नाका - विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका. 

विविध विधाओं में से चुनकर पढ़ें -

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---

यहाँ की विशाल ऑनलाइन लाइब्रेरी में मनपसंद रचनाकार अथवा रचनाएँ खोज कर पढ़ें -

 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com  रचनाकार के वाट्सएप्प नंबर 8989162192 (कृपया कॉल नहीं करें, कॉल रिसीव नहीं होगी, तथा इसका उपयोग केवल प्रकाशनार्थ रचना भेजने के लिए ही करें) पर भी वाट्सएप्प से रचनाएँ अथवा रचना पाठ के वीडियो प्रकाशनार्थ भेजे जा सकते हैं. अधिक जानकारी के लिए यह पृष्ठ [लिंक] देखें.

--

कविताएँ // यह कैसा सूर्योदय // विनोद सिल्ला

FB_IMG_1535088264979

1.

यह कैसा सूर्योदय

काल के भाल पर
यह कैसा सूर्योदय हुआ?

सद्भाव है दहशत में
धर्मांध जय-जय हुआ

नफरतें ही छप रही
अखबार के समाचार में

मंदिर-मस्जिद दहक रहे
रूढ़िवादी प्रचार में 
 
दबा रहे आवाज को
कर कलम खामोश ये

इंसानियत को कर रहे
फासीवादी बेहोश ये

साम्प्रदायिक चश्मे से 
पूरे जहां को देख रहे।

साम्प्रदायिक तवे पर,
सियासती फुल्के सेंक रहे।

-विनोद सिल्ला©

2.

सबसे बड़ा आतंकवाद

भारत में आतंकवाद
कर चुका जड़ें गहरी
जिसका पोषक है
हर घर
हर परिवार
हर व्यक्ति
जिसका शिकार है
हर घर
हर परिवार
हर व्यक्ति
खतरे में है
हर घर
हर परिवार
हर व्यक्ति
गवाह हैं जातीय दंगे
भारत में
सबसे बड़ा आतंकवाद
है जातिवाद

-विनोद सिल्ला©

3.

सबरीमाला मंदिर में

तू भारत की नारी है
कर सकती है
निसंकोच प्रवेश
अंतरिक्ष में
लांघ सकती है
सात-समन्द्र
छू सकती है
दुनिया की
सबसे ऊंची चोटी
माउंट एवरेस्ट
जा सकती है तू
विश्व की
सबसे बड़ी पंचायत
यू. एन. में
कर सकती है दांत खट्टे
सीमा पर दुश्मन के
बनके सैनिक
लेकिन नहीं जा सकती
सबरीमाला मंदिर में
वैसे वहाँ जा कर
करेगी भी क्या?

-विनोद सिल्ला©

4.

कौन है ये

गाँव जाए
हो जाता है एक अरसा
लेकिन जब भी
जाता हूँ गाँव
होती है सुखद अनुभूति
मिलता है सम्मान
जैसे हूँ मैं मेहमान
खुश हो जाते हैं मिलकर
हमउम्र साथी
खिल जाते हैं
बड़े-बुजुर्ग

लेकिन जो हैं छोटे
करते हैं कोशिश
पहचानने की
कानाफूसी-सी करके
पूछते हैं
'कौन है ये'
उनका व्यवहार
कर देता है पराया

-विनोद सिल्ला©

5.

बदलाव

गाँव छोड़े
हो गए बीस वर्ष
बहुत बदल गया है
मेरा गाँव
गाँव के बीच की बस्तियाँ
हो चुकी हैं खाली
कर गए लोग पलायन
बस्ती से बाहर के
प्लाटों में
जहाँ खाली होते थे मैदान
वहाँ हो गई बसाहट
शायद हर रोज
हो जाता है बदलाव
जो नहीं होता महसूस
गाँव वासियों को
मैं आता हूँ गाँव में
लम्बे अरसे बाद तो
देखता रह जाता हूँ
बदलाव

-विनोद सिल्ला©

6.

कलम

मेरी इस कलम ने
दुख में दिया
मेरा साथ
कोशिश की बंटाने की
खुशी में भी
दिया मेरा साथ
कोशिश की बांटने की
की इसने सृजना
पद्य की
गद्य की
कितनी रचनाएं की
बढ़ा दिया
मेरा सम्मान
कर दिए
मेरे सुख-दुख भी
अमर

-विनोद सिल्ला©

7.

परम्परा

होता है विरोध
हर नवीन परिवर्तन का
दी जाती है दुहाई
परम्पराओं की
कहा जाता है अक्सर
करते रहे हैं निर्वहन
हमारे पूर्वज
इन परम्पराओं का
परम्पराओं के निर्वहन में
झेलते रहे कष्ट सदा
हमारे पूर्वज
अब और कष्ट क्यों
वैसे भी परम्परा तो
होती ही है
टूटने के लिए

-विनोद सिल्ला©

8.

इन्कलाब जिंदाबाद

सुबह-सुबह
निजी स्कूल की
प्रात: कालीन सभा में
लगा जा रहे थे नारे
छात्र-छात्राओं द्वारा

इन्कलाब-जिंदाबाद
देश की रक्षा कौन करेगा
वगैरह-वगैरह
सामने खड़े थे अध्यापक
प्रबंधन कमेटी से
सहमा हुए
जो नहीं सोच सकते
इन्कलाब लाने की
जिनसे करवा लिए जाते हैं
हस्ताक्षर
पूरे वेतन पर
थमा दिया जाता है
आधा वेतन
ऐसे में
इन्कलाब के नारे
बेमानी लगते हैं

-विनोद सिल्ला©

9.

सब व्यस्त थे

मैं गया सब्जी मंडी
खरीदने सब्जी
मंडी में
इतने ही व्यापारी थे
इतने ही ग्राहक
इतने ही गाय-सांड
व्यापारी सब्जी बेचने में
व्यस्त थे
ग्राहक सब्जी खरीदने में
व्यस्त थे
गाय-सांड
सड़ी-सब्जी, पोलिथीन
खाने में व्यस्त थे
गोभक्त
गोहत्या रोकने के लिए
धरने-प्रदर्शनों में
व्यस्त थे
सब व्यस्त थे

-विनोद सिल्ला©

10.

खो गया तालाब

गाँव में
बस्ती के बीच में
था एक तालाब
नहाते थे उसमें
बालक बच्चे
बस्तीवासी डालने लगे
कूड़ा-कर्कट
तालाब हो गया
बदबूदार
बच्चों ने भी
छोड़ दिया उसमें नहाना
लोगों के मकानों की हदें
बढ़ती गई
तालाब की हद
सिमटती गई
धीरे-धीरे
जाने कहाँ
खो गया तालाब


-विनोद सिल्ला

परिचय

नाम - विनोद सिल्ला
शिक्षा - एम. ए. (इतिहास) , बी. एड.
जन्मतिथि -  24/05/1977
संप्रति - राजकीय विद्यालय में शिक्षक

प्रकाशित पुस्तकें-

1. जाने कब होएगी भोर (काव्यसंग्रह)
2. खो गया है आदमी (काव्यसंग्रह)
3. मैं पीड़ा हूँ (काव्यसंग्रह)
4. यह कैसा सूर्योदय (काव्यसंग्रह)

संपादित पुस्तकें

1. प्रकृति के शब्द शिल्पी : रूप देवगुण (काव्यसंग्रह)
2. मीलों जाना है (काव्यसंग्रह)
3. दुखिया का दुख (काव्यसंग्रह)


सम्मान

1. डॉ. भीम राव अम्बेडकर राष्ट्रीय फैलोशिप अवार्ड 2011
(भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा)
2. लॉर्ड बुद्धा राष्ट्रीय फैलोशिप अवार्ड 2012
(भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा)
3. उपमंडल अधिकारी (ना.) द्वारा
26 जनवरी 2012 को
4. दैनिक सांध्य समाचार-पत्र "टोहाना मेल" द्वारा
17 जून 2012 को 'टोहाना सम्मान" से नवाजा
5. ज्योति बा फुले राष्ट्रीय फैलोशिप अवार्ड 2013
(भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा)
6. ऑल इंडिया समता सैनिक दल द्वारा
14-15 जून 2014 को ऊना (हिमाचल प्रदेश में)
7. अम्बेडकरवादी लेखक संघ द्वारा
कैथल  में (14 जुलाई 2014)
8. लाला कली राम स्मृति साहित्य सम्मान 2015
(साहित्य सभा, कैथल द्वारा)
9. प्रजातंत्र का स्तंभ गौरव सम्मान 2018
(प्रजातंत्र का स्तंभ पत्रिका द्वारा) 15 जुलाई 2018 को राजस्थान दौसा में
10. अमर उजाला समाचार-पत्र द्वारा
'रक्तदान के क्षेत्र में' जून 2018 को
11. डॉ. अम्बेडकर स्टुडैंट फ्रंट ऑफ इंडिया द्वारा
साहब कांसीराम राष्ट्रीय सम्मान-2018
पता :-

विनोद सिल्ला
गीता कॉलोनी, नजदीक धर्मशाला
डांगरा रोड़, टोहाना
जिला फतेहाबाद (हरियाणा)
पिन कोड-125120

0 टिप्पणियाँ

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.