व्यंग्य // कुत्ता- पुराण डॉ. // सुरेन्द्र वर्मा

SHARE:

कथा है कि युधिष्ठिर अपने प्रिय कुत्ते को लेकर स्वर्ग के द्वार खड़े थे। देवराज इंद्र ने कहा कुत्ता रखने वालों को स्वर्ग में स्थान नहीं है। इस ...

कथा है कि युधिष्ठिर अपने प्रिय कुत्ते को लेकर स्वर्ग के द्वार खड़े थे। देवराज इंद्र ने कहा कुत्ता रखने वालों को स्वर्ग में स्थान नहीं है। इस कुत्ते को छोड़कर आप मेरे साथ चलें। युधिष्ठिर बोले भक्त का त्याग करने से जो पाप होता है उसका कभी अंत नहीं हो सकता। मैं अपने कुत्ते का त्याग नहीं कर सकता। कहने का तात्पर्य यह है कि कुत्ते की मनुष्य के प्रति भक्ति महाभारत काल से ही जानी मानी गई है। लेकिन क्या कुत्ता सचमुच इतना ही वफादार है ?

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि भेडिया, लोमड़ी और गीदड़ की जाति का पशु है यह कुत्ता; कुत्ते की बेवफाई देखिए उसने अपनी जाति के साथ रहना छोड़ दिया है और आदमियों के साथ रहने लगा है. इंसान को भी कुत्तों के साथ रहना बड़ा रास आ गया है. उसके गुणों से प्रभावित होकर कुत्ते को पालतू बना लिया गया है. सिर्फ इतना ही नहीं, आदमी ने उसकी अनेक विशेषताओं को अपना भी लिया है और ये विशेषताएं इंसान की मानों अपनी ही दोयम प्रकृति बन गई हैं. लार टपकाना, पूंछ हिलाना, भौंकना आदि, जैसे कुकुर-गुण अब मानवी गुण हो गए हैं. ये गुण आदमी के चरित्र और उसकी संस्कृति की विशेषताएं गिनी जाने लगी हैं.

मानव समाज में कुत्ते का सामाजिक, साहित्यिक, भाषिक तथा राजनैतिक योगदान से कोई इनकार नहीं कर सकता। हाल ही में कुत्ते की उपस्थिति राजनैतिक क्षेत्र में काफी सुर्ख़ियों में रही है। भारत में जब भी चुनाव नज़दीक होते हैं “तू तू मैं मैं” शुरू हो जाती है। विरोधी दल एक दूसरे को ‘कुत्ता-राजनीति’ में घसीटने लगते है। और तो और भारत के प्रधान-मंत्री तक ने यह कहते हुए कोई गुरेज़ नहीं किया कि विरोधी दलों को, जिनमे राष्ट्र प्रेम की बेहद कमी दिखाई देती है, थोड़ी बहुत देश भक्ति कर्नाटक में पाए जाने वाले मुधुल हाउंड कुत्ते से सीख लेना चाहिए जो (अपनी देश भक्ति के कारण?) भारतीय सेना में भरती किया जाता है।

कुत्ते सिर्फ सेना में ही अपना योगदान नहीं दे रहे हैं बल्कि (अपराध) सूंघने की अपनी शक्ति के कारण उन्होंने पुलिस के महकमे में भी अपनी जगह बनाई है। मुख्यत: परिवार की सुरक्षा के लिए तो उन्हें आम आदमी भी पालता है। अफसरों में तो कुत्ते पालने का रिवाज़ शायद कुछ अधिक ही है। वे स्वयं को हर समय असुरक्षित जो महसूस करते हैं। उनके बंगलों में कुत्ते से सावधान रहने की हिदायत लिखी रहती है। शरीफ लोग तो ऐसे “कुत्ता-घरों” में घुसना ही पसंद नहीं करते। आप उनके कुत्ते को कुत्ता बोल दें तो साहब लोग भौंकने लगते हैं। एक बार ऐसा ही हुआ। मैं साहब के यहाँ गया तो कुत्ता भौंकने लगा। मैंने कहा, कुत्ता एक तरफ कर लें साहेब ! साहेब भौंकने लगे। बोले आप क्यों नही एक तरफ हो जाते ? और इसका नाम ‘कुत्ता’ नहीं है; यह ‘डौगी’ है, “डौगी”।

कुत्तों ने साहित्यकारों को भी खूब प्रेरणा दी है। हरिशंकर परसाई ने एक व्यंग्य आलेख “ एक मध्यम वर्गीय कुत्ता” लिखकर कुत्ते पर लिखने के लिए व्यंग्यकारों के लिए ज़मीन तैयार कर दी, वहीं सआदत हसन मंटो ने “टेटवाल का कुत्ता” कहानी लिखकर कुत्तों को चकित कर दिया। भाषा में तो कुत्ता बहुत पहले से ही घुसा हुआ है। हम भाषा में कुत्ते का इस्तेमाल गाली देने के लिए करते हैं; मज़ाक उड़ाने के लिए करते हैं। कुत्ते को “अपनी गली का शेर” बताते हैं। कुत्ते की तरह जीवित रहना गवारा है लेकिन हमारी भाषा को “कुत्ते की मौत मरना” गवारा नहीं है। कुत्ता भौंकता ज़रूर है लेकिन वह उल्टी-सीधी बातें नहीं करता। लेकिन हमारी भाषा में जो उलटी सीधी बात करता है, उसे “कुत्ते का काटा” हुआ बताने में देर नहीं करते। कोई सच्चा आदमी अपनी ‘सीधी’ बात पर यदि अड़ ही जाए तो, मज़ा देखिए, उसे “कुत्ते की पूंछ” कह दिया जाता है जो कभी ‘सीधी’ नहीं होती। कुछ लोग व्यर्थ ही कभी कभी किसी निरर्थक वस्तु के लिए आतुर हो जाते हैं। यह बेशक मनुष्य की हूक हो सकती है (इक हूक सी दिल में उठती है !) लेकिन भाषा की ज्यादती देखिए, वह इसे “कुत्ते की हूक” बताती है। बात न हुई कुत्ता हो गई, उसे ज़बर्दस्त्ती आगे बढ़ाना भाषा में “कुत्ता घसीटना” हो गया।

आदमी कुत्ते को एक वफादार पालतू जानवर के रूप में देखता है और उसे अपना एक भरोसेमंद साथी मानता है. कारण स्पष्ट है. कुत्ते ने आदमी से कभी बेवफाई नहीं की, बल्कि जब भी काम पडा उसने इंसान का साथ दिया। भले ही कुत्ता, जानवरों - जैसे भेडिया, लोमड़ी. गीदड़ आदि ,का - जो पशु होने और उसकी अपनी प्रजाति के होने के कारण जैविक रूप से उसके अधिक नज़दीक हैं, का साथ न दे पाया हो लेकिन जानवरों के शिकार के लिए आदमी कुत्तों को ही साथ ले जाता है. इंसान की बस्ती में गृह-मृग और ग्राम-सिंह की तरह उसने अपनी पहचान बनाई है.

पर दूसरी तरफ, आदमी को देखिए. उसने कुत्ते को हमेशा हिकारत की नज़र से ही देखा। उसका सोचना है कि जो अपनों का नहीं हो सका ,वह दूसरों का भला क्या होगा? आदमी को जब भी किसी की फजीहत करना होती है, वह उसे “कुत्ता” कहने से बाज़ नहीं आता. कुत्ता आदमी के लिए हमेशा गाली ही रहा. उसका सर-नेम कभी नहीं बन पाया. आपको इंसानों में ‘सिंह’, ‘भेंडिया’, ‘लैम्ब’ जैसे कुल-नाम मिल जाएंगे लेकिन ‘कुत्ता’ सर-नेम कहीं नहीं मिलेगा. नाम में भला क्या रखा है? भले ही आदमी का कुल-नाम कुत्ता न भी हो कुत्ता-कुल की हरकतों से उसे वंचित नहीं किया जा सकता.

क्योंकि आदमी कुत्ता पालता है इसलिए वह सुबह-सबेरे ‘मोर्निंग-वाक’ पर उसे भी ले जाता है. उस समय यह तय कर पाना बड़ा मुश्किल हो जाता है कि इनमें से कौन पालक है कौन पालतू. कुत्ते की ज़ंजीर बेशक आदमी के हाथ रहती है लेकिन बस, कहने भर को. वस्तुस्थिति यह है कि कुत्ते के इशारे पर ही आदमी की सैर निर्भर करती है. कुत्ता कहता है तो वह चलते चलते रुक जाता है, कुत्ता कहता है तो वह चलना दुबारा शुरू कर देता है. जब तक फारिग होकर कुत्ता इशारा नहीं कर देता मजाल कि आदमी आगे बढ सके.

कुत्ते ने आदमी पर अच्छा-खासा दबदबा कायम कर रखा है. वह आदमी पर इतना हावी हो गया है कि अपनी इंसानियत भूल कर आदमी के मन पर कुत्तई सवार हो गयी है. वह अपनी ही बिरादरी के लोगों का दुश्मन बन गया है. इंसान और इंसानियत को ख़त्म करने के उसने तरह तरह के हथियार आविष्कृत कर लिए हैं. वह अपने ही लोगों का खूँख्वार मांस-भक्षी और अस्थि-भोजी बन गया है. उसे सुधारने की, लगता है, अब कोई गुंजाइश ही नहीं रही है. उसकी पूंछ जो ज़ाहिरा तौर पर दिखाई नहीं देती, टेंडी की टेंडी ही है.

कुत्ते का काटा आदमी पानी नहीं मांगता. बल्कि पानी से डरने लगता है. उसका अपना पानी भी सूख जाता है. पागल कुत्ते की तरह अपनी टेंडी पूंछ को सीधी करके दौड़ने लगता है. अपनी इस संवेदनहीनता के चलते दौड़ते-दौड़ते गिर जाता है और कुत्ते की मौत मर जाता है. अपनी भयानक स्थिति के प्रति वह पूरी तरह बेखबर और लापरवाह हो जाता है. कितने ही कुत्ते अपनी ही बनाई इस जेल में सड़ जाते हैं, ता-उम्र सड़ते रहते हैं. कोई क्या कर सकता है.

फिर भी कुत्ते बड़े प्यारे होते हैं. खासतौर पर सजावटी कुत्ते. बड़े-बड़े बालों वाले छोटे-छोटे कुत्ते – सफ़ेद, काले या भूरे कुत्ते, इंसान की गोद में बड़े खूबसूरत लगते हैं. टीवी में ऐसे कुत्तों को शैम्पू कराते, नहलाते, दुलराते, चूमते देखता हूँ तो लगता है इन कुत्तों को पालने वाले इनके सामने टिक नहीं सकते.

कई वर्ष पहले अमेरिका में सेंट फ्रांसिस्को नाम के एक शहर में वहां के निवासियों ने ‘बॉस’ नामक एक कुत्ते को अपना मेयर चुन लिया था. उनका तर्क था कि कुत्ता राजनीति नहीं कर सकता है. वह आदमी की तरह फालतू के सरकारी झमेलों में भी नहीं पड़ता. आज भी जो लोग राजनीति में आते हैं, उन्हें राजनीति से कोई मतलब नहीं रहता. वे बस सरकारी कोश को लूटने के लिए ही आते हैं. और रईसों के कुत्तों की तरह ठाट से रहते हैं.

कुत्ता तो कुत्ता होता है. कहीं का भी हो. देशी हो विदेशी हो. पर भारत में विदेशी कुत्तों को कुछ ज्यादह ही तवज्जह दी जाती है. एक मर्तबा गांधीजी की समाधि पर विदेश से आए किन्हीं पर्यटकों को अपने कुत्ते के साथ परिक्रमा लगाने की इजाज़त मिल गई. देशी कुत्तों को यह कभी नसीब नहीं होती. कुछ लोगों का तो यहां तक कहना है कि भारत में देशी कुत्ता क्या देशी नेता तक कभी पसंद नहीं किया गया. वह विदेशी भले न हो, कम से कम ‘विदेशीवत’ तो होना ही चाहिए. विदेशी हो तो और भी अच्छा ! हर इम्पोर्टेड वस्तु के लिए हमारी कुत्ता-हूक (ललक) देखते ही बनती है.

बहरहाल, इंसान की तहजीब में कुत्ते ने अपनी एक अहम जगह बना ली है. कुत्ता सिर्फ कुत्ता नहीं रह गया है. बंदूक का घोड़ा भी कुत्ता है और किवाड़ का खटका भी कुत्ता ही है. कुत्ता गाली है, फजीहत है. विश्वसनीयता का माप है, नीचता का पैमाना है. साहित्य, राजनीति और धर्म में उसकी पैठ है. वह भैरव का वाहन है और राजगुरु युधिष्ठिर का नरक तक का साथी है।

.................................

-डा. सुरेन्द्र वर्मा

१०, एच आई जी / १, सर्कुलर रोड / इलाहाबाद -२११००१

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: व्यंग्य // कुत्ता- पुराण डॉ. // सुरेन्द्र वर्मा
व्यंग्य // कुत्ता- पुराण डॉ. // सुरेन्द्र वर्मा
https://lh3.googleusercontent.com/-9FDk5pcM4gs/WknbK0wnKKI/AAAAAAAA-FU/j-0J0xgsZkMitZClnyCvqCVxnFyTx9ItgCHMYCw/Surendra%2BVerma%2BPortrait_thumb%255B6%255D?imgmax=200
https://lh3.googleusercontent.com/-9FDk5pcM4gs/WknbK0wnKKI/AAAAAAAA-FU/j-0J0xgsZkMitZClnyCvqCVxnFyTx9ItgCHMYCw/s72-c/Surendra%2BVerma%2BPortrait_thumb%255B6%255D?imgmax=200
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2018/05/blog-post_60.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2018/05/blog-post_60.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content