व्यंग्य // ईट इंडिया प्रोग्राम // यशवंत कोठारी

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मित्रों ,इन दिनों मैं ईट इंडिया प्रोग्राम में व्यस्त हूँ. चाय-पकौड़ों से निपटा तो भटूरे-छोले आ गये.इनसे निपटा तो काजू बादाम की प्लेट आ गई. जो लोग डिजिटल इंडिया ,मेक इन इंडिया.कैश लेस इंडिया,क्लीन इंडिया स्टार्ट अप इंडिया स्किल इंडिया,स्मार्ट इंडिया,बुलेट इंडिया के गीत गा रहे हैं उनसे निवेदन है मेरे ईट इंडिया प्रोग्राम में शामिल हो.असली मज़ा यहीं है .बिहार में सात दिन में आठ लाख से ज्यादा शौचालय बन गए.ये है ईट इंडिया के मज़े.थोड़े दिनों के बाद शौचालय घोटाले के समाचारों के लिए तैयार रहिये. ईट इंडिया कार्यक्रम में सबका स्वागत है,बहनों और भाइयों फिर न कहना खबर न हुईं.

गरीबों के लिए ईट इंडिया प्रोग्राम के लिए कोई जगह नहीं है.ये आनंद केवल अमीरों,नौकर शाहों, नेताओं, उद्ध्योग पतियों के लिए है. बैंकों से माल लो विदेश भाग जाओ.आई .पी ल कराओ मॉल जिमो और ईट इंडिया में अपनी जिम्मेदारी निभाओ. इंडिया को आप भी खाओ और मुझे भी खाने दो.जो नहीं खाने की बात करते थे उनके दल में सबसे ज्यादा माल जमा हुआ,और मित्रों यह तो सफ़ेद लक्ष्मी है काली लक्ष्मी के बारे में सोचो. आखिर हर चुनाव के बाद बाज़ार में इतना पैसा आता कहाँ से है? ईट इंडिया के कारण ही हर एम् अल ए एम् पी हर चुनाव में करोड़ों खर्च कर रहा है,फिर वसूल कर रहा है. ईट इंडिया प्रोग्राम जिन्दाबाद.

इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए हमने क्या नहीं किया? हमने साधु को मुख्यमंत्री बना दिया , बाबा को व्यापारी बना दिया, व्यापारी को लोन ले कर विदेश भागने की सुविधा दे दी. कुछ अपनों को केबिनेट के बाहर केबिनेट दे दी ,कुछ को राज्य मंत्री का दर्जा दे दिया.जो बचे उनको इस योजना में निगमों बोर्डों में बैठा दिया.हमने नए सचिव बना दिये जो निर्धारित पात्रता नहीं रखते.हमने नोट बंदी कर दी .हमने देश के गरीबों के खाते बेंक में खुलवा दिए.हमने इन खातों से लाभ ले लिया.चार कदम सूरज की ओर जाने के लिए हमने शाइनिंग इंडिया का नारा दिया.हम विदेश गए.जो किया जा सकता है वो सब किया जा रहा है. फिर भी जनता नहीं समझती हैं .हमने बलात्कार से पीड़ित के बाप को मरवा दिया.विधायक को खुला छोड़ दिया.नियम से जितने मंत्री बन सकते थे उनसे दोगुना को मंत्री पद के लाभ दे दिए.और क्या करे ? बोल बाबा और क्या करे? हमने दलितों अल्प संख्यकों को दूसरे दर्जे का नागरिक बना दिया .देख तमाशा ज़माने का .अत्याचार अब बंद हो गए हैं सब ईट इंडिया में व्यस्त हैं.बेरोजगारों को हमने भीड़ का काम दे दिया है,जहाँ भी भीड़ चाहिए इनको काम दे देते हैं.

विपक्ष देश के विकास में रोड़े अटकाता है ,काम नहीं करने देता मगर सरकार सभी रोड़ों को किनारे कर के विकास के मार्ग पर तेज़ी से बढ़ती जा रही है . ईट इंडिया प्रोग्राम जा री है.सब का साथ सबका विकास जारी है.

संतों, असंतों घोंगा बसंत मत बनो ,इस प्रोग्राम का महत्व समझो. ये सब योजनायें आप के लिए लायें हैं.

शोर शराबे से गुमराह मत होइए. यह सब तो लोक तंत्र में चलता रहता है. और हमारा प्रोग्राम भी चलता रहता है,चलता रहेगा.काले झंडों से कुछ नहीं होता.

हमारे पास आंकड़ों का ऐसा माया जाल है की हम हत्या को आत्महत्या और बलात्कार को विदेशी हरकत बता सकते हैं. आप लोग समझते क्यों नहीं?

गरीबी हटाने का यह सबसे अचूक और आसान इलाज है. देश को प्लेट समझ लो,बस सब ठीक हो जायगा. हमने हर योजना में पूरा ध्यान रखा है.बाबा ने साफ कह दिया निचले स्तर पर रिश्वत की रेट बढ़ गयी है.इस प्रोग्राम में भी यह नियम लागू है .

साहित्य कला संस्कृति में भी हमने ईट इंडिया प्रोग्राम शुरू कर दिया है.वेतन भत्तों के बाद जो बचेगा उसे ईट इंडिया प्रोगाम में शामिल कर दिया जायगा,वैसे कुछ बचेगा इसमें पूरा संशय है.इस क्रम में हमने पुरस्कारों की मेरा थन दोड़ शुरू कर दी है जो ज्यादा तेज दौडेगा उसे सम्मानित किया जायगा.

ईट इंडिया कार्य क्रम में आप सबका स्वागत है.आईये हुजूर .

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यशवंत कोठारी ,८६,लक्ष्मी नगर ब्रह्मपुरी बाहर जयपुर-३०२००२

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