370010869858007
Loading...

लघु कथा - गुस्सा - देवेन्द्र सोनी

लघु कथा - गुस्सा

    - देवेन्द्र सोनी


           अड़सठ वर्षीय रमानाथ को आज खुद पर बेहद गुस्सा आ रहा था । सुबह से ही वे बेचैनी का अनुभव कर रहे थे । आज उन्हें रह रह कर यह एहसास हो रहा था कि उनके क्रोधी स्वभाव ने उनका पूरा जीवन तहस - नहस कर दिया है ।
         जब तक सरकारी मुलाजिम रहे अपने क्रोधी स्वभाव से हुकूमत करते रहे पर घर में उनका यही स्वभाव उन्हें अपने बच्चों से दूर करता चला गया । वे दूसरे शहरों में रहने लगे और पत्नी ह्रदयाघात का शिकार होकर समय से पहले उन्हें अकेला छोड़ गईं। दोनों बेटों ने उन्हें अपने साथ रखना चाहा मगर उनकी जिद और गुस्से के चलते यह संभव न हो सका ।


         पिछले पांच साल से वे स्वयं के मकान में एकाकी जीवन बिता रहे हैं । पेंशन और मकान में रह रहे किरायेदार से जो रकम उन्हें हर महीने मिलती है वह जीवन यापन से कहीं अधिक ही होती है । देखने वालों को लगता है आराम से जिंदगी कट रही है रमानाथ की पर वे ही जानते हैं - एकाकीपन और बच्चों से विलगता का दर्द । रह रह कर उठती है उनके मन में यह टीस मगर गुस्से का उनका यह स्वभाव छूटता ही नही उनसे । बात बात पर यकायक तमतमा उठना अब तो उनकी फितरत में शुमार हो गया है।


        अपनी इस आदत से वे खुद भी हैरान परेशान रहते हैं । अक्सर सोचते हैं - ऐसे कैसे कटेगी यह एकाकी जिंदगी । उन्हें खुद को बदलना ही होगा । अपना क्रोधी स्वभाव छोड़ना ही होगा । जब तक वे अपने गुस्से पर काबू नहीं पाएंगे तब तक उन्हें अपनों का प्यार नसीब नहीं होगा ।


        कई दिनों से उनके मन में यही अंतर्द्वंद चल रहा था । अंततः सुबह से हो रही बेचैनी ने कमरे में चहल कदमी करते हुए मन ही मन उन्हें आत्म विश्वास और दृढ़ता से भर दिया । उन्होंने प्रण कर लिया - आज से वे अपने गुस्से पर काबू पाकर ही रहेंगे ।
        अपने इस निर्णय से वे मुस्कुरा उठे और चल दिए बच्चों के घर । अपने घर।


            - देवेन्द्र सोनी , इटारसी ।

लघुकथा 7688809462504434375

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

emo-but-icon

मुख्यपृष्ठ item

कुछ और दिलचस्प रचनाएँ

फ़ेसबुक में पसंद करें

---प्रायोजक---

---***---

ब्लॉग आर्काइव