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उसका प्यार (लघु कथा) - सुशील शर्मा

सुशील कुमार शर्मा

उसका प्यार

(लघु कथा)

मैं शाम को घूमते हुए शहर से दूर वीराने में निकल गया,सुरमई शाम थी। अचानक मेरे मन में आया क्यों न अपनी पत्नी से मज़ाक किया जाए मैंने मोबाइल निकाला और उसे चिढ़ाने के लिए एक बहुत पापुलर चुटकुला उसे भेजा।

अगर बीवी शक करे तो

बुरा मत मानिए

गर्व कीजिये कि,

आप अभी भी इस लायक हो!!

"अच्छा आप इतने नालायक हो मुझे आज पता चला।"

उसने तपाक से उत्तर भेजा।


ये नालायक तुमसे प्यार करता है

मैंने झट से लिखा,

I LOVE YOU

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"मैं तो आप पर कभी शक कर ही नहीं सकती जो व्यक्ति अपनी बीबी से मोबाइल में प्यार का इज़हार करता हो और सामने शर्माता हो वो किसी दूसरी से कैसे बात कर सकता है।"

उसके इस प्रहार से में अचकचा गया।

उसने लगभग झिड़कते हुए कहा

बाजार से आलू और पालक ले आना पापा जी को सूप बनाना है। और कल बेटी आ रही है उसके लिए पनीर ,भूल मत जाना ,भुलक्कड़ हो।


अरे मेरे प्रेम को इतना तो मत लताड़ा करो।

मैंने जरा गुस्से में कहा।

सुनो कल से मोबाइल घर पर रख कर जाया करो और चलते वक्त मोबाइल से बात नहीं करते किसी गाड़ी से टकरा जाओगे। अब मोबाइल बंद करो जल्दी।

मैंने झट से मोबाइल बंद किया और मन ही मन मेरे प्रति और मेरे परिवार के प्रति प्यार के बारे में सोच कर चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई।

पुरुषों का प्यार अक्सर बनावटी ,शब्दों का और खुद की खुशी के लिए होता है जबकि स्त्री का प्यार मन से, भावपूर्ण और समग्र होता है।

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