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होली के रंग में रंगी काव्य गोष्ठी

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भोपाल। निर्भया साहित्य संस्था की पांचवी काव्य गोष्ठी व्यायाम शाला बरखेड़ा पठानी में आयोजित की गई। गोष्ठी में कविता, गजल लिखने के शौकीन नवोदित रचनाकारों को मार्गदर्शन भी प्रदान किया गया। काव्य गोष्ठी होली के रंग में रंगी नजर आई। कवियों ने फागुन और होली-रंगपंचमी पर केन्द्रित रचनाएं पढ़ीं और सभी को होली की शुभकामनाएं देते हुए तालियां बटोरीं।

निर्भया साहित्य संस्था की ओर से कवयित्री प्रमिला झरबड़े ’मीता’ ने बताया कि काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता कवि चरणजीत कुकरेजा ने की और मुख्य अतिथि के रूप में कवि तेज सिंह ठाकुर उपस्थित रहे। काव्य गोष्ठी का संचालन कवि अशोक व्यग्र ने किया और अंत में कमलेश वर्मा ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। काव्य गोष्ठी में साहित्य जगत के महत्वपूर्ण काव्य रत्नों ने कविता पाठ किया। किसी ने जीवन की विडंबनाओं को रोचकता से शब्दों में पिरोया तो किसी ने वर्तमान राजनीतिक परिवेश, बदलते मानव स्वभाव और जीवन के उतार-चढ़ाव पर शब्दों के माध्यम से अपनी बात रखी।

काव्यगोष्ठी में होली की कविताएं छाई रहीं। कवियों ने अपनी कल्पना और भावों से शब्दों की ऐसी फुहार मन-मस्तिष्क में डाली, जिसकी सभी ने सराहना की। काव्य गोष्ठी में नवोदित रचनाकारों को भी काव्यपाठ के लिए प्रोत्साहित किया गया और उन्हें काव्य लेखन में रखी जाने वाली सावधानियां एवं प्रस्तुति के बारे में वरिष्ठ एवं अनुभवी कवियों ने बताया। काव्य गोष्ठी के माध्यम से कवियों ने सभी को होली की शुभकामनाएं दीं और होली का त्यौहार आपसी प्रेम और भाईचारे से मिलजुलकर मनाने की अपील की। कवियों ने बताया कि होली का त्यौहार सभी भेदभाव भुलाकर एकजुटता के साथ खुशी मनाने का पर्व है, हमें इसके परंपरागत स्वरूप को बनाये रखना है।

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