370010869858007
नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका संपर्क : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी यहाँ [लिंक] देखें.

****

Loading...

लघुकथा // आदर // डॉ. एस के पाण्डेय

आशीष नाइक की जलरंग कलाकृति

आदर
बाबूजी के घर शर्माजी पहली बार दवा करने आए हुए थे । बाबू जी के बच्चों ने श्यामू ग्वाला को आवाज लगाई- बाबा ! ओ बाबा ! आओ दवा ले लो ।

  श्यामू लाठी के सहारे आया और उसके आने पर बच्चों ने चारपाई की ओर इशारा करके कहा बैठिये बाबा । श्यामू बैठ गया और शर्माजी ने आकर श्यामू से प्रणाम किया । श्यामू बोला कि मैं ग्वाला हूँ । आप मुझसे प्रणाम न करें । ‘मैं ग्वाला हूँ’ इतना सुनते ही शर्मा जी हतप्रभ सा हो गए ।

  शर्माजी दवा देकर तो चले गए । लेकिन उनके समझ में यह नहीं आया कि बाबू जी के  बच्चे एक ग्वाले का इतना आदर क्यों कर रहे हैं ?

-डॉ. एस के पाण्डेय,
समशापुर, उ. प्र. ।
ब्लॉग- https://hindirachanavali.blogspot.in/
http://www.sriramprabhukripa.blogspot.com/
______________________________

लघुकथा 7823602805272452253

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

emo-but-icon

मुख्यपृष्ठ item

कुछ और दिलचस्प रचनाएँ

फ़ेसबुक में पसंद करें

---प्रायोजक---

---***---

ब्लॉग आर्काइव