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लघुकथा // माँ तो माँ होती है // रचना सिंह"रश्मि"

अजय के घर में प्रवेश करते ही काव्या का गुस्सा फूट पड़ा ।

पूरे दिन कहाँ रहे? आफिस में पता किया, वहाँ भी नहीं पहुँचे! मामला क्या है?

वो-वो... मैं..."

अजय की हकलाहट पर झल्लाते हुए काव्या फिर बरसी, "बोलते नही? कहां चले गये थे। ये गन्दा बक्सा और कपड़ों की पोटली किसकी उठा लाये"

वो मैं माँ को लाने गाँव चला गया था। अजय ने  हिम्मत करके बोला।

क्या कहा? तुमने सासु जी को यहां ले आये? शर्म नहीं आई तुम्हें? तुम्हारे भाईयों के पास इन्हें क्या तकलीफ है। आग बबूला थी काव्या ने एक बार भी

साड़ी के पल्लू से आँखें पोंछती बीमार वृद्धा की तरफ देखा तक नहीं  ।

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काव्या ने इन्हें मेरे भाईयों के पास नहीं छोड़ा जा सकता। तुम समझ क्यों नहीं रहीं।"अजय ने दबी जुबान से कहा क्यों, यहाँ कोई कुबेर का खजाना रखा है? बच्चों की पढ़ाई,राशन बिजली के बिल और घर खर्च इतनी मंहगाई में कैसे घर चला रही मैं ही जानती हूँ! काव्या अब ये हमारे साथ ही रहेगी। अजय ने कठोरता से कहा।

मैं कहती हूँ, इन्हें इसी वक्त वापिस छोड़ कर आओ वर्ना मैं इस घर में एक पल भी नहीं रहूंगी  सासु माँ आप को यहाँ आते जरा भी लाज नहीं आई?" रामादेवी से अब और बर्दाश्त ना हुआ।

काव्या ।बेटी मेरी बात तो सुनो आवाज जानी पहचानी थी काव्या को मानो झटका सा लगा रामादेवी की तरफ देखा, तो पाँव तले से जमीन ही  खिसक गयी! माँ तुम? झेंपते हुए बोली।

हाँ काव्या ! तुम्हारे भाई और भाभी ने मुझे घर से निकाल दिया। दामाद जी को फोन किया, तो ये मुझे यहां ले आये मैं कहाँ जाती मैंने कहा मुझे वृद्धाश्रम छोड दो पर अजय जिद करके मुझे अपने साथ ले आये।

काव्या तुम क्यों चुप हो सामान फेंको। अब यही मैं तुम्हारी माँ के साथ करुँ तब जवाब दो।

काव्या सहमकर अजय को देखकर गिडगिडाने लगी माँ बीमार है कहाँ जायेगी बेबस सी अजय को देखे जा रही थी।

काव्या तुम परेशान मत हो माँ जी जब तक चाहे यहाँ रह सकती है मेरी माँ ने मुझे अच्छे संस्कार दिये है कहते कहते अजय की आँखें भर आई.

काव्या माँ तो माँ होती है! क्या मेरी क्या तेरी

                               रचनासिंह"रश्मि"

                           रचनाकार/साहित्यकार

                                 आगरा उ.प्र

लघुकथा 5514653283284899775

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  1. आपकी लिखी रचना "साप्ताहिक मुखरित मौन में" शनिवार 15 सितम्बर 2018 को साझा की गई है.........https://mannkepaankhi.blogspot.com/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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