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व्यंग्य // अबलापन और 'हाई टेक' बाबा // डॉ अनिता यादव

‘जब पूरी दुनिया हाई तकनीक की हाई स्पीड पर सवार है तो मैंने किसी की भैंस खोली है जो मैं पीछे रहूँ!’ ये कुलीन ‘बोल’ गाँव के उस मुंशीजी के हैं जो हाल फिलहाल में ‘हाई टेक बाबा’ कहलाने लगे हैं। आधुनिक टेक्नॉलॉजी ने उनकी इस ‘बाबागिरी’ को गाँव तक ‘हिरण कुलांच गति’ सा खूब ग्लोरीफ़ाई किया है । बाबाओं के चर्चे ‘प्यार’ के ही नहीं ‘काम’ के भी हो सकते हैं -बाबा आजकल यही सिद्ध करने में मशरूफ़ हैं।

आज सुबह भेंटते ही प्रेमचंद के दो बैलों की तरह हम दोनों सींग फंसा बैठे। कारण? मेरा ज्ञानपिपासु ‘मन’ तो कतई नहीं था बल्कि ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के बच्चन की आत्मा मुझ में प्रवेश कर गई थी। उन्हें देखते ही मैंने आव देखा न ताव और सवाली गोला दाग दिया- ‘बाबा! क्या आप वाकई चौबीस घंटे में हर समस्या का समाधान निकाल देते हैं जैसा कि आपने फेसबुक पेज पर दावा किया हैं?’ गोला पड़ते ही बाबा की धोती से बिना आग धुआँ उठने लगा।

’जी बच्चा! आपको कोई समस्या हैं? है तो रात डेरे पर आइये फिर देखिये हम क्या क्या निकाल सकते हैं?’

इतना सुनते ही मेरी आंखें बाहर निकलने की सीमा तक खुल गई और बाबा की बंद हो गई। एक बेहद अश्लील गाली देने का मन किया पर संस्कार की बेड़ियों ने आकर मुझे जकड़ लिया।

चूंकि अगला बम फोड़ने के लिए खुद को संयत भी करना था-

‘फिर तो आपको सरकार में होना चाहिए! देखिये न! वह रात दिन विपक्ष के चौतरफा आरोपों सहित विभिन्न समस्याओं से घिरी रहती हैं। समाधान की कोशिशें करती हैं पर विपक्ष सम्मुख सब औंधे मुंह!”

सुनते ही बाबा की आंखें सुरमई से सुर्ख हो उठी और मेरे अंदर ‘भय’ स्थायी भाव को जागृत करने में लग गई ।

फिर अचानक उवाच पड़े -

‘बच्चा! पहले मैं यूपी सरकार में ही था। फिर मुझसे भी ज्यादा प्रतापी बाबा का डेरा जमने पर मुझे अपना उखाड़ना पड़ा। क्या हैं न कि एक म्यान में दो तलवार भी रह जाये, पर एक डेरे में दो धूनी नहीं रम सकती’!

मेरे झोले से फुफकारते भुजंग सरीखे सवाल फन उठाते रहे। वे किसी भी हालत में मानने को तैयार नहीं थे -

‘आप केवल औरतों की समस्याओं का समाधान ही क्यों करते हैं? जबकि पुरुष बेचारा कितनी सर्पिल समस्याओं से ग्रस्त हैं’।

सवाल सुनकर बाबा की घंटी बजती सुनाई दी। उनकी सिकुड़ता नाक संकेत कर रही थी कि वे 'सवाल' जैसी बेतुकी बातों में विश्वास नहीं करते फिर भी वे उवाचे-

’देखो, बच्चा! स्त्री अबला हैं । हमें चाहिए कि उसके अबलापन को सबलापन से ढक दें। रही बात पुरुष की तो वह खुद समस्याओं का नियोजक हैं। उसके दुख सुख केवल पत्नी नामक जीव में केंद्रस्थ हैं। जिसे वह लद्धड़ आदमी समझने की कोशिश नहीं करता'! कहते हुये बाबा ने थोड़ी मुस्कान उस मुखड़े पर लपेटने की असफल कोशिश की जिसका आधा रंग उड़ चुका था।

‘तो क्या माँ बनाकर स्त्री का अबलापन दूर करेंगे आप?’ ये कहते हुये अंतस में कुछ खटका हुआ था मुझे फिर भी रिस्क लिया।

‘बच्चा! तेरे भारत-महान में आधी अबला तो वह बिन औलाद ही हैं! तुम्हारा समाज उसे बंजर भूमि से भी गया गुजारा समझता हैं। मैं उस 'बंजर' को कुछ खादपानी दे उगले उगले हीरे मोती देने की कोशिश करता हूँ तो केवल तुम सी पढ़ी लिखी ही खफा हो सकती हैं!’ ये कहते हुये बाबा तन गए थे मानो भगवान और पति परमेश्वर दोनों की शक्तियाँ उनमें उतर आई हो।

कोई ग्रामीण बाला होती तो उनके इस रूप से आह्लादित हो चरणों में लोटपोट हो चुकी होती। पर मैं थी कि उनका जैसे दोहन करने पे तुली थी-

‘ऑनलाइन बुकिंग, ऑनलाइन पेमेंट मोड आदि सुविधाएं भी उपलब्ध हैं’ मेरा उवाच अभी पूर्णता को प्राप्त भी न हुआ था कि बाबा का चेहरा तमतमा उठा जैसे उनके ‘कच्चे फोड़े’ को कुरेद दिया हो।

‘आप की छाती पर गेहुअंन [साँप] क्यों लौट रहा हैं मोहतरमा! हम हाई स्पीड से हाई टैक सुविधा देकर नए जमाने के हिसाब से चल रहे हैं’!

बच्चा से मोहतरमा पर उतर आए बाबा से अब कुछ कहना खतरे को न्यौता देना था और वह मैं दे चुकी थी। अब भागने में ही मेरी भलाई थी।

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संक्षिप्त परिचय

डॉ अनिता यादव

दिल्ली यूनिवर्सिटी

सम्पादन कार्य- आधा दर्जन से अधिक पुस्तकों का सम्पादन।

हास्य व्यंग्य प्रकाशित- नई दुनिया ,अट्टहास मासिक पत्रिका, विभोम स्वर अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका (USA से प्रकाशित), सरस्वती सुमन मासिक पत्रिका(देहरादून), रचनाकार.कॉम, प्रतिलिपि.कॉम, हरिभूमि ई-पेपर, कालवाड़ टाइम्स (जयपुर), समज्ञा दैनिक पत्र, आदि।

लेख प्रकाशित- जनसत्ता दैनिक पत्र, नव भारत टाइम्स दैनिक पत्र, स्वराज खबर पत्र, आदि।

कहानी प्रकाशित- आधुनिक साहित्य पत्रिका, युद्धरत आम आदमी पत्रिका, सहचर ई-पत्रिका।

जनकृति ई-पत्रिका में यात्रा संस्मरण और फिल्म समीक्षा प्रकाशित।

रचनाकार डॉट ऑर्ग द्वारा संस्मरण प्रतियोगिता में 'विशिष्ट प्रविष्टि' पुरस्कार।

विभिन्न राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों में परिपत्र प्रस्तुति

विभिन्न पुस्तकों में अध्याय लेखन

वर्तमान में 12 वर्षों के अनुभव सहित दिल्ली विश्वविद्यालय के गार्गी महाविद्यालय में सहायक प्रोफेसर के पद [स्थायी] पर कार्यरत।


E-mail: dr.anitayadav@yahoo.com.

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