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कहानी संग्रह - वे बहत्तर घंटे - मोक्ष - राजेश माहेश्वरी

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कहानी संग्रह

वे बहत्तर घंटे

राजेश माहेश्वरी

मोक्ष

प्रयाग में भागीरथी के तट पर एक सन्त से मेरी मुलाकात हो गई। मैंने मन की जिज्ञासा की संतुष्टि के लिये उनसे विनम्रता पूर्वक आग्रह सहित पूछा- मोक्ष क्या है ? उन्होंने स्नेहपूर्ण वाणी में समझाया- मोक्ष दुनियां के विवादास्पद विषयों में से एक है। यह क्या है ? किसी ने इसे देखा है ? इस पथ के विषय में कोई भी व्यक्ति आज तक दावे के साथ नहीं कह सकता कि वह रास्ता मोक्ष तक जाता है। इसका रुप व स्वरुप किस प्रकार का है। हमारे धार्मिक ग्रन्थों में इसकी व्यापक व्याख्या है। यदि हम गम्भीरता से मनन और चिन्तन करें तो हम इस निष्कर्ष पर पहुँचेंगे कि मोक्ष की प्राप्ति लगभग असंभव है। मेरा व्यक्तिगत विचार तो यह है कि मृत्यु के बाद मोक्ष की कल्पना समाज को अनुशासन में रखने एवं सामाजिक दायरों में व्यक्ति को बांधे रखने के लिये धर्मग्रन्थों के माध्यम से स्थापित की गई व्यवस्था है।

मोक्ष की मृगतृष्णा में व्यक्ति धर्म पूर्वक कर्म करता रहे एवं मानवीय दृष्टिकोण रखते हुए जीवन व्यतीत करे। उसके मन में मोक्ष की कामना सदैव बनी रहे। इसी उद्देश्य से मोक्ष की अभिकल्पना की गई है। मेरा तो दृढ़ विश्वास है कि मोक्ष हमें इसी जीवन में प्राप्त हो सकता है।

जीवन में मोक्ष का दूसरा स्वरुप आनन्द है। अब आनन्द क्या है? दुख में भी आनन्द की अनुभूति हो सकती है और सुख में भी आनन्द का अभाव हो सकता है। जीवन में कठिनाइयों और परेशानियों से घबरा कर भागने वाला जीवन को बोझ समझ कर निराशा के सागर में डूबता उतराता रहता है। वह कठिनाइयों और अवसादों को घोर घना जंगल समझता है। परन्तु साहसी व्यक्ति कर्मठता के साथ सकारात्मक सृजन करता है एवं परेशानियों से जूझकर उन्हें हल करता है। यह संघर्ष उसे उत्साहित करता है। वह सफलता की हर सीढ़ी पर अनुभव करता है एक अलौकिक संतुष्टि के साथ स्वयं पर आत्मविश्वास। अनुभव करता है एक अलौकिक सौन्दर्य युक्त संसार का। यही आनन्द है। धन संपदा और वैभव से हम भौतिक सुख तो प्राप्त कर सकते हैं किन्तु आनन्द की तलाश में मानव जीवन भर भागता रहता है। भौतिक सुख बाहरी हैं परन्तु आनन्द आन्तरिक है। सुख की अनुभूति शरीर को होती है किन्तु आनन्द की अनुभूति हमारे अंतरमन को होती है। आनन्द का उद्गम हैं हमारे विचार हमारे सद्कर्म और हमारी कर्मठता। यही मोक्ष है जो आनन्द का दूसरा स्वरुप है।

मोक्ष क्या है और कैसे प्राप्त हो यह विषय कल भी था आज भी है और कल भी रहेगा।


(क्रमशः अगले भाग में जारी...)

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