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माँ पर कुछ दोहे-- शिव कुमार ‘दीपक’

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माँ पर कुछ दोहे--
                          ⚫ शिव कुमार ‘दीपक’

जननी  करती  उम्र भर , जीवन पथ आलोक ।
माँ  के  आगे  क्षुद्र  हैं , धरा, गगन ,सुरलोक ।।-1

माता  मूरत प्रेम  की , शुचि, सुभाषिनी, धीर ।

सभ्य,सुशील,सुधाकिनी, हरे जगत  की  पीर ।।-2

घाट-घाट का जल पिया,बुझी न मन की प्यास ।
माँ  के  चरणों  में हुआ , जन्नत  का  आभास ।।-3

कोई  रोजा , व्रत  रखें , या  निर्जल  उपवास ।

मिले पुण्य जिसने रखा , मात-पिता को पास ।।-4

हे   मेरे   भगवान   जी ,  ऐसा   दो   आशीष ।
सारी  उम्र  झुका   रहे  , माँ  के चरणों  शीश ।।-5

कभी गर्म  वह शॉल सा , कभी  चपाती  चार ।
कभी  जले पर बर्फ  सा, लगता माँ का प्यार ।।-6

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वन्दनीय  हैं  जगत  में , पिता  गुरू  भगवान  ।
सबसे  पहले सिर झुका , कर माँ  का सम्मान ।।-7

बच्चा   होता  जगत  में ,  कोरा  पृष्ठ  समान  ।
माँ  ने जैसा लिख दिया , वही  प्राथमिक ज्ञान ।।-8

माँ  के चरणों  में झुका , अभिवादन को  शीश ।
उठा  हाथ माँ  ने  दिया ,  मंगलमय   आशीष  ।।-9

माँ  के  चरणों  में  किया , अर्पित जिसने  प्यार ।
ईश्वर  ने  उसको   दिए  ,  खुशियों  के  उपहार ।।-10

इज्जत दौलत घर अना , सौम्य  सुधारस  वेन ।
जो  कुछ  मेरे पास है ,सब  कुछ  माँ  की देन ।।-11

माँ  माखन,  मिश्री , सुधा , रोटी ,  गीता  ज्ञान ।
माँ  ममता  की खान  है , बच्चों  की  मुस्कान ।।-12

अनपढ़, सभ्य, सुशील थी , साक्षर  जैसा  ज्ञान ।
लड़ूँ   लड़ाई   तिमिर  से , है  माँ  का  वरदान ।।-13

सुने  नहीं  माँ- बाप  की , करे  नहीं  सम्मान ।
उजड़ा  उसका  मानिए , जीवन  का  उद्यान ।।-14

सुत  ने  बूढ़े  बाप  की , रखी  न  कोई  धीर ।
तब  दादा  घर से  गये , बनके  सन्त  फकीर ।।-15

झाड़ू  जैसा  सन्त  का , होता  है  व्यवहार ।
फैली  घर  में  गंदगी  , करता खूब  निखार ।।-16

शिक्षक  सन्त समाज का , देता  ज्ञान पवित्र ।
चले  ज्ञान  की  तूलिका , बनें सत्य के चित्र ।।-17

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बटवारा  घर  में  हुआ , बटा  माल  घर  द्वार ।
उनको धन दौलत मिली,मुझको मां का प्यार।।- 18  

मात- पिता ,गुरु जगत में , सचमुच हैं भगवान ।
जो  इनकी  सेवा  करे , मिले  जगत  सम्मान ।।- 19

तत्व ज्ञान गुरु से मिले , करे तिमिर  सब  दूर ।
हिम्मत   देते  हैं  पिता , माँ  दे  गुण  भरपूर ।।-20

नमन करूँ जो दे गये , मुझको  नैतिक  ज्ञान ।
मात-पिता गुरु एक से , सद्गुरु सम भगवान ।।-21

हर  मौसम  में  मानिये , माँ  बच्चे  की  ढाल ।
गर्मी ,पावस ,शरद में , कुल्फी, छाता , शाल ।।-22

इज्जत, दौलत, घर, अना, शिक्षा, ज्ञान,शरीर ।
जो कुछ  मेरे  पास है , माँ  की  सब  जागीर ।।-23

प्रेम, सत्य, सद्भावना , मिलन ,दर्द , आभार ।
रखे  महकती  जिंदगी , सच्ची  माँ का प्यार ।।-24

सच्ची माँ  परिवार  को , देती  खुशी  अपार ।
सबसे  पहली शिक्षिका , कहता  है  संसार ।।-25

                ✍  शिव कुमार ‘दीपक’

                     बहरदोई, सादाबाद

                      हाथरस (उ० प्र०)

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परिचय

नाम-        शिव कुमार ‘दीपक’
पिता  - स्व०श्री खुशाली राम धनगर
माता  - स्व०श्रीमती चन्द्रवती देवी
जन्म तिथि -10अगस्त 1975
पता-        गाँव- बहरदोई , पत्रालय- आरती
              जनपद- हाथरस ( उ० प्र० )
                  भारत - 281307
लेखन -    गद्य एवं पद्य की विभिन्न विधाओं में
प्रिय छंद -  दोहा एवं कुण्डलिया
प्रकाशन -  दर्जनों समवेत काव्य संकलन ,शोध
             ग्रंथों एवं देश की  विभिन्न साहित्यक
          पत्र - पत्रिकाओं  में रचनाएं प्रकाशित ।
प्रसारण- आकाशवाणी मथुरा और आकाशवाणी
             दिल्ली से कविताओं का प्रसारण ।
सम्मान - 1-साहित्यिक सांस्कृतिक कला संगम      अकादमी (प्रतापगढ़) द्वारा वर्ष 2008 का हिंदी सेवी सम्मान ।
2- विमल साहित्य सदन (मथुरा)  द्वारा वर्ष 2009 में ‘दोहा श्री ‘ की मानद उपाधि से सम्मानित ।
3- यू.एस.एम. पत्रिका द्वारा वर्ष 2010 का राष्ट्रीय हिंदी सेवी सम्मान ।
4- राम रहमान साहित्यिक सांस्कृतिक संस्थान (बस्ती ) द्वारा प्रतिष्ठित ‘डॉ० लक्ष्मी नारायण लाल पुरस्कार वर्ष 2016 ‘ से सम्मानित ।
5- अखिल भारतीय साहित्य परिषद ( ब्रज प्रान्त)
    द्वारा  ‘ ब्रज गौरव सम्मान ‘ वर्ष 2016 में  
   सम्मानित ।
के अलावा  संस्कार भारती , नव्या महिला एवं शिशु कल्याण सोसायटी  आगरा , अखिल भारतीय वैचारिक क्रांति मंच लखनऊ ,भारती साहित्यिक सामाजिक संस्था (बरेली)आदि संस्थाओं द्वारा सम्मानित

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