370010869858007

---प्रायोजक---

---***---

नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका संपर्क : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी यहाँ [लिंक] देखें.

****

Loading...

लघुकथा // स्वयंभू // अनूपा हरबोला

जैसे ही गीता ने मोबाइल ऑन किया, धड़ धड़ करते व्हाट्स एप मेसेज का ढेर लग गया...

गर्ल्स ग्रुप १०५,खानदान ५३,देवरानी जेठानी ३............

"क्या है आज, जो गर्ल्स ग्रुप (उसके पति के बॉस की वाइफ एडमिन थी उस ग्रुप की, सब उन्हें भाभीजी बोलते हैं) में इतने मेसेज ,यही सोच कर उसने मेसेज पढ़ने शुरू किए।

भाभीजी ने एक मेसेज फॉरवर्ड किया था,उस पर वाहवाही करते हुए लोग, उनके विचारों को उच्चकोटी का दिखा रहे थे। उसने बिना कुछ लिखे मोबाइल ऑफ किया, तभी इंटरकॉम पर मिसेज खान का फोन आया,"गीता आज भी तुमने भाभीजी के मेसेज पर कमेंट नहीं किया,देखना भारी पड़ेगा तुम्हें ये ।"

"फॉरवर्ड किए पोस्ट पर क्या कमेंट करूँ,वैसे भी बहुत पुराना है वो,मन नहीं किया तो नहीं किया।"

"किया करो, नहीं तो उनको बुरा लगता है,दो तीन बार उन्होंने तुम्हारे बारे में पूछा भी है बातों बातों में,वैसे भी तुम्हारे मिस्टर का प्रोमोशन ड्यू है इस बार ।"

" तो क्या हुआ,वो काबिल हैं मिलना चाहिए प्रमोशन उन्हें।"

"यहाँ काबिलियत से ज्यादा कुछ और मायने रखता है, तुम समझा करो।"

"ऊपरवाला सब देखता है, उसे सब पता है।"

"पर यहाँ उस खुदा से ज्यादा इस खुदा की चलती है, उसी की भक्ति से प्रसाद मिलता है,

मैं भी पहले तुम्हारी जैसी ही थी,६ साल तक कोई प्रमोशन नहीं मिला खान साहब को,जैसे ही इस खुदा की भक्ति की दूसरे साल ही ...।"

"पर ..."

"पर -वर कुछ नहीं तुम सिर्फ मेसेज पर कमेंट करना शुरू करो बस।"

न चाहते हुए भी गीता ने " वाह भाभीजी" लिख दिया .......... ।

अनूपा हरबोला

लघुकथा 7989258041906106273

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

emo-but-icon

मुख्यपृष्ठ item

रचनाकार में छपें. लाखों पाठकों तक पहुँचें, तुरंत!

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं.

   प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 14,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही रचनाकार से जुड़ें.

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है. किसी भी फ़ॉन्ट में रचनाएं इस पते पर ईमेल करें :

rachanakar@gmail.com
कॉपीराइट@लेखकाधीन. सर्वाधिकार सुरक्षित. बिना अनुमति किसी भी सामग्री का अन्यत्र किसी भी रूप में उपयोग व पुनर्प्रकाशन वर्जित है.
उद्धरण स्वरूप संक्षेप या शुरूआती पैरा देकर मूल रचनाकार में प्रकाशित रचना का साभार लिंक दिया जा सकता है.

इस साइट का उपयोग कर आप इस साइट की गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं.

नाका में प्रकाशनार्थ रचनाएँ भेजने संबंधी अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

आवश्यक सूचना : कृपया ध्यान दें -

कविता / ग़ज़ल स्तम्भ के लिए, कृपया न्यूनतम 10 रचनाएँ एक साथ भेजें, छिट-पुट एकल कविताएँ कृपया न भेजें, बल्कि उन्हें एकत्र कर व संकलित कर भेजें. एकल व छिट-पुट कविताओं को अलग से प्रकाशित किया जाना संभव नहीं हो पाता है. अतः उन्हें समय समय पर संकलित कर प्रकाशित किया जाएगा. आपके सहयोग के लिए धन्यवाद.

*******


कुछ और दिलचस्प रचनाएँ

---प्रायोजक---

---***---

फ़ेसबुक में पसंद करें

---प्रायोजक---

---***---

ब्लॉग आर्काइव