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व्यंग्य // स्टार्ट अप और पुश अप // यशवंत कोठारी

स्टार्ट अप और पुश अप

यशवंत कोठारी

अब अकादमी पुरस्कार उसे मिलेगा जो पुश अप का वीडिओ लगाएगा। जो ज्यादा पुश अप करेगा उसे पद्म सम्मान भी दिया जा सकेगा,या फिर राज्य सभा में भेजा जा सकेगा,सो कवियों पुश अप व् स्टार्ट अप पर ध्यान दो। सरकार स्टार्ट अप के लिए लोन, अनुदान मदद व स्किल विकास से मदद कर रहीं है सोचता हूँ मैं भी एक स्टार्ट अप डाल दूँ।

एक कवि से बात हुईं,पूछने लगे –स्टार्ट अप कहते किसे है? मैंने बताया जिस तरह आप कविता शुरू करते हैं वैसे ही किसी बड़े का म को राष्ट्रीय स्तर पर शुरू करने के लिए सरकार ने स्टार्ट अप योजना शुरू की है। सरकार योजना के किये आवश्यक कौशल, लोन, मदद व इन्फ्रा स्ट्रक्चर भी दे रहीं है, यह सुविधा भी है की आप लोन लेकर दूसरे देश भाग जाओ और वहां पर नए सिरे से स्टार्ट अप डाल दो। कई भारतीय विदेशों से ही स्टार्ट अप चला रहे हैं और कई लोन लेकर चले गए हैं। इधर सरकार पुश अप के वीडिओ जारी कर रही है, ये वीडिओ कहते है हम फिट तो सरकार हिट, हम फिट तो साहित्य हिट। अच्छी कविता लिखने से कुछ नहीं होता, दंड बैठक लगाओ ।

स्टार्ट अप में कहानी का स्टार्ट अप का अलग सेल होगा,कविता का अलग व्यंग्य के लिए तो एक कियोस्क ही काफी होगा। जो लोग कविता, कहानी, व्यंग्य, का डेंटिंग पेंटिंग करना चाहते हैं, उनका इस स्टार्ट अप में स्वागत है । आलोचना के लिए भी एक स्टार्ट अप डाला जायगा, जिसमें लेखकों को आलोचना की जानकारी दी जायगी। जो लोग वातानुकूलित कक्ष में दस पुश अप लगाकर वीडिओ जारी करेंगे, उनको साहित्य के स्टार्ट अप के लिए बिना जमानत के लोन दिया जायगा। उनके बैंक खाते में जल्दी ही पन्द्रह लाख रूपये अगले चुनाव से पहले डाल दिए जायेंगे।

स्टार्ट अप चलाने वाले हर समय हर जगह मिल जाते हैं। ये लोग गंगा नगर में भी है,कोटा मे भी,बनारस में भी,मुंबई में भी,भोपाल में भी,जयपुर में भी। कहाँ नहीं है स्टार्ट अप चलने वाले?

विदेशों तक में शाखाएं खोल दी है। कनाडा, मकाओ में, सिंगापुर, मलेसिया श्रीलंका नेपाल तक में साहित्य के स्टार्ट अप खुल गए हैं। ये स्टार्ट अप साहित्य के अलावा सब काम करते हैं। घुमाना फिरना, विमोचन करना-कराना विवादास्पद बयान देना- दिलवाना। अपने आकाओं या फंडिंग एजेंसीज के हिडन एजेंडा को लागू करना और अपना उल्लू सीधा करना, इन स्टार्ट अप से व इनके चित्रों से सोशल मीडिया भरा पड़ा है। यदि आपने आलोचना कर दी तो तुरंत कहेंगे –अंगूर खट्टे हैं। अपने पैसे से अपना स्टार्ट अप खोलो। खाओ खाने दो। ये धंधा हिंदी में भी खूब फल फूल रहा हैं। हिंदी सम्मेलनों के नामपर, विश्व हिंदी , अंतर्राष्ट्रीय हिंदी, वर्ल्ड हिंदी, जैसी कई दुकानें चल रही हैं कुछ ने तो सरकार के साथ टाई अप कर लिया।

कल ऐसे ही एक सज्जन का फोन आया-भाई साहब इतने सालो से लिख रहे हो,कुछ मिला क्या ?मैंने कहा –अभी तक तो कुछ नहीं मिला ?

वे तुरंत बोल पड़े –मास्को चलो आपका सम्मान व् लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड दिला देंगे, बस हमारे स्टार्ट अप के शायर ले लो। कल दो लाख में आप मास्को घूम लेंगे, किताब का लोकार्पण हो जायगा और आपको विश्व स्तरीय साहित्यकार बना देंगे। मैंने विश्व स्तरीय साहित्यकार बनने से मना कर दिया। सच पूछो तो ये स्टार्ट अप वाले हर गली मोहल्ले में बिखरे पड़े हैं, गणिकाओं की तरह लेखकों पर डोरे डालते हैं, उन्हें फंसातें हैं, उनकी जेब पर डाका डालते हैं साहित्य के पर्यटन के नाम पर हफ्ता वसूली। कथा सम्मान कविता सम्मान, व्यंग्य सम्मान, सब मिलेगा हमारी छतरी के नीचे आजा जानी । प्रकाशकों ने भी बहती गंगा में हाथ धो लिए, अफसरों ने लेखकों की लिस्ट और पांडुलिपियाँ दे दी, इनको छापो, खरीद लिए जाओगे, प्रकाशक तो बिकने को आतुर खडा था, मित्रों।

एक अन्य सज्जन का मेल आया। विश्व हिंदी सम्मेलन में हम अपनी टीम लेकर जा रहे हैं। आपका स्वागत है, कुल खर्चा देय, शामिल है पास पोर्ट, वीसा,घुमा फिरना, पत्रिका स्मारिका,लोकार्पण, महिला मित्र आदि । मैंने कहा सरकार भेजेगी तो चले जायेंगे। उनका जवाब था सरकार के भरोसे बैठे बैठे तो बुड्ढे हो गये हो। वहां पर सामान्य सरकारी डेलीगेशन में या आमंत्रित सूची में शामिल होने में ही हजारों लग जायेंगे,हम मामूली रकम में चलेंगे। देखो तुम से आधी उम्र के लोग अपने पैसे से अंतर राष्ट्रीय सम्मेलनों में सम्मानित होकर लौट आये,फिर अपने नगर में भी माला पहन ली। अब चंदे की तैयारी में लगे है। तुम लिखते रहो कजोडा कौन पूछता है?

वास्तव में हालत यही है यारों। भाइयों और बहनों सब स्टार्ट अप बना ओ। देश विदेश में सम्मान पो। यह सब पैसा क्या साथ ले जाओगे?खाना पहना खर्चा सो अपना। जल्दी करो फिर न कहना । सभी प्रकार के स्टार्ट अप के दरवाजे खुले हैं पहले आओ पहले पाओ। कविता के लिए कन्सेशन भी है,कवयित्री है तो निशुल्क प्रवेश का वादा। व्यंग्य के मठाधीश इस जलजले से दूर रहे। ये पुश अप का मामला है कहीं बुढ़ापे में कोई हड्डी चटक गयीं तो बिस्तर पर ही राम नाम सत्य हो जायगा। चलता हूँ कमरा ठंडा हो गया है पुश अप का वीडिओ डालना है।

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यशवंत कोठारी,

८६,लक्ष्मी नगर ब्रह्मपुरी बाहर

जयपुर-३०२००२

व्यंग्य 5970546926758665167

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