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सुनहरा भविष्य (लघुकथा) सुशील शर्मा

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*सारी मेहनत पर पानी फेर दिया कितना समझाया था अच्छे से पढ़ो दोस्तों में नाक नीची करवा दी नालायक ने*

अशोक गुस्से में नीता को डांटे जा रहा था।

नीता जार जार रो रही थी *पापा मैंने कितनी मेहनत की दिन रात पढ़ी लेकिन फिर भी मेरिट में नहीं आ पाई मैं क्या करूँ*

*क्या खाक पढ़ाई की पढ़ती तो मेरिट में नहीं आ जाती।*

अशोक ने गुस्से में कहा।

*उसके 90 प्रतिशत बने है ये क्या कम है?* अशोक के पिता जी ने अशोक पर आंखें तरेरी।

*आजकल 90 प्रतिशत के कोई मायने नहीं* अशोक ने अपने पिता की बात काटते हुए कहा।

*अशोक तुम्हारे मैट्रिक में कितने प्रतिशत थे बेटा* अशोक के पिता ने मुस्कुराते हुए पूछा।

*40 प्रतिशत वो तो मैं बीमार हो गया था ।* अशोक ने झेंपते हुए कहा।

*खुद के 40 प्रतिशत में मैंने तुम्हें साइकिल ला कर दी थी और कभी भी तुम्हें नहीं डांटा कि तुमने उस समय मेरे दोस्तों में मेरी कितनी बेइज़्ज़ती की थी कभी शिकायत की तुमसे*

*उस 40 प्रतिशत के बाद भी तुम आज एक प्रतिष्ठित नौकरी पर हो*

*90 प्रतिशत आने के बाद भी तुम बेटी से उम्मीद करते हो कि वो मेरिट में आये क्या ये प्रतिशत सुरक्षित भविष्य की गारंटी है* अशोक के पिता जी ने अशोक को लगभग निरुत्तर कर दिया।

*नीता ने जी भर कर कोशिश की उसके 90 प्रतिशत कड़ी मेहनत का प्रतिफल है जो हमेशा उसके काम आएगा*

दादाजी ने नीता के आंसू पोंछते हुए कहा।

*बेटा नीता मुझे तुम पर गर्व है सिर्फ मेरिट में आना सुरक्षित भविष्य की गारंटी नहीं है बल्कि कड़ी मेहनत सुरक्षित भविष्य को साकार करता है तुम्हारा सुनहरा भविष्य तुम्हें पुकार रहा है।*

अशोक दादाजी और नीता तीनों मुस्कुरा रहे थे।

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