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बौद्धिक प्रबलता // अखिलेश भारती

 (सकारात्मक विचार )

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अगर आपसे कोई यह कहे, कि सादे कागज़ पर अपनी उपलब्धियाँ या नाक़ामियाँ लिखें, तो सवर्प्रथम आपकी नकारात्मक वैचारिक मन आपको अपनी कमजोरियों, नाकामियों को लिखने के लिए प्रेरित करेंगी, क्योंकि नकारात्मकता हमेशा सकारात्मकता को प्रहार करती हैं, ऐसा इसलिए होता है, कि हम अपने मन कि आत्मदृढ़ता को नियंत्रित नहीं कर पाते, स्वयं का अपने ऊपर विश्वास न होना, परन्तु ज्यों ही आप सकारात्मक वैचारिकता अपने अंदर लाते हैं, आपको अपने अंदर कि अनेकों उपलब्धियाँ, सदगुण, प्रबल सोच जैसी अनेक विचार आपके मस्तिष्क पटल पे छायांकित होने लगते हैं, और आपकी मन विचार कि शुद्धता को ग्रहित कर प्रबल बौद्धिक चेतना को अवलोकित करती हैं.

अतएव बौद्धिक शुद्धता हमारे विचारों से उत्पन्न होते हैं, हमारे कर्मों की उपलब्धियाँ हमें बौद्धिकता की महिमा को परिभाषित करती हैं, जो हमेशा हमारे प्रबल विचारों को अनुसरित करती हैं.

सकारात्मक सोच ऊर्जावान बनती हैं, जहाँ संघर्ष नहीं, वहां जीवन नहीं, संघर्ष का दूसरा नाम है- जीवन।

जीवन में प्रतिकूलताएं एवं अनुकूलता आएँगी, जैसे की सुख-दुःख जीवन का पहिया हैं.जीवन में प्रत्येक व्यक्ति सफल होना चाहता है, किंतु यह उसके संघर्ष, परिश्रम और निरंतर प्रयासों पर निर्भर करता है. अनुकूल और विपरीत परिस्थितियां हर मनुष्य के जीवन में आता हैं. सकारात्मक सोच रखने वाले परिस्थितियों का डट कर मुकाबला करते हैं. अतएव नकारात्मक विचारो को दूर करके हमें अच्छी और सकारात्मक चीज़ों के बारे में सोचना चाहिए. सकारात्मक सोच या विचार आपके जीवन को नयी राह दिखता हैं. सकारात्मक सोच एवं विचार से आत्मविश्वास बढ़ता हैं. अपने को आनंदित रखें और सकारात्मक विचारों को अपने अंदर लाएं.

हमारा दृष्टिकोण सकारात्मकता का पर्याय होना चाहिए. सकारात्मकता का प्रारम्भ आशा और विश्वास हैं.

द सीक्रेट किताब में कहा गया है -आपकी हर सोच आपका भविष्य decide करती है। सकारात्मक सोच एक ऐसी सोच है जो आपकी जिंदगी बदल सकती है।

स्वामी विवेकानंद जी कहते हैं कि, “मन में अच्छे विचार लायें। उसी विचार को अपने जीवन का लक्ष्य बनायें। हमेशा उसी के बारे में सोचे, सपने देखें। यहाँ तक की उसके लिए हर क्षण जिएं। आप पायेंगे कि सफलता आपके कदम चूम रही है।

महापुरुष हमेशा से ये कहते रहे हैं की, सकारात्मक सोच वाला व्यक्ति अपनी सोच से असंभव को भी संभव बना देता हैं.

दीपक की शक्ति है कि दीपक अपने चारों ओर फैले अँधेरे को एक पल में दूर कर देता हैं, इसी प्रकार आशा की एक किरण सम्पूर्ण नकारात्मक विचारों को एक पल में मिटा देती हैं.

महात्मा गाँधी- मनुष्य वह प्राणी है जो अपने विचारों से बना होता है, वह जैसा सोचता है वैसा ही बन जाता है.

किसी महापुरुष ने ठीक ही कहा हैं - सकारात्मक सोचना या न सोचना हमारे मन के नियंत्रण में है और हमारा मन हमारे नियन्त्रण में है.

नकारात्मक संवाद व्यक्ति को अवसाद कि तरफ ले जाता हैं, क्योंकि विचारों में बहुत शक्ति होती है। हम क्या सोचते हैं, या नहीं सोचते यह हमारे जीवन पर बहुत गहरा असर डालता हैं. अतः अक्सर निराशा के क्षणों में मनोवैज्ञानिक भी सकारात्मक संवाद एवं सकारात्मक चीजों को केंद्रित करने के लिए प्रेरित करते हैं. सकारात्मक सोच, सकारात्मक संवाद और सकारात्मक कार्यों का असर हमें सफलता की ओर अग्रसर करती हैं. हमारे सकारात्मक विचार ही मन में उपजे निराशा के अंधकार को दूर करके आशाओं के द्वार खोलते हैं।

स्वामी विवेकानंद ने कहा था - हम वो हैं जो हमारी सोच ने हमें बनाया है, इसलिए इस बात का ध्यान रखिये कि आप क्या सोचते हैं। शब्द गौंण हैं, विचार दूर तक यात्रा करते हैं।

अल्बर्ट आइन्स्टीन- आपको खेल के नियमों को सीखना होगा और तब आप किसी और से बेहतर खेलेंगे.

विंस्टन चर्चिल- खुद के लिए मैं बहुत आशावादी हूँ. इसके अलावा कुछ और होना ज्यादा मायने नहीं रखता.

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AKHILESH BHARTI (ASSISTANT MANAGER-DCC-MPPKVVCL-JABALPUR)

EMAIL ID- akhilesh.bharti59@gmail.com

आलेख 217169857412284231

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