---प्रायोजक---

---***---

रु. 25,000+ के  नाका लघुकथा पुरस्कार हेतु लघुकथाएँ आमंत्रित हैं.

अधिक जानकारी के लिए यहाँ [लिंक] देखें. आयोजन में अब तक प्रकाशित लघुकथाएँ यहाँ [लिंक] पढ़ें.

नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें.

15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस विशेष आलेख - विडंबनाओं के देश में चुनौतियां - प्रमोद भार्गव

साझा करें:

दुनिया के गणतंत्रों में भारत प्राचीनतम गणतंत्रों में से एक है। यहां के मथुरा, पद्मावती और त्रिपुरी जैसे अनेक हिंदू राष्ट्र दो से तीन हजार सा...

दुनिया के गणतंत्रों में भारत प्राचीनतम गणतंत्रों में से एक है। यहां के मथुरा, पद्मावती और त्रिपुरी जैसे अनेक हिंदू राष्ट्र दो से तीन हजार साल पहले तक केंद्रीय सत्ता से अनुशासित लोकतांत्रिक गणराज्य थे। केंद्रीय मुद्रा का भी इनमें चलन था। लेकिन भक्ति, अतिरिक्त उदारता, सहिष्णुता, विदेशियों को शरण और वचनबद्धता जैसे भाव व आचरण कुछ ऐसे उदात्त गुणों वाले दोष रहे, जिनकी वजह से भारत विडंबनाओं और चुनौतियों के ऐसे देश में बदलता चला गया है कि राजनीति का एक पक्ष आज यहां समस्याओं को यथास्थिति में रखने की पुरजोर पैरवी करने लग जाता है। बांग्लादेशी घुसपैठियों के संदर्भ में जो राष्ट्रीय नागरिकता पत्रक की सूची आई है, उस परिप्रेक्ष्य में यही देखने में आ रहा है। विपक्षी दलों के ऐसे स्थाई भाव के चलते चुनौतियों से निपटना और आजादी के बाद अनुत्तरित रह गए प्रश्नों के व्यावहारिक हल खोजना मुश्किल हो रहा है। गोया, चुनौतियों से निपटने में सामूहिक भावना परिलक्षित नहीं होती है।

यह विडंबना इसलिए भी आश्चर्यजनक है, कि जब हमारे स्वतंत्रता सेनानी ब्रिटिश हुकूमत से लड़ रहे थे तब वे अभावग्रस्त और कम पढ़े-लिखे होने के बावजूद अपने पारंपरिक ज्ञान और चेतना से इतने बौद्धिक थे कि किसान-मजदूर से लेकर हर उस वर्ग को परस्पर जोड़ रहे थे, जिनका एक-दूसरे के बिना काम चलना मुश्किल था। इस दृष्टि से महात्मा गांधी ने चंपारण के भूमिहीन किसानों, कानपुर, अहमदाबाद, ढाका के बुनकरों और बंबई के वस्त्र उद्यमियों के बीच सेतु बनाया। नतीजतन इनकी इच्छाएं आम उद्देश्य से जुड़ गईं और यही एकता कालांतर में शक्तिशाली ब्रिटिश राज से मुक्ति का आधार बनी। इसीलिए देश के स्वतंत्रता संग्राम को भारतीय स्वाभिमान की जागृति का संग्राम भी कहा जाता है। राजनीतिक दमन और आर्थिक शोषण के विरुद्ध लोक-चेतना का यह प्रबुद्ध अभियान था। यह चेतना उत्तरोतर ऐसी विस्तृत हुई कि समूची दुनिया में उपनिवेशवाद के विरुद्ध मुक्ति का स्वर मुखर हो गया। परिणामस्वरूप भारत की आजादी एशिया और अफ्रीका की भी आजादी लेकर आई। भारत के स्वतंत्रता समर का यह एक वैश्विक आयाम था, जिसे कम ही रेखांकित किया जाता है। इसके वनिस्वत फ्रांस की क्रांति की बात कही जाती है। निसंदेह इसमें समता, स्वतंत्रता एवं बंधुता के तत्व थे, लेकिन एशिया, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका की अवाम उपेक्षित थी। अमेरिका ने व्यक्ति की निजी स्वतंत्रता और सुख के उद्देश्य की परिकल्पना तो की, परंतु उसमें स्त्रियां और हब्शी गुलाम बहिष्कृत रहे। माक्र्स और लेनिनवाद ने एक वैचारिक पैमाना तो दिया, किंतु वह अंततः तानाशाही साम्राज्यवाद का मुखौटा ही साबित हुआ। इस लिहाज से गांधी का ही वह विचार था, जो सम्रगता में भारतीय हितों की चिंता करता था। इसी परिप्रेक्ष्य में दीनदयाल उपध्याय ने एकात्म मानववाद और अंत्योदय के विचार दिए, जो संसाधनों के उपयोग से दूर अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के उत्थान की चिंता करते हैं।

कमोबेश इन्हीं भावनाओं के अनुरूप डॉ भीमराव अंबेडकर ने संविधान को आकार दिया। इसीलिए जब हम सत्तर साल पीछे मुड़कर संवैधानिक उपलब्धियों पर नजर डालते हैं तो संतोष होता है। प्रजातांत्रिक मूल्यों के साथ राष्ट्र-राज्य की व्यवस्थाएं जीवंत हैं। बीच-बीच में आपातकाल जैसी अतिरेक और अराजकता भी दिखाई देती है, लेकिन अंततः मजबूत संवैधानिक व्यवस्था के चलते लंबे समय तक ये स्थितियां गतिशील नहीं रह पाती। फलतः तानाशाही ताकतें स्वयं ही इन पर लगाम लगाने को विवश हुई हैं। यही कारण है कि प्रजातंत्र, सामता, न्याय और धर्मानिरपेक्ष मूल्यों के साथ विधि का शासन अनवरत है। भारत की अखंडता और संप्रभुता स्थापित करने की दृष्टि से सरदार पटेल जैसे लोगों ने कूटनीतिक कड़ाई से 600 से भी ज्यादा रियासतों का विलय कराया। हैदराबाद व जम्मू-कश्मीर रियासतों का विलय हुआ। जमींदारी उन्नमूलन व भूमि-सुधार हुए। सर्वोदयी नेता विनोवा भावे ने सामंतों की भूमि को गरीब व वंचितों में बांटने का उल्लेखनीय काम किया। पुर्तगाल और फ्रांस से भी भारतीय भूमि को मुक्त कराया। गोवा आजाद हुआ और सिक्किम का भारत में विलय हुआ।

चीन और पाकिस्तान के आक्रमणों से सामना किया। इंदिरा गांधी ने 1971 में पाकिस्तान को विभाजित कर दो देशों में बांटने का दुस्साहसिक कार्य किया। इसी पृष्ठभूमि में गुटनिरपेक्ष व शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व वाली ठोस विदेश नीति अपनाई। विकेंद्रीकरण की नीति अपनाते हुए इंदिरा गांधी ने ही राजाओं के प्रीविपर्स बंद किए और बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया। देश में औद्योगीकरण की बुनियाद रखने के साथ सामरिक महत्व के इसरो व डीआरडीओ जैसे संस्थान अस्तित्व में आए। इन्हीं की बदौलत हम प्रक्षेपास्त्र और अंतरिक्ष में उपग्रह स्थापित करने में सक्षम हुए। हरित क्रांति की शुरूआत करके खाद्याान्न के क्षेत्र में न केवल आत्मनिर्भर हुए, बल्कि कृषि उपजों के निर्यात से विदेशी मुद्रा कमाने में भी समर्थ हुए। ये उन्नति के कार्य इसलिए संपन्न हो पाए, क्योंकि 1990 से पहले तक हमारे राजनेता और प्रशासनिक अधिकारी सही रूप में बौद्धिक होने के साथ स्वदेशी की भावना रखते थे और नैतिक दृष्टि से कमोबेश ईमानदार थे। इसलिए ग्रामों से ज्यादा पलायन नहीं हुआ और खेती-किसानी समृद्ध बने रहे।

सरकारी शिक्षा की पाठशालाओं से ही निकले इस कालखंड के लोग ही श्रेष्ठ वैज्ञानिक अभियंता और चिकित्सक बने। यही नहीं आज हम जिन प्रवासी भारतीयों की बौद्धिक व आर्थिक उपलब्धियों पर गर्व करते हैं, वह आठवें दशक के अवसान और नौंवे दशक के आरंभ की वह पीढ़ी है, जो कनस्तर और बिस्तरबंद के साथ सरकारी विद्यालयों में पढ़कर देश व दुनिया में छाई हुई है। बावजूद अंग्रेजी व विदेशी और निजी शिक्षा को सरंक्षण देने की दृष्टि से हमने कई ऐसे नीतिगत उपाय कर दिए, जिससे समूची सरकारी शिक्षा व्यवस्था निराशा और हीनताबोध से ग्रस्त होती चली गई। अब तो प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक के संस्थान भी छात्रवृत्तियों और मध्यान्य भोजन के बहाने भीख के कटोरों के बूते चल रहे हैं। जबकि यह वही देश है, जहां मिट्टी के द्रोणाचार्य ने एकलव्य से धनुर्धर गढ़े और अर्जुन की सीख ने अभिमन्यू को गर्भ में ही चक्रव्यूह भंग करने में दीक्षित कर दिया।

बहरहाल तमाम उपलब्धियों के बीच शिक्षा में ही नहीं सभी क्षेत्रों में नैतिक मूल्यों का क्षरण हुआ। आपातकाल के बाद जनता दल की गठबंधन सरकार गिरने के बाद संजय गांधी की युवा-टोली को राजनीति में प्रवेश मिला, उसने मूल्यों के अवमूल्यन की पृष्ठभूमि रची। हाशिए पर पड़े सामंत और जमींदार बड़ी संख्या में एकाएक राजनीति की केंद्रीय भूमिका में आ गए। जब ये विधायक एवं सांसद के रूप में सत्ता-तंत्र में हस्तक्षेप के अधिकारी हुए तो इन्होंने पुनः मृतप्रायः समंती दुष्प्रवृत्तियों को सींचकर हरा-भरा कर लहलहा दिया। गांधी और नेहरू के निष्ठावान अनुयायी लगभग निर्वासित कर दिए गए। नतीजतन 1984 में पंजाब में पनपे उग्रवाद के चलते इंदिरा गांधी की हत्या हुई तो प्रतिकार स्वरूप पूरे देश में कांग्रेसी सत्ता के सरंक्षण में सांप्रदायिक हिंसा हुई। इसी की पृष्ठभूमि से भाषाई, जातीय व क्षेत्रीय अस्मिताएं प्रखर आंदोलन के रूप में उभरीं। 1989 में जब वीपी सिंह की सरकार को देवीलाल ने अस्थिर किया तो उन्होंने मंडल का पिटारा खोल दिया। इसे लेकर मंडल-कमंडल में भी हिंसक टकराव देखने में आए। फलस्वरूप राममनोहर लोहिया के जो अनुयायी भाषाई आंदोलन चला रहे थे, उनकी प्राथमिकता पिछड़ों के जातीय और क्षेत्रीय हितों में जमींदोज हो गई। मुलायम, लालू, शरद, नीतीश और मायावती इन्हीं आंदोलन के अगुआ रहकर मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार में मंत्री बने। यही वह दौर रहा है, जिसमें धनबल और बाहुबल का राजनीति में पर्दापण हुआ तथा अपराध का राजनीतिकरण एवं राजनीति का अपराधीकरण हुआ। कांग्रेस और भाजपा भी इससे अछूते नहीं रहे। रही-सही कसर 24 जुलाई 1991 को सरंचनागत समायोजन के बहाने बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए भारत में व्यापार का जो समझौता हुआ, उसने देश की आर्थिक आजादी को लगभग 500 साल के लिए गिरवी रख दिया। नतीजतन हम नवउपनिवेश के गुलाम होते जा रहे हैं। इन कंपनियों की आवारापूंजी, पूंजीवाद के विस्तार और प्राकृतिक संपदा की लूट में लगी हुई हैं। उपभोग की संस्कृति बेलगाम होती जा रही है।

अतएव लगता है कि संविधान की प्रस्तावना के उदात्त आदर्श व उद्देश्य पूरे नहीं हुए हैं। गोया राजनीति त्याग, समता, अपरिग्रह और जनसेवा की भावना से प्रेरित होने की बजाय लाभकारी व्यवसाय, धनोपार्जन का माध्यम और सत्तासुख भोगने का साधन बनती जा रही है। भारतीय संविधान ने संसदीय प्रणाली को स्वीकार किया, जिसमें समस्त निर्वाचित जन-प्रतिनियों और मंत्रियों के पवित्र उत्तरदायित्व की परिकल्पना है। साफ है, संविधान निर्माताओं ने ऐसी संकल्पना कतई नहीं की थी, जिसमें मंत्रियों के दायित्व में आम आदमी बहिष्कृत होता चला जाए। इसी कृटिल मंशा के चलते सत्ता में भागीदार अपने लिए तो अधिकतम प्रजातांत्रिक अधिकारों की मांग उठाते हैं, लेकिन दूसरों को उनके प्रजातांत्रिक अधिकार के कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्धता जताते नहीं दिखते हैं। अधिकार और कर्तव्य की यह ऐसी विडंबना है, जो लोकतंत्र की बढ़ती उम्र के साथ जटिल होती जा रही है। इसी तात्कालिक लाभ की दृष्टि के चलते नेताओं की दलों के प्रति निष्ठा भंग हुई है। लिहाजा चुनावी मौसम में दलबदलुओं के टिड्डी दल दिखाई देने लगते हैं। इसी कारण संसद और विधानसभाएं दलबदल और अस्थायी बहुमत का दंश झेलने को बाध्य हो रही हैं।

स्वतंत्रता के बाद से ही हम पढ़ते व सुनते चले आ आ रहे हैं कि भारत एक कृषि-प्रधान देश है। सत्तर प्रतिशत आबादी ग्रामों में रहती है और खेती-किसानी व पशुधन से जीविकोपार्जन करती है। इसी धारणा पर देश विकसित होता चला गया और अब वर्तमान में हम उच्च विकास दर के साथ विकसित देशों की होड़ में शामिल हैं। इस समय भी देश में कृषि उत्पादन चरम पर है। वित्तमंत्री अरुण जेटली द्वारा संसद में पेश आंकड़ों के मुताबिक 2016-17 में 275 मिलियन टन खाद्यान्न और करीब 300 मिलियन टन फल व सब्जियों का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है। बावजूद किसान आत्महत्या और किसानों द्वारा सड़कों पर फसल और दूध नष्ट करना, अर्से से चिंतनीय पहलू बना हुआ है। किंतु अब केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने नए बजट प्रावधान करते हुए यह संकल्प लिया है कि वह 2022 तक खेती-किसानी से जुड़े लोगों की आमदनी दोगुनी करेगी। इस हेतु विभिन्न फसलों पर समर्थन मूल्य बढ़ाए गए हैं। साथ ही फसलों का उत्पादन बढ़ाने, कृषि लागत कम करने, खाद्य प्रसंस्करण एवं कृषि आधारित वस्तुओं का निर्यात बढ़ाने की इच्छा जताई है और नीतिगत उपाय भी किए हैं। भुगतान का डिजीटल लेन-देन से भी किसान, गरीब और वंचितों को उनके हक का पूरा पैसा मिलने लगा है। यहां गौरतलब है कि जिस आर्थिक विकास को हम 7 से 7.8 प्रतिशत तक ले जाना चाहते हैं, वह ग्रामीण भारत पर फोकस किए बिना संभव ही नहीं है। यही जमीनी विकास आर्थिक विकास की कुंजी है। इसमें कोई दो राय नहीं कि हमारी आर्थिक मजबूती में पिछले कई दशकों की कृषि उत्पादकता ने अहम् भूमिका निभाई है, तथापि सच्चाई यह है कि आज कृषि हमारे आर्थिक विकास के ऊंचे मानकों से बहुत नीचे है। बड़े उद्योग, सेवा क्षेत्र, विनिर्माण आदि कृषि के मुकाबले आगे निकल गए हैं। इसलिए इसे सरकारी सरंक्षण से संवारे जाने की ऐसी ही निरंतरता बनी रहना चाहिए।

प्रमोद भार्गव

लेखक@पत्रकार

शब्दार्थ 49,श्रीराम कॉलोनी

शिवपुरी म.प्र.

लेखक, वरिष्ठ साहित्यकार और पत्रकार हैं।

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर

-----****-----

-----****-----

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1

.... प्रायोजक ....

-----****-----

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधा/विषय पर क्लिक/टच करें : ~

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---


|आपके लिए कुछ चुनिंदा रचनाएँ_$type=complex$count=8$src=random$page=1$va=0$au=0

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3865,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,337,ईबुक,192,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,257,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,105,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2812,कहानी,2137,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,489,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,30,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,91,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,22,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,348,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,327,बाल कलम,23,बाल दिवस,3,बालकथा,50,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,9,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,18,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,238,लघुकथा,865,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,24,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,326,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,62,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1932,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,660,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,703,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,15,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,61,साहित्यम्,2,साहित्यिक गतिविधियाँ,186,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,58,हास्य-व्यंग्य,69,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस विशेष आलेख - विडंबनाओं के देश में चुनौतियां - प्रमोद भार्गव
15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस विशेष आलेख - विडंबनाओं के देश में चुनौतियां - प्रमोद भार्गव
http://lh3.ggpht.com/-H15PPViPEnY/VLCZ8BlC8MI/AAAAAAAAc4Y/ihAosGGNEvo/image_thumb%25255B3%25255D.png?imgmax=200
http://lh3.ggpht.com/-H15PPViPEnY/VLCZ8BlC8MI/AAAAAAAAc4Y/ihAosGGNEvo/s72-c/image_thumb%25255B3%25255D.png?imgmax=200
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2018/08/15.html
https://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/2018/08/15.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय SEARCH सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है चरण 1: साझा करें. चरण 2: ताला खोलने के लिए साझा किए लिंक पर क्लिक करें सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ