नाका - विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका. 

विविध विधाओं में से चुनकर पढ़ें -

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---

यहाँ की विशाल ऑनलाइन लाइब्रेरी में मनपसंद रचनाकार अथवा रचनाएँ खोज कर पढ़ें -

 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com  रचनाकार के वाट्सएप्प नंबर 8989162192 (कृपया कॉल नहीं करें, कॉल रिसीव नहीं होगी, तथा इसका उपयोग केवल प्रकाशनार्थ रचना भेजने के लिए ही करें) पर भी वाट्सएप्प से रचनाएँ अथवा रचना पाठ के वीडियो प्रकाशनार्थ भेजे जा सकते हैं. अधिक जानकारी के लिए यह पृष्ठ [लिंक] देखें.

--

श्री नानी पालखीवाला जी का प्रेरणाप्रद वसीयतनामा

image

जब मैं मर जाऊं....

image

-मेरी नज़र उस आदमी को देना जिसने कभी सूर्योदय ही नहीं देखा है

-मेरा दिल उसे देना जिसे दिल की व्यथा का पता हो

- मेरा खून उस युवक को देना जिसे कार दुर्घटना के विनाश से निकाला गया हो, ताकि वह जीवित रह कर अपने पौत्र को खेलते देख सके

-मेरे गुर्दे किसी और के शरीर से विष निकास सके उसे देना

-मेरी हड्डियां किसी अपंग बच्चे को पैदल करने में सहायक हो

-जो कुछ मेरा बाकी बचा हो, जला देना और बिखेर देना वह राख हवाओं में ताकि उसमें फूल अंकुरित हो पायें

- अगर तुम्हें कुछ दफनाना ही है, तो वे है मेरी गलतियां, व् मेरी क्षतियां जो मेरे देश बंधुओं के हेतु है

- मेरे पाप दुर्जन को दे दो

- मेरी जीवात्मा परमात्मा को दे दो

- अगर तुम मुझे याद करना चाहते हो, तो एक हितकर कार्य से या वचन से करो, उसके साथ जिसे तुम्हारी जरूरत हो.

अगर तुम यह सब करोगे जो मैंने चाहा है, मैं चिरकाल तक अमर रहूँगा.

नानी. ए. पालखीवाला

(1.6.1920 --11-12-2002)

हिंदी अनुवाद: देवी नागरानी

27-12-2017

0 टिप्पणियाँ

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.