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क्षितिज साहित्य मंच द्वारा रचना पाठ संगोष्ठी

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क्षितिज साहित्य मंच इंदौर द्वारा 21 अक्टूबर, 2018 को दशहरा मिलन एवं रचना पाठ संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कविता , गज़ल , लघुकथा , व्यंग्य ऐसी विभिन्न विधाओं पर केन्द्रित गोष्ठी में रचनाकारों ने समकालीन सामाजिक एवं राजनीतिक परिदृश्य पर संवेदनशील , मार्मिक रचनाएं प्रस्तुत की।

राममूरत राही ने ' बेटी तो बेटी है ' में बेटी के महत्व को बताया । जितेंद्र गुप्ता ने ' रूतबा ' , देवेंद्र सिसौदिया ने व्यंग्य रचना ' वापसी ' सुनाई। देवेंद्र होलकर की ' मरने के बाद ' , चैतन्य त्रिवेदी की ' खुशियाँ ' , पुरूषोत्तम दुबे की ' तीन पत्ती ' तथा वसुधा गाडगिल की ' विरासत ' आदि मानवीय संबंधों की विसंगतियों को व्यक्त करती रचनाएं थी। प्रदीप नवीन की प्रासंगिक रचना , अरूण ठाकरे की ' इतिहास का चाकू ' , ब्रजेश कानूनगो की ' ज़रूरी नहीं यह कि चमकती दिखाई दे हथियारों की धार , धार तो कुंए की रस्सी में भी होती है...' आदि रचनाओं ने बहुत दाद बटोरी। किशन शर्मा " कौशल " की ' संगीन हादसों पर भड़क तो जाते हैं लोग दिल है कि किसी का किसी हालात पर तड़पता नहीं ` तथा सतीश राठी की ' चाँद की किरणों में आज रोज-सा रेशम नहीं है। दर्द में डूबे हैं लेकिन आंख बिल्कुल नम नहीं हैं ' ,जैसी गज़लों ने अलग समां बांधा और सभी की सराहना प्राप्त की।

मुख्य अतिथि डॉ. ओम ठाकुर ने कहा कि प्रत्येक रचना पर गंभीर और सूक्ष्म चर्चा होनी चाहिये I इन चर्चाओं से ही सृजनधर्मिता का परिष्कार होता है। उन्होंने अपनी कविताओं का पाठ भी किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार कांतिलाल ठाकरे ने की। उन्होंने काव्य सृजन को श्रेष्ठ विधा निरूपित करते हुए यह कहा कि काव्य की साधना ही सर्वाधिक कठिन सृजन साधना होती है और जो लोग काव्य का सृजन कर लेते हैं वह साहित्य की किसी भी विधा में सृजन कर सकते हैं। उन्होंने सभी रचनाकारों को श्रेष्ठ रचना पाठ के लिए हृदय से साधुवाद दिया।

संचालन डॉ. पुरूषोत्तम दुबे ने तथा आभार प्रदर्शन संस्था अध्यक्ष सतीश राठी ने किया।


दीपक गिरकर

समीक्षक

28-सी, वैभव नगर, कनाडिया रोड,

इंदौर- 452016


मेल आईडी : deepakgirkar2016@gmail.com

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