्रदान कर 30-04-2003 को सम्मानित किया। वर्ष 2003 में साहित्य अकादमी गुजरात द्वारा पुस्तक “मोड पर” को कहानी विधा के अंतर्गत द्वितीय पुरस्कृत।

अन्य उपलब्धियाँ - आकशवाणी (अहमदाबाद-वडोदरा) की वार्ताकार। टी.वी. पर साहित्यिक पुस्तकों का परिचय कराना।

संपर्क - डॉ. रानू मुखर्जी

17, जे.एम.के. अपार्ट्मेन्ट,

एच. टी. रोड, सुभानपुरा, वडोदरा – 390023.

Email – ranumukharji@yahoo.co.in.

ranumukharji@yahoo.co.in

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: वसंत के इस मतवाले समीरण में // डॉ. रानु मुखर्जी
वसंत के इस मतवाले समीरण में // डॉ. रानु मुखर्जी
https://lh3.googleusercontent.com/-hbl-Cx71TIc/Wgqe0b92HfI/AAAAAAAA8m0/DDd3tjYxZLUsQFYSTGexmKzDwdRJ1Q4aQCHMYCw/s100-c/1%2B004_thumb%255B1%255D?imgmax=200
https://lh3.googleusercontent.com/-hbl-Cx71TIc/Wgqe0b92HfI/AAAAAAAA8m0/DDd3tjYxZLUsQFYSTGexmKzDwdRJ1Q4aQCHMYCw/s72-c/1%2B004_thumb%255B1%255D?imgmax=200
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2017/11/blog-post_25.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2017/11/blog-post_25.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content