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जीतेन्द्र वर्मा के तांका

तांका की महक

जीतेन्द्र वर्मा

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हों सब एक जुट
करें बहिष्कार
कुप्रथा दहेज़
न बिके दूल्हा
न लगे उसकी बोली

अब तो आओ
देखने मेरा हाल
आयी है मौत
कहने रुक जाओ
देख लूं तुम्हें ज़रा

अकेलापन
क्यों खलने लगा है
अब क्या करें
प्यार का जादू जो है
क्या चलने लगा है?

शब्दों से परे
उगती रहती है
मूक की भाषा
जिसने पढ़ लिया
समझो जान लिया


रह भी लेंगे
तुम्हारे बिन हम
तोड़ेंगे हम
गुरूर भी प्यार का
मरते दम तक


रिश्ता दर्द का
छूटता नहीं कभी
छूटा सजन
मिलता नही़ं कभी
न जाता दर्द कभी

देख न पाया
कभी अपने को मैं
तुम्हें जो देखा
छत के ऊपर से
बहुत ही छोटे‌ दिखे

घूम‌ रहा है
ख़तरा बेलगाम
हर जगह
हरेक  डरा हुआ
परेशान हैं सब

इन्द्रियां देखें
विचार लेते जन्म
आत्मा बोलती
सुनते कहां हम
कुटिलता है‌ जन्मे

परदा उठा
एक बच्चा रोता है
परदा गिरा
एक बूढ़ा है रोया
नाटक ज़िन्दगी का...



तैरता गीत
हवा में चढ़कर
मिलने चला
अपने प्रियतम
परदेस की ओर

बिखरा आंसू
टपका अंखियों से
जो शाने पर
दर्द कम करने
न समझा शाना


एक नज़र
काफ़ी है मेरे लिए
जगेगा प्यार
देख लो मुझे ज़रा
इधर एक बार

शाम है नम
पड़ रही  फुहार
चाँद है कहाँ
तारों की न बारात
आ जाओ इस बार

कहा तुमने
सिर्फ़ एक जुमला
हो गया प्यार
भीग गया तन मन
अचानक क्यों  बरसा

यादों के मेघ
घिर घिर आये हैं
हर तरफ
घिर गया जीवन
भीगा है तन मन

मोहब्बत थी
जो छीन ली मुझसे
जीना दुश्वार
रोज़  आता हूं द्वार
पाने तुम्हारा प्यार

गाओ तो गाना
मेरे लिए ही सिर्फ
उदास हूँ मैं
जी मेरा नहीं लगे
एक प्यारा सा गीत

चुप न रहो
बोलती है बयार
गीत ही सही
जो तुम हरदम
गुनगुनाते हमेशा

सूरज उगा
बिखेरने किरणें
सोना बिखरा
मंदिर की घंटियां
मस्जिद में अज़ान

बजते कान
टिनिटस हुआ ज्यों
आत्मा कहती
बुरा मत करना
है कोई भी इलाज

JITENDRA VARMA
A - 48, Freedom Fighters Encclve
IGNOU Road
Bew Delhi - 110068

3 टिप्पणियाँ

  1. बेनामी1:26 pm

    रचनाकार कम्प्यूटर युग में भी साहित्य पताका बहुत ऊँची उड़ा रहा है। रतन जाट

    जवाब देंहटाएं
  2. बेनामी1:29 pm

    Proud of RACHANAKAAR

    जवाब देंहटाएं

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