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व्यंग्य लेख // भालूनाथ अमर रहे ! // कमल किशोर वर्मा

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एक विशाल देश था। उसमें एक सूक्ष्म नेता थे भालूनाथ , ज्यादा पढ़े-लिखे तो न थे पर थे जुगाडू , अब इसे उनका सौभाग्य कहिये या देश का दुर्भाग्य - वे चुनाव जीत गए। उनके आसपास चापलूसों की भीड़ मँडराने लगी। उन्हें यह भ्रम हो गया कि देश का भार उनके कंधों पर ही है यदि वे न होते तों धरती अब तक रसातल पहुँच जाती ! वे कई साल तक जी भर कर घोटाला करते हुए सत्ता सुख भोगते रहे। एक दिन उनकी मृत्यु हो गई। अब देश में उनकी प्रशंसा करने वालों की बाढ़ आ गई। जो विपक्षी रात - दिन उनको कोस-कोस कर उनकी सरकार गिराना ही अपने जीवन का लक्ष्य समझते थे वे भी कहने लगे - भालूनाथजी एक कर्तव्यनिष्ठ और महान नेता थे, उनका निधन देश के लिये एक अपूरणीय क्षति है। अब उनके चापलूसों में यह होड़ मच गई कि कौन बड़ा और सच्चा अनुयायी ? उनको श्रद्धाजंलि देने हर शहर में कार्यक्रम आयेजित किये जाने लगे। हर वक्ता भालूनाथ के गुणगान करने में अपना जीवन धन्य समझ रहा था , हर वक्ता यही कहता था - हम उनके सपनों को पूरा करेंगे , हम उनके बताए हुए रास्ते पर ही चलेंगे ( हम भी घोटाला करेंगे ? )

ष् आसपास के सभी गाँव के लोग सभा में बुलवाए गए थे ,हर गली मोहल्ला के छोटे नेता को भीड़ इकट्ठी करने का जिम्मा दिया गया था ! हर चौराहे पर पोस्टर लगे थे - भालूनाथ अमर रहे ! शहर में खूब भीड़ थी ,लोग उन्मुक्त भाव से नारे लगा रहे थे - भालूनाथ अमर रहे ! भालूनाथ अमर रहे ! ..........

लोग बिना सोचे समझे भेड़-चाल में नारे लगाए जा रहे थे - भालूनाथ अमर रहे ! जिनको ये मालूम नहीं था कि भालूनाथ कौन थे ? वे भी नारे लगा रहे थे ! सम्पूर्ण वातावरण भालूनाथ मय था ! ऐसा लग रहा था जैसे इन लोगों के जीवन का यही उद्देश्य है- भालूनाथ अमर रहे। जीवन के दुःख-संकट, बीमारी, गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा, कुशिक्षा, अराजकता, समाज में बढ़ते अपराध, घटती नैतिकता, चौरी - ठगी की घटनाएँ आम आदमी की लाचारी, प्राकृतिक संसाधनों का दोहन और प्रदूषण , और भी हजारों समस्याएं हैं परन्तु भीड़ की दीवानगी देखकर प्रतीत हुआ - इनके जीवन की बस एक ही समस्या है - भालूनाथ अमर रहे !

आखिर देश के लिए भालूनाथ का अमर रहना जरूरी क्यों है ? क्या इस लिए कि वह अनन्तकाल तक सत्ता-सुख भोगकर घोटाले करता रहे ? क्या लोग यह नहीं जानते कि यह मृत्युलोक है , जो जन्मा है वह अवश्य मरेगा ! जन्म-मृत्यु इस संसार का नियम है, क्या लोग भालूनाथ को अमर रख कर प्राकृतिक नियम और व्यवस्था के विरूद्ध विद्रोह कर रहे हैं ? शरीर जर्जर हो जाता है तब आत्मा पुराने वस्त्र का त्याग कर नया वस्त्र धारण करती है क्या लोग नहीं चाहते कि भालूनाथ की आत्मा नया वस्त्र धारण करे ? जीवन की भाग-दौड़ से थक-हार कर आदमी भगवान की शरण में जाना चाहता है क्या लोग नहीं चाहते कि भालूनाथ भगवान की शरण में जाय ? सभा के अन्त में भालूनाथ को श्रद्धाजंलि दी गई - भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे !

हानि लाभ जीवन मरण यश अपयश विधि हाथ ..... जब लोग भालूनाथ को अमर रखकर भगवान के विधान में विघ्न डाल रहें हैं तो वह भालूनाथ की आत्मा को शांति क्यों दे ? ..........आम लोग अभी भी नारे लगा रहे थे - भालूनाथ अमर रहे ! जनता नारे लगा रही थी, खास आयोजक और सच्चे ? अनुयायी नाश्ते में मगन थे। यह सब देख कर भालूनाथ की आत्मा स्वर्ग ( नर्क ) में भी गद्गद् हो रही थी।

कमल किशोर वर्मा कन्नौद

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