370010869858007
नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका संपर्क : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी यहाँ [लिंक] देखें.

****

Loading...

श्रीदेवी : विशेष संस्मरण : आप तो हमारे घरों में मुहावरे बनकर जीती रहीं हैं // विनीत कुमार

image

आप तो हमारे घरों में मुहावरे बनकर जीती रहीं हैं :

बॉलीबुड नायिकाओं को शायद इस बात का अंदाजा हो या नहीं, पता नहीं लेकिन वो एक सामान्य मिडिल क्लास फैमिली में मुहावरे बनकर भी रोज याद की जाती हैं. एक ऐसा मुहावरा जो अक्सर द्विअर्थी और भाव एक कि तुम ऐसा नहीं हो सकती.

वो हमारा स्कूली जीवन था. घर में दीदी लोग मुझसे बड़ी है और उस वक्त तो और खर-पतवार( मां की भाषा में ) की तरह बढ़ रहीं थीं. मेरी मां ऊपर से सख्त किन्तु भीतर से आजाद ख्याल की महिला रही हैं. दीदी लोगों की अच्छी आदतों और मनमानी आदतों के लिए श्रीदेवी का नाम मुहावरे के तौर पर इस्तेमाल करतीं.

कहीं बाहर जाते समय दीदी पूरा झमकाकर( अच्छे से तैयार होकर ) निकलने को होती कि यूं मां से पूछ लेती- ठीक लग रही हूं न मां ? मां पहले से जबाव लिए होती- दू घंटा लगाके तैयार हुई तो अब क्या एकदम से श्रीदेवी का कान काट लोगी ?

मुहल्ले की चाचियां एक-दूसरे के घर की शिकायत करते हुए जोड़ देती- बेटी को पढ़ावे लिखावे के चाही तो खुल्ला छूट दिए हुए हैं, अच्छा बड़ा होकर श्रीदेवी बनेगी.

मोहल्ले की कुछ लड़कियां खुद को सेलेब टाइप ट्रीट करतीं. कुछ लेने घर आती और मां कुछ खाने, थोडी देर रूकने कहती तो मना करने लग जाती. तब मां एकदम से कहती- काहे यहां से जाके तुमको हवा-हवाई पर डांस करना है..रूको थोड़ी देर.

बिसेसर के वाइफ का उमर साल-दर-साल बढ़ता जा रहा है लेकिन श्रीदेवी जैसी जस की तस है.

बिटुआ के मौगी( पत्नी ) शुरू-शुरू में तो एकदम श्रीदेवी जैसन संस्कार लेके घर घुसी. कनझटके( उपर-उपर ) नजर भी पड़ता तो चाची-चाची करके परनाम-पाती करती. हमको क्या पता कि बाद में नागिन का रोल सीख लेगी. हमको तो अब नजर मिलावे में भी हाथ-गोड़ सुन्न होने लगता है.

एक ही नायिका के नाम को लेकर दर्जनों मुहावरे बनते और उन सबमें वो अलग-अलग सिनेमाई चरित्र में जीतीं हैं. औरत जात के जादे उठल्लू( अपमान ) करके नहीं चाहिए. उ जो ठान ली तो अपना देह-धच्चर( ऑरा ) ऐसा कर लेती है कि तब मर्दाना सबका बोखार छोडा देती है. देखे नहीं इंग्लिश- विग्लिंश में श्रीदेवी को.

वक्त बदला. मां श्रीदेवी पर से शिफ्ट होकर काजोल पर आ गयी. इधर जब बोर हो जाया करती तो कहती- ए खुशी, करके दिखाओ तो जिरी सोनाक्षी सिन्हा वाला हुडहुड दबंग पर डांस. नय मन लग रहा है. लेकिन

बदलते वक्त के बीच तब भी कोई ढंग से बनारसी साडी पहनकर मां की नजरों से गुजर जाए तो- प्रीतम के वाइफ को एकदम श्रीदेवी जैसा साडी पहने का लूर( समझ ) है. मां अब भी छोटी बच्ची की आंख में काजल लगाने की सलाह देती है तो साथ जोड़ देती है- बउआ के आंख एकदम श्रीदेवी वाला है, बस अक्किल-बुद्धि सुस्मिता सेन वाला दीहो दीनानाथ.

मुहावरे में बेपनाह जीती रहीं श्रीदेवी अब हमारे बीच नहीं रहीं लेकिन उनके काम के बीच से निकले मुहावरे हिन्दुस्तान के घरों में जिंदा रहें..

विनीत कुमार

image

के फ़ेसबुक पेज https://www.facebook.com/vineetdu से साभार.

संस्मरण 1872849241941445115

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

emo-but-icon

मुख्यपृष्ठ item

रचनाकार में छपें. लाखों पाठकों तक पहुँचें, तुरंत!

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं.

   प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 14,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही रचनाकार से जुड़ें.

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है. किसी भी फ़ॉन्ट में रचनाएं इस पते पर ईमेल करें :

rachanakar@gmail.com
कॉपीराइट@लेखकाधीन. सर्वाधिकार सुरक्षित. बिना अनुमति किसी भी सामग्री का अन्यत्र किसी भी रूप में उपयोग व पुनर्प्रकाशन वर्जित है.
उद्धरण स्वरूप संक्षेप या शुरूआती पैरा देकर मूल रचनाकार में प्रकाशित रचना का साभार लिंक दिया जा सकता है.

इस साइट का उपयोग कर आप इस साइट की गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं.

नाका में प्रकाशनार्थ रचनाएँ भेजने संबंधी अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

आवश्यक सूचना : कृपया ध्यान दें -

कविता / ग़ज़ल स्तम्भ के लिए, कृपया न्यूनतम 10 रचनाएँ एक साथ भेजें, छिट-पुट एकल कविताएँ कृपया न भेजें, बल्कि उन्हें एकत्र कर व संकलित कर भेजें. एकल व छिट-पुट कविताओं को अलग से प्रकाशित किया जाना संभव नहीं हो पाता है. अतः उन्हें समय समय पर संकलित कर प्रकाशित किया जाएगा. आपके सहयोग के लिए धन्यवाद.

*******


कुछ और दिलचस्प रचनाएँ

फ़ेसबुक में पसंद करें

---प्रायोजक---

---***---

ब्लॉग आर्काइव